नीतिवचन 19:13

मूढ़ पुत्र अपने पिता के लिए विपत्ति है; और पत्नी का झगडा-रगडा नित्य जल टपकने के समान है।

मनुष्य के साथ दो भयावह बातें हो सकती हैं। वह किसी घिनौनी स्त्री से विवाह कर सकता है, या उसके बच्चें मूर्ख हो सकते हैं। दोनों बातें विपत्तियां हैं, और ये बातें विवाह तथा बच्चों को एक गम्भीर मसला बनाती हैं। जिन व्यक्तियों को और रिश्तों को उपयुक्त और सुख देने वाला होना चाहिए था, वे बैरियों के समान बन जाते हैं। इन सम्भावित खतरों को सावधानी से समझना और उनके जाल में फंसने से बचना बुद्धिमानी है।

यह नीतिवचन अनमोल है। जो दो रिश्तें दांव पर लगे हैं, बहुत गम्भीर मसला है – एक नाखुश वैवाहिक जीवन या शर्मनाक बच्चें। दोनों ही एक पुरुष को कई वर्षों तक यातनाएं देते हैं, और अंत में उसका विनाश कर देते हैं। जो पुरुष दोनों से गुजर रहा होता हैं, वह प्रतिदिन दुख का सामना करता है जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। परंतु आपको इन दोनों बुराइयों से बचाने के लिए परमेश्वर ने राजा सुलैमान के द्वारा यह नीतिवचन दिया, और उसने इसे केवल एक तथा सरल नियम के रूप में सारगर्भित कर दिया। शानदार बुद्धि! अतुल्य कृपा और भलाई! इसे आगे पढ़ते रहें!

झगड़ालू स्त्रियां जानती हैं कि कैसे एक पुरुष को, एक मूर्ख पुरुष को अपने वश में करना है। वे कई तरीकों से अपना बाहरी रूप रंग संवारती हैं, ताकि उसकी आंखें अपनी ओर खींच सकें। वे अनुग्रह, आदर्श, समर्पण, और प्रेम का दिखावा करके, जो अंदर है -अर्थात् उनके चारित्रिक अवगुण और लांछनिय स्वभाव- उसे छुपाती हैं और रूप बदलती हैं। ये प्रयास विवाह हो जाने तक किए जाते हैं। विवाह के कुछ ही दिन बीत जाने पर, फिर यह घिनौनी पत्नी अपना असली रंगरूप दिखाना शुरू कर देती है (नीति 30:21-23)। और वह क्या ही खौफनाक और विदृप दृश्य बन जाती है! बेचारा मूर्ख पति!

इस लापरवाह मनुष्य के पास एक ऐसी बीमारी आ गई है जो कैंसर से भी बदतर है – वह पृथ्वी पर ही नरक की यातनाओं में गिर गया है – उस पर एक ऐसा अभिशाप आ पड़ा है जो मृत्यु से भी खौफनाक है (सभोप 7:26)। अब उसे जीवनभर हर रोज़ इस अभागे जीवन को जीने के लिए काम से घर लौटना होगा, और उसके साथ एक ही बिछौने पर सोना होगा! वह जल्द ही अतिरिक्त घंटे काम करने के अवसरों को खोजने लगता है, बाहर मछली पकड़ने जैसे शौक पालने लगता है, या कहीं अलग-थलग अपनी दुकान खोलता है, ताकि इस चिढ़ानेवाले और झगड़ालू जीव के शोर-शराबे से मुक्ति पा सके (नीति 21:9, 19; 25:24)।

सार्वजनिक स्थानों पर वह उसे छिपाना चाहता है, परंतु वह कैसे छिपाएगा? वह थूथन में सोने की नथ पहनी हुई एक बड़ी सुअरी के समान सबको दिखाई देती है (नीति 11:22)। यह अभागा मनुष्य अपनी इस बड़ी शर्मिंदगी से बच भी नहीं सकता क्योंकि हर कोई देख सकता है कि उसने एक खूबसूरत चेहरेवाली एक घृणास्पद और विद्रोही स्त्री से विवाह कर लिया है (नीति 27:15-16)। वह जानता है कि उसके मित्र और शत्रु दोनों ही उसके भयावह घरेलू जीवन के विषय में दबी जुबान में खुसर-फुसर करते हैं।

एक सद्गुणी स्त्री अपने पति का मुकुट होती है, परंतु यहां पर वर्णित स्त्री उसकी हड्डियों में सड़न है (नीति 12:4)। एक ग़लत स्त्री से विवाह करने का दर्द इतना कड़वा होता है कि सुलैमान ने उसे मृत्यु से भी भयावह समझा (सभोप 7:26)। और उसने चिढ़ दिलानेवाली पत्नी को पृथ्वी पर के जीवन के भयावह अभिशापों में गिना (नीति 30:21-23)। अभागा पति पुकार उठता है, “हे प्रिय मृत्यु, मुझे इस औरत से छुटकारा दिला।”

एक झगड़ालू पत्नी हर छोटी-छोटी बात पर प्रश्न उठाएगी, चर्चा करेगी, वाद-विवाद करेगी, और विरोध करेगी। वह मान लेती हैं कि उसके विचार और अभिमत उसके पति से श्रेष्ठ हैं। वह हमेशा मुंहतोड़ जवाब देती है। वह अहंकारी है, हठीली है, और अपने आप को धर्मी समझती है। वह पति की अगुवाई में नहीं चल सकती; बल्कि उसकी अगवाई करना चाहती है। वह बहुत-से प्रश्न पूछती है, तरह-तरह के सुझाव देती है, और प्रसन्न-चित्त से आज्ञा पालन नहीं करती। वह अपने पति को सुधारना चाहती है जो उसके विचार से कभी तथ्यों को ठीक ठीक समझ नहीं पाता। परंतु वह विरले ही अपने में सुधार को स्वीकार करती है, या विरले ही अपनी ग़लतियों को मानती है। उसके पास हमेशा कोई ना कोई बहाना होता है कि आज की रात क्यों अच्छी नहीं है, या आज की सुबह क्यों शुभ नहीं है।

यहां पर वर्णित नित्य जल का टपकना वर्षा के दिनों का चित्र है (नीति 27:15)। आप उसे रोक नहीं सकते; वह टपकते रहती है। आप उसके शोर को रोक नहीं सकते और न ही उसका प्रतिरोध कर सकते हैं। ये एक सुरक्षित छत पर टपकने वाली सुखद बुँदे नहीं हैं; वे टपकने वाली छत से गिरनेवाली बूंदे हैं जो चिढ़ उत्पन्न करती हैं और मन की शांति का नाश कर देती हैं। जिस मनुष्य ने टपकने वाली छत के नीचे सोने की कोशिश की हो, वह इस चित्र को बखूबी और आसानी से समझ सकता है। वह स्त्री एक यातना है! एक मूर्ख पुत्र को घर से बाहर निकाल दिया जा सकता है; परंतु एक झगड़ालू पत्नी को सहना ही पड़ता है। मूर्ख पुत्र अपने कमरे में होता है; परंतु एक झगड़ालू पत्नी आपके बिछौने पर होती है! हे मूल्यवान मृत्यु, मुझे ले जा!

इसलिए, हर एक मनुष्य बड़ी चौकसी रखें कि वह कैसी स्त्री से विवाह करता है, या उसका पुत्र कैसी लड़की से विवाह करता है। जवान मूर्ख होते हैं, और नहीं जानते कि किसी लड़की को कैसे परखें; इसलिए पिताओं को उनकी सहायता करनी चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि वे ऐसी झगड़ालू स्त्री के जाल में फंस जाए जिसके साथ उन्हें 50 वर्ष निकालने पड़े। पिताओं, रिश्तों की समझ के अनुभव के आधार पर, एक स्त्री के साथ अपने वैवाहिक जीवन का आपको अपने पुत्र से अधिक अनुभव रहा है, क्योंकि वह अब भी अज्ञानी है, और बचपन तथा जवानी की मूर्खताओं से ग्रस्त है। आपके वैवाहिक जीवन के वर्ष उसकी वर्तमान उम्र से भी अधिक हैं।

इस वर्तमान पीढ़ी का यह सोचना कि वह अपने दम पर ऐसा दूरगामी निर्णय ले सकते हैं, एक शर्म की बात है। इस कारण आज हम अपने चारों ओर दुष्क्रिय विवाहों, तलाकों, और व्यभिचार की महामारी को देखते हैं। जवानों, यह तुम्हारे लिए अधिक बेहतर होगा कि तुम अपने घर और बिछौने पर एक अकेलेपन और निराशा का जीवन जिओ, बजाय इसके कि तुम एक घिनौनी, झगड़ालू स्त्री से विवाह कर बैठो जिसके साथ तुम्हें अपनी पूरी जिंदगी रहना पड़े और सोना पड़े। अविवाहित और अकेले रहने से भी विपत्तिकारक एक बात है – ग़लत लड़की से विवाह के बंधन में बंध जाना।

प्रियजन, यदि आपने नासमझी में विवाह कर ही लिया है, तो पश्चाताप करो, और दूसरों को ऐसी ग़लती करने से बचाओ। विवाह की परिभाषा ईश्वरीय समर्पण की व्यवस्था के अनुसार की जानी चाहिए; और यदि आपने यहां समझौता कर लिया तो जल का टपकना नित्य जारी रहेगा (उत्पत्ति 3:16; 1 कुरि 11:3,8-12; 14:34-35; इफि 5:22-24,33; कुलु 3:18; तीतुस 2:5)। यदि आपकी पत्नी परमेश्वर का भय मानने का कोई दावा करती है तो उसे अपने सृष्टिकर्ता के सिंहासन के सामने ले जाए, और उसे परमेश्वर की बुद्धिमान व्यवस्था और उल्लंघन करने पर उसके न्याय के विषय में समझाएं, अर्थात् बाइबल से (1 तिमु 2:13-14)। मसीही पतियों, यदि आप इस प्रथम चरण में विफल होते हैं, तो जैसा कि हमारे प्रभु ने नियम दिया, उसे मण्डली के सामने ले जाओ (मत्ती 18:15-17; 1 कुरि 6:1-8)।

हर एक मनुष्य, जिसकी सद्गुणी पत्नी है (नीति 31:10-31), जो अनुग्रहपूर्ण और भली, मन की दिन और स्वभाव से शांत है तो उसे सबसे पहले अपने स्वर्गीय पिता को धन्यवाद देना चाहिए जिसने उस पर ऐसी हिफ़ाज़ती कृपा की, और फिर उस भली स्त्री को खाने पर बाहर ले जाए और समय-समय पर उसकी प्रशंसा करें। वह ऐसे सम्मान के योग्य है। तुम उसके कर्ज़दार हो। परमेश्वर ने तुम्हें एक ऐसे जीवन से बचाया है जो आत्मा को फाड़ देता है, हृदय को दहला देता है, मानसिक स्वास्थ को बिगाड़ देता है, और पीड़ाओं से भरा होता है।

प्रत्येक मसीही स्त्री संसार के एकमात्र सच्चे और उचित दर्पण – अर्थात् परमेश्वर के वचन के प्रकाश में-अपने को परखे (याकूब 1:21-26; भजन 19:7-14)। अपनी कमियों और दोषों को देखने के बाद अपने में आवश्यक बदलाव करें कि आपको प्रतिफल मिले। इस भ्रष्ट समाज की कपोल-कल्पनाओं का और अपने विषय में अपने स्वार्थी विचारों का त्याग करें (भजन 119:128; यशा 8:20)। परमेश्वर की विचारधाराओं को पढ़ें जो कि आप अभी पढ़ रहे हैं। फिर अपने कामों को प्रमाणित करें और अपने में आनंद मनाए (नीति 14:14; गला 6:4-5; 1 पतरस 3:1-6)।

एक मूर्ख पुत्र भी मनुष्य के जीवन की एक भयावह बात है। वह आपके मन से आनंद और जीवन को छीन लेता है, क्योंकि आप जान जाते हैं कि आपने एक मूर्ख को जन्म दिया है और उसका पालन पोषण कर उसे बड़ा किया है। उपदेशक ने मूर्ख पुत्रों को अपनी आंखों से देखा है, क्योंकि उसके मूर्ख भाई थे, और उसका पुत्र रहबाम एक मूर्ख था। उसके दर्द की दास्तां पढ़ें और एक महत्वपूर्ण तथा गम्भीर सबक सीखे (नीति 10:1; 15:20; 17:21,25; 23:15-16, 24-25; 29:3, 15)। दूसरों की ग़लतियों और तकलीफों से सीखना बुद्धिमानी है – इसलिए ध्यान देकर सुनो, और इस पाठ को समझो।

विपत्ति एक अत्यंत गम्भीर पीड़ा या दुख है; यह गहरी दुर्गति है, संकट है, और क्लेश है। यह कष्टदायक तूफान है। इससे चीजें उलट-पुलट हो जाती है। यह एक तबाही और त्रासदी है जो एक पिता के हृदय से जीवन-शक्ति को निचोड़ लेती है। यह उस दुख को बढ़ा-चढ़ाकर बयान करना नहीं है जो एक मूर्ख पुत्र अपने पिता को पहुंचाता है, क्योंकि एक पुत्र को वास्तव में अपने पिता के हृदय का आनंद होना चाहिए। और जहां एक पिता को कृतज्ञ और प्रतिष्ठा पाया हुआ होना चाहिए, वहां उसके बदले में अपने पुत्र के कारण वह हैरान होता है और सब उसकी निंदा करते हैं।

पिताओं, तुम्हारे पुत्र में जो मूर्खता पनपती है, उसे बाहर निकालने के लिए बुद्धि की शिक्षा दो, जब तक कि आशा है (नीति 22:15; 19:18)। यहां वह विपत्ति है जिससे आप बच सकते हैं (नीति 29:17)। अपने पुत्र को बचाओ! अपने को बचाओ! यदि तुम इस प्रशिक्षण की उपेक्षा करोगे, तो वह आप ही मूर्खता में चला जाएगा (नीति 29:15)। उसे शिक्षा देना आपके लिए आज्ञा है (नीति 22:6; इफि 6:4); और उपदेशक आपको बताता है कि यह कैसे किया जाता है – अर्थात् छड़ी और दपट (नीति 29:15; 23:13-14)।

प्रेम करनेवाला पिता अपने पुत्र को प्रशिक्षण देगा; और वह इसे समय पर शुरू करेगा; परंतु जो पिता अपने बच्चों का शत्रु है वह छड़ी और दपट दोनों का उपयोग करने से मना करेगा और अंत में उसके विनाश का कारण बनेगा (नीति 13:24; 8:33-36)।

यदि आप बहुत ही व्यस्त हैं, बहुत थके हुए हैं, अति संकोची, अति आलसी, बाकी सब बातों में अति रुचि रखनेवाले या अपने पुत्र को शिक्षा देना टालने के लिए अन्य बहाने बनाने वाले व्यक्ति हैं, तो आप अपना बोझ आप ही उठाएंगे। संकट और बदनामी आएगी, जब तक कि आप पश्चाताप नहीं करते, और परमेश्वर से दया की भीख नहीं मांगते, और उन बर्बाद वर्षों को पुनः प्राप्त नहीं करते जब आपको अपना आसान कर्तव्य पूरा करना चाहिए था (नीति 29:15; 13:15; गला 6:5; योएल 2:25)।

यदि आपका पुत्र मूर्ख है, तो पश्चाताप करें, उसे फिर से पाने के लिए परमेश्वर से याचना करें (योएल 2:23-27)। अपनी अधिकारयुक्त और प्रेमयुक्त शिक्षा को पुनर्स्थापित करने हर सम्भव प्रयास करें। अगर आपने और आगे समझौता किया तो भविष्य में इससे भी बड़ी विपत्ति आ पड़ेगी जैसा कि एली के साथ हुआ (1 शमू 2:29; 3:13)। यदि आपका पुत्र परमेश्वर का भय मानता है, तो उसे प्रार्थना के द्वारा सृष्टिकर्ता की उपस्थिति में लेकर आए, और उसे उसके कर्तव्यों का स्मरण दिलाए (इफि 6:1-3)। यदि वह नहीं सुनता और चर्च का सदस्य है, तो उसे चर्च के अन्य सदस्यों के सामने चर्चा के लिए लेकर आए (मत्ती 18:15-17)।

प्रत्येक व्यक्ति जिसके पास बुद्धिमान और महान पुत्र हैं, उसे सबसे पहले अपने पिता परमेश्वर को ऐसी सुरक्षात्मक और दयालु दया के लिए धन्यवाद देना चाहिए और फिर अपने पुत्रों की उनकी विश्वासयोग्यता के लिए प्रशंसा और सम्मान करना चाहिए। पिता को ऐसे आज्ञाकारी पुत्र पर दिल खोलकर पैसा खर्च करना चाहिए। ऐसे पुत्रों पर हमेशा रोब दिखाना उन्हें हतोत्साहित कर सकता है (कुलु 3:21; इफि 6:4)।

हर एक पुत्र, चाहे वह किसी भी उम्र का हो, अपने आप को एकमात्र सच्चे दर्पण में परखें – परमेश्वर का वचन (याकूब 1:21-26)। क्या आप अपने पिता के लिए एक आनंद हैं? या क्या ऐसी चीजें हैं जो आप जानते हैं कि उन्हें सही करना चाहिए? उन्हें सुधारो! अपनी दुष्ट पीढ़ी की विद्रोही धारणाओं, और मूर्खता के अपने विद्रोही विचारों को त्याग दो। युवाओं के विषय में परमेश्वर क्या कहता है, इसे पढ़ें, जैसा कि नीतिवचन की पुस्तक स्पष्ट रूप से घोषित करती है। फिर अपने कामों को प्रमाणित करों, और अपने आप में आनन्दित रहो (नीति 14:14; गला 6:4-5)।

आपके सुखी जीवन और सफलता के लिए दोनों खतरे, अर्थात् एक घिनौनी पत्नी या एक मूर्ख पुत्र, एक सरल नियम के उपयोग से हल हो जाते हैं – यहोवा का भय मानना। यदि तुम ऐसी स्त्री से विवाह करते हो जो सचमुच यहोवा का भय मानती है, तो तुम्हारे पास जीवन भर के लिए एक गहना होगा (नीति 31:30; 1 पतरस 3:1-6)। यदि आप अपने पुत्र को आरम्भ से ही यही भय मानना सिखाओगे, तो वह तुम्हारे मन को प्रसन्न करेगा (भजन 34:11; सभो 12:13-14)। यह इतना आसान है, और एकमात्र बुद्धिमान परमेश्वर और इतिहास के सबसे बुद्धिमान राजा ने इसे आपके लिए लिखा है। अमूल्य!

प्रिय मसीही, आप स्वर्ग में के अपने पति (यीशु) और पिता के लिए किस तरह की पत्नी और पुत्र हैं? क्या आपका दूल्हा आपकी निरंतर निष्ठा, सरगर्म प्रेम और हर्षित समर्पण में आनन्दित होता है? या तुम उसके घर में एक घिनौनी बदबू हो? क्या आपका स्वर्गीय पिता आपको लेपालक पुत्र के रूप में अपनाने की आशीष देकर प्रसन्न है? या आप एक ऐसे बेटे हैं जिसे बार-बार ताड़ना देने की ज़रूरत पड़ती है? हर मसीही अपने पति (यीशु) और पिता की इच्छाओं को पूरा करने के लिए अपने आप को परखें।

इसके अलावा, प्रिय मसीही, यह नीतिवचन इस संसार के महानतम अवसरों और सुखों की निराशाजनक लक्ष्यों की शिक्षा देता है, भले ही उन्हें अंजाम देने के लिए एक सिद्ध सृष्टिकर्ता ने ठहराया हो। जिन बातों को मूल्यवान समझा जाता है, अर्थात् विवाह और बच्चें, वे ही बड़ी आसानी से सबसे बड़ी विपत्तियां ला सकती हैं। उसकी कृपा के बिना सब कुछ व्यर्थ है और मन के लिए पीड़ा है! यहाँ महान सबक है कि केवल परमेश्वर को ही आपकी आत्मा का भाग और ख़जाना होना चाहिए (भजन 73:25-26; मत्ती 6:19-21)।

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