नीतिवचन 18:21
जीवन और मृत्यु जीभ के वश में हैं; और जो उससे प्रीति रखते हैं, उसका फल खाएंगे। (केजेवी)
आपके मुंह के वचन आपकी या तो भलाई करेंगे या चोट पहुंचाएंगे (नीति 10:14; 12:14; 13:2-3; 18:6-7, 23)। यदि आप एक बड़े बुजुर्ग हैं, तो आप पहले ही से अच्छे और बुरे नतीजों से गुजर चुके हैं। कई लोगों ने अपनी जीभ को वश में न रखने के कारण अपनी ही जिंदगी बर्बाद कर ली है। तो वहीं कुछ ऐसे हैं जिन्हें उनके अच्छे वचनों और बुद्धिमान वाणी के कारण सम्मानित किया गया है। आपकी वाणी समय और अनंत काल दोनों में परमेश्वर और मनुष्य से आप पर आशीष या शाप ले आएगी। क्या आप भलाई के वचन बोलने से प्रीति रखते हैं, या बुरी वाणी से? आपके चुनाव और आदतों से आपके भविष्य पर बहुत असर पड़ेगा।
एक जीभ दूसरे को मार सकती है या बचा सकती है। एक झूठा गवाह किसी निर्दोष व्यक्ति की मृत्यु का कारण बन सकता है, या एक सांत्वना देनेवाला उन्नति करनेवाले वचन बोलकर टूटे मन के व्यक्ति को पुनर्स्थापित कर सकता है। एक निंदक अच्छे व्यक्ति की प्रतिष्ठा को धूमिल कर सकता है, या एक बुद्धिमान परामर्शदाता किसी जवान को जवानी के खतरों के विषय में मार्गदर्शन करके उसे सही राह दिखा सकता है। एक बहकानेवाली स्त्री किसी पुरुष का जीवन बर्बाद कर सकती है, या एक धर्मपरायण मां अपने बच्चों को सत्य की शिक्षा देकर उनकी उन्नति कर सकती है। वाणी दूसरों को अवश्य प्रभावित करती है, परंतु इस नीतिवचन का पाठ यह नहीं है।
जीभ का असर बोलने वाले पर भी पड़ता है। जीभ के वश में जो मृत्यु और जीवन है, वह आपके वचनों का आपके जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव हैं। इसे आप इस नीतिवचन के दूसरे भाग से सीखते हैं, जो सिखाता है कि जो जीभ का उपयोग करने से प्रीति रखते हैं वे या तो मृत्यु का फल खाएंगे या जीवन का। आप इसे संदर्भ में भी जानते हैं क्योंकि इसके पहले के नीतिवचन में लिखा है “मनुष्य का पेट मुँह की बातों के फल से भरता है; और बोलने से जो कुछ प्राप्त होता है उससे वह तृप्त होता है” (नीति 18:20)।
भाषण से प्रीति रखना क्या है, जो इस नीतिवचन को समझने की कुंजी है। बुरे लोग जब उन्हें अपना कोई स्वार्थी उद्देश्य हासिल करना होता है, तब वे अच्छे वचन बोल सकते हैं, और भले मनुष्य की जुबान कभी-कभी ऐसे फिसल जाती है कि वे ऐसे शब्द बोल देते हैं जो उन्हें नहीं बोलने चाहिए थे (नीति 23:6-8; सभो 10:1)। परंतु केवल भले मनुष्य ही अच्छे भाषण से सचमुच प्रीति रखते हैं, और केवल दुष्ट जन ही बुरे भाषण से सचमुच प्रीति रखते हैं। इस नीतिवचन का नियम इस पर आधारित है कि आप किस प्रकार के भाषण से प्रीति रखते हैं – अर्थात् वह भाषण जिसे आप अपना मन, मुंह, और आदतें समर्पित कर देते हैं।
जब आप किसी ऐसे मनुष्य को देखते हैं जो जीवन में असफल हुआ है तो संभवत है उसने अपनी जीभ को वश में नहीं रखा। आप उसकी असफलता को उसके विवाह (या विवाहों) में, बच्चों के साथ उसकी अनबनो में, और उसके अस्तव्यस्त उद्यम में देख सकते हैं। दूसरों की आलोचना और कठोर शब्दों के कारण उसने दूसरों से प्रेम को खो दिया है। अतिशयोक्तियों और नींदात्मक कठोर शब्दों के कारण उसने अपनों के विश्वास को खो दिया। उसकी शिकायती और सनसनी प्रवृत्ति के कारण उसने अपना प्रभाव खो दिया है। घमंड और अधिकारियों के लिए अनादर के कारण वह अपनी पदोन्नतियों के अवसरों से वंचित रह गया है। जरूरत से ज्यादा शब्द बोलने के कारण उसने अपने श्रोता खो दिए। पीठ पीछे बुराई करने और कानाफूसी करने की उसकी आदतों के कारण उसने अपना सम्मान खो दिया। मूर्खता और दूसरों की खिल्ली उड़ाने के कारण उसने अपनी प्रतिष्ठा को दी।अपने किए हुए वादों को बार-बार तोड़ने के कारण वह सब की दृष्टि में एक झूठा मनुष्य बन गया है। वह बर्बाद हो गया है।
उसने अपनी जीभ के उपयोग से आत्महत्या कर ली है। उसने मृत्यु का फल खाया। उसने अपनी जीभ की ताकत का दुरुपयोग अपने ही विनाश के लिए किया। वह अपने मन को वश में नहीं रख सका, और न ही अपनी जीभ को बुद्धि सिखा पाया (नीति 16:23; 25:28)। इस कारण परमेश्वर और मनुष्य दोनों ही ने उसकी जुबानी मूर्खता के लिए उसे दंड दिया। परमेश्वर उसका शत्रु बन गया, और मनुष्यों ने उसे त्याग दिया और उसे अपनी मित्र-मंडली तथा लाभ के उद्योगों से दूर कर दिया । उसने अपनी जीभ की शक्ति का उपयोग अपने ही विनाश और मृत्यु के लिए किया।
कुछ लोगों की जुबान पर घी-शक्कर जैसी मिठास होती है, क्योंकि वे अपनी जीभ को वश में रखते हैं। वे बहुत कम शब्द बोलते हैं (नीति 10:19; 17:27-28)। वे तूफानी शब्दों के बजाय सौम्य वाणी का उपयोग करते हैं (नीति 15:1; 25:15)। में सत्य के कुछ विशेष और चुनिंदा शब्द ही बोलते हैं (नीति 22:17-21)। वे कभी किसी ऐसे मनुष्य के विरोध में बातें नहीं करते जो वहां पर मौजूद न हो (नीति 16:28; 26:20-22)। वे बोलने से पहले मसले को परखते हैं और सोचते हैं (नीति 15:28)। वे सदैव कृतज्ञ होते हैं। वे कभी-कभार ही बोलते हैं जब तक उनसे बोलने के लिए न कहा जाए (नीति 18:13; 29:11; याकूब 1:19)। उनकी अनुग्रहपूर्ण वाणी लोगों के मन को जीत लेती है -वे शीघ्र ही राजा के मित्र बन जाते हैं (नीति 16:13; 22:11)। वे दूसरों के लिए और अपने लिए जीवन का वृक्ष हैं (नीति 10:11; 13:3; 15:4)।
यदि कोई स्त्री असफल होती है तो संभवत: उसने अपनी जीभ को वश में नहीं रखा। कठोर और आलोचनात्मक शब्दों, अवगुणों को याद दिलानेवाली उसकी प्रवृत्ति, मुंहतोड़ जवाब देने की उसकी आदत, या हर बात पर मशवरा या सुझाव देने की उसकी प्रवृत्ति के कारण उसने अपने ही पति का प्रेम नष्ट कर दिया है -उसने अपने विवाह की हत्या कर दी। उसके बच्चे जल्द से जल्द घर से दूर चले जाना चाहते हैं क्योंकि बार-बार की रोबदार आलोचना अब सही नहीं की जा सकती। वह घिनौनी औरत है। उसकी कोई सहेलियां नहीं है, क्योंकि घिनौनी औरत से सभी घृणा रखते हैं । उसने अपनी जीभ के दुरुपयोग के कारण वैवाहिक, घरेलू, और सामाजिक आत्महत्या कर ली है। उसने मृत्यु का फल खाया। वह अब मृत है !
अनुग्रह करने वाली स्त्री की हमेशा प्रतिष्ठा होती है (नीति 11:16)। नियम बिल्कुल सरल और परम सत्य है -जो स्त्री अपनी जीभ को वश में रखती है उसकी बहुत सी सहेलियां होंगी और वह शानदार प्रतिष्ठा पाएगी। उसके मुंह में प्रेम का नियम निवास करता है, और वह केवल तब बोलती है जब उसके पास कहने के लिए कोई बुद्धिमान और महत्वपूर्ण शब्द हो (नीति 31:26)। वह अपनी ही सुनाने के लिए, तुच्छ बात बोलने के लिए, छोटी-छोटी बातों में सुधार करने, या यह सुनिश्चित करने की भीड़ में वह सबसे बड़ी सलाहकार है, कभी नहीं बोलती। वह नम्र और मन की दीन होती है – एक ऐसी स्त्री जो बिना किसी उचित कारण के बोलना भी पसंद नहीं करती है (1 पतरस 3:3-4)।
जवानों, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए तुम समझ की बातें बोलना सीख लो। केवल अनुग्रहसहित बोलनेवाले और बुद्धिमान मनुष्य से संगति रखो जो अपने मुंह को वश में रखते हैं। हर एक मूर्ख और वकवादी मुंहवाले से दूर रहो। तुम अपने होठों को शिक्षा देने के विषय में सुलैमान की बुद्धि को सीखो (नीति 4:24; 6:12; 8:13; 10:31-32; 15:28; 16:23)। सब समयों पर समझदारी की बातें करना सीखने से तुम अपना भविष्य अत्यंत उज्जवल बना सकते हो।
जवान स्त्रियों, तुम भी इन्हीं बातों पर चलना सीखो। यदि तुम ऐसा नहीं करोगी तो तुम ऐसा पुरुष ढूंढ नहीं पाओगी जो तुम से विवाह करके अपना जीवन बर्बाद करना चाहे। घिनौनी स्त्री पुरुषों के लिए एक भयानक खतरा होती है, और एक जवान अर्थात एक बुद्धिमान जवान अपने कानों से ऐसी स्त्री को पहचान लेगा । तुम्हें अवश्य हैं तुम व्यर्थ बड़बड़, फूहड़पन, मूर्खतापूर्ण बातों, मनमौजी वाद-विवादो,और अन्य धिनौने लक्षणों को तुच्छ जानो।
वृद्धो, तुम तो पहले से ही अपने जीभ की करनी का फल खा रहे हो। तुम्हें केवल एक ही आशा है कि तुम परमेश्वर और मनुष्यों के सामने अपने बकवाद के पाप का अंगीकार करो, और जब बोलने को कहा जाए तो केवल अनुग्रहसहित बुद्धि के वचन बोलो, और अपनी बेलगाम जुबान को वश में रखने के लिए परमेश्वर से बुद्धि और बल मांगो। पौलुस ने तुम्हें जो सलाह दी है उस पर अमल करो कि तुम बोलने में कुलीन और गंभीर बनो, इसलिए खिल्ली उड़ाना और मूर्खतापूर्ण बातें करना त्याग दो (तीतुस 2:1)।
वृद्ध स्त्रियों, तुमने भी संभवतः अपने-अपने पतियों के मन को डरा कर रखा है। और तुम्हारे बच्चे अत्यंत खुश होते हैं जब वे आप से दूर घर से बाहर जाते हैं, या फोन पर बात करना समाप्त हो जाता, भले ही वे आपको ऐसा महसूस न होने देते हो। कितने हैं जो तुम्हारी उपस्थिति को तरसते हैं या आपसे बातें करने का मौका ढूंढते हैं? यदि ऐसे लोग बहुत ही कम हैं जो तुम्हारे आसपास रहना चाहते हैं या आपकी बातें सुनना चाहते हैं, तो तुम्हें भाषण की समस्या है। ऐसे में, जो सलाह वृद्ध पुरुषों को दी गई है, तुम उसी का अनुकरण करो और परमेश्वर पर भरोसा रखो कि तुम पर अनुग्रह हो।
प्रिय मसीही, तुम्हारे मुंह के वचन वर्तमान जगत और आनेवाले जगत दोनों में जीवन या मृत्यु को ले आएंगे। यीशु ने कहा “और मैं तुम से कहता हूँ कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन वे हर एक उस बात का लेखा देंगे। क्योंकि तू अपनी बातों के कारण निर्दोष, और अपनी बातों ही के कारण दोषी ठहराया जाएगा” (मत्ती 12:36-37)। मृत्यु और जीवन तुम्हारी जीभ में हैं। जीवन को चुनो, आज ही!
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