नीतिवचन 17:5
जो निर्धन को ठट्ठों में उड़ाता है, वह उसके कर्ता की निन्दा करता है; और जो किसी की विपत्ति पर हँसता है, वह निर्दोष नहीं ठहरेगा।
एक धनी लड़की एक गरीब लड़की को परेशान करती है। खिलाड़ी लड़के एक विकलांग लड़के का मजाक उड़ाते हैं। एक आदमी हँसता है जब उसके प्रतियोगी को दिल का दौरा पड़ता है। क्या ये उदाहरण आप को आहत करते हैं? आपको आहत होना चाहिए। परमेश्वर आहत होता है! आपको ऐसी असंवेदनशील और दुष्ट क्रूरता पर बहुत गुस्सा आना चाहिए। परमेश्वर क्रोधित होता है!
परमेश्वर न्यायपूर्वक और संप्रभुता के साथ मनुष्यों को एक-दूसरे से भिन्न बनाता है, और उन्हें उन भिन्नताओं के बारे में न तो घमंडी होना चाहिए और न ही क्रूर होना चाहिए। एक व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में परमेश्वर के कार्यों का मज़ाक नहीं बनाना चाहिए। आपको ऐसे अहंकार को कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए। परमेश्वर दण्ड देगा! आपको अपने बच्चों को ऐसे लोगों के बारे में या ऐसे लोगों से कभी भी आलोचनात्मक रूप से न सोचने या न बोलने की शिक्षा देनी चाहिए।
परमेश्वर कुछ मनुष्यों को गरीब बनाता है। उन पर हँसने से परमेश्वर आहत होता है, क्योंकि उसने मनुष्यों में भेद किया, तुम ने नहीं। जीवन में आपके पास जो भी आशीषें हैं, वे उसकी दयालु कृपा के कारण हैं (1 कुरिन्थियो 4:7)। आप उन्हें अपनी उपलब्धियां मानकर अहंकार नहीं कर सकते ,और आप उन लोगों पर हँस नहीं सकते जिनके पास वे नहीं हैं। परमेश्वर ने आपके और दूसरों के बीच अंतर किया है; दीनता से उसकी आराधना करें।
जब विपत्तियाँ आती हैं, जैसा कि यीशु मसीह के समय में आई थीं, तो तुरंत इस निष्कर्ष पर न पहुँच जाएँ कि जिनका नाश हुआ वे आप से भी अधिक पापी थे। इसके बजाय आपको अपने आप को जाँचना चाहिए और कोई भी ज्ञात पाप के लिए पश्चाताप करना चाहिए, ऐसा न हो कि आप भी उनकी तरह नष्ट हो जाएँ (लूका 13:1-5)। आपकी आकस्मिक मृत्यु या बहिष्कार होने की संभावना होती है, इसलिए जब आप दूसरों के साथ ऐसा होते हुए देखे तो सावधान रहें।
परमेश्वर मनुष्यों का न्याय पवित्र और सिद्ध न्याय से करता है। उसकी गुप्त योजनाएं तुम्हारी समझ से परे है (व्यवस्थाविवरण 29:29)। उनके सभी निर्णयों में असीम रूप से बुद्धिमत्ता वाले उद्देश्य होते हैं। यदि आप अपने व्यक्तिगत शत्रु के मारे जाने पर प्रसन्न होते हैं, तो आप प्रतिनिधिक बदला ले रहे हैं (नीतिवचन 24:17-18)। आप मानते हैं कि परमेश्वर ने यह आपके सम्मान के लिए किया है। यदि आपका हृदय दुष्ट है तो आपको सज़ा दी जाएगी।
एक होते हैं परमेश्वर के कार्य ,और एक होते हैं मूर्खों के कार्य। क्या आपको अंतर पता है? जब एक मनुष्य अंधा पैदा होता है, तो वह परमेश्वर का अपनी महिमा के लिए किया कार्य है (यूहन्ना 9:1-3)। आपको ऐसे व्यक्तियों की गहरी दीनता और कोमल करूणा के साथ परवाह करनी चाहिए। परंतु जब एक मूर्ख राजा अपने पिता सुलैमान के सलाहकारों को ठुकराने के कारण दस गोत्रों को खो देता है, तो आप उसके संकट पर हंस सकते हैं।
मनुष्य की दुष्टता के लिए स्पष्ट दंड के रूप में परमेश्वर के कार्य होते हैं । जब सदोम के लोगों को लूत के द्वार पर अंधा कर दिया गया था, यह अंधापन का एक ऐसा मामला है जिस पर आप को पवित्र हंसी के साथ आनंदित होना चाहिए (उत्पत्ति 19:11)। आप बिलाम की सवारी, दुष्ट हामान, नबूकदनेस्सर का पशु के समान घास चरना, और दानिय्येल के विरोधियों के बारे में भी हंस सकते हैं।
परमेश्वर और सच्चाई के शत्रु होते हैं, और आपके व्यक्तिगत शत्रु भी होते हैं। क्या आपको अंतर पता है? जब आपका व्यक्तिगत शत्रु आपके गाल पर मारता है, तो आपको दूसरा गाल भी उसकी ओर कर देना चाहिए (मत्ती 5:38-48)। परंतु जब परमेश्वर के शत्रु उसकी कलीसिया को नष्ट करना चाह रहे होते हैं, तो जब उनके गीले मृत-शरीर तट पर तरंगते हुए दिखाई देते हैं तब जश्न मनाने और नाचने-गाने का समय होता है (निर्गमन 15:1-21)।
बुद्धिमान मनुष्य को इन अंतरों का पता होता है। परमेश्वर मूर्खों पर हंसता है जब वे विपत्ति में पड़ते हैं (नीतिवचन 1:26; भजन संहिता 2:1-5), और जब आप उसके साथ हँसते हैं तो पवित्र न्याय होता है (भजनसंहिता 52:6-7; प्रकाशितवाक्य 18:20)। परमेश्वर अपने शत्रुओं से घृणा करता है, और आपको भी उनसे घृणा करनी चाहिए (भजनसंहिता 31:6; 139:21-22; 2 इतिहास 19:2)। हर मामले में परमेश्वर की भूमिका को पहचानना और उसके अनुसार उस स्थिति से निपटना ही कुंजी है।
मूर्ख मनुष्य का उपहास करना बुद्धिमानी और भलाई है(1 राजाओ 18:2-7; सभोपदेशक 10:13-15); आलसी मनुष्यों का उपहास करना बुद्धिमानी और भलाई है (नीतिवचन 6:6-11; 19:24); और घृणित स्त्रियों का उपहास करना बुद्धिमानी और भलाई है (नीतिवचन 11:22; 27:15-16; 30:21-23)। पलिश्तियों की गिलटियों और येहू के मलिन स्थल आपकी हंसी के कारण होने चाहिए!
यदि आप आशीषित हैं, तो परमेश्वर को उसकी दया के लिए धन्यवाद दें ।जो आशीषित नहीं है उनका तिरस्कार न करें। यह अंतर परमेश्वर के अनुग्रह से है। यदि आप उनका उपहास करते या मज़ाक बनाते हैं जिन्हें परमेश्वर ने अपने असीम बुद्धिमत्ता में आशीष से वंचित किया है, तो आप परमेश्वर की ही निंदा करते हैं, और वह इसे लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करेगा। जब आप गरीबों का मज़ाक उड़ाते हैं तो आप स्वयं परमेश्वर की आलोचना करते हैं।
यदि आपका व्यक्तिगत शत्रु पीड़ित होता है, तो उसके लिए प्रार्थना करें और उसकी सहायता करें (भजन संहिता 35:11-14; लूका 10:33-35; रोमियों 12:17-21)। यह मसीहत का एक महत्वपूर्ण मानक है। यदि आप गर्व से गरीबों का तिरस्कार करते हैं या अपने शत्रुओं के पतन पर आनंदित होते हैं, तो परमेश्वर स्वयं आपकी अहंकारी और अपवित्र दुष्टता से बदला लेगा। सावधान! इसके बजाय उनके लिए प्रार्थना करें, और चरित्र में इस समानता के साथ अपने को परमेश्वर की संतान के रूप में प्रकट करें, क्योंकि वह हर दिन दयालु है (मत्ती 5:43-48)।
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