नीतिवचन 17:9
जो दूसरे के अपराध को ढाँप देता, वह प्रेम का खोजी ठहरता है, परन्तु जो बात की चर्चा बार बार करता है, वह परम मित्रों में भी फूट करा देता है।
क्षमा कर देना और अपराध को भूला देना प्रेम है। क्या आप जानते हैं कि प्रेम को कैसे जीता जाता है और मित्रता कैसे बनाई जाती है? ये वे हुनर और कलाएँ हैं जिन्हें सिर्फ़ बुद्धि ही सिखा सकती है – यह वह आचरण है जिसे सीखा जाता है। सब मनुष्य स्वभाव ही से अभिमानी, ईर्ष्यालु, नफ़रती, दुष्ट, स्वार्थी और प्रतिशोधी होते हैं (रोमियों 1:29-31; 2 तीमुथियुस 3:2-3; तीतुस 3:3)।
मनुष्य को आदम से विरासत में मिली इन बुरी प्रवृत्तियों से केवल परमेश्वर का अनुग्रह ही छुटकारा दिला सकता है। तब प्रेम और मित्रता को बुद्धि के द्वारा सीखा जा सकता है (नीतिवचन 8:9; 14:6; तीतुस 3:4-7)। दोस्त कैसे बनाएं और लोगों को कैसे प्रभावित करें इस विषय पर लिखी-लिखाई सारी किताबें सुलैमान की बुद्धि की बराबरी नहीं कर सकती जो उसने परमेश्वर की प्रेरणा से नीतिवचनों में लिखी है।
क्या आपने प्रेम और मित्रता सीखी है? क्या आप एक प्रेम से भरे मित्र हैं? क्या दूसरे आपकी मित्रता से प्रसन्न होते हैं? क्या आपके कई मित्र हैं? सच्चा प्रेम और सच्ची मित्रता ऐसी होती है जिसमें आपके विरुद्ध व्यक्तिगत रूप से किएँ गएँ सब अपराधों को आप अनदेखा कर देते हैं और उन्हें भूल भी जाते हैं, लेकिन मूर्ख लोग उन ज़ख्मों को बारबार कुरेदकर शांतिपूर्ण संबंधों को नष्ट कर देते हैं। सच्चा प्रेम और सच्ची मित्रता कभी भी किसी व्यक्ति की असफलताओं या पापों को दूसरों के सामने उजागर नहीं करती, लेकिन मूर्ख लोग चुगली, पीठ पीछे बुराई और कानाफूसी करके सब तरफ़ ढिंढोरा पिट देते हैं (नीतिवचन 10:12; 11:13; 16:28)।
दूसरे के अपराध को ढाँप देना ही अपना प्रेम और मित्रता को साबित करने का तरीका है। यह उन गलतियों को क्षमा करना और भूल जाना है जो दूसरों ने आपके साथ निज़ी तौर पर की हैं। मानवीय संबंधों की एक पक्की बात यह है कि दूसरे लोग आपको परेशान करेंगे और अपमानित करेंगे। लेकिन आप उन निज़ी तौर पर किएँ अपराधों से कैसे निपटते हैं, यही मुख्य बात है। जब आप दूसरों के उकसावे और ज़लिलत को अनदेखा करते हैं, तो आप उन्हें खुद से ज़्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं – जो सच्चा प्रेम और मित्रता है (फिलिप्पियों 2:3; 1 कुरिंथ 13:4-7)।
बुद्धिमान लोग उनके साथ निज़ी तौर पर किएँ दूसरों के अपराधों को अनदेखा करने के अवसरों पर ख़ुशी जताते हैं; उनका विवेक और आत्म-संयम उनके क्रोध को खत्म कर देता है (नीतिवचन 19:11)। उन्हें कुछ भी परेशान नहीं करता, खासकर छोटी-मोटी चिड़चिड़ाहट जो आम तौर पर लोगों में होती है। वे जानते हैं कि उन्हें भी बहुत बार और बहुत से अपराध क्षमा किएँ गएँ हैं, इसलिए उनके लिए दूसरों को क्षमा करना आसान है। वे जानते हैं कि उनकी अपनी आँखों में लट्ठा हैं, इसलिए वे दूसरों की आँखों में छोटे-छोटे तिनकों की चिंता नहीं करते (मत्ती 7:3-5)।
दूसरे के अपराध को ढाँप देना ही अपना प्रेम और मित्रता को साबित करने का तरीका है। यह हर चुगली करने वाली जीभ को चुप करा देता है और हर चुगली करने वाले और कानाफूसी करने वाले को दूर भगा देता है (नीतिवचन 11:13; 16:28; 18:8; 20:19; 25:23; 26:20-22; भजन 101:5)। यह किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को खराब करने वाली अफवाहों या तथ्यों को दूसरों के सामने उजागर करने से इनकार करता है। सच्चा प्रेम दूसरों के बारे में बुरा नहीं सोचता और दूसरों के जीवन में असफलताओं या पापों के बारे में सुनकर खुश नहीं होता (1 कुरिन्थियों 13:4-7)। अपराध को ढाँप देना ऐसी खबरों को दबाना है जो दूसरे के चरित्र पर बुरा असर डालती हैं। प्रेम दूसरों की प्रतिष्ठा की रक्षा करता है।
अपराधों को ढाँप देना पाप के साथ समझौता करना नहीं है। यदि कोई व्यक्ति परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध पाप करता है, तो इसे मनुष्यों के बीच के अपराधों से अलग तरीके से निपटाया जाना चाहिए (1 शमूएल 2:25; 1 कुरिन्थियों 5:1-5; 6:7)। इन बड़े मामलों से कैसे निपटा जाना चाहिए इसके लिए परमेश्वर के नियमों को बाइबल में बारबार बताया गया है। आपको मित्र बनाने या बनाए रखने के लिए परमेश्वर के विरुद्ध किएँ पाप को कभी भी ढाँप नहीं देना है और न ही उन्हें अनदेखा करना चाहिए। यहाँ विषय उन अपराधों का है जो दुसरे आपके खिलाफ व्यक्तिगत रूप से करते हैं और उन अपराधों को आप ढाँप सकते हैं (नीतिवचन 19:11; मत्ती 5:38-48; 18:15-22; 1 कुरिन्थियों 6:1-8), या दूसरों की असफलताएँ और पाप जिसके लिए आप ज़िम्मेदार नहीं हैं। यदि किसी व्यक्ति ने किसी पाप का पश्चाताप किया है, चाहे वह कितना भी जघन्य क्यों न हो, दूसरों के सामने उसे बताना इसमें कोई प्रेम या लाभ नहीं है।
जो लोग अभिमानी और विद्रोही प्रवृत्ति के होते हैं वे अपने ख़िलाफ किएँ दूसरों के अपराधों को छिपाने की बुद्धि नहीं सीखेंगे, और न ही अज्ञानी और मूर्ख लोग इसे सीख पाते हैं। दोनों ही दिखावा करते हैं कि उन्हें दूसरों को दोष और कमज़ोरियों के बारे में याद दिलाकर खुद को बचाना चाहिए। उनका मानना है कि उन्हें दूसरों से महसूस होने वाले किसी भी अपमान का बदला लेना चाहिए। वे अपराधों को अनदेखा नहीं कर सकते। उन्हें दूसरों को उनके पापों की याद ज़रूरी ही होता है। वे मामूली अपराधों के लिए भी अंदर ही अंदर जलते रहते हैं, कभी-कभी तो सालों तक। वे बदला लेना ज़रूरी समझते हैं।
खुद को सही ठहराने और दूसरों को नीचा दिखाने के लिए, वे दूसरों के बारे में सुनी गई किसी भी विफलता को इधर-उधर फैला देते हैं। उनके पास एक ऐसा दिल है जो दूसरों के बारे में चुगली करने और बुरी खबरों को व्यापक रूप से फैलाने के लिए तडपता है। दूसरों के पापों के बारे में कानाफूसी करने से उनके विकृत मनों को आनंद मिलता है। ये दुष्ट जानवर नहीं जानते कि प्रेम क्या होता है और इसलिए ऐसे लोग शायद ही कभी सच्चे मित्र बन पाते हैं।
प्रेम और मित्रता मन से शुरू होती है। जब दूसरे आपको अपमानित करते हैं, तो इसे अनदेखा करें, अपने दिल में भी। जब दूसरे आपको नीचा दिखाते हैं, तो इसे अनदेखा करें, अपने दिल में भी। जब दूसरे आपको उकसाते हैं, तो उनके बारे में अनुग्रहपूर्ण और करुणा से भरी सोच रखें। प्रतिशोध के बारे में न सोचें। विवाद को भूल जाएँ। इसे सामने लाने का अवसर न बनाएँ। जब दूसरे असफल होते हैं या उनके जीवन में पाप होता है, तो इस पर खुश न हो। आपकी पहचान एक ऐसे मनुष्य की हो जो केवल दूसरों को आशीर्वाद देने और दूसरों को सफलताओं पर आनंदित होने के लिए जाना जाता है।
प्रेम और मित्रता का सबसे अच्छा व्यावहारिक अभ्यास घर पर किया जाता है। अगर आप भाई-बहनों या जीवनसाथी के साथ उदार, कृपालु और दयालु हो सकते हैं, तो आप किसी भी व्यक्ति के साथ ऐसा ही रहेंगे। बच्चों को भाई-बहनों की गलतियों को अनदेखा करना सिखाया जाना चाहिए, न कि उनसे बदला लेना; भाई-बहनों को सिखाया जाना चाहिए कि वे एक-दूसरे की गलतियों को दूसरों के सामने न बताएं। उन्हें गलतियों को छिपाना और प्रेम की ख़ोज करना सीखयें।
यह नीतिवचन आपके वैवाहिक जीवन को भी बेहतर बना सकता है। क्योंकि वैवाहिक जीवन दूसरे के साथ एक घनिष्ठ और अंतरंग संबंध होता है, इसलिए आप अपने जीवनसाथी की गलतियों और असफलताओं के बारे में किसी भी अन्य व्यक्ति की तुलना में अधिक जानते होंगे। क्या आप बिना कुछ कहे उसे छिपा सकते हैं, माफ़ कर सकते हैं और अनदेखा कर सकते हैं? या क्या आपको लगता है कि मामले को फिर से उठाने से आपको या उन्हें कोई फायदा होगा? अगर आप ऐसा सोचते हैं, तो आप प्रेम के बारे में कुछ नहीं जानते, और आप दो मित्रों के बीच जो आपस में विवाहित हैं, दीवारें खड़ी करके अपने ही वैवाहिक जीवन को नष्ट कर देंगे।
दूसरों ने आपके खिलाफ़ व्यक्तिगत रूप से जो भी अपराध किएँ हैं या कर रहें हैं उन्हें अनदेखा करें और भूल जाएं। दूसरों के बारे में अफ़वाहें, कानाफूसी न करें, और अगर कुछ बातें सच हो तौभी उन्हें दूसरों को न बताएं क्योंकि ऐसा करने से उनका जीवन अंधकारमय हो सकता है। ये दोनों बातें ख्रिश्चन प्रेम के विरुद्ध पाप हैं जो प्रेम और मित्रता को नष्ट करते हैं। हर ख्रिश्चन व्यक्ति अपने अपराधी को ठीक वैसे ही क्षमा करें जैसी परमेश्वर ने उसके अपराधों को क्षमा किया है (इफिसियों 4:31-32)। दूसरों की गलतियों और असफलताओं को माफ़ कर देने और भूल जाने में जो आनन्द हैं वह अन्य किसी भी बात में नहीं, और यह ख़ूबी ख्रिश्चन धर्म की धन्यता रही है।
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