नीतिवचन 18:1

जो दूसरों से अलग हो जाता है, वह अपनी ही इच्छा पूरी करने के लिये ऐसा करता है, और सब प्रकार की खरी बुद्धि से बैर करता है।

बुद्धि समर्पित प्रयास से ही प्राप्त होती है। और बहुत ही कम लोग होते हैं जो उसे हासिल करने की इच्छा रखते और पाने के लिए प्रयास करते हैं। इसलिए उपदेशक सुलैमान ने उन पुरुषों और स्त्रियों की प्रशंसा कीं जो पूरे परिश्रम और लगन से उसे ढूंढते हैं।

लोगों का एक बहुत बड़ा तबका जीवनभर अज्ञानता और मूर्खता में रहता है और उसी अवस्था में मर जाता है, यहां तक कि वे भी जिनके सामने बुद्धि और ज्ञान रखा जाता है। ऐसे लोग और उनके साथ उनके बच्चे भी उचित पीड़ा भोगेंगे।

अगला वचन मनुष्यों के बीच इस भेद की पुष्टि करता है, क्योंकि मूर्खों को सीखने में कोई आनंद नहीं होता है; वे पूरी तरह से अपने विचारों और कल्पनाओं में व्यस्त और मस्त रहते हैं (नीतिवचन 18:2; 17:16)।

प्रिय पाठक, क्या आप इस लायक हैं कि इस नीतिवचन का लेखक बुद्धि और ज्ञान प्राप्त करने की आपकी अभिलाषा और परिश्रम की सराहना कर सके? क्या परमेश्वर और सुलैमान बुद्धि और ज्ञान सीखने के आपके प्रेम और प्रयास की प्रशंसा करेंगे?

जब कोई व्यक्ति बुद्धि पाना चाहता है, तो ज़रूरी है उसे कुच्छ बातों का बलिदान देना होगा। वह उन बातों से जो उसका ध्यान और मन भटका देती हैं, और जिनसे केवल समय बर्बाद होता है, और जीवन को दिशाहीन कर देती हैं, दूर रहेगा । वह उन मित्रों और ऐय्याशी से खुद को दूर कर देगा जो इस महान लक्ष्य की प्राप्ति में रोड़ा बनते हैं। वह धन, शिक्षा, मनोरंजन, या शारीरिक व्यायाम को लेकर बने आज के लोकप्रिय चलन एयर महत्वाकांक्षाओं को अपनाने से इनकार कर देगा। ऐसे में उसका जीवन एकाकी हो सकता है। पर फिर भी, इस अकेलेपन से छुटकारा पाने की एक आशा है- बाइबल के सिद्धांतों पर चलनेवाले किसी चर्च में विश्वासयोग्य ख्रिश्चन पवित्रजनों की संगति, जहाँ उसे उसी के समान जीवन का मार्ग चुननेवाले कुछ लोग मिलेंगे (लूका 8:14; 1 कुरिन्थ 9:24-26; 1 यूहन्ना 2:15-17)।

परमेश्वर के जन के समान, उसे इस संसार के कामों के अपने दायित्वों को सीमित करना होगा (2 तीमु 2:4; 1 तीमु 6:6-12)। क्योंकि ये सांसारिक दायित्व उसके पहले से ही थके हुए शरीर को और भी थका देंगे (सभो. 12:12)। और इस दुनिया की अज्ञानतापूर्ण भूख एक ऐसा जाल है जिससे उसे बचना होगा (नीतिवचन 9: 6; 13:20; 1 कुरिन्थ 15:33; 2 कुरिन्थ 6: 14-18)।

वह जान लेगा कि कैसे अकेले रहने पर उसे अपने स्वर्गीय पिता की संगति और उसके वचन से शिक्षा पाने के सबसे मधुर क्षण मिलते हैं (भजन 4:4; 63:5-6; मत्ती 6:6; अय्यूब 33:14-18)। वह जानता है कि अगर उसे अपनी अंतरात्मा परिक्षण करना है और अपने पैरों के मार्ग पर विचार करना हा, तो उसे दूसरों के सब शोर-शराबे और कामों से खुद को अलग करना होगा (नीतिवचन 4:26; भजन 26:2; 77:6; 139:23-24)।

परमेश्वर ने अब्राहाम के लिए अंधेरी रात को चुना (उत्पत्ति 15:5), मूसा के लिए रेगिस्तान (निर्गमन 3:1), यहेजकेल के लिए मैदान (यहेजकेल 3:22), यूहन्ना के लिए जंगल (लूका 1:80), और पौलुस के लिए अरब (गला 1:17) को चुना। हमारा धन्य प्रभु यीशु स्वयं अपने पिता से अकेले मिलने के लिए तड़के ही उठ जाया करता था (मरकुस 1:35), या फिर वह अपने पिता के साथ अकेले पूरी रात बिताया करता (लूका 6:12)।

आज की आसान ज़िन्दगी जैसे घूमना-फिरना आसान होना, टेलीफोन, ईमेल और घरों, कार्यालयों और कारों में सभी प्रकार के संचार उपकरणों की उपलाब्दियाँ, इन सब बातों की मौजूदगी से आप एक अभिशाप से अभिशप्त किये गएँ हैं। एकांत समय बहुत बड़ी चुनौती और कठिनाई बन गया है और यह विपात्ति किसी की समझ में नहीं आती। बीते दिनों में एक किसान अपने बैल के साथ खेत में और अपने परमेश्वर एकांत में जो समय बिताया करता था, वह सौभाग्य आज के विकास ने उससे छीन लिया है। सांसारिक जीवन के लिए विकास के अपने फायदे तो हैं, लेकिन यह अनंत जीवन की बातों से ध्यान भटकाने में भी योगदान देता है।

भेड़ों को चराते और उनकी रखवाली करते समय भजन लिखना ऐसी समृद्धि है जिसे यह विकृत पीढ़ी नहीं कर सकती। लोग तो दिन में ज्यादा से ज्यादा काम करने के लिए अपनी घड़ियाँ आगे कर देते हैं, जबकि सूर्य चिल्ला रहा होता है, “शान्त रहो और चैन की साँस लो!” अगर रिबका आज के इस दौर में एक ऐसे पुरुष को ढूंढती जो खेतों में परमेश्वर के वचन में ध्यानमग्न रहता हो, तो वह अविवाहित और अकेली ही रहेगी (उत्पत्ति 24:62-67)। हे परमेश्वर, अपने बच्चों की किसी शांत स्थान पर एकांत में समय बिताने के लिए पहाड़ियों की ओर भागने में मदद कर।

भला मनुष्य उन सब बातों से जो अधिकांश मनुष्यों को धोखा देती हैं, उन्हें विचलित करती और अंत में नष्ट कर देती हैं, अलग होने के बाद, बुद्धि और ज्ञान के सभी पहलुओं की खोज करता है और उसी में दिलचस्पी लेता है – गहराई से शामिल होता है, उसी की बातों में संलग्न और व्यस्त रहता है। वह अपने मार्गदर्शको के रूप में पवित्र आत्मा, बाइबल और परमेश्वर के जन के साथ बैठकर सृष्टि और प्रकाशन के सभी पहलुओं के अध्ययन और चिंतन में डूब जाता है। इस काम के लिए गहन और समर्पित खोज की आवश्यकता होती है (नीतिवचन 2:1-9; 2 तीमु 2:15; 1 तीमु 4:13-16)।

यहां तक कि शुतुरमुर्ग और घोड़ा भी आपके सावधानीपूर्वक ध्यान और विचार के पात्र हैं (अय्यूब 39:13-25)। आप कुछ ही मिनटों में परमेश्वर के सभी कार्यों को कैसे याद रखेंगे, कैसे उनपर मनन और चिंतन करेंगे (भजन 143:5)? क्या आप कुछ ही मिनटों में एक उद्धारकर्ता के प्रेम के आयामों को समझ सकते हैं (इफि 3:14-19)? जब परमेश्वर आप ही आपका पुरस्कार है, तब क्या यह आपके अधिक समय के योग्य नहीं है? आप आखिरी बार कब परमेश्वर के वचन की समझ से अभिभूत होकर उसकी प्रशंसा में लवलीन हो गएँ थें (रोमियों 11:33)?

आप अपनी बाइबल के 31,101 वचनों को कैसे पढ़ेंगे, उन पर विचार करना और मनन करना तो दूर की बात है? फिर भी भजन 119, जो बाइबल का सबसे लंबा अध्याय है, प्रत्येक वचन पर सावधानीपूर्वक ध्यान करने के महत्व को समझाता है। केवल दृढ़ इच्छा-शक्ति वाला व्यक्ति ही, जो खुद को बाकी सब भटकाने वाली बातों से अलग रखता है, इस व्यापक और मूल्यवान दिनचर्या में कोई प्रगति कर पाएगा।

कमज़ोर इच्छा वाले कुछ लोग कहेंगे कि उनके पास पर्याप्त समय नहीं है। इसलिए प्रेरित पौलुस ने लोगों से कहा कि वे ज्ञान और समझ के लिए समय का सदुपयोग करें (इफि 5:15-17)। आप अपने बाकी कामों को छोड़कर समय खरीद सकते हैं। एक सप्ताह में 168 घंटे होते हैं, जिनमें से केवल आधे घंटे ही आप काम करते हैं और सोते हैं। मूर्खतापूर्ण कार्यों और आलसपूर्ण प्रबंधन में बहुत समय बर्बाद किया जाता है। हे परमेश्वर, रहम कर।

बाइबल ज्ञान के समर्पित साधकों का वर्णन करती है। दाऊद और दानिय्येल प्रतिदिन तीन बार प्रार्थना किया करते थें (भजन 55:17; दान 6:10)। बारह वर्ष की आयु में हमाराधन्य प्रभु सब प्रकार की ज्ञान की बातों और वाद-विवाद में हिस्सा लेता था, जबकि उनके हमउम्र साथी खेल रहे थे (लूका 2:41-52)। शिष्यों ने देह में प्रकट हुई इस बुद्धि और इस ज्ञान का अनुसरण करने के लिए सब कुछ छोड़ दिया (मरकुस 1:16-20), और पौलुस ने बाकी सभी चीजों को गोबर माना (फिलिपियों 3:7-14)। उसने करने के लिए एक काम चुना (फिलिपियों 3:13), क्योंकि वह जानता था कि दुचित्ता मन मूर्खता है (याकूब 1:8)। बिरीयावासियों ने बड़े तत्पर मन से पौलुस का उपदेश सुना और वे प्रतिदिन पवित्रशास्त्र में खोज करते थें (प्रेरितों 17:11)।

प्रिय पाठक, आपने बुद्धि और ज्ञान प्राप्त करने के लिए इस सप्ताह क्या किया है? आपने परमेश्वर का वचन कितने मिनट तक पढ़ा है? आपने कितने मिनट प्रार्थना की है? नीतिवचन का कितना अध्ययन किया? क्या आपने अपने पास्टर के उपदेश की समीक्षा की? क्या आपने महत्वपूर्ण ढंग से आत्मिक विषयों पर चिंतन या चर्चा की?

प्रिय माता-पिता, आपने अपने बच्चों में ऐसी महत्वाकांक्षा पैदा करने के लिए क्या किया है? हन्ना ने शमूएल को इतनी अच्छी तरह प्रशिक्षित किया कि दूध छुटते ही वह परमेश्वर की आराधना करने में लग गया था (1 शमू 1:20-28)। लोइस और यूनीके ने तीमुथियुस को विश्वास और पवित्रशास्त्र में पूरी तरह से प्रशिक्षित किया (2 तीमु 1:5; 3:15)। यह पिता का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को प्रभु की शिक्षा और चेतावनी देते हुए उनका पालन–पोषण करें (इफि 6:4)।

यीशु मसीह ने सिखाया कि स्वर्ग का राज्य किसी खेत में छिपे गुप्त धन के समान है, जिसके लिए व्यक्ति खुशी-खुशी अपना सब कुछ बेचकर उस खेत खरीदेगा और उसमें खुदाई करेगा (मत्ती 13:44)। या एक अनमोल मोती के समान, जिसे खरीदने के लिए वह अपना सब कुछ बेच देता (मत्ती 13:45-46)। क्या आपका जीवन इस पवित्र उत्साह को प्रतिबिंबित करता है? ज्ञान और बुद्धि को प्राप्त करने के लिए आज आप क्या त्याग करेंगे?

बहुत कम लोग इस नीतिवचन को समझेंगे और बहुत कम लोग ही इसका अपने जीवन में व्यावहारिक उपयोग करेंगे। अज्ञानता और मूर्खता का मार्ग, जो इस जीवन में और इसके बाद वाले जीवन में भी नरक की ओर ले जाता है, कई यात्रियों के लिए बहुत चौड़ा है। और ज्ञान और बुद्धि का मार्ग, जो इस जीवन को और इसके बाद वाले जीवन को भी महिमा की ओर ले जाता है, बहुत संकीर्ण है और केवल कुछ ही लोग इसे खोज पाते हैं। जो जो मसीह का नाम लेता है उन में से कोई भी इस चौड़े मार्ग पर न पाया जाए।

क्या आप ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति के लिए सप्ताह में 168 घंटों में से कुछ मिनट निकाल सकते हैं? अपनी मूढ़ता में ही क्यों मरें, जबकि आपका जीवन समय की भारी बर्बादी है, और आपके बच्चे आपकी अज्ञानता को दोहराने और उसके परिणाम भुगतने के लिए अभिशप्त हैं? स्वर्गदूत खुद मनुष्यों से सरोकार रखनेवाली इन बातों को देखने की इच्छा रखते हैं (1 पतरस 1:12), लेकिन मनुष्य किसी और बातों में अति व्यस्त हैं। परमेश्वर करें कि इसे लिखनेवाला लेखक स्वयं और पढ़नेवाला पाठक अपना अपना आत्मपरीक्षण करें।

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