नीतिवचन 18:10

प्रभु का नाम दृढ़ गढ़ है, धर्मी उसमें भागकर सब दुर्घटनाओं से बचता है।

जब आप भयभीत होते हैं, तब आपको अपनी सुरक्षा और बचाव के लिए किस प्रकार का गढ़ चाहिए होता है? भय के समय में प्रभु एक दृढ़ गढ़ ठहरता है। जब भी आपको उसकी आवश्यकता पड़े, आप भागकर उसकी ओर जा सकते हैं और अपना बचाव कर सकते हैं। इस गढ़ में आपको कोई भी नहीं छू सकता। इस गढ़ का नाम प्रभु है, और खतरे से बचने के लिए इससे बेहतर जगह और कोई नहीं हो सकती। इस नीतिवचन को विश्वास के साथ थामे रहें; यह आपके जीवन की सुरक्षा करेगा।

प्रभु का मात्र नाम दृढ़ गढ़ नहीं है, क्योंकि उसके नाम में दुष्ट लोगों के विरुद्ध कोई अलौकिक विशेषता नहीं है। बल्कि स्वयं परमेश्वर ही वह दृढ़ गढ़ हैं जिसके नाम ही से लोग उसे जान लेते हैं। स्वयं प्रभु ही वह दृढ़ गढ़ हैं जिसमें सभी अद्भुत गुण और परिपूर्णता हैं। वह जीवित और सच्चा परमेश्वर है, स्वर्ग और सृष्टि का कर्ता, अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है। हाँ, वही परमेश्वर है। उसका नाम प्रभु है। क्या आप उसे अच्छी तरह से जानते हैं?

उसका नाम क्या है? सभी बड़े अक्षरों वाला यह नाम, प्रभु का क्या अर्थ है? क्या यह बाइबल के किंग जेम्स अनुवाद के अनुवादकों का एक विलक्षण भ्रम है? यदि आप परमेश्वर से प्रेम करते हैं तो इस पर ध्यान से विचार करें। वे चार बड़े अक्षर इस्राएल के पवित्र चतुर्भुज का प्रतीक हैं। परमेश्वर ने स्वयं को मूसा के सामने प्रकट किया, और कहा “मैं हूँ जो मैं हूँ ”। यहूदियों ने इस नाम को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने इसे चार व्यंजनों के चतुर्भुज के रूप में लिखा, जेएचवीएच। इसे यहूदी भाषा में परमेश्वर के अन्य नाम, एलोहिम और अडोनाई, से स्वरों को लेकर “यहोवा” के रूप में लिखा और उच्चारित किया जाता है! बड़े अक्षर प्रभु का अर्थ यहोवा होता है, जिसका संदर्भ परमेश्वर के इस कथन “मैं हूँ जो मैं हूँ” से है।

क्या यह परमेश्वर दृढ़ गढ़ है? उसके अलावा और कोई दूसरा परमेश्वर है ही नहीं! राष्ट्रों में अन्य सभी देवता केवल मूर्ख मूर्तिपूजकों की दुष्ट कल्पनाएँ हैं। वे एक लकड़ी के टुकड़े, पत्थर, जानवर और कीड़े के रूप में होते हैं। उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना पड़ता है। यहोवा निरंतर बाइबल में उनका उपहास करता है, और उसकी नज़र में जो लोग उनकी पूजा करते हैं वे भी उतने ही मूर्ख होते हैं।

यह गढ़ ,कितना दृढ़ है? यहोवा पर सदा भरोसा रख, क्योंकि प्रभु यहोवा सनातन चट्टान है (यशायाह 26:3-4)! अब्राहम, इसहाक और याकूब उसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में जानते थे, परंतु उसने स्वयं को मूसा के सामने प्रकट किया (निर्गमन 6:3)। हागर ने उसका नाम रखा, “अत्ताएलरोई” (उत्पत्ति 16:13)। “परमेश्वर अपने पवित्र धाम में, अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है” (भजन संहिता 68:5)। जो कोई भी उस पर भरोसा करता है, वह कभी भी भटकता नहीं!

दाऊद से प्रेरणा लें। अपनी विपत्तियों में प्रभु को पुकारो, और वह आपको छुटकारा देगा (भजन संहिता 18:1-6)। वह दाऊद की चट्टान, शरण, छुड़ानेवाला, परमेश्वर, बल, ढाल, उद्धार का सींग और ऊंचा गढ़ था (भजन संहिता 18:2)। दाऊद ने कहा, “हे परमेश्वर, हे मेरे बल, मैं तुझ से प्रेम करता हूँ” (भजन संहिता 18:1)।

वह धर्मी लोगों को इस प्रकार बचाता है: “तब पृथ्वी हिल गई, और काँप उठी और पहाड़ों की नींव कँपित होकर हिल गई क्योंकि वह अति क्रोधित हुआ था। उसके नथनों से धुआँ निकला, और उसके मुँह से आग निकलकर भस्म करने लगी; जिससे कोएले दहक उठे। वह स्वर्ग को नीचे झुकाकर उतर आया; और उसके पाँवों तले घोर अंधकार था।और वह करूब पर सवार होकर उड़ा, वरन् पवन के पंखों पर सवारी करके वेग से उड़ा। उसने अंधियारे को अपने छिपने का स्थान और अपने चारों ओर आकाश की काली घटाओं का मण्डप बनाया।” (भजन संहिता 18:7-11)। क्या आप इस महिमामय परमेश्वर को जानते हैं? क्या आप उसमें प्रसन्न होते हैं और उस पर भरोसा करते हैं?

क्या आपको लगता है कि कोई अन्य देवता यह सब कर सकता है? या अन्य धर्मों के बड़ी बड़ी मूर्तियों के देवता यह सब कर सकते हैं? या मिस्रियों के पवित्र पशु ऐसा कर सकते हैं? या इथियोपिया के लोगों द्वारा पूजे जाने वाला स्वर्गीय पानी का कीड़ा ऐसा कुछ कर सकता है? या सूरज, चाँद, या तारे, जिनकी की लोग पूजा करते हैं? केवल एक ही जीवित और सच्चा परमेश्वर है, और वह यहोवा हैं। आपको उसे ही जानना चाहिए। उसने आपको अपने लिए बनाया है (नीतिवचन 16:4)। उसकी आराधना करें।

यदि आप मूर्तिपूजकों के मूर्खतापूर्ण और झूठे देवताओं का उपहास करना नापसंद करते हैं, तो आपको या तो बाइबल पढ़ने की आवश्यकता है या एक नया धर्म अपनाने की, क्योंकि प्रभु को मूर्तिपूजकों के धर्म के नीच पाखंडियों के उपहास से आनंद मिलता है। उसके तुल्य और कुछ नहीं है! 1 राजाओं 18:27; भजन संहिता 115:1-8; 135:15-18; यशायाह 40:18-20; 44:9-20; 46:1-9; यिर्मयाह 10:1-5; और हबक्कूक 2:18-20 को भी पढ़ें।

“हाय उस पर जो काठ से कहता है, जाग, या अबोल पत्थर से, उठ! क्या वह सिखाएगा? देखो, वह सोने चाँदी में मढ़ा हुआ है, परन्तु उसमें साँस नहीं है। परन्तु यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में है; समस्त पृथ्वी उसके सामने शान्त रहे।” (हबक्कूक 2:19-20)

लकड़ी और पत्थर की मानव रचित मूर्तियों से ऊबकर, संसार के मूर्तिपूजकों ने अब नए तरीकों से ऐसा करना शुरू कर दिया है। इनमें से किसी की भी तुलना परमेश्वर, हमारे प्रभु से नहीं की जा सकती।

कई लोग मूर्तिपूजक देवताओं का तिरस्कार करते हुए, रूसी कम्युनिस्ट लोग व्लादिमीर लेनिन नामक एक मूर्ख और दुबले व्यक्ति को पूजने लगे, वहीं चीनी कम्युनिस्ट लोग माओ से टंग नामक एक मूर्ख और मोटे व्यक्ति को पूजने लगे। मूर्तियों से लेकर माओ तक, शैतान इन सभी पाखंडियों को जानता है, और जब वे अधोलोक में जाएँगे वह उन सभी पर हँसता है।

परंतु एक ऐसा व्यक्ति है जिससे शैतान सभी देवताओं, स्वर्गदूतों और मनुष्यों से भी अधिक डरता है । और वह व्यक्ति जोसेफ स्मिथ, या पोप फ्रांसिस I नहीं है। बल्कि वह व्यक्ति नासरत का यीशु है। जब वह पृथ्वी पर अति विनम्रता से जीवन जीता था, तब दुष्टात्माएं भाग-भागकर उसकी महिमा करने आते थे और उससे विनती करते थे कि वह उनके न्याय के नियत समय से पहले उन्हें कोई कष्ट न दे। और अब जब वह परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठता है, तो वह उन सभी से बहुत ऊपर है और उन्हें पाँव की चौकी के रूप में उपयोग करने और उन्हें नरक में अनंत काल के लिए भेज देने की तैयारी कर रहा है।

सच्चे मसीही बेबीलोन और रोमन अंधविश्वास के आगे नहीं झुकते और मरियम से प्रार्थना नहीं करते। वह न तो एक गढ़ है और न ही दृढ़ है। वह तो स्वयं की सहायता भी नहीं कर सकती थी। मरियम को भी उद्धारकर्ता यीशु की उतनी ही आवश्यकता थी, जितनी कि किसी अन्य साधारण स्त्री को थी, जैसा कि उसने अपनी चचेरी बहन इलीशिबा से कहा था (लूका 1:46-49)। वह जानती थी कि वह एक दीन दासी थी और आशीष प्राप्त करने वाली थी, न कि आशीष देने वाली। यीशु ने कहा कि उसकी माँ भी परमेश्वर के किसी भी अन्य विश्वासी के समान ही महत्वपूर्ण है (लूका 11:27-28; मत्ती 12:46-50)।

सच्चे मसीही संतों से प्रार्थना नहीं करते, क्योंकि वे आज भी मृत और दफनाए हुए हैं। वे कुछ सहायता नहीं कर सकते। वे कोई सुरक्षा का गढ़ नहीं हैं। वे मर गए क्योंकि वे परमेश्वर के शाप के तहत पापी ठहरे थे। उनके नाम तक भूल जाएं। कैथोलिक लोग ऐसे लोगों को उतनी ही तेज़ी से और व्यर्थता से खड़े करते हैं, जितनी तेज़ी से मूर्तिपूजक लोग एक नए देवता को। दोनों के ही नाम निरर्थक हैं। मदर टेरेसा? उनमें तो स्वयं की जान बचाने तक की सामर्थ नहीं थी। केवल सच्चे परमेश्वर को ही पुकारो!

आपके माता-पिता, पास्टर, पोप, या याजक भी आपको नहीं बचा सकते। वे आपकी कोई सहायता नहीं कर सकते। उनको भी उस दृढ़ गढ़ की उतनी ही आवश्यकता है जितनी कि आपको है। केवल एक ही नाम है जिसके द्वारा एक व्यक्ति बचाया जा सकता है; केवल एक ही नाम है जो हर नाम से श्रेष्ठ है; केवल एक ही नाम है जो कि एक दृढ़ गढ़ है। वह नाम यीशु है, जिसके आगे हर घुटना झुकेगा (फिलिप्पियों 2:9-11)।

जब एक मसीही परमेश्वर से अपनी प्रार्थना “यीशु के नाम से” कहकर समाप्त करता है, तो वह पूरे संसार के सबसे श्रेष्ठ नाम को पुकारता है (फिलिप्पियों 2:9-11)। क्योंकि आप उस नाम का उपयोग करते हैं जिसका अर्थ है कि प्रभु यहोवा ही उद्धार है (मत्ती 1:21)। वह एक दृढ़ गढ़ है! और आप इस गढ़ में सदा सुरक्षित रहेंगे!

यह सदा के लिए जाना जाए कि नासरत का यीशु, इस्राएल का मसीहा, परमेश्वर का मसीह, स्वयं प्रभु ही है, वह सामर्थशाली परमेश्वर, अनन्त पिता, धन्य और एकमात्र शासक, इम्मानुएल, और परमेश्वर का वचन है! वह प्रभु है, और वह सभी का प्रभु है!

प्रिय मसीही पाठक, आप प्रभु को जानते हैं। वह आपका दृढ़ गढ़ है। वह आपको हर खतरे से बचाएगा। “हे लोगों, हर समय उस पर भरोसा रखो; उससे अपने-अपने मन की बातें खोलकर कहो;

परमेश्वर हमारा शरणस्थान है। सेला” (भजन संहिता 62:8)। “प्रभु के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उनको बचाता है।” (भजन संहिता 34:7)।

उसके पास भागकर जाओ! क्योंकि कहीं और आपको कोई सहायता नहीं मिलेगी। प्रार्थना के द्वारा उसके पास भागकर जाओ। विश्वास के द्वारा उसके पास भागकर जाओ। अपने विश्वास में उसके पास भागकर जाओ। तुरंत ही उसके पास भागकर जाओ! वह आपको इस जीवन में और आने वाले जीवन में, आपके सभी शत्रुओं और विपत्तियों से छुटकारा देगा। हे धर्मी, उसके पास भागकर जाओ!

परंतु अपने पाप का अंगीकार किए बिना उसके पास मत जाओ, क्योंकि वह आपसे मुंह फेर लेगा (नीतिवचन 15:8,29; 28:9; भजन संहिता 66:18; यशायाह 1:15; याकूब 4:3)। ऐसी अपवित्र प्रार्थना या आराधना से परमेश्वर का उपहास नहीं होता; यदि आपने उसकी चेतावनियों की उपेक्षा की है, तो वह विपत्ति आने पर आप पर हँसेगा (नीतिवचन 1:20-32)। वह पवित्र है।

भले ही आप कितने ही भय में हो या आप पर कितनी ही विपत्तियाँ आएँ, इस जीवन में और अनंत काल में, प्रभु आपका दृढ़ गढ़ है, और वह आपको बचाएगा। “और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सके।” (प्रेरितों के काम 4:12)। “जब मैंने उसे देखा, तो उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा और उसने मुझ पर अपना दाहिना हाथ रखकर यह कहा, “मत डर; मैं प्रथम और अन्तिम हूँ, और जीवित भी मैं हूँ, “मैं मर गया था, और अब देख मैं युगानुयुग जीविता हूँ; और मृत्यु और अधोलोक की कुंजियाँ मेरे ही पास हैं।” (प्रकाशितवाक्य 1:17-18)।

फिर मैंने स्वर्ग को खुला हुआ देखा, और देखता हूँ कि एक श्वेत घोड़ा है; और उस पर एक सवार है, जो विश्वासयोग्य, और सत्य कहलाता है; और वह धार्मिकता के साथ न्याय और लड़ाई करता है। उसकी आँखें आग की ज्वाला हैं, और उसके सिर पर बहुत से राजमुकुट हैं। और उसका एक नाम उस पर लिखा हुआ है, जिसे उसको छोड़ और कोई नहीं जानता।वह लहू में डुबोया हुआ वस्त्र पहने है, और उसका नाम ‘परमेश्वर का वचन’ है। और स्वर्ग की सेना श्वेत घोड़ों पर सवार और श्वेत और शुद्ध मलमल पहने हुए उसके पीछे-पीछे है। जाति-जाति को मारने के लिये उसके मुँह से एक चोखी तलवार निकलती है, और वह लोहे का राजदण्ड लिए हुए उन पर राज्य करेगा, और वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के भयानक प्रकोप की जलजलाहट की मदिरा के कुण्ड में दाख रौंदेगा। और उसके वस्त्र और जाँघ पर यह नाम लिखा है: “राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु।” (प्रकाशितवाक्य 19:11-16)।

“हमारा प्रभु आनेवाला है। प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम पर होता रहे।” (1 कुरिन्थियों 16:22-23)।

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