नीतिवचन 17:6
बूढ़ों की शोभा उनके नाती-पोते हैं; और बाल-बच्चों की शोभा उनके माता-पिता हैं।
परमेश्वर ने परिवारों को बनाया है। वह सबसे बेहतर तरीके से जानता है कि उन्हें कैसे बढ़ाया जाता है। यहाँ चार पारिवारिक भूमिकाएँ, तीन पीढ़ियाँ और दो पारस्परिक संबंध के विषय में बात की गई है। क्या आप उन्हें पहचान सकते हैं? परमेश्वर ने आपको एक अनमोल नीतिवचन दिया है। यहाँ दी गई सीख एक कुलीन और प्रेममयी परिवार के बारे में है, जो कि आपके लिए एक उत्कृष्ट लक्ष्य है। साथ ही, बुद्धिमत्तापूर्ण दूरदृष्टि वाले बुद्धिमान माता-पिता और उनका मूल्य जानने वाले आज्ञाकारी बच्चों के विषय में भी सीख दी गई है।
इस संक्षिप्त नीतिवचन में ज्ञान व्यापक रूप से उपस्थित है। एक परिवार की चार भूमिकाएँ पोता, दादा, बेटा, और पिता होती हैं। इसमें कम से कम तीन पीढ़ियों शामिल हैं। यहाँ दो पारस्परिक संबंध भी हैं – दादा और उनके पोते, और पिता और उनके बेटे। इसमें पोती, दादी, माँ और बेटियाँ निहितार्थ रूप से शामिल होती हैं। प्रत्येक पाठक को इस नीतिवचन के आशीष को प्राप्त करने में अपनी कई भूमिकाओं पर विचार करना चाहिए।
यहाँ केवल बुद्धिमान और अच्छे परिवारों के विषय में बात की गई है। सभी नाती-पोते अपने दादाओं कि शोभा, अर्थात आदर और प्रतिफल का एक अलंकार नहीं होते। कई नाती-पोते अपने दादाओं के लिए अपमान और शर्म का कारण होते हैं। सभी पिता अपने बेटों की शान, अर्थात अत्यंत हर्ष और आदर का कारण नहीं होते। कई बच्चे अपने पिता का इस तरह सम्मान नहीं करते। कई पिता ऐसे सम्मान के हकदार ही नहीं होते। क्या यह नीतिवचन आपके परिवार पर लागू हो रहा है?
केवल गुणी पोते ही अपने दादा के लिए हर्ष का कारण बनते हैं। केवल बुद्धिमान दादा ही गुणी पोतों को अपने लिए एक आशीष मानते हैं। पारिवारिक रिश्तों के विषय में बुद्धिमत्तापूर्ण तर्कों के द्वारा उसमें निहित निहितार्थों को समझें। सुलैमान ने बड़े और विस्तृत, कार्यात्मक और खुशहाल परिवारों की सराहना की है। परंतु उसने ऐसा केवल कुछ परिवारों के लिए कहा है। और गहराई से निहितार्थों को समझें। सुलैमान ने कुछ ही शब्दों में, लाभ प्राप्त करने के लिए कई पारिवारिक कर्तव्यों को उल्लेखित किया।
अमेरिका के परिवार खतरे में हैं। वे सोचते हैं, बच्चे? उन्हें गर्भ में ही गिरा दो। विवाह? दो पुरुषों के बीच भी संभव है। माता-पिता? उनकी अवहेलना करो या उन्हें छोड़ दो। दादा-दादी? इच्छामृत्यु द्वारा आसानी से निपटे जा सकते हैं। पिता? अनावश्यक। नाती-पोते? उन्हें केवल हमारी संपत्ति चाहिए। बच्चे? एक बोझ और परेशानी जो हमारा सब समय ले लेंगे। विवाह? इसके बिना भी यौन संबंध बनाए जा सकते हैं। एक परिवार? हमारे करियर से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। एक बड़ा परिवार? इस समय हम इतना खर्च नहीं उठा सकते। माताएँ? एक आया नियुक्त करना बेहतर है।
परमेश्वर ने परिवारों को बनाया (उत्पत्ति 1:27)। उसने शुरुआत की एक पुरुष और एक महिला के विवाह से, जो कि जीवन भर है (उत्पत्ति 2:18, 21-25; मत्ती 19:1-6)। उसने प्रभाव और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए उसमें बच्चों को जोड़ा (भजन संहिता 107:41; 127:3-5; 128:1-6)। उसने उन परिवारों में दादाओं और परदादाओं को भी एक भूमिका दी (अय्यूब 42:16; भजन संहिता 78:1-8; योएल 1:1-3; 2 तीमुथियुस 1:3-5)।
परमेश्वर उन लोगों को शापित करता है जो बुरे पारिवारिक संबंधों का कारण बनते या उन्हें बढ़ावा देते हैं (मलाकी 4:5-6; नीतिवचन 20:20; 30:17; व्यवस्थाविवरण 27:16)। परंतु वह उन लोगों को आशीष देता है और उनके साथ चलता है जिनके पारिवारिक संबंध अच्छे होते हैं (लूका 1:17)। ऐसे लोग प्रभु के लिए तैयार लोग होते हैं। धर्मी संबंध, विशेष रूप से परिवार, उसकी आशीषों के लिए आवश्यक हैं (मलाकी 2:10-16; 1 पतरस 3:7; इफिसियों 6:1-4)।
प्रिय पाठक, आप इनमें से क्या हैं? माता-पिता? बच्चे? दादा-दादी? नाती-पोते? या चारों में से सभी? क्या आपने एक महान और गौरवशाली परिवार को बढ़ावा देने के लिए अपनी परमेश्वर-प्रदत्त भूमिका को पूरा किया है? क्या आपका परिवार परमेश्वर की महिमा और सत्य की एक जीवित गवाही है? या फिर आप अपने परिवार को एक बोझ समझते हैं? आपके पास अपने परिवार और स्वयं को सम्मान के साथ आशीषों से भरने का एक शानदार अवसर है।
पिताओं को अपने बच्चों को प्रशिक्षित करना चाहिए (इफिसियों 6:4)। बच्चों को अपने माता-पिता की आज्ञा माननी चाहिए और उनका आदर करना चाहिए (इफिसियों 6:1-3)। पिताओं को अपने बच्चों के लिए संपत्ति छोड़नी चाहिए (नीतिवचन 13:22; 19:14; 2 कुरिन्थियों 12:14)। नाती-पोतों को आगे बढ़कर अपने दादा-दादी का आदर करना चाहिए (नीतिवचन 16:31; लैव्यव्यवस्था 19:32)। दादा-दादी को अपनी महान बुलाहट को पूरा करने और विरासत छोड़ने के लिए, इन सब की देखरेख करनी चाहिए।
क्या परिवार के किसी भी रिश्ते में कड़वाहट है? क्या आपने सभी सदस्यों के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा किया है? क्या आपने अपने से पहले और बाद के सभी लोगों के अपराधों को माफ कर दिया है? क्या आप एक धर्मी, खुशहाल परिवार को बढ़ावा देने के लिए दैनिक रूप से प्रयास कर रहे हैं? क्या आपका परिवार एक सद्गुण और धार्मिकता का आधार है? क्या वह गुणवत्ता और महिमा में बढ़ रहा है? क्या आप एक पारिवारिक मेल करने वाले हैं?
बुजुर्ग व्यक्तिगण , आज आप अपने बच्चों के बच्चों में क्या निवेश करेंगे? यदि आप उन्हें नियमित रूप से धार्मिकता और चरित्र के विषय में मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और चेतावनी देते हैं, तो वे अभी और आपके जाने के बाद भी आपकी शोभा ठहेरेंगे। जीवन के इस चरण में आपको अपना अधिकतर समय उन्हें ज्ञान बांटने में व्यतीत करना चाहिए।
माता-पिता, क्या आप अपने बच्चों की शान हैं? यदि नहीं, तो ऐसा क्यों है? आप सम्मान के हकदार तभी हैं जब आप इसे प्रतिदिन अर्जित करते हैं, जो कि उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए, उनके पूरे जीवनकाल में एक पवित्र उदाहरण बनकर और करुणामय रूप से उनका पालन-पोषण करने के द्वारा किया जाता है। यदि आप बहुत व्यस्त हैं या ऐसे सांसारिक कार्यों से परे हैं, तो आप एक क्रूर मूर्ख हैं। आप परमेश्वर द्वारा आपको दी गई आत्माओं के उपहार को बर्बाद कर रहे हैं जिन्हें इस दुनिया मे आपने जन्म दिया है, और आपको इसके लिए बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
बच्चों और नाती-पोतों, क्या आप अपने दादा-दादी की शोभा हैं? आपको उनका आदर करने और उन्हें पुरस्कृत करने के लिए एक पवित्र जीवन जीना चाहिए। आपको उनके चले जाने से पहले उनके बारे में और अधिक जानना चाहिए, और ज्ञान की उन बातों को सुनना चाहिए जो आपको आगे के की वर्षों तक नहीं मिलेगी। क्या आप अपने माता-पिता पर गर्व करते हैं? यह प्रतिज्ञा के साथ-साथ पहली आज्ञा भी है, और यह कितनी ही अनमोल प्रतिज्ञा है कि परमेश्वर आपको अपने माता-पिता का आदर करने के लिए पुरस्कृत करेंगे (इफिसियों 6:2-3)। जल्द ही आप इसी तरह का व्यवहार अपनी संतान से भी चाहेंगे।
विश्वासयोग्य जीवन, प्रेमपूर्ण देखभाल और बुद्धिमत्तापूर्ण प्रशिक्षण के द्वारा, इस पृथ्वी पर एक धर्मी प्रभाव छोड़ने का एक सचमुच बढ़िया अवसर होता है परिवार। और एक खुशहाल परिवार का आनंद और आराम बुढ़ापे के किसी भी अन्य पहलू से कहीं बढ़कर होता है (नीतिवचन 23:15-16,24; भजन संहिता 127:3-5; 128:1-6; रूत 4:13-22)। बुद्धिमान पति और पत्नियाँ गुणवत्तापूर्ण परिवारों का निर्माण करेंगे और उन्हें बढ़ावा देंगे।
सच्चे विश्वासी अनुग्रह द्वारा परमेश्वर की संतान कहलाते हैं (1 यूहन्ना 3:1), और परमेश्वर ही उनकी महिमा है, और वह इसके योग्य है (रोमियों 11:33-36)। अति प्राचीन ने आपको छुड़ाने के लिए अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजा, और वह आपको अपनी संतान कहता है जिसे स्वयं परमेश्वर ने उसे दिया है (इब्रानियों 2:13)। अपने महान परमेश्वर के साथ आपका यह पारिवारिक संबंध कितना महिमामय है! परमेश्वर की संतान के रूप में अपना जीवन जिएँ।
प्रभु यीशु मसीह आपका भाई है, और आप परमेश्वर के परिवार का हिस्सा हैं (इफिसियों 3:14-15)। आपके माता-पिता, भाई-बहन और बच्चे आपके वंशावली से कहीं अधिक हैं (मरकुस 10:28-30)। अपने घर के सदस्यों के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा करने के बाद, मसीह में भाइयों और बहनों के प्रति अपने चर्च में भी अपने कर्तव्य को पूरा करें (1 थिस्सलुनीकियों 4:9-10; इब्रानियों 13:1-3)।
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