नीतिवचन 19:27

हे मेरे बेटे ऐसे उपदेश को मत मान जो ज्ञान की बातों से फिराता है।

मूर्खों को सुनना बंद करो! उन मूर्ख दोस्तों को त्याग दो! उस झूठी कलीसिया से बाहर निकलो! टेलीविजन का बटन बंद करो! कॉलेज की पढाई के लिए आपने जो डिग्री चुनी है उसे बदलो! उस रेडियो स्टेशन को बंद कर दो! उनके चुटकुलों को ठुकरा दो! उन किताबों और पत्रिकाओं को जला दो! उस उपदेशक की मत सुनो! अपनी नौकरी बदलो!

परमेश्वर ने आपको बुद्धिमान बनाने के लिए राजा सुलैमान को नीतिवचन लिखने प्रेरित किया। यदि आप इस दुनिया के सत्य-विरोधी विचारधाराओं को सुनते हैं, तो उनकी अज्ञानी सलाह आपको आपको घातक उलझन में डाल देगी, और उस बुद्धि को भ्रष्ट कर देगी जिसे आपको पाना चाहिए था। इस संसार की शिक्षा आपका विनाश कर देगी। अपने कानों की रक्षा करें।

बुद्धि के लिए कुछ गुणदोष-विवेचक और एकांत की आवश्यकता होती है। भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जिसे इस कुटिल पीढ़ी ने विकृत कर दिया है, नरक से है। कोई भी भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केवल तभी स्वतंत्र है जब वह परमेश्वर के वचन से मेल खाती है। अन्य किसी भी भाषण को दंडित किया जाना चाहिए। दाऊद ने कहा, “मैं किसी ओछे काम पर चित्त न लगाऊँगा। मैं कुमार्ग पर चलनेवालों के काम से घिन रखता हूँ; ऐसे काम में मैं न लगूँगा। टेढ़ा स्वभाव मुझ से दूर रहेगा; मैं बुराई को जानूँगा भी नहीं” (भजन 101:3-4)। व्यवस्था 13:6-18 पढ़िए।

स्वतंत्रता और आजादी पर विचार करें। परमेश्वर ने आदम और हव्वा को खाने की स्वतंत्रता दी – वे वाटिका के हर पेड़ से खाने के लिए स्वतंत्र थे, सिवाय उस वृक्ष के जिसे उसने सीमा से बाहर रखा था (उत्पत्ति 2:16-17)। बेशक, यह पीढ़ी कहेगी कि उस पेड़ पर भी उनका अधिकार है; शैतान अभी भी जीवित है और अपने अनन्त न्याय से पहले हाथ-पैर मार रहा है। परमेश्वर ने अपने बच्चों को विवाह की स्वतंत्रता दी – वे जिससे चाहें विवाह करने के लिए स्वतंत्र हैं, परन्तु केवल प्रभु में (1 कुरिन्थ 7:39)। तो आप देखते हैं कि परमेश्वर ने स्वतंत्रता और आजादी को अपनी प्रकट इच्छा की सीमाओं में परिभाषित किया है।

इस दुष्ट पीढ़ी का विश्वास है कि उचित शिक्षा का अर्थ है मूर्तिपूजक धर्मों और विकृत तत्वज्ञानियों की झूठी विचारधाराओं से अवगत होना। समय और धन की क्या ही बर्बादी! और क्या ही कितना प्राण-घातक प्रयोग है! इसमें दिखाने के लिए क्या है? उच्च शिक्षित लोगों का एक समूह जिन में एक बच्चे जितनी भी बुद्धि या समझ नहीं! उद्विकास से लेकर गर्भपात तक, तलाक से लेकर समलैंगिकता तक, दाह संस्कार से लेकर बाल प्रशिक्षण तक, और पशु संरक्षण से लेकर इच्छामृत्यु तक, वे उस ज्ञान से चूक गए हैं जिस की समझ आज से केवल 100 साल पहले ही ज्यादातर अनपढ़ किसानों के पास हुआ करती थीं।

पौलुस ने गंभीरता से चेतावनी दी, “धोखा न खाओ: बुरी संगति अच्छे आचरण को बिगाड़ देती है” (1 कुरिं 15:33)। सुलैमान ने चेतावनी दी, “जो बुद्धिमानों के संग चलता है सो बुद्धिमान होगा : परन्तु मूर्खों का संगी नाश पाएगा।” (नीति 13:20)। बुरे शिक्षक अंत में आपको ज्ञान के शब्दों से भटका देंगे – उनसे दूर हो जाओ। विवेक और चतुराई के लिए आवश्यक है कि आप व्यर्थ विचारों और झूठों से दूर रहें, ताकि उनकी मूर्खतापूर्ण सोच से आपकी सच्ची और सही समझ को दूषित होने के खतरे से बचाया जा सके।

जैसा कि आजकल प्रचलन बन चूका है, “आओ, हम असहमति पर सहमत हो जाए” का कोई विकल्प नहीं है। वे समझौता करने वालों के मूर्खतापूर्ण और झूठे शब्द हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि सत्य व्यक्तिनिष्ठ (अपनी-अपनी राय) है। यदि परमेश्वर के वचन ने किसी विषय को संबोधित किया है, तो प्रत्येक व्यक्ति को उसके साथ पूरी तरह से सहमत होना और हर विरोधी विचार से घृणा करना आवश्यक है (भजन 119:113,128)। यदि परमेश्वर ने किसी विषय को संबोधित नहीं किया है, तो यह विशुद्ध रूप से ‘अपनी-अपनी सोच’ है, और इसलिए किसी सहमति की कोई आवश्यकता नहीं होती। जैसे ही आपको पता चलता है कि कोई व्यक्ति मूर्ख है, अपना प्राण बचाने के लिए उस व्यक्ति से दूर भाग जाए (नीति 14:7)।

यह नीतिवचन न केवल झूठी शिक्षा से भ्रष्ट होने से बचने का निर्देश दे रहा है, बल्कि झूठी शिक्षा को सुनना भी निषिद्ध कर रहा है। निषेध के बल पर विचार करें। जैसा कि पौलुस ने चेतावनी दी, यह सोचना अपने आप को धोखा देना है कि आप झूठे विचारों को सुन सकते हैं और फिर भी आप उनसे अपने व्यवहार को दूषित करने देने से बच सकते हैं। जीवन और मृत्यु का यह मुद्दा गलत शिक्षा को सुनने से भी मना कर रहा है। यह कहना काफी नहीं है कि मैं टेलीविजन से अपने को भ्रष्ट नहीं होने दूंगा। यहोवा कहता है कि इसे देखना बंद कर।

आज एक और झूठ बड़ा प्रचलन में है, “मांस मांस खाओ, और हड्डियों को फेंक दो।” परन्तु यह एक खतरनाक खेल है, और यह पवित्रशास्त्र के विपरीत है। आप आसानी से यह सोचकर धोखा खा जाएंगे कि कुछ हड्डियाँ मांस हैं, परन्तु वे आपका गला घोंट देंगे। मुर्गी के सिने का केवल बोनलेस शुद्ध हिस्सा खाना ही बेहतर है, सावधानी से और केवल परमेश्वर के वचन से काट-काटकर।

पिताओं, यहाँ सुलैमान के उसके पुत्र के लिए इस नीतिवचन के संबोधन पर गौर करो। एक पिता के रूप में यह आपका कर्तव्य है कि आप अपने बेटे (और बेटी) को उस शिक्षा से दूर रखें जो उन्हें सत्य से भटकाती है। आपको जिस भी साधन की आवश्यकता है उसका उपयोग करें – जो कुछ शिक्षा वे अपने जीवन में पाते हैं उसे शुद्ध और सच्चा रखें। और हर युवापुरुष को गंभीरता से इस प्रतिबंध की आवश्यकता को समझना चाहिए।

यह संसार हमेशा कुछ न कुछ सिखाता है। हर विषय पर उनके झूठे विचारों और लोकप्रिय वाक्पटुता के पीछे शैतान का हाथ है। वह झूठ का पिता है, इसलिए उनके पागल और विकृत मतिभ्रम कहाँ से आते हैं इस पर आपको कोई आश्चर्य करने की ज़रूरत नहीं है (यूहन्ना 8:44; 2 थिस्स 2:9-12; प्रकाशितवाक्य 12:9)। टेलीविजन और थिएटर उस के दो मंच हैं। स्कूल उस के धर्म-विद्यालय हैं। संचार-माध्यम उस के जनसंपर्क गुरु हैं। राजनेता उनके ताबीज हैं। झूठे शिक्षक उसके मंत्री हैं।

ख्रिश्चनों को कितना एकांतिक होना चाहिए? यूहन्ना ने झूठे शिक्षकों को नमस्कार करने से भी मना किया (2 यूहन्ना 1:10-11)। पौलुस ने उस समाचार से जो उसने सुनाया था, भिन्न सुसमाचार सुनाने वाले को शाप दिया, चाहे उसका प्रचार किसी स्वर्गदूत ने ही क्यों न किया हो (गला 1:6-9)। यदि कोई किसी झूठे विचारों से निपट सकता है, तो वे केवल मसीह के सेवक हैं, पर फिर भी, पौलुस ने तीमुथियुस को आज्ञा दी कि वह ऐसों की पहचान करें और उनसे दूर ही रहे (1 तीमुथियुस 6:3-5,20; 2 तीमुथियुस 3:5)। यह वही सलाह है जो उसने सभी विश्वासियों को दीं (रोमियों 16:17-18; 2 थिस्स 3:6)।

ख्रिश्चनों को कितना अनुशासन-बद्ध होना चाहिए? मूसा ने झूठे शिक्षकों के लिए मृत्युदण्ड ठहराया, फिर चाहे उन्होंने चमत्कार ही क्यों न किए हों (व्यवस्थाविवरण 13:1-5)। पौलुस ने विश्वासियों से कहा कि वे प्रेरितीय शिक्षाओं को बिना डगमगाए दृढ़ता से थामे रहें (2 थिस्स 2:15)। ख्रिश्चनों को बाइबल के द्वारा सभी विचारों को मापना है और ऐसी किसी भी विचारधारा को ठोकर मारनी है जो बाइबल से ठीक-ठीक मेल नहीं खाती (यशा 8:20; 1 थिस्स 5:21; 1 युहन्ना 4:1-6)। आपको उस सत्य के लिए ईमानदारी से कड़ा संघर्ष करना होगा जिसे एक ही बार कलीसिया को सौंपा गया था (यहूदा 1:3)। पास्टरों और शिक्षकों को अवश्य है कि वे विश्वासियों की झूठे सिद्धांतों की हर एक वायु से उछाले जाने और इधर-उधर घुमाए जाने से सुरक्षित रखे (इफि 4:14)।

बुद्धि और ज्ञान मूल्यवान सम्पत्तियां हैं (नीति 4:7; 23:23), और झूठी शिक्षा इन संपत्तियों को भ्रष्ट कर देगी और चुरा लेगी। चोर और बिगाड़ने वाले से दूर हो जाओ जो सत्य को चुराते हैं और उसे झूठ से बदल देते हैं। रोमन कैथोलिक चर्च की मानव-निर्मित परंपराएं निश्चित रूप से इस श्रेणी में आती हैं, और ऐसे ही बिली ग्राहम, बिल गोथर्ड, जेम्स डॉब्सन, बिल मेकार्टनी, सी एस लुईस, ए डब्लू टोज़र और इन जैसे समझौता करने वाले झूठे सुसमाचार प्रचारकों की भव्य रूप से प्रस्तुत किए जानेवाली सार्वपंथीय शिक्षाए हैं।

यीशु अच्छा चरवाहा है, क्योंकि वह अपनी भेड़ों को उन चोरों और लुटेरों से बचाता है जो उनका नाश करने के लिए आते हैं (यूहन्ना 10:1-18)। वही मार्ग है; वही सत्य है; वही जीवन है (यूहन्ना 14:6)। उसके समस्त पहाड़ी उपदेश का उद्देश फरीसियों की उन गलत शिक्षाओं को उजागर करना था, जिनके कारण कई लोग परमेश्वर की व्यवस्था से भटक गए थे। उसने अधिकारयुक्त शिक्षा के माध्यम से परमेश्वर की व्यवस्था के मूल उद्देश्य को पुनर्स्थापित किया, और सब लोग उस से अचम्भित थे (मत्ती 7:28-29)।

परमेश्वर सच्चे उपासकों की ख़ोज करता है, और वे बहुत थोड़े हैं। झूठी धर्म-शिक्षा पर विश्वास करते हुए सच्ची आराधना या भक्ति सम्भव नहीं है (यूहन्ना 4:20-24)। परमेश्वर ने आपको अंत के दिनों के संकटपूर्ण समय के लिए चुना है, जब अधिकांश ख्रिश्चन लोग और कलीसियाएं आगे से सत्य की परवाह नहीं करेंगे; वे अपनी अभिलाषाओं और लोकप्रियता के बारे में अधिक परवाह करते हैं, इसलिए उन्होंने सत्य को हटाकर उस के स्थान पर दंतकथाओं और मनोरंजन को स्थान दिया है, जैसा कि पौलुस ने भविष्यवाणी की थी (2 तीमु: 3:6-7; 4:3-4)। उनसे दूर हो जाओ! उन सभी से! अपने लिए एक ऐसा चर्च ढूंढो जहां बाइबल से उपदेश दिया जाता है, और जहां उस ज्ञान के वचन को ऊंचा उठाया जाता है जो केवल पवित्र-शास्त्र में पाया जाता है।

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