नीतिवचन 17:28
मूढ़ भी जब चुप रहता है, तब बुद्धिमान गिना जाता है; और जो अपना मुँह बन्द रखता वह समझवाला गिना जाता है।
आज ही अपनी छवि और प्रतिष्ठा में सुधार करें। इसे कोई भी कर सकता है, मूर्ख भी। अपने शब्दों को कम कर दें – सब आपको बुद्धिमान और ज्ञानी व्यक्ति मानेंगे। क्या ही अद्भुत नीतिवचन है! दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं, इसे तुरन्त सुधारने के लिए यहां गहन सम्मति और एक बुद्धिमानीपूर्ण युक्ति है।
उतावली में बातें करना, बिना सोचे-समझे बोल देना, या बोलते ही जाना एक मूर्ख को चिह्नित करता है। अपना मुंह बंद करने और अपने शब्दों को कम करने से दूसरे लोग यह मानेंगे कि आप एक बुद्धिमान और समझदार व्यक्ति हैं, असल में भले ही आप मूर्ख हों। परमेश्वर और राजा सुलैमान, जो कि दोनों ही सच्चे बुद्धिमान हैं, इसकी गारंटी देते हैं।
वाणी चरित्र को प्रकट करती है (नीतिवचन 15:2; 29:11; सभोपदेशक 5:3; 10:12-14)। सचेत, सुविचारित, लाभदायक और उचित वाणी एक बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान होती है। मुँह से निकलनेवाले उतावले, आवेगी, व्यर्थ और टेढ़े-मेढ़े शब्द मूर्ख और दुष्ट व्यक्ति को चिन्हित करते हैं। एक मूर्ख शायद ही कभी कुछ भी लाभदायक या उपयुक्त कह पाता है (सभोपदेशक 10:3), लेकिन अगर वह अपने शब्दों को कम करता है तो दूसरों को लगेगा कि वह बोलने में धीमा और संयमी है।
ठीक ठीक निरिक्षण करना और ठीक ठीक सुनना, पर फिर भी कम बोलना बुद्धिमानी है। आप बोलने से नहीं, बल्कि सुनकर सीखते हैं। जब तक आवश्यक या दूसरों के लाभ के लिए न हो तब तक बात नहीं करनी चाहिए। अन्य लोग यह मानेंगे कि आपकी चुप्पी बोलने से पहले विषय पर सावधानीपूर्वक अवलोकन और गहन विचार और सही विचारों और शब्दों की गहन खोज का संकेत देती है। क्या बुद्धिमान मनुष्य के रूप में प्रतिष्ठा हासिल करना कभी इतना आसान रहा है, जैसा कि यह नीतिवचन अवसर दे रहा है? कभी नहीँ!
जीभ खतरनाक है और आसानी से दूसरों को चोट पहुँचाती है (नीतिवचन 10:19; 18:21; याकूब 3:2-12), इसलिए बुद्धिमान पुरुष पाप से बचने के लिए अपने मुँह के शब्दों को सीमित करते हैं (नीतिवचन 17:27; अय्यूब 13:5), और वे बोलने से पहले मसले की छानबीन करते हैं (नीतिवचन 15:28)। बोलने में फुर्ती करने की अपेक्षा सुनने में फुर्ती करना उत्तम है (याकूब 1:19-20)। परमेश्वर ने आपको दो कान दिए लेकिन मुंह एक ही दिया। इसलिए अपने शब्दों को कम करों तो आपके शरीर की रचना से तालमेल बैठेगा।
आह, लेकिन कुछ लोगों में बोलने की आग लगी रहती है (भजन 39:1-3)। वे इस आग को बुझा नहीं सकते; वे गर्मी को कम नहीं कर सकते; उन्हें अपने आवेग पर कोई नियंत्रण नहीं रहता; उन्हें बोलने ही होता है, और अभी! एक अनियंत्रित मुँह होना और आसपास मौजूद हर किसी को बताना क्या ही अभिशाप है कि तुम मूर्ख हो। अपना मुंह बंद रखों, और भले ही तुम सच में अकेले हो, और आसपास कोई और न हो, फिर भी आप जानते हैं कि वह कब खुलता है।
यह नीतिवचन सभी लोगों पर लागू नहीं होता, क्योंकि कुछ लोग हैं जो ज्यादा नहीं बोलते। बुद्धिमान लोग संयम संतुलन बनाए रखना सीखते हैं, वे इतने भी मूर्ख नहीं होते, और वे दूसरों के लिए जीवन का वृक्ष बनते हैं (नीतिवचन 10:21; 12:18; 15:4,23)। यह बाइबल के परम-सत्य कथनों का सावधानीपूर्वक व्यावहारिक उपयोग ही है जिसका परिणाम सत्य और बुद्धि है। यदि आप इस नियम को शांत रहनेवाले पुरुषों पर थोपते हैं जो शायद ही कभी बोलते हैं, तो वे कभी कुछ नहीं कहेंगे।
यदि यह नियम पुरुषों के विषय में सच है, तब तो यह महिलाओं के विषय में और भी अधिक सच है, जिनकी विशेष सजावट नम्रता और मन की दीनता है (1 पतरस 3:3-4)। एक बातूनी स्त्री को यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोग एक घिनौनी और कलहपूर्ण स्त्री के रूप में उसका तिरस्कार न करें, अपने शब्दों को आधे से भी कर देना अवश्य है (नीतिवचन 9:13; 11:16; 27:15; 30:23)। कम बोलने के इन दो ईश्वर-प्रेरित कारणों से, महान महिलाएं अपने शब्दों को एक चौथाई तक कम कर लेंगी।
राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन, जो राजा सुलैमान द्वारा नीतिवचन लिखने के लगभग 3000 साल बाद इस दुनिया में आयें थें, वे भी बुद्धि और सार्वजनिक मर्यादा के इस ईश्वर-प्रेरित नियम से सहमत थें जब उन्होंने एक अलग दृष्टिकोण से अपने प्रसिद्ध वचन कहें “बोल बोलकर सारे हलों का निवारण करके एक मुर्ख समझे जाने से चुप रहकर एक मुर्ख समझा जाना बेहतर है।” पाठक, चुप रहना सुरक्षित और अधिक लाभदायक है, अगर यकीन न हो तो आजमाकर देखें।
यदि आपके पास कहने के लिए कुछ आवश्यक, लाभदायक या भली बात नहीं है, तो बोलना ही क्यों? दूसरों को खुश या संतुष्ट होने के लिए आपके शोर की ज़रूरत नहीं है। चुप्पी सुनहरी है। खालीपन को भरने के लिए बकबक करना अपनी और दूसरों की शांति को भंग करना और मूर्खतापूर्ण बातें करना है, जिसके लिए आपका न्याय किया जाएगा (इफिसियों 5:3-5)। तब तो आप काँटों की वह चरचराहट हैं जिसे सुलैमान ने तुच्छ जाना (सभोपदेशक 7:4-6)।
क्या ही अद्भुत नीतिवचन है! परमेश्वर और सुलैमान की क्या ही अद्भुत व्यावहारिक सलाह! अधिकांश लोग बाइबल के अतुल्य मूल्य को नहीं समझते, क्योंकि उन्होंने इसे पढ़ा ही नहीं है, या उनके कोई शिक्षक नहीं हैं जो जिन्होंने इसे पढ़ा हो। एक ऐसी पुस्तक को प्रेरित करने के लिए परमेश्वर का धन्यवाद, जिसमे सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर प्रतिष्ठा को दाव पर लगानेवाली वाणी के नतीजों से लेकर अंतिम न्याय तक और इनके बीच होनेवाली सब बातों का वर्णन किया गया है।
प्रभु यीशु मसीह ने चेतावनी दी कि न्याय के दिन हमें उस हर एक व्यर्थ शब्द का हिसाब देना होगा जो हम अपने मुंह से निकालते हैं (मत्ती 12:36)। इसलिए उसके न्यायासन के सामने अपने अच्छे भविष्य के लिए बुद्धि का उपयोग करते हुयें कम बोले और अपनी शांत रहकर और अपने होठों को बंद रखकर अपनी वर्तमान प्रतिष्ठा की रक्षा करें। यहाँ कम से कम दोहरा आशीर्वाद है। अपने शब्दों को कम करके परमेश्वर और भले मनुष्यों को प्रसन्न करें।
भले ही लोग आपकी कम बातों के कारण आपको बुद्धिमान समझें, आप परमेश्वर के जीवित वचन को बिल्कुल भी धोखा नहीं दे सकते। उसकी आँखों के सामने सब कुछ नग्न और खुला है; वह आपके मन की भावनाओं और विचारों को परखता है (इब्रानियों 4:12-14)। इसलिए बेहतर है कि अपनी मूर्खता को पूरी तरह से त्याग दें और अपने पूरे मन से सच्ची बुद्धि की खोज करें। आप परमेश्वर को गुमराह नहीं कर सकते।
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