नीतिवचन 19:3
मूढ़ता के कारण मनुष्य का मार्ग टेढ़ा होता है, और वह मन ही मन यहोवा से चिढ़ने लगता है।
मनुष्य को अपनी मूर्खता के कारण जीवन में परेशानियाँ होती हैं और उसपर कई संकट आते हैं, लेकिन फिर वे इसका दोष परमेश्वर को देते हैं! कैसी घिनौनी दुष्टता! वह उस बुद्धि के अनुसार नहीं जीएगा जो परमेश्वर ने उसके सामने राखी है, क्योंकि वह चीजों को अपने तरीके से करना चाहता है। लेकिन जब उसके मूर्खतापूर्ण निर्णयों के परिणाम उसी पर मुसीबत बनकर टूट पड़ते हैं, तो वह चिढ़ता है और अपनी मुसीबतों के लिए परमेश्वर को दोषी ठहराता है। ऐसा मनुष्य कितना दयनीय, विद्रोही, कृतघ्न अभागा है!
परमेश्वर सबके लिए अच्छा है और उसकी करुणा सब मनुष्यों पर है। वह उन सभी को मुफ्त में ज्ञान और बुद्धि प्रदान करता है जिनके पास उसकी कमी है (नीतिवचन 8:1-5,32-36; 9:1-6)। परन्तु मूर्ख बुद्धि पर हंसते हैं; उन्हें लगता है कि उनके मार्ग और तौर-तरीकें बेहतर हैं। वे अपनी मूर्खता का फल खाएंगे (नीतिवचन 1:29-33)। इस नीतिवचन के अनुसार दुष्ट मनुष्य परमेश्वर पर दोष लगाता है कि उसके मार्ग सीधे नहीं हैं, परन्तु वास्तव में मूर्खों के मार्ग ही सीधे नहीं हैं (यहेज़केल 18:25)!
प्रिय पाठक, क्या यह नीतिवचन आपके जीवन में कभी सच साबित हुआ है? क्या आपने अपना रास्ता खुद चुना है और इसकी वजह से आपको दुःख और मुसीबत का सामना करना पड़ा है? क्या आपको कभी लगा कि परमेश्वर अन्यायी थे? आपको मुसीबत से न छुड़ाने या आपकी प्रार्थनाओं का उत्तर न देने के कारण क्या आप उस पर कभी चिढ़े हैं? क्या आपने कभी उस परमप्रधान परमेश्वर के सामने अपना क्रोध, असंतोष, झल्लाहट, या आत्मतुष्ट विचारों को अभिव्यक्त किया है? यह आपकी गलती है कि आपको अपने भयानक फैसलों के परिणामस्वरूप जीवन में मुसीबतों को भुगतना पड़ता है।
ध्यान दें, यह मूर्ख का मन ही है जो चिढ़ता है। यह आपके आंतरिक विचार हैं जिनका परिक्षण किया जाना चाहिए, और चर्च में आपकी मीठी मीठी बातें उन्हें छिपा नहीं सकती। जहाँ आपके आसपास के सब लोग नहीं देख सकते, वहाँ आपने अपने मन में क्या विचार किया है? आप क्या सोचते है? परमेश्वर आपके सब विचारों को देखता है। वह आपके गुस्से, निराशा या असंतुष्ट विचारों को देखता है। आपको परमेश्वर पर चिढ़ने के बजाय खुद पर और अपनी मूर्खता पर चिढ़ना चाहिए।
ऐसी झुंझलाहट या चिढ़ पाप है! जो कुछ भी आप हैं या आपके पास है वह आपका नहीं है। यह स्वर्ग से आपको मिला एक उपहार है। परमेश्वर ने आपको जीवन में अपना स्थान, योग्यताएं, माता-पिता, स्वास्थ्य, बच्चे, नौकरी, जीवनसाथी, समय और वह सब कुछ दिया है जो आज आपके पास हैं। इन उपहारों पर उससे चिढ़ क्यों? ये चीजें आपकी नहीं हैं; वे उनकीके हैं। उसने उन्हें आपको उधार दिया था, और बदले में वह आपसे धन्यवाद की उम्मीद करता है। आप उसके ऋणी हैं! वह किसी भी चीज के लिए आपका ऋणी नहीं है शिवाय इसके कि आपके पाप के कारण आपकी आत्मा को अनन्तकाल के लिए नरक में डाल दे। इससे कुछ भी कम केवल दया है।
परन्तु जब आप अपने आलसीपन या मूर्खता के कारण उसके इन उपहारों को बिगाड़ देते हैं और फिर उसी पर चिढ़ते हैं, तो आपके झुंझलाहटभरे विचार आपके मन से रिसने वाले नरक के विद्रोही जहर के समान होते हैं। आप अपने पापों में दुष्टता को भी जोड़ देते हैं। इन पापपूर्ण विचारों को कुचल दें। परमेश्वर के सामने स्वयं को नम्र करें। अपना आनंद और संतुष्टि उसके द्वारा दिए गए उपहारों में खोजने के बजाय उसी में खोजें। अगर वह आपकी मूर्खता के कारण आपसे अपने उपहार ले लेता हैं तो उसे स्वीकार करें। अपनी मूर्खता को मान लें जिसके कारण आपको यह दुर्दशा झेलनी पड़ी।
आदम ने अदन में अपने लिए लजा और को चुना, और उसने इसके लिए परमेश्वर को दोषी ठहराया (उत्पत्ति 3:11-12)। कैन को अपने भाई हाबिल की हत्या के लिए शाप दिया गया था, और उसने यह कहकर परमेश्वर को दोषी ठहराया कि उसका दण्ड बहुत बड़ा है (उत्पत्ति 4:13-14)। अहाब ने अंगूर की बाग़ को हथियाने के लिए नाबोत की क्रूरता से हत्या की और खुद को युद्ध के संकट में डाल दिया, और उसने परमेश्वर को दोषी ठहराया यह कहकर कि उसने उसे कभी सफ़लता नहीं दीं (1 राजा 22:8)। आज ये तीनों पुरुष कहाँ हैं? संभवत: वही जहाँ इन तीनों को होना चाहिए! आप कल कहाँ होंगे?
आपकी अधिकांश समस्याएँ आपकी अपनी गलती के कारण हैं। आपने परमेश्वर के वचन का ईमानदारी से पालन करने की उपेक्षा की। आपने मूर्खतापूर्वक अपना रास्ता चुन लिया। ज्ञान का अनुसरण करने के प्रति आपका उत्साह सड चूका था। क्या आप यह देख नहीं सकते? जो कुछ उसने आपको दिया था उसका सदुपयोग न कर पाने की अपनी मूर्खता को स्वीकार करें। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपका दर्द और भी बढ़ने जा रहा है (अय्यूब 36:16-18)।
आप अपने जीवन में कहाँ कहाँ मूर्खता कर रहे हैं? आपकी मूर्खता आप पर मुसिबर बनकर वापस लौट आएगी। यदि आप अपनी मुसीबतों और दुर्दशा के लिए परमेश्वर को दोषी ठहराते हैं, तो आप अपनी मूर्खता में और भी बड़ा पाप जोड़ लेते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि आपका जीवन अस्त-व्यस्त है। बाइबल कहती है, “मार्ग यही है, इसी पर चलो” (यशायाह 30:21)। यदि आपने शिक्षा, बुद्धि और ज्ञान को ठुकरा दिया है, क्योंकि आपको लगा कि आपके विचार बेहतर हैं, क्योंकि पास्टर परमेश्वर के वचन के प्रति बहुत दृढ़ और सख्त था, क्योंकि बाइबल बहुत पुराने जमाने की है, या क्योंकि आपके पिता ने इसे इस तरह से नहीं किया था, तो सावधान रहें।
धोखा न खाओ; परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है वही काटेगा। यदि आप अपने वैवाहिक जीवन, परिवार, विचार, वाणी, या जीवन के किसी भी क्षेत्र में उसके वचन को दरकिनार करते हैं, तो आप दर्दनाक परिणाम भुगतेंगे (गलातियों 6:7)। उसने मनुष्य को सीधा बनाया, परन्तु उसने बहुत से आविष्कार किए हैं (सभोपदेशक 7:29)। आपने उसकी आज्ञाओं के विरुद्ध क्या आविष्कार किया है? उसके मार्ग सीधे हैं; आपके मार्ग टेढ़े हैं। यदि आप अपने पाप में उस पर चिढ़ना जोड़ते हैं, तो वह और भी अधिक ताड़ना या कठोर दण्ड लेकर आएगा।
यदि आप मूर्खतापूर्ण जीवन जी रहे हैं और उस वजह से आपके जीवन में मुसीबतें आती हैं, तो आपको केवल एक ही काम करना है। एलीहू ने हमें परमेश्वर से क्षमा मांगने के लिये एक अच्छी प्रार्थना दी, कि वह मनुष्यों पर करुणा की दृष्टि करता है, और यदि कोई कहे, “मैं ने पाप किया, और सच्चाई को उलट-पुलट कर दिया, परन्तु उसका बदला मुझे दिया नहीं गया। उसने मेरे प्राण को क़ब्र में पड़ने से बचाया है, मेरा जीवन उजियाले को देखेगा” (अय्यूब 33:27-28)। यदि आप मूर्ख हैं, तो परमेश्वर पर चिढ़ने के बजाए आपको ऐसी ही प्रार्थना करनी चाहिए, और परमेश्वर आपको क्षमा कर देगा और आपको पुनर्स्थापित करेगा।
अगर कभी कोई ऐसा मनुष्य इस दुनिया में होकर गया जिसे अपनी नियति पर चिढ़ने का पूरा हक़ था, तो वह धन्य प्रभु यीशु मसीह होता। लेकिन जब उसे अपने जीवन के सबसे कठिन और भयानक कार्य का सामना करना पड़ा – अर्थात मनुष्य की दुष्टता के पाप का दाम चुकाने के लिए – तो उस घड़ी में उसने पिता परमेश्वर से कहा, “तौभी मेरी नहीं, परन्तु तेरी ही इच्छा पूरी हो” (लूका 22:42)। उसने कभी भी परमेश्वर के मार्ग को नहीं बिगाड़ा, लेकिन क्योंकि मनुष्य ने उसके मार्ग को बिगाड़ दिया, अत: मानवजाति के पाप का दाम चुकाने वह क्रूस की मृत्यु मरा। पर वह फिर भी परमेश्वर पर चिढ़ा नहीं। परमेश्वर के धन्य और सिद्ध पुत्र की स्तुति करो।
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