नीतिवचन 17:4
कुकर्मी अनर्थ बात को ध्यान देकर सुनता है, और झूठा मनुष्य दुष्टता की बात की ओर कान लगाता है।
लोगों की झूठी और पापपूर्ण बातें सुनने से आप भी उन्हीं के समान गलत हो जाते हैं जो उन्हें बोलते हैं। क्या ये सच हो सकता है? इस नीतिवचन पर बारीकी से विचार करें, क्योंकि इन शब्दों के शक्तिशाली पाठ को याद करना आसान है। एक ही प्रजाति के पक्षी झुंड में एकसाथ रहते हैं, और खुद को अनर्थ की बातों से छुड़ाने का एकमात्र तरीका है मूर्खों से संगति न करना!
राजा सुलैमान ने झूठ बोलनेवाले होठों, कुटिल बातें करनेवाली जीभ और बकवादी मुँह की बार बार निंदा की है (नीतिवचन 6:17; 10:18,31-32; 12:13,22; 18:6-7,22; 21:6; 24:2, 28; 26:24,28)। और उतनी ही बार उसने भक्तिपूर्ण और अनुग्रहसहित कही जानेवाली बातों की प्रशंसा की (नीतिवचन 13:2; 15:23; 16:13; 18:20-21; 22:11; 24:26; 25:11)।
इन सभी नीतिवचनों का मूल्यवान सबक बिलकुल सरल और समझने में आसान है: ऐसा मनुष्य जो अपनी वाणी पर नियंत्रण नहीं रख सकता ताकि जब समय आए तो केवल वही बोले जो सही और बुद्धिमानीपूर्ण है, वह एक दुष्ट और मूर्ख मनुष्य है (लूका 6:45)। किसी भी व्यक्ति के चरित्र और मन की अचूक परख तब होती है जब आप उसकी बातें सुनते हैं, क्योंकि वह अपनी बातों से अपनी ही पोल खोल देता है।
लेकिन ध्यान दें, यह नीतिवचन झूठ बोलनेवाले होठों या अनर्थ की बाते करनेवाली जीभ की निंदा नहीं कर रहा है। बल्कि यह ऐसी बातों को सुननेवाले व्यक्ति की निंदा करता है और यहां आप बहुत बुद्धि सीख सकते हैं। वास्तव में पवित्र और बुद्धिमान होने के लिए, ज़रूरी है कि आप मूर्खतापूर्ण बातें करने वालों और उनके शब्दों से बचें, उन्हें अस्वीकार करें, फटकार लगायें और ठुकराना दें।
इस बात पर सहमत होना आसान है कि कुछ बातें अनर्थ की होती है। परन्तु यदि आप उन्हें सुनते हैं, तो आप भी उन्हें बोलनेवालों के समान ही दुष्ट हैं। सुनने का एकमात्र कारण आपका घिनौना मन है जो इसका आनंद लेता है या भक्ति, सत्य और ज्ञान के लिए खड़े होने के नतीजों से डरता है। बुद्धिमान लोग मूर्खतापूर्ण बातचीत और अनर्थ की बातों को ठुकरा देते हैं, और वे उतनी ही तेज़ी उन लोगों को भी ठुकरा देते हैं जो ऐसी बातें बोलते हैं। कभी-कभी ये कुकर्मी आपके मित्र होंगे, जिसका अर्थ है कि आपको नए मित्र ढूंढने की आवश्यकता है।
सुलैमान ने सिखाया कि भक्ति और बुद्धि में जीभ और कान दोनों की रक्षा करना शामिल है। यह नीतिवचन कुकर्मी वक्ताओं और उनके वचनों के आसपास रहने की गलती और मूर्खता की निंदा करता है, और उसने यही सत्य कुछ और नीतिवचनों में भी सिखाया (नीतिवचन 14:7; 13:20; 19:27; 20:19; 25:23)। दाऊद और पौलुस ने एक ही ज्ञान सिखाया (भजन 101:3-8; इफि 5:3-11; रोमियों 1:32; तीतुस 1:10-11)।
ज्ञान का यह नियम पूरी सरकार को भी कुकर्मी घोषित करता है, जब शासक झूठ सुनता है, क्योंकि उसके पास उन्हें ख़ारिज करने का अधिकार होता है (नीतिवचन 29:12)। यह उन माता-पिता के बारे में क्या कहता है जो अपने घर में चुगलखोर या झगड़ालू बच्चे की बातों को सुनते हैं? एक विदूषक के मूर्खतापूर्ण चुटकुले? किसी भी मुक़द्दमें में सिर्फ़ एक ही की गवाही का क्या? सत्ता का अनादर करनेवाले का क्या? या बढ़ा-चढ़ाकर बातें बतानेवाले का क्या?
संगीत, टेलीविजन, इंटरनेट और अन्य झूठी और अनर्थ साहित्य के बारे में क्या? जो माता-पिता अपने बच्चों को मनोरंजन की अनुमति देते हैं, जिसे वे अपने बच्चों को सार्वजनिक रूप से कहने की अनुमति नहीं देते, वे पाखंडी और भयानक माता-पिता हैं। परमेश्वर ऐसे मनुष्य के दुष्ट स्वभाव की निंदा करता है क्योंकि वह ऐसी चीजें करता है जिन्हें वह जानता है कि गलत हैं और न सिर्फ़ वह खुद करता है बल्कि दूसरों को ऐसा करते देखने का आनंद लेता है (रोमियों 1:32)।
जब आप किसी कानाफूसी करनेवाले की उपस्थिति में हों, तो आपको अपने चेहरे पर क्रोध का भाव लाकर उसे कानाफूसी करने से रोकना चाहिए (नीतिवचन 25:23)। दाऊद ने, जो पवित्र जीवन की बड़ी लालसा करता था, अपने घराने से सभी निंदकों और झूठ बोलने वालों को निकाल देने का प्रण लिया था (भजन 101:5-7)। आपका भी यही नेक-नियत लक्ष्य होना चाहिए। यदि आप माता-पिता से लेकर पास्टर तक किसी भी अधिकार के पद पर हैं, तो आपको इस नियम को अपने बच्चों और चर्च के लोगों पर पूरा पूरा लागू करना होगा।
यदि कानाफूसी करने वाले को चुप रहने और चले जाने के लिए कहा जाए तो वह कुछ नहीं कर सकता। यदि पीठ पीछे दूसरों की बुराई करनेवाले को पाप न करने के लिए कहा जाए तो उसके दांत साफ हो जाएंगे। विदूषक मजाक करना बंद कर देगा, अगर सुनने वाले उसे ऐसे घूरें जैसे वह पागल हो। यदि निंदा करने वाली औरत को उसके कुटिल अनुमानों और झूठे आरोपों को खारिज कर दिया जाए तो वह अकेली रह जाएगी। कानाफूसी करनेवाले को अगर ठुकरा दिया जाए तो वह केवल अपने आप से ही बातें कर सकता है।
लोग अपनी अनर्थ की बातें केवल इसलिए बोलते रहते हैं क्योंकि उन्हें सुननेवाले लोग होते हैं। परन्तु हाय उस मनुष्य पर जो अनर्थ की बातें सुनता है, क्योंकि वह बोलनेवाले के समान ही दुष्ट हृदय को प्रगट करता है। ख्रिश्चन कहलाने वाला प्रत्येक व्यक्ति यह प्रण ले कि वह दोबारा कभी भी अनर्थ की बातें नहीं सुनेगा!
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