नीतिवचन 18:11

धनी का धन उसकी दृष्टि में गढ़वाला नगर, और ऊँचे पर बनी हुई शहरपनाह है।

अमीरी ने बड़े पैमाने पर मनुष्यों का केवल घात ही किया है। धन के कारण लोगों का अहंकार और भी बढ़ जाता है। धन के कारण उन्हें अब परमेश्वर या अपने आस-पास के बाकी लोगों की कोई आवश्यकता नहीं दिखाई देती। वे खुद को यकीन दिलाते हैं कि वे अब सब प्रकार की मुसीबतों से सुरक्षित हैं; वे मानते हैं कि उनकी सफलता साबित करती है कि वे सबसे स्मार्ट हैं। वे इस तथ्य से अनभिज्ञ हैं कि परमेश्वर ने उन्हें अमीर बनाया है, वे उस मृत्यु से नहीं बच सकते जो वह उनपर जल्द ही भेजेगा, और उन्हें अपने एक एक पल का हिसाब-किताब उसे देना होगा, जिसकी क़ीमत उन्हें नरक में चुकानी होगी।

अमीर लोग अपनी सुरक्षा के लिए अपने पैसे पर भरोसा रखते हैं। यह उनकी दृष्टि में उनका गढ़वाला नगर है। क्योंकि उनके पास धन है, उन्हें लगता है कि वे मुसीबत से निकलने का रास्ता चुन सकते हैं। यह उनकी ऐसी ऊँचे पर बनी हुई शहरपनाह है जिसे वे अपनी घमण्डी सोच से बना लेते हैं। परन्तु उनका अहंकार उन्हें धोखा देता है। वे मृत्यु से अपनी भेट टाल नहीं सकते या उसे आगे नहीं बढ़ा सकते; वे अपने साथ एक ढेला भी नहीं ले जा पाएंगे; और जिस पवित्र और भयानक न्यायी से उनकी जल्द ही मुलाक़ात होगी, उसे किसी प्रकार की कोई रिश्वत नहीं दी जा सकती।

धनवान अपने आप को सभी शत्रुओं से सुरक्षित समझते हैं, मानो एक मज़बूत शहर में हों; वे कल्पना करते हैं कि उनके इस शहर की चारों ओर एक ऊंची दीवार है जो आक्रामक हमलावरों को भी पराजित कर सकती है। लेकिन शहर और दीवार दोनों ही उनके घमण्ड का धोखा हैं। कर्क रोग (कैंसर) को न तो आपके पैसे की परवाह है और न ही उस के उपयोग से समय ख़रीदा या पैदा किया जा सकता है। जब विपत्ति आएगी तो वह रूपयों की इस दीवार को तोड़ देगी; मौत इस गढ़वाले शक्तिशाली नगर पर धावा बोल देगी; और अंतिम न्याय सब कुछ नरक में ले जाएगा।

जब तक आप इस नीतिवचन के पहले के नीतिवचन को नहीं पढ़ लेते, तब तक आप इस नीतिवचन को पूरी तरह से नहीं समझ पाएंगे। वहां लिखा है, यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है, धर्मी उसमें भागकर सब दुर्घटनाओं से बचता है” (नीतिवचन 18:10)। धर्मी और अमीर के बीच का फ़र्क क्या है! धर्मी लोग प्रभु यहोवा में सुरक्षा पाते हैं, जबकि धनी लोग सहायता के लिए अपनी संपत्ति और धन की ओर देखते हैं।

क्या अमीर लोग अपने लिए सुरक्षा खरीद सकते हैं? वे अपने आलिशान बंगले को मच्छरों से सुरक्षित रखने के लिए स्प्रे खरीद सकते हैं। वे अपने बिगड़े हुए उड़ाऊ बच्चों के लिए बड़े निवेश कर सकते हैं। वे अपने व्यवसायों को सब्सिडी दिलवाने या बड़े लोन लेने के लिए राजनेताओं को खरीद सकते हैं, और कानूनों को अपने पक्ष में करवा सकते हैं। उनकी औरतें जवान दिखने अपने चहरों पर प्लास्टिक सर्जरी करवाने के लिए सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों को कोई भी क़ीमत चूका सकती हैं। यहाँ तक कि अगर उनके बच्चों का अपहरण हो जाए तो वे अपने बच्चे को सुरक्षित वापस पाने के लिए अपहरणकर्ताओं को फिरौती के रूप में कोई भी रक़म देने में सक्षम हो सकते हैं।

इसलिए अमीर मनुष्य अपने अहंकारी आत्मविश्वास के साथ एक विजेता का जीवन जीता है। वह सबसे अच्छे रेस्तरां में खाना खाता है, हवाई जहाज की प्रथम श्रेणी में बैठता है, उसके पास अपना चार्टर विमान और पायलट भी हो सकता है। उसे बेरोज़गारी, बच्चों का भविष्य, अपने असफल माता-पिता, कर्ज़ चुकाना, बच्चों को कॉलेज में दाखिला दिलाना, या किसी और चीज़ की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। उसे लगता है कि यह उसकी अपनी उपलब्धि है – जब तक कि वह मर नहीं जाता और अपने आप को सब जीवितों और मरे हुओं का फैसला करनेवाले न्यायाधीश, जिसे अमीर लोगों की कोई परवाह नहीं, की आँखों को अँधा करनेवाली ज्योति के सामने नंगा खड़ा नहीं पाता।

दाऊद ने इन लोगों और उनकी विक्षिप्त सोच के बारे में लिखा (भजन 49:6-14)। वे अपने परिवार में के किसी भी सदस्य के लिए मृत्यु को टाल नहीं सकते, चाहे वह कितना भी प्रिय क्यों न हो। उन्हें लगता है कि मृत्यु जैसे बाकी लोगों को कचोटती है, वैसे वह उनको नहीं कचोट पाएगी। वे देखते तो हैं कि जब अमीर लोग मर जाते हैं तब कैसे उनकी बड़ी-बड़ी सम्पदाएँ किसी और के नाम हो जाती हैं, या पारिवारिक संघर्ष के कारण नष्ट हो जाती हैं, लेकिन वे ऐसी चेतावनियों को नज़रअंदाज कर देते हैं और अहंकार में डूबे रहते हैं। वे अपने सम्मान को बढ़ावा देने के लिए इमारतों और पार्कों के नाम अपने नाम पर रखते हैं। पर अन्त में, वे लकड़बग्घे के समान मर जाते हैं और कब्र में सड़ जाते हैं, लेकिन उनके बाद उनके वंशज या लाभार्थी भी उनकी ही जीवनशैली और उसी अहंकार को अपनाते हैं। कितने मूर्ख हैं!

क्या आप अमीरों और मशहूर लोगों की जीवनशैली को देखकर जलते हैं? बॉलीवुड-हॉलीवुड और उनके पीछे काम करनेवाली शैतानी शक्तियाँ आपको उस खोखली खुशी के पीछे छुपी भयानक तस्वीर नहीं दिखाना चाहती। क्या आज के ज़माने की हवेलियांनुमा रो-बंगलों संस्कृति और सुन्दर- सुन्दर लॉन और विशाल प्लेग्राउंड वाली बड़ी बड़ी गेटेड टाउनशिप आपको दुष्टों से ईर्ष्या करने के लिए उकसाती हैं? क्या आप अपनी नौकरी, अपने दो कमरों के घर या अपने जीवन से भी नाराज़ हैं? बुद्धिमान बनें और संतोषसहित भक्ति को चुनें, ऐसा न हो कि आप भी उनके बेकार जीवन, तलाक, ड्रग्स, नशे जैसी बातों में फंस जाएं।

यीशु ने एक घमंडी धानवान मनुष्य का वर्णन किया, जिसके पास इतना अधिक धन था कि उसे रखने के लिए उसके पास जगह नहीं थी। उसने अहंकारपूर्वक दावा किया कि वह उसे जमा रखने के लिए बड़े-बड़े गोदाम बनाएगा, और फिर वह कई वर्षों तक पूरे-पूरे सुख-विलास के साथ अपनी शानदार सेवानिवृत्ति का आनंद लेगा। परन्तु यहोवा ने उस से कहा, ‘हे मूर्ख! इसी रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा; तब जो कुछ तू ने इकट्ठा किया है वह किसका होगा?’ (लूका 12:20)। मृत्यु ने उसकी ऊँचे पर बनी हुई शहरपनाह ढा दीं गई! मृत्यु ने उसका गढ़वाला नगर ले लिया!

अमीर लोग इसलिए अमीर होते हैं क्योंकि परमेश्वर उन्हें अमीर बनाता है (1 इतिहास 29:12; भजन 75:6-7; 1 कुरिन्थ 4:7)। उन्हें सबसे अधिक विनम्र मन का होना चाहिए, क्योंकि उन्हें दूसरों की तुलना में अधिक तेज़ी से जानना और स्वीकार करना चाहिए कि उनके पास जो कुछ भी हैं वह सब केवल परमेश्वर की सर्वोच्च दया और कृपा से है। ‘खुद के बलबूते पर बना हुआ इन्सान’ जैसी कोई चीज़ नहीं है, और विरासत में मिली कोई भी वस्तु केवल एक अमीर घर में जन्म लेने का नतीजा है। मनुष्य के पास जो कुछ भी है या वह जो कुछ भी करने में सक्षम है वह परमेश्वर का वरदान है, और इसलिए उस मनुष्य को चाहिए कि वह सारी महिमा और प्रशंसा केवल उसी को दे।

एक आतंकी है जिसका वे खौफ़ खाते हैं, और जब वे अपने शयनकक्ष में होते हैं तब वे न तो उसके टाल सकते हैं, और न ही उसे स्थगित कर सकते हैं। इसने हर तरफ़ अपना भय फैलाया है। यह उनके सारे आत्मविश्वास को जड़ से उखाड़ देगा। वह भय का राजा है – स्वयं मृत्यु (अय्यूब 18:11-14)। मूर्ख धनवान के लिए आगे क्या रखा है, “वह उजियाले से अन्धियारे में ढकेल दिया जाएगा, और जगत में से भी भगाया जाएगा” (अय्यूब 18:18)?

जब यीशु ने कहा कि परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊँट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं है (मत्ती 19:24)। ऐसा कहने के चंद पलों पहले ही उसने एक धनवान युवक को अपने धन के कारण उसका अनुसरण करने से विमुख होते देखा था (मत्ती 19:21-22)। इतनी खतरनाक चीज़ की कभी इच्छा मत करो! आप दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकते, इसलिए आज ही परमेश्वर की सेवा का फैसला लो और धन से बैर रखों (मत्ती 6:24)। आपके पास जो कुछ भी है उसके लिए आभारी रहो और जरूरतमंदों को उनकी ज़रूरतों के अनुसार भेंट और दान दो (1 तीमु 6:17-19)।

ख्रिश्चन पाठक, आपके रास्ते में आने वाले धन पर कोई विश्वास न रखो (भजन 62:10; 1 तीमु 6:17)। धन की खोज में मत रहो, क्योंकि इसके कारण तुम से पहिले बहुतों ने विश्वास से भटककर अपने आप को नाना प्रकार के दु:खों से छलनी बना लिया है (1 तीमुथियुस 6:7-10)। असीम ज्ञान क्या कहता है याद रखें, कि सन्तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है (1 तीमु 6:6)। बुद्धिमान आगुर की प्रार्थना को अपनी प्रार्थना बनाएं, और अपनी आवश्यक मौलिक कमाई में संतुष्ट रहें (नीतिवचन 30:8)। इसके बजाय परमेश्वर में भरोसा और अच्छे कार्यों के द्वारा अपने विश्वास का निर्माण करें (नीतिवचन 18:10; 1 तीमु 6:19)।

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