नीतिवचन 19:29
ठट्ठा करनेवालों के लिये दण्ड ठहराया जाता है, और मूर्खों की पीठ के लिये कोड़े हैं।
मूर्ख और ठट्ठा करनेवाले एक ही बात के पात्र हैं – पिटाई। यही एकमात्र तरीका है जिसे वे समझते हैं (नीतिवचन 26:3)। मूर्ख को केवल मूर्ख ही कोड़े खाने से बचाने या उन्हें सम्मान देने का प्रयास करते हैं। सज्जन लोग परमेश्वर के साथ खड़े रहते हैं और मूर्खों और ठट्ठा करनेवालों से बैर रखते हैं। जब तक वे पश्चाताप नहीं करते, उन्हें कड़ी सजा दी जानी चाहिए। उन्हें सम्मान देना या उन पर तरस खाना परमेश्वर और बुद्धि के साथ विद्रोह करने जैसा है।
बुद्धिमान लोगों को सज़ा की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि उनके लिए सुधार और शिक्षा ही काफी हैं। वे सत्य की फटकार को सुनते हैं, और उसके अनुरूप अपने जीवन में सुधार करते हैं। वे शिक्षा की बातों को सुनते हैं और समझ प्राप्त करते हैं (नीतिवचन 1:5; 9:9)। मूर्खों और ठट्ठा करने वालों के विपरीत, उन्हें शिक्षा से लाभ ही होता है। “एक घुड़की समझनेवाले के मन में जितनी गड़ जाती है, उतना सौ बार मार खाना मूर्ख के मन में नहीं गड़ता” (नीतिवचन 17:10)।
मूर्ख तो बुद्धिहीन होते हैं; ठट्ठा करनेवाले विद्रोही होते हैं। मूर्ख जिद्दी होते हैं; ठट्ठा करनेवाले दुर्भावनापूर्ण होते हैं। दोनों की पीठ के लिये कोड़े हैं, क्योंकि वे समाज की व्यवस्था के कानूनों का खुलेआम उल्लंघन करते हैं। इसलिए, अधिकारियों को उन्हें दंडित करने में गंभीरता दिखानी चाहिए – विशेष रूप से सरकार को, जिसे सामाजिक अपराधियों को कठोर दंड देने का क़ानून बनाना चाहिए (व्यवस्था 25:1-3)।
पीठ पर कोड़े मारने से धारियाँ आ जाती हैं। कोड़े मारना एक समय घरों, स्कूलों, सेना और समाज में अनुशासन का मुख्य ज़रिया हुआ करता था। किसी भी पुराने समय के विश्वकोश की जाँच करें। बेशक, यह भ्रमित और स्त्रैण पीढ़ी हिंसक अपराधियों के साथ भी नरमी से पेश आती है। कोड़े मारना अब अपमानजनक, अमानवीय और पुरातनपंथी समझा जाता है, हालाँकि कुछ साल पहले यह आम बात थी। परमेश्वर सच्चा ठहरे (नीतिवचन 10:13; 13:24; 18:6; 19:18,25; 22:15; 23:13-14; 26:3; 29:15)!
बुद्धिमान मनुष्य, इस्राएल का राजा सुलैमान, इस वर्तमान पीढ़ी से बेहतर जानता था। वह समझ गया था कि कुछ पुरुष केवल एक ही चीज़ से सुधर सकते हैं – दर्द। इसलिए, वह सख्त दंडात्मक कार्यवाही का महत्व जानता था। यह मूर्खों और ठट्ठा करनेवालों से निपटने का एकमात्र तरीका था। उनकी अज्ञानता और अहंकार उन्हें निर्देश द्वारा सीखने से रोकते हैं, इसलिए उन्हें दंड देना ही उचित है।
अज्ञानी भावुकतावादी मूर्खों और ठट्ठा करनेवालों की रक्षा करते हैं और उनका सम्मान करते हैं, लेकिन सज़ा उनके अपराधों को रोक देगी (सभोपदेशक 8:11)। और इससे दूसरों को भी चेतावनी मिलती है (नीतिवचन 19:25; 21:11)। सज़ा कम करने से घमंड और विद्रोह को बढ़ावा मिलता है। अधिकांश राष्ट्रों ने जो बोया है उसका आज वे कड़वा फल काट रहे हैं। वर्तमान युवाओं को अपनी मूर्खता और ठट्ठा करने की फ़ितरत का कोई डर नहीं है। मूर्ख या ठट्ठा करनेवाले का सम्मान करना गलत है (नीतिवचन 26:1)। उनसे बचा जाना चाहिए, अपनी संगती से दूर किया जाना चाहिए और दंड दिया जाना चाहिए।
माँ-बाप की परवरिश से लेकर निर्वाचित अधिकारियों के लिए मतदान तक, एक सख्त आपराधिक न्याय प्रणाली और कठोर दंड संहिता घरों और समाज में ज्ञान और धार्मिकता को प्रभावी ढंग से बढ़ाती है। अगर इस सरल नीतिवचन का पालन किया जाता तो आज विद्रोह और हिंसा के कारण होने वाले भयानक दर्द और पीड़ा से बचा जा सकता था, जिसे आपके दादा-दादी ने स्पष्ट रूप से समझा था। आज जिन घटनाओं को लेकर कई लोग अपना सीना पिटते हैं, वे शायद ही पिछली पीढ़ियों में कभी घटित हुई हों।
इस्राएल में कोई जेल नहीं थी, क्योंकि परमेश्वर की न्याय प्रणाली को उनकी कोई आवश्यकता नहीं थी। मूसा के कानून के तहत बड़े अपराधियों को तुरंत मौत की सजा दी जाती थी, अन्य अपराधों के लिए कोड़े की सजा दी जाती थी, तो कुछ अपराधों के लिए भारी क्षतिपूर्ति की मांग की जाती थी, और यदि आप भुगतान नहीं कर सकते थें तो आपको गुलामी में बेच दिया जाता था। जेल प्रणाली पर एक पैसा भी खर्च नहीं किया जाता था, जहां दुष्ट मूर्ख और ठट्ठा करनेवाले एक दिन में तीन बार खाना खाते समय एक साथ आ सकते हैं और अपनी दुष्ट सोच और योजना में एकदूसरे को और भी प्रोत्साहन दे सकते हैं।
आपके जीवन में मूर्ख या ठट्ठा करनेवाले कहाँ हैं? आपके घर में? आपके ऑफिस में ? आपके चर्च में? आपके देश में? परमेश्वर ने आपको जो भी अधिकार या पद दिया है, इस नीतिवचन की बुद्धिमत्ता का पालन करने के लिए मूर्खता और ठट्ठा के प्रति कठोर और गंभीर प्रतिक्रिया देने का फैसला लें। यदि अधिक लोग अपना योगदान देंगे, तो शांति कायम करने के लिए मूर्खों और ठट्ठा करनेवालों को कम किया जा सकता है।
मूर्ख और ठट्ठा करनेवाले जिन्हें कमजोर माता-पिता और स्त्रैण समाज के कारण दंडित नहीं किया जाता है, उन्हें याद रखना चाहिए कि स्वर्ग में एक परमेश्वर है, जो अहंकार और विद्रोह के हर कार्य को देखता है; वह बिना किसी समझौते या दया किए दंड देगा (गिनती 32:23; भजन 5:4-6; नीतिवचन 29:1; सभोपदेशक 12:13-14), और धर्मी लोग न्यायपूर्ण प्रतिफल को देखकर आनन्दित होंगे (भजन 58:6- 11)।
नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।