नीतिवचन 19:15
आलस से भारी नींद आ जाती है, और जो प्राणी ढिलाई से काम करता, वह भूखा ही रहता है।
आलस या सुस्ती का अर्थ है धीरे-धीरे काम करना। आलस काम से डरना है और काम के लिए जो ज़रूरी मेहनत करनी पड़ती है उस पर गुस्सा जताना है। यह काम के प्रति एक आलसी रवैया अपनाना और ढिलाई से प्रयास करना है; और इससे एक दुष्चक्र शुरू हो जाता है। आलस आपकी ऊर्जा को सोख लेता है, आपको धीमा कर देता है, आपकी आत्मा को भयभीत कर देता है, और आपको सुला देता है। आलस केवल आलस को ही जन्म देता है, जब तक कि आप एक नाकारा मांस की लोथ नहीं बन जाते। आलस आपको इस ओर ले जाता है, “मैं इतना अधिक थक गया हूँ कि कुछ नहीं कर सकता; मुझे लगता है कि मैं एक झपकी लूंगा।” जल्द ही आप इतने “थक” जाते हैं कि आप खा भी नहीं सकते (नीतिवचन 19:24: 26:15)!
आलस के क्या परिणाम होते हैं? भक्तो के संसार में, आप भूखे मरोगे। बाइबल का यीशु मसीह आलसी लोगों को खाने की भी मनाही करता है (नीतिवचन 20:4; 2 थिस्स 3:10)! एक निष्क्रिय आत्मा – अर्थात् कुछ भी काम नहीं करने वाला व्यक्ति – भूख से मर जाएगा। क्योंकि आप आलसी हैं, अत: एक समझदार नियोक्ता आपकी पदोन्नति नहीं करेंगे और न ही आपको पर्याप्त तनख्वाह देंगे; आप ज़िन्दगीभर छोटे काम ही करते रहेंगे और गरीब से गरीब होते जाएंगे (नीतिवचन 10:4; 12:24; 13:4)। और वह समय जल्द ही आता है जब आपके पास खाने के लिए भी कुछ नहीं होगा।
आलस क्या है? आलस सुस्ती में काम करना है! आलस क्या है? इसकी मिसाल मंदे भालू (Sloth) से तुलना करके दी जाती है जो एक स्तनपायी जानवर है और जो दक्षिण व मध्य अमेरिका में पाया जाने वाला मध्यम आकार का एक शाकाहारी स्तनधारी प्राणी है। । मंदे भालू बहुत धीरे-धीरे चलते हैं। यह धीमी गति से हिलने के लिये जाना जाता है और लोक-कल्पना में इसे एक बहुत आलसी जानवर समझा जाता है। ये जानवर जमीन पर बहुत धीमी गति से यात्रा करते हैं (एक मिनट में केवल 5 फीट)। पेड़ों के बीच से उल्टा चलते समय, वे तेज गति (एक मिनट में लगभग 12 फीट) से यात्रा करते हैं। स्लॉथ बहुत आलसी जानवर होते हैं और प्रतिदिन औसतन 15 घंटे सोते हैं।
हर दिन आपकी यह साबित करने परीक्षा होती है कि कही आप यही आलसी जानवर तो नहीं हैं। पहली परीक्षा सुबह के समय होती है, जब बिस्तर से उठने का समय होता है। आप क्या करते हैं? यदि आप लुढ़कते हैं, अपने आप को कंबल के नीचे लपेटते हैं और चाहते हैं कि आपको उठना न पड़े, तो आप एक आलसी, अर्थात मंद भालू (Sloth) हैं। जो हरकतें आप बिछौने पर करते हैं सुलैमान ने उसका उपहास किया, “कुछ और सो लेना, थोड़ी सी नींद, एक और झपकी, थोड़ा और छाती पर हाथ रखे लेटे रहना, तब तेरा कंगालपन राह के लुटेरे के समान और तेरी घटी हथियार बन्द के समान आ पड़ेगी” (नीतिवचन 6:9-11; 24:33-34; 26:14)। मेहनती लोग एक और दिन पाकर, कुछ न कुछ काम मिलने के कारण और काम के स्थान के लिए आभारी होते हैं; वे उठते हैं और काम पर लग जाते हैं।
एक और दैनिक परीक्षा तब होती है जब आपको कोई ऐसा काम करना पड़े जो आपको पसंद नहीं या जिसे करने में आपको उबाऊ महसूस होता है, जैसे होटलों में गन्दे बरतनों से भरा सिंक, या चुभती धुप में किसी बड़े लॉन में काटछाट का काम। आप या तो काम पर टूट पड़ेंगे और पूरी ताकत के साथ उसे पूरा करके ही दम लेंगे, या आप खुद पर तरस खाकर शिकायत करेंगे कि आप कितने किस्मत के मारे हैं कि आपको इतनी मेहनत करनी पड़ती है, और सारा दिन कराहते और विलाप करते रहेंगे। आलसी मत बनो! यह मत सोचो कि काम कितना कठिन है! इस बारे में सोचें कि आप अपनी अच्छी सेहत, शक्ति, सूरज की रौशनी, बगीचा, घास और अपना खुद का काम पाने के लिए परमेश्वर के कितने आभारी हैं। कामचोरी की मानसिकता से बाहर निकलो और सब बातों का आनन्द लो और उन्हें चित्ताकर्षक बनाओ।
कड़ी मेहनत करने वाला पहले काम पूरा करता है, कड़ी मेहनत का आनंद लेता है, उसे उपलब्धि का होश रहता है, और उसे परमेश्वर और मनुष्यों द्वारा पुरस्कृत किया जाता है। वह किसी ऊँचाई पर जा रहा है। वह अपनी नई कार आलसी के काम के स्थान के पास से चलाकर जाता है और देखता है कि वह अब भी घास काटने वाली मशीन में ही लगा है। वह सुस्त आदमी बहुत बाद में अपना काम खत्म करता है, हर चीज के बारे में शिकायत करता है, एक पराजित और थकी हुई आत्मा द्वारा कुचल दिया जाता है, और उसकी पुरानी खरीदी कार को भी वापस ले लिया जाता है। उस कामचोर आलसी को काम से निकाल दो! मेहनत करनेवाला खुश है, उन्नति पर है, और ओवरटाइम मांग रहा है। सुस्त इंसान बस एक और झपकी लेना चाहता है।
यह सब आपकी प्रवृत्ति का विषय है। और आपकी प्रवृत्ति या आपका रवैया आपका अपना चुनाव है। यदि आप धीरे-धीरे उठते हैं और चाहते हैं कि आप अभी भी बिस्तर पर ही रहे, तो आप अपनी ऊर्जा सोख लेंगे और अपने आप को सुस्त बना देंगे। यदि आप एक आह भरके और कुडकुडाकर काम शुरू करते हैं, तो यह एक पहाड़ जैसा लगेगा और कभी खत्म ही नहीं होगा। आलसी के लिए हर काम का मार्ग काँटों से रुन्धा हुआ होता है (नीतिवचन 15:19)। लेकिन अगर आप सुबह पूरे जोश से उठते हैं, परमेश्वर को धन्यवाद देते हैं कि उसने अपनी सेवा करने के लिए आप को एक और दिन दिया, तो आप दोपहर से पहले कई काम ख़त्म कर सकते हैं, उपलब्धि, शांति और आनंद की पूरी संतुष्टि पा सकते हैं, और एक बड़ी सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
यह आपका अपना चुनाव है। बैठो मत। यह मत सोचो कि आपको क्या करना है। यह मत सोचो कि काम कठिन है। यह मत सोचो कि इसमें कितना समय लगेगा। पहला काम अभी शुरू करो। काम पर लग जाओ! सोचो मत! बस काम करो! आपका काम ख़त्म हो जाएगा और आपको पता भी नहीं चलेगा, फिर आप काम को अच्छी तरह से कर लिए जाने का आनंद से भर जाएंगे और प्रतिफल से तरोताजा हो जाएंगे, आप अपनी क़ाबलियत से आनंद-विभोर हो जाएंगे, और लोग भी आपको बढ़ावा देंगे, आपको तरक्की देंगे।
सड़क पर रहने वाला एक भिखारी, जो सारा दिन शहर के किसी पार्क की बेंच के पास बैठता और सोता रहता है, उसने शुरू में ही अपने जीवन का आरम्भ इस फैसले से किया था कि वह कभी कड़ी मेहनत नहीं करेगा। एक दिन मेहनत न करने के कारण दूसरे दिन आलसी होना आसान हो गया। कुछ ही दिनों में, उसने कड़ी मेहनत की आदत, निश्चय, आंतरिक प्रेरणा और आनंद, यह सब कुछ खो दिया। उसने अपने आप को थपकियां देकर सुला लिया, और अब वह किसी भिकारी के समान सोता रहता है। आलसी मनुष्य! अपना पेपर बैग खोल और अपनी सस्ती शराब पी! फिर किसी गटर में गिर पड़ और अपनी ही वमन में सो जा!
ऐसे सुस्त लोगों का इलाज क्या है? देश ऐसे लोगों से तभी मुक्ति पा सकता है जब इन्हें सामाजिक सहायता देना बंद किया जाए और अलसी कर्मचारियों को नौकरी से ही निकाल दिया जाए। इससे देश की उत्पादकता में उछाल आएगा। समृद्धि इससे कहीं अधिक प्रचुर मात्रा में होगी। भुखमरी अच्छे काम की आदतों को प्रेरित करनेवाली सबसे अच्छी शिक्षक है (नीतिवचन 16:26; 20:4)। जब मनुष्य की नाभि उसकी रीढ़ की हड्डी के करीब आ जाती है, तबहम मनुष्य में आभारी रहने और काम करने के लिए प्रेरित होने की एक आम प्रवृत्ति देखते हैं। यदि देश की सरकार आलसी लोगों की रक्षा करना और उन्हें आर्थिक लाभ देना बंद कर दे, तो लोग या तो काम करना सीखेंगे या भूखे मरेंगे। दोनों ही तरीके से, समाज और मज़दूर संघ को खाने और पीने के अयोग्य लोगों से शुद्ध किया जा सकता है। क्या ही शानदार बुद्धि है!
आपके लिए क्या इलाज है? बहाने मत बनाओ (नीतिवचन 22:13; 26:13,16)। काम पर लग जाए। जान लो कि बिस्तर में बिताया एक अतिरिक्त पल एक भयानक बर्बादी है (नीतिवचन 6:9-11; 20:13; 24:30-34)। उठो। अपने काम पर उग्र जोश के साथ टूट पडों कि मानो आप यह काम राजाओं के राजा अर्थात प्रभु यीशु मसीह के लिए करते हो, और सोचो कि आप राजाओं के लिए काम करते हो, क्योंकि तुम्हारा अगला काम शायद यही हो (नीतिवचन 22:29; कुल 3:22-25)। धर्मी मनुष्य की दृष्टि में काम आनंद और एक विशेषाधिकार है, और परमेश्वर ने उसे जो भी योग्यता और नौकरी दी है, वह उससे संतुष्ट रहेगा।
माता-पिता, अपने बच्चों को हर दिन सिखाने के लिए यह एक अच्छा सबक है। यह बहुत कम मायने रखता है कि गुरुत्वाकर्षण की खोज किसने की, टाइटेनियम के लिए परमाणु संख्या 22 है, या स्पेनिश में नाचोस को नाचोस ही कहते है! लेकिन इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता कि बच्चे सुबह कैसे और कितने बजे उठते हैं और पूरा दिन किस प्रकार या किस मानसिकता से काम करते हैं। कड़ी मेहनत और एक उत्साही रवैया किसी जाति, राष्ट्रीयता या स्वभाव के गुण नहीं हैं; बल्कि वे परमेश्वर के बच्चों की पहचान हैं। यदि आपने इस नीतिवचन से परमेश्वर का ज्ञान सीखा है, तो आप आलसी बच्चों को आर्थिक सहायता, सुरक्षा या लाड़ प्यार नहीं करेंगे।
क्रिश्चन पाठक, इस नीतिवचन का पाठ आपके जीवन के सभी क्षेत्रों पर लागू होता है, न कि केवल रोजगार, बर्तन धोने या घास काटने पर। इसमें आपके वैवाहिक जीवन में, बच्चों के प्रशिक्षण में, व्यक्तिगत भक्ति में, प्रार्थना और परमेश्वर की आराधना में आपका रवैया और परिश्रम शामिल है। क्या आप इन सभी कर्तव्यों में भी महत्वाकांक्षी, प्रतिबद्ध, ऊर्जावान और उत्कट हैं? जीने का और अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने का एक ही तरीका है – सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिए करना!
एक मिनट के लिए भी यह मत सोचें कि यह सिद्धांत केवल पुराने नियम में पाया जाता है। पौलुस ने नए नियम में आलस की निंदा की (रोम 12:11; 1 थिस्स 4:11-12; इफि 4:28)। उसने कलीसियाओं को आदेश दिया कि वे आलसी लोगों को खाने न दें (2 थिस्स 3:10-12)। और उसने इन आदेशों से समझौता करने वाले किसी भी चर्च के सदस्यों को बाहर करने का आह्वान किया (2 थिस्स 3:6-15)। परमेश्वर का अनुग्रह जो पापियों में परिवर्तन लाता है, और उसके वचन का उचित प्रचार, लोगों को इस आलसी और बिगड़ैल पीढ़ी की आलसी आदतों और सोच से मुक्ति देकर बदल देगा।
धन्य प्रभु यीशु और प्रेरित पौलुस परिश्रमी मजदूर थे। यीशु के पास विश्राम के लिए समय नहीं होता था (मरकुस 3:20-21; 6:31)। वह नहीं चाहता था कि रात हो, क्योंकि रात होने पर उसे काम करना छोड़ना होता (यूहन्ना 4:34; 9:4; 17:4)। पौलुस अन्य प्रेरितों की तुलना में अधिक लगन से काम किया करता था (1 कुरिन्थ 15:10)। वह दिन में प्रचार करता और रात में काम करता था; उसने रात में प्रचार किया और दिन में काम किया (प्रेरितों के काम 18:3; 1 थिस 2:9; 2 थिस्स 3:8)।
आलसी और सुस्त लोगों के लिए स्वर्ग के राज्य में कोई स्थान नहीं है (मत्ती 11:12; लूका 9:62; 13:24; 1 कुरिन्थ 9:24; फिल 3:14)। न तो यीशु और न ही पौलुस आलसी थे, और वे दोनों आपके लिए मिसाले हैं (1 कुरिन्थ 11: 1)। उन्होंने परमेश्वर की इच्छा को हाथ लगाया, और अपनी पूरी शक्ति से उस इच्छा को पूरा किया, जैसा कि आपको उन सब कामों में करना चाहिए जिन्हें परमेश्वर ने आपको करने के लिए सौपा हैं (सभोपदेशक 9:10)।
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