नीतिवचन 19:25
ठट्ठा करनेवाले को मार, इससे भोला मनुष्य समझदार हो जाएगा, और समझवाले को डाँट, तब वह अधिक ज्ञान पाएगा।
अनुशासनसहित प्रेम प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से फलदायक होता है। जब आप किसी ठट्ठा करने वाले को दंड देते हैं, तो इससे उसका विद्रोही मुंह बंद हो जाएगा, और ऐसा करने से आप इस अनुशासन को देखनेवाले मूर्ख दर्शकों को भी जो ऐसी ही ठट्ठा करने की सोच रहे होते हैं, चेतावनी का सन्देश देते हैं।
बुद्धिमानों को केवल डाँट ही काफ़ी है, और वे ज्ञान में बढ़ जाते हैं। अनुशासनसहित प्रेम के द्वारा बहुत कुछ भलाई की जा सकती है, जो कि उन लोगों को उचित दण्ड देना या फटकार लगाना है जिन्हें इसकी ज़रूरत होती है (नीतिवचन 21:11)।
आज की विकृत पीढ़ी विद्रोही बच्चों और युवाओं, अपराधियों और यहां तक कि युद्धबंदियों के साथ सौम्यता का व्यवहार करने की पैरवी करती है। अमेरिका युवा लड़कियों से भी ज्यादा स्त्रीवत बन गया है। अधिकांश चर्च अब सिखाते हैं कि पाप करते रहनेवाले सदस्यों के लिए सबसे अच्छा और प्रभावी उपचार है उनका लाड़-प्यार करना।
परमेश्वर के घर में और बाकी सब ठिकानों पर डांट, फटकार का अभ्यास और न्याय की पुनर्स्थापना की जानी ज़रूर है (58:1; यिर्म 4:1-10; 2 तीमु 4:3-4; तीतुस 2:15; 1 कुरिन्थ 5:1-5)। प्रार्थना करें कि परमेश्वर एलिय्याह, बपतिस्मा देनेवाला यूहन्ना और पौलुस जैसे पवित्र लोगों को खड़ा करें की वे पाप और पापियों के विरुद्ध परमेश्वर के वचन का तुरही फूँके।
अगर आप इस मूर्ख पीढ़ी की विकृत शिक्षा को मानकर उसकी सुनते हैं, तो आप यह विश्वास करने लगेंगे कि अगर ठट्ठा करने वाले को सुधारना है तो ताकत या दंड का नहीं, बल्कि सिर्फ़ दया से भरा प्रेमपूर्ण व्यवहार किया जाना चाहिए। वे कहते हैं कि डराना-धमकाना और शारीरिक दण्ड इस समस्या का हल नहीं है। लेकिन आपके लिए ज़रूरी है कि आप परमेश्वर के वचन पर भरोसा रखें और मनुष्य के हर झूठे विचार से बैर रखें (भजन 119:128)। पर्याप्त शारीरिक दण्ड अपराधियों पर लगाम लगाएगा, और यह नीतिवचन सिखाता है कि ऐसा करने से देखनेवाले बाकी लोग भी सावधान हो जाएंगे।
जब यीशु ने प्रचार किया, तो आम लोग ज्ञान में बढ़ने पर आनन्दित हुएं (मरकुस 12:37; लूका 13:17; 19:48; 21:38)। परन्तु जो उसके वचन की ठट्ठा करते थें उनक मुँह बन्द हो जाता था और उससे और अधिक प्रश्न पूछने से डरते थे (लूका 13:17; 20:40)। इज़राइल ने लंबे समय से ऐसे उपदेशक को नहीं सुना था, क्योंकि उनके राजनीतिक रूप से सही, स्त्रीवत और सुसंस्कृत शिक्षक ठट्ठा करते थे (मत्ती 7:28-29)।
ठट्ठा करने वालों को सबके सामने दण्ड देने से और भी लाभ होते हैं। परमेश्वर ने इस्राएल में विद्रोही युवाओं को पत्थरवाह करके जान से मारने का क़ानून दिया था, जिसका सीधा प्रभाव ऐसी घटनाओं के गवाह बनने वाले किशोरों पर पड़ा (व्यवस्थाविवरण 21:18-21)। पौलुस ने तीमुथियुस को लिखा, “पाप करनेवालों को सब के सामने समझा दे, ताकि और लोग भी डरें” (1 तीमुथियुस 5:20)। पौलुस का यह नियम मुख्य रूप से पाप करने वाले प्राचीनों पर लागू होता है, लेकिन साथ ही यह सभी के लिए इस नीतिवचन के सबक की भी पुष्टि करता है।
सबके सामने अनुशासन की मिसाल कायम करना बुद्धिमानी है। ऐसा चर्च, घर, स्कूल, ऑफिस, सेना या राष्ट्र के हित के लिए किया जा सकता है। जब मुखिया को पकड़कर दंडित किया जाता है, तो उसके मूर्ख अनुयायियों को भी एक स्पष्ट संदेश मिलता है जिसे केवल शब्दों से प्रसारित नहीं किया जा सकता। जो लोग किसी समाज पर अधिकार रखते हैं उन्हें विशेष रूप से इस प्रकार अपना शासन बनाए रखना ज़रूरी होता है।
पालकों, यदि आपको अपने किसी बच्चे को अनुशासित करना ही है, तो बाकी बच्चों के लाभ के लिए पूरे परिवार की उपस्थिति में अनुशासित करें। यदि ऐसा सबसे बड़े बच्चे के साथ समय समय पर किया जाता है, तो छोटा बच्चा बड़ा होकर आपका सम्मान करेगा और आपकी आज्ञा मानेगा। यदि सरकारों ने परमेश्वर की बुद्धि सीख ली, तो सार्वजनिक रूप से दंड और फाँसी देने के काम के व्यापक राष्ट्रीय लाभ होंगे (व्यवस्थाविवरण 17:8-13; 19:16-21; 21:18-21)।
बाइबल के उदाहरणों पर विचार करें। एक मनुष्य जब विश्राम के दिन लकड़ी बीनता हुआ पाया गया था तब सारी मण्डली के लोगों ने उसको छावनी से बाहर ले जाकर उस पर पथराव किया, और वह मर गया और इस घटना ने सारे इस्राएल का ध्यान सब्त के पालन की सख्ती की ओर खिंच लिया (गिनती 15:30-36)। परमेश्वर की आराधना में बदलाव करने वालों पर जब पथराव किया गया तो इसका असर पूरी मण्डली पर पड़ा (व्यवस्थाविवरण 13:6-11)। हनन्याह और सफीरा ने परमेश्वर के प्रेरितों की ठट्ठा कीं और दोनों की लाशें ज़मीन पर गिर गई जिससे यरूशलेम की कलीसिया में फिर से भय उत्पन्न हो गया (प्रेरितों 5:1-11)।
जब दण्ड पर तुरन्त अमल नहीं किया जाता, तो ठट्ठा करने वाले और देखनेवाले दोनों ही बुराई करने वालों की हिम्मत और भी बढ़ जाती हैं (सभो 8:11)। यदि आप अपने घर के मुखिया है, कार्यस्थल, सरकार या चर्च में अधिकारी है, तो यह आपका कर्तव्य है कि आप इस नीतिवचन का व्यवहारिक उपयोग करते हुए ठट्ठा करने वालों को दंड दें और मूर्ख लोगों को चेतावनी दें। ऐसे कार्यों से बुद्धि और धार्मिकता बढ़ती और फलती है।
“बुद्धिमान के लिए शब्द ही काफी है” बिलकुल सत्य है। इसका मतलब है कि बुद्धिमान लोगों को ज्ञान सीखने के लिए केवल थोड़ी सी डांट या चेतावनी की आवश्यकता होती है (नीतिवचन 1:5; 9:9)। इन लोगों के लिए दण्ड उचित नहीं है। ऐसे लोगों पर छड़ी या फटके चलाना ज्यादती होंगी। “एक घुड़की समझनेवाले के मन में जितनी गड़ जाती है, उतना सौ बार मार खाना मूर्ख के मन में नहीं गड़ता” (नीतिवचन 17:10)। इस भेद को समझने की शक्ति बुद्धि है।
क्योंकि अच्छे लोगों का मन नेक होता है और वे सुधार से प्रेम रखते हैं, उन्हें सुधारने और सिखाने का आपका कर्तव्य सम्मान की बात है (नीतिवचन 9:8; 25:12)। खुली हुई डाँट गुप्त प्रेम से उत्तम है। जो घाव मित्र के हाथ से लगें वह विश्वास योग्य हैं (नीतिवचन 27:5-6; लैव्य 19:17)। बुद्धिमान लोग जहां संभव हो, ठट्ठा करने वालों से बचकर और अच्छे लोगों पर अधिक ध्यान देकर अपनी सीमित ऊर्जा और समय की रक्षा करते हैं।
बुद्धिमान लोग अपने दर्शकों को जानते हैं और उसके अनुसार निपटने के तरीकों में बदलाव करते हैं। यदि वे संजीदा और नेक व्यक्तियों के साथ हैं, तो वे जानते हैं कि एक सौम्य डांट या अनुग्रहसहित चेतावनी से काम चल जाएगा। वे जल्दबाजी या अज्ञानतापूर्वक गलत तरीके को गलत लोगों पर लागू नहीं करते हैं। वे जाने हैं कि कुछ लोगों के प्रति दया दिखाने और कुछ को आग से बाहर निकालने के बीच क्या फ़र्क है (यहूदा 1:22-23)।
इस नीतिवचन के तीन सबक हैं, जिन्हें हमें आत्मसात करना है। सबसे पहला, ठट्ठा करने वालों को सबके सामने दण्ड दें, ताकि देखने वाले भोले लोग समझदार हो। दूसरा, जब आवश्यक हो, बुद्धिमानों को भी डांटें, क्योंकि इससे वे ज्ञान में और भी अधिक वृद्धि बढ़ेंगे। तीसरा, सुनिश्चित करें कि आप खुद ठट्ठा करने वाले या भोले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि एक बुद्धिमान व्यक्ति हैं जो डांट के मूल्य को समझता है और जानता है कि उससे ज्ञान बढ़ता है।
क्या कैन, कोरह और यहूदा जैसे ठट्ठा करने वालों को सज़ा दिए जाने के बाइबल के लेखों ने आप पर कोई असर डाला है? या क्या आप मूर्खतापूर्वक यह सोचते रहते हैं कि आपके जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा है? जान लो कि आपका पाप आपको ढूंढ ही लेगा! स्वर्ग का परमेश्वर पाप सहन नहीं करता; वह इसे दंड देगा ही। संयम और बुद्धिमानी से जीना चुनें। बुद्धि की खोज करें और उससे प्रेम रखें, भले ही इसमें कुछ डांट-फटकार शामिल हो।
परमेश्वर ने अपनी संतानों के लिए यह ठहराया है कि वे स्थानीय चर्चों के भाग बन जाएं। वहां वे बाइबल से सीखते हैं कि कैसे परमेश्वर ने ठट्ठा करने वालों को दण्ड दिया, और साथ ही यह भी देखते हैं कि किस प्रकार चर्च का एक विश्वासयोग्य पास्टर ठट्ठा करने वालों को दण्ड देता है। वहां उनकी सेवा में ऐसे साथी विश्वासी और बुद्धिमान चर्च सदस्य होते हैं जो उनसे प्रेम करते हैं, और परमेश्वर और मनुष्यों के सामने उन्हें सिद्ध बनाने के लिए उन्हें डांटते हैं और उनके जीवन की गलतियों के बारे में उन्हें आगाह करते हैं। क्या आप ऐसे चर्च में जाते हैं?
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