नीतिवचन 19:1

जो निर्धन खराई से चलता है, वह उस मूर्ख से उत्तम है जो टेढ़ी बातें बोलता है।

व्यक्तिगत खराई धन से उत्तम है। जो मनुष्य दरिद्र होते हुए भी खराई से चलता है, वह उस मूर्ख धनवान की अपेक्षा जो टेढ़ी बातें बोलता है, परमेश्वर और भले मनुष्यों की दृष्टि में अधिक सफल है। परमेश्वर और सुलैमान की बुद्धि आर्थिक सफलता से आगे जाकर पवित्र जीवन को अधिक महत्व और बढ़ावा देती है।

यहां शब्दों का दीर्घवृत्त है – अर्थात ऐसे विलोम शब्द जो वाक्य को छोटा करने और इसे अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए प्रयुक्य किएँ जाते हैं। हम जानते हैं कि कि जब अपूर्ण प्रतिपक्ष होता है तो वह एक दीर्घवृत्त है, क्योंकि इस नीतिवचन में “निर्धन” के लिए कोई विपरीत शब्द प्रयुक्त नहीं हुआ है, और भलाई का परमेश्वर हमें नीतिवचन 28:6 में पूर्ण संस्करण देता है। यहाँ सिर्फ टेढ़ी बातें बोलनेवाले मूर्ख व्यक्ति की तुलना खराई से चलनेवाला निर्धन व्यक्ति से नहीं की जा रही है, बल्कि यह तुलना टेढ़ी बातें बोलनेवाले मूर्ख ‘धनवान’ व्यक्ति से की जा रही है।

यहाँ सुलैमान प्राथमिकताओं का उल्लेख कर रहा है – तुलनाओं का उपयोग कर बुद्धि सिखाना। युवाओं को अपने पेशे में उन्नति या वित्तीय सफलता से अधिक धार्मिक जीवन के लिए यत्न से मेहनत करनी है। खराई से चलना आर्थिक प्रगति से अधिक मूल्यवान है। उन्हें पेशेवर महत्वाकांक्षाओं के बजाय पवित्र जीवन चुनना चाहिए। चरित्र और आचरण धन के लाभ से बढ़कर हैं।

नीतिवचन की पुस्तक में कुछ संबंधित तुलनाएँ पाई जाती हैं। घबराहट के साथ बहुत रखे हुए धन से, यहोवा के भय के साथ थोड़ा ही धन उत्तम है (नीतिवचन 15:16); बिना अधिकार के अर्जित बड़ी कमाई से धर्म के साथ थोड़ा सा रूपया उत्तम है (नीतिवचन 16:8); खराई से चलनेवाला निर्धन मनुष्य झूठ बोलने वाले धनवान मनुष्य से उत्तम है (नीतिवचन 19:22)। इन तुलनाओं के आधार पर ही आपको अपने जीवन में प्राथमिकताओं का निर्धारित करना चाहिए।

नवजवानों, टेलीविजन विज्ञापनों, जल्दी आमिर बनने के मूलमंत्र या अपने अमीर पड़ोसी पर ध्यान न दें। पैसा कमाना और आगे बढ़ना इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि अपने हर काम में खराई से चलना। जो मनुष्य यहोवा का भय नहीं मानता और अपने मुंह से टेढ़ी बातें बोलता है, वह हारा हुआ है, चाहे वह कितना भी धन क्यों न कमाता हो या उसका घर कितना भी बड़ा क्यों न हो। वह नीचे अधोगति में जा रहा है।

आपको रोज़ फैसलें लेने पड़ते है, जहां आपको परमेश्वर के समक्ष खराई और “आगे बढ़ने” के बीच चुनाव करना होगा। क्या आप बड़ी बिक्री करने के लिए वस्तु की क़ीमत को गलत दिखाएँगे? जब आपके प्रतिस्पर्धी पर झूठा आरोप लगाया जाएगा तो क्या आप चुप रहेंगे? क्या आप ऐसी पदोन्नति चाहेंगे जिसके लिए आपको एक बेईमान बॉस के लिए काम करना पड़ेगा? क्या आप उस नौकरी के लिए अपने आवेदन में अपने विषय पूरी सच्चाई बताएंगे जिसे आप हर हाल में पाना चाहते हैं? क्या आप टैक्स बचाने के लिए अपनी वित्तीय जानकारी में हेराफेरी करेंगे?

आपको चेतावनी दी जा चुकी है। यदि आप पेशेवर या वित्तीय सफलता को पवित्र जीवन से आगे रखते हैं, तो आप आज भी हारे हुए हैं और बाद में भी हारते ही हैं। प्रभु आपके हृदय और हर काम को देखता है, और वह अब और अपने न्याय के दिन आपके साथ सख्ती से व्यवहार करेगा। लेकिन वह आज वह आपको वह सुख और आनन्द भी दे सकता है जिसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता (भजन 4:7), और वह उन लोगों को अनन्त जीवन देगा जो धार्मिकता से जीते हैं (मत्ती 7:21)।

आपके जीवन का लक्ष्य अनुग्रह सहित और खराई की बातें करना, सच्चा व्यापारिक व्यवहार, प्रेमी जीवनसाथी बनना, अपने बच्चों को अच्छी तरह से प्रशिक्षित करना और सभी लोगों की भलाई करना होना चाहिए। ज़रूरी है कि आप पाखंड, बुरे विचारों और बुराई के हर स्वरुप से भी बचना चाहिए। और आपको यह सब अपने उद्देश्यों और लक्ष्यों में परमेश्वर को प्रथम स्थान देकर करना चाहिए। ऐसा मनुष्य समझौता करनेवाले धनवान मनुष्य से उत्तम है।

एक बुद्धिमान व्यक्ति इस बात पर विचार करेगा कि परमेश्वर अपने नैतिक मूल्यों जीवन में लागू किए जाने को मापता है, न कि इस मूर्ख दुनिया के बारे में चिंता करेगा जो लोगों का मूल्यांकन उनकी कमाई के आधार पर करती है। इस नीतिवचन की महत्वाकांक्षाओं और लक्ष्यों में यह प्राथमिकता परमेश्वर यहोवा की ओर से है, और सुलैमान ने उसकी ही प्रेरणा से इसे लिखा है। इस पर विश्वास करो। युवावस्था में इन प्राथमिकताओं को चुनना आपको परमेश्वर के सामने महान बना सकता है।

नाबाल नामक मनुष्य बहुत धनवान था और उसकी अति सुंदर पत्नी थी, लेकिन वह मूर्ख और बेलियाल का पुत्र था (1 शमू 25:2-3,17,25)। दाऊद इस्राएल में सबसे आकर्षक मनुष्य था और अपनी जीविका के लिए भेड़ों के साथ जंगलों और खेतों में रह रहा था। आप इन दोनों में से कौन सा व्यक्ति बनना चाहेंगे? कौन सा व्यक्ति उत्तम था? इन दोनों का क्या हुआ? परमेश्वर को महिमा दो!

परमेश्वर ने नाबाल को उसके ठंडे भय के कारण दस दिनों के लिए पत्थर में बदल दिया, उसे मार डाला, और उसकी पत्नी दाऊद को दे दी। परमेश्वर ने दाऊद की रक्षा की, उसे राज सिंहासन पर बैठाया, और अंत में उसे बहुत महान बना दिया। एक ने अपनी आत्मा शैतान को बेच दी, और दूसरा परमेश्वर के साथ चला गया। एक संभवतः मृत्यु के समय सीधे नरक में चला गया, और दूसरा धर्मी की मृत्यु मरा। इन दोनों व्यक्तियों के बीच समय और अनंत काल का अंतर अथाह है। इस फ़र्क को समझें। आपकी प्राथमिकताएँ क्या हैं?

हे युवक, दुष्टों का मार्ग बहुतों को फूसलाकर बहका देता है (नीतिवचन 12:26)। अमीर और मशहूर लोगों की जीवनशैली को नज़रअंदाज करना मुश्किल है। यह तो मूर्खों की समृद्धि है (नीतिवचन 1:32); आपको उनकी समृद्धि के झाँसे में नहीं आना है, क्योंकि उनकी समृद्धि दिखाती है कि उनका अंत भयानक होगा (भजन 73:16-20)। सुलैमान ने क्या कहा, “जो अपने धन पर भरोसा रखता है वह गिर जाता है, परन्तु धर्मी लोग नये पत्ते के समान लहलहाते हैं” (नीतिवचन 11:28)।

यदि आप यीशु मसीह के लिए इस दुष्ट संसार की चीज़ों और बातों को त्याग देते हैं, तो वह आपको अभी सौ गुना इनाम देने और आने वाले नए जगत में अनन्तकाल का जीवन देने का वादा करता है (मरकुस 10:29-31)। यद्यपि अधर्मियों को इस बात पर विश्वास करना कठिन लगता है, लेकिन यह सत्य है। राजाओं के राजा की ओर से आए ऐसे अद्वितीय और निश्चित सुसमाचार से आप कैसे हार सकते हैं? धन के स्थान पर भक्ति को, जो कि यीशु मसीह पर विश्वास करना है, चुनकर आज ही अनन्तकाल का जीवन प्राप्त करें।

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