नीतिवचन 19:21
मनुष्य के मन में बहुत सी कल्पनाएँ होती हैं, परन्तु जो युक्ति यहोवा करता है, वही स्थिर रहती है।
क्या आज आपकी कोई योजनाएँ है? क्या वह पूरी होंगी? यदि आपकी दिन भर की योजनाएं यहोवा की पहले से तय युक्ति में शामिल नहीं हैं, तो आपकी ये योजनाएं कतई पूरी नहीं होंगी। युक्ति केवल उसकी स्थिर रहती है। यदि उसका सम्प्रभु विधि-विधान आप की योजना के विरुद्ध हैं, तो ऐसी कोई संघटना या शक्ति नहीं है जो आपकी सहायता करने के लिए दौड़ी चली आएं।
दुष्ट लोग कहते हैं, “हमारा प्रभु कौन है? (भजन 12:4) परन्तु सर्वशक्तिमान परमेश्वर उन पर प्रभु है। वे परमेश्वर की सनातन काल में ही पूर्वनियोजित युक्ति के बिना कोई कार्य नहीं कर सकते। उसके संप्रभु शासन के विरुद्ध उनकी घृणित योजनाओं को देखकर वह अपने पवित्र उपहास के साथ उनपर हँसता है (भजन 2:1-4)!
यदि आप को यह सच्चाई अच्छी नहीं लगती है, तो आपको किसी और विश्व में जिसका ईश्वर कोई और है, जन्म लेना चाहिए था। लेकिन अगर आपके लिए यही अतुल्य निर्णय लिया गया था – और अन्य सभी निर्णय और चुनाव जिनका आपके जीवन पर प्रभाव पड़ता ही है – तो अब खुद को दीन करें और अपने गौरवशाली संप्रभु परमेश्वर की आराधना करें। सबसे महत्वपूर्ण बात जो आप अपने लिए कर सकते हैं वह है इस महान परमेश्वर की आज्ञा का पालन करना और उसे प्रसन्न करना।
दुष्ट लोग अपने मन के विकृत क्रोध में आकर दिन-रात बुरी बातें गढ़ते और युक्तियाँ निकालते हैं (नीतिवचन 16:30; भजन 35:20; मीका 2:1; रोमियों 1:30), लेकिन परमेश्वर अपनी महिमा की प्रशंसा के लिए सब बातों पर नियंत्रण रखता है और उनकी बुरी बातें व युक्तियाँ विफल करता है (भजन 76:10) परमेश्वर मनुष्य को केवल एक ही उद्देश्य से क्रोध देता है : अपनी किसी पूर्वनियोजित योजना को अंजाम देने के लिए। उसने यीशु मसीह के विरुद्ध यहूदियों के क्रोध का उपयोग अनन्त जीवन का दान इस दुनिया में लाने के लिए किया गया था।
हम यह कहें, “यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे” (याकूब 4:15)। कल जीने की कल्पना मत करो, क्योंकि यह तुम्हारे हाथ में नहीं है (नीतिवचन 27:1)। आज रात को तुम सोने से पहले अपने दाँत भी उसकी युक्ति के बिना साफ नहीं कर पाओगे, क्योंकि गौरैया भी इसकी इच्छा के बिना नहीं उड़ सकती (मत्ती 10:29)। कोई भी ‘बिज़नेस प्लैन’ केवल तब ही सफ़ल हो पाता है जब वह परमेश्वर की गुप्त युक्ति या योजना के पक्ष में होता है (व्यवस्था 29:29; याकूब 4:13-15)।
क्या इस विकृत दुनिया में रोज़-रोज़ ज़ुल्म और दुष्टता की ख़बरें आपको विचलित कर देती हैं? उनसे भी ऊंचा एक संप्रभु परमेश्वर है (सभो. 5:8), और वह उन्हें कठपुतलियों की तरह इस्तेमाल कर रहा है (यशा 10:15)। चाहे वह सिकंदर महान हो या किंडरगार्टन में धमकाने वाला एक छोटा बच्चा, इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता, परमेश्वर की युक्ति में आपकी सुरक्षा शामिल है, यदि आप उसका दिव्य भय मानते हुए आज उस पर भरोसा करते हैं और उससे प्रेम करते हैं।
यदि शत्रु आपके विरुद्ध षड़यंत्र रचें तो क्या होगा? क्या होगा यदि वे आपको नुकसान पहुँचा पाते हैं? यहोवा की युक्ति स्थिर रहेगी। वह सभी शत्रुओं पर हँसता है (भजन 21:7-13)। फ़िरौन ने इस्राएल के ख़िलाफ़ साज़िश रची, लेकिन परमेश्वर की योजना हमेशा से उसे केवल बर्बाद करने की थी (निर्गमन 9:16)। सन्हेरीब ने यहूदा के विरुद्ध षडयंत्र रचा, परन्तु परमेश्वर की योजना हमेशा से उसका उपहास करने और उसका विनाश करने की थी (यशायाह 10:5-19)।
क्या शैतान ने अय्यूब के जीवन में जो कहर बरपाया, वह आपको विचलित करता है? वह आपके प्रभु यहोवा के पूर्ण नियंत्रण में एक कठपुतली से अधिक कुछ नहीं था (अय्यूब 1:6-12; 2:1-6)। परमेश्वर से डरें! अय्यूब के पास पहले जितना था, अन्त में पीडाओं के समाप्त होने के बाद उसे उससे दुगुना दिया गया, और यदि उसने अपनी ईमानदारी बनाए रखी होती तो यह मुकदमा बहुत पहले ही समाप्त हो गया होता। अंत में प्रभु की ओर से उसे जो प्रतिफल मिला उसकी बुद्धिमान लोग प्रशंसा करते हैं (याकूब 5:11)।
लेकिन अच्छी कल्पनाओं (या योजनाओं) का क्या? अपने मन में कोई भी योजनाएं परमेश्वर का भय मानते हुए बनाएं, और वह आपकी सोच से कही बढ़कर आपके कदमों को प्रतिफल की ओर के जाएगा (नीतिवचन 16:9; भजन 37:4; 84:11)। रूत ने अपनी और अपनी सास की उपजीविका के लिए खेत में सिला बीनने की योजना बनाई, लेकिन परमेश्वर की युक्ति उसकी कल्पना से बेहतर थी – बोअज़ से उसका विवाह (रूत 2:2-3)। एस्तेर ने अपने लोगों की जान बचाने के लिए एक योजना बनाई, लेकिन परमेश्वर ने उसके सभी शत्रुओं की जान उसके हाथों में दे दी।
आकस्मिक घटनाओं का क्या? चिट्ठी का डाला जाना भी पूरी तरह से उसके नियंत्रण में है (नीतिवचन 16:33), और जब अहाब राजा भेष बदलकर युद्ध-क्षेत्र में गया तब किसी ने अटकल से एक तीर चलाया और वह उसकी झिलम और निचले वस्त्र के बीच में की एक छोटी सी दरार से छेदकर लगा (1 राजा 22:34)। किसी भी व्यक्ति के जीवन में बुद्धिमान परमेश्वर की योजना या तो उसके पक्ष में काम करती है, या उसके विरोध में। प्रभु के विरूद्ध कोई बुद्धि, समझ या युक्ति नहीं ठहरती, ऐसी कोई युक्ति अस्तित्व में ही नहीं है (नीतिवचन 21:30)।
प्रार्थना का क्या? उसने अपनी सनातन युक्ति में आपकी प्रार्थनाओं को भी शामिल किया है, इसलिए दृढ़ विश्वास के साथ प्रार्थना करें, और वह उसी युक्ति के द्वारा आपको तुरंत उत्तर देगा (नीतिवचन 16:1; भजन 10:17; यशा 38:1-5; फिल 2:13)। दाऊद के समान, तब तक प्रार्थना करें जब तक बच्चा मर न जाए, लेकिन फिर थोड़ी देर और प्रार्थना करें (2 शमू 12:22-24; 2 राजा 4:18-37; मरकुस 5:35-43)। यहोवा के लिए कुछ भी कठिन नहीं है। सिर्फ विश्वास करें!
शैतान द्वारा प्रेरित धार्मिक यहूदियों ने नासरत के यीशु मसीह को मिटाने की साजिश रची, लेकिन उनकी इस साजिश में केवल अपने लोगों को छुड़ाने की परमेश्वर की ही योजना पूरी तरह से पूरी हुई (प्रेरितों 2:22-24; 3:17-18; 4:26-28; 13:26-28) ). चालीस साल बाद यहूदियों ने रोमी साम्राज्य के खिलाफ विद्रोह की योजना बनाई, लेकिन परमेश्वर की योजना ने इतिहास में सबसे बड़ा क्लेश लाया और उन्हें चारों दिशाओं में बिखेर दिया। परमेश्वर की महिमा हो!
यहूदियों ने तरतुस के शाऊल, अर्थात पौलुस को मारने की कोशिश की जब उसने दमिश्क में अपना सामर्थी उपदेश दिया, यह साबित करते हुए कि यीशु ही मसीह है, लेकिन परमेश्वर ने उसे एक टोकरी के द्वारा शहर से बाहर निकलवा दिया (प्रेरितों 9:19-25)। उस परिवर्तित कट्टरपंथी के लिए परमेश्वर की युक्ति यह थी कि वह अन्यजातियों में उसके चुने हुओं को सुसमाचार का प्रचार करें और जगत को उलट-पुलट दे (2 तीमु 2:10)। एक ग़ैर-यहूदी ख्रिश्चन व्यक्ति होने के नाते आपको हमेशा बहुत आभारी रहना चाहिए (2 थिस्स 2:13)।
आज आप इस महान परमेश्वर को क्या और कैसी प्रतिक्रिया देंगे? उसकी युक्ति पहले से ही तय है कि वह आपके साथ क्या करने जा रहा है, और इसमें इस अध्ययन को पढ़ने के बाद आपकी उपेक्षा, आपकी अस्वीकृति, या आपका पश्चाताप शामिल है। स्वयं को विनम्र करें और जीवन, आशीर्वाद और समृद्धि को चुनें। संपूर्ण प्रेम और श्रद्धा से उसकी आराधना करें, उससे कहें कि वह उसकी इच्छा को अपने मन में रखे।
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