नीतिवचन 17:24

बुद्धि समझनेवाले के सामने ही रहती है, परन्तु मूर्ख की आँखें पृथ्वी के दूर दूर देशों में लगी रहती हैं।

आपने मूर्खों को देखा और जाना है। वे यहाँ से वहाँ बस उछलते-कूदते फिरते हैं। वे आज इस बात को लेकर जोश में हैं, और कल किसी और बात को लेकर जोश में रहेंगे। वे हमेशा ख़ुशी और सफलता की तलाश में रहते हैं, जो कि उन्हें कभी नहीं मिलती। उन्हें नई नई चीजें करना अच्छा लगता हैं। वे महत्वपूर्ण मामलों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। वे बच्चों की तरह अपने कर्तव्यों से आसानी से विचलित हो जाते हैं। वे सवालों के जवाब ढूंढनें बड़ी अजीब-अजीब जगहों पर जाते हैं। वे सपने देखते हैं। वे बहुत बातें करते हैं। वे संतुष्ट नहीं हैं। वे चंचल, अस्थिर मनवाले और आसानी से भ्रम में फँसनेवाले होते हैं।

लेकिन एक बुद्धिमान व्यक्ति बहुत अलग होता है। उसमें समझ होती है जो उसके आचरण में उसकी मार्गदर्शक और व्यवस्था के रूप में काम करती है। वह परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करने के दृढ़ उद्देश्य के साथ जीवन के सभी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करता है। उसे जो कुछ सिखाया गया था उसे वह कभी नहीं भूलता, न ही वह पवित्रशास्त्र की धर्म-शिक्षा से अनभिज्ञ है। वह ज्ञान और बुद्धि पाने के लिए बाइबल में खोज करता है, और वह सभी बातों को सिर्फ़ बाइबल से प्रमाणित करता है (प्रेरितों 17:11; 1 थिस्स 5:21)। वह जीवन से संतुष्ट है और कोई भी दुविधा आने पर आत्मविश्वास से भरा रहता है।

मूर्ख अक्सर ठट्ठा करने वाले होते हैं – सुधार और निर्देश से ख़फा हो जाते हैं – इसलिए वे बहुत कम सीखते हैं (नीतिवचन 14:6)। मूर्ख को मूर्खता में इतना रोमांच नज़र आता है कि वह बुद्धि और समझ से दूर भागता है (नीतिवचन 15:14)। एक मूर्ख इतना आलसी होता है कि वह कभी भी ज्ञान प्राप्त करने के लिए आवश्यक परिश्रम नहीं करता, क्योंकि वह अपने विचारों में आनंद लेना और उन्हें दूसरों पर अभिव्यक्त करना ज्यादा पसंद करता है (नीतिवचन 18:1-2)। मूर्ख अक्सर अहंकारी होते हैं, जिससे उनके लिए ज्ञान और बुद्धि को पहचानना और उन्हें सीखना असंभव हो जाता है (नीतिवचन 26:12)।

बुद्धिमान लोग दिन में सपने नहीं देखते, या चीजों को लेकर अटकलें नहीं लगाते। उन्हें अपना मन बहलाने की अपेक्षा विषयाश्रित होकर चिंतन करना अच्छा लगता है (भजन 143:5)। वे कल्पना से अधिक चिंतन करने, मनोरंजन या दिल्लगी से अधिक शिक्षा और आत्म-प्रबोधन से अधिक आत्म-निरीक्षण को प्राथमिकता देते हैं। वे सत्य को पाना चाहते हैं बस, और वे सत्य की परिभाषा बाइबल में निहित परमेश्वर के वचनों से ही करते हैं (नीतिवचन 22:17-21)। लोग क्या सोचते हैं इसकी उन्हें कोई परवाह नहीं है (भजन 119:98-100)। उन्हें बुद्धि को यहाँ-वहाँ ढूंढने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि वे उसे जानते हैं (नीतिवचन 14:6)। उन्होंने उसे अपने हृदय में छिपा रखा है (भजन 119:11,128), और वे दिन-रात उस पर ध्यान करते हैं (भजन 1:3)।

आप जब इस धरती पर आये, उस वक़्त आपको कोई ज्ञान नहीं था। आप यहाँ बस थोड़े ही समय के लिए हैं, और आपका पूरा कर्तव्य यही है कि आप परमेश्वर का भय मानें और उसकी सब आज्ञाओं का पालन करें (सभो 12:13-14)। आपका शरीर, जो आपके अस्तित्व का सबसे पापपूर्ण भ्रष्ट हिस्सा है, आँखों की अभिलाषा से देखता है (1 यूहन्ना 2:15-17)। शैतान और यह संसार भी आपके सामने बहुत सी चीज़ें प्रस्तुत करते हैं (लूका 4:5-7)। मूर्ख अपनी वासनाओं के आगे झुक जाता है और अवास्तविक चीजों के पीछे भागकर अपना जीवन बर्बाद कर देता है। परन्तु दाऊद प्रार्थना की कि परमेश्वर उसकी आँखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे (भजन 119:37)!

किसी बेहतर चीज़ की लालसा में अपना जीवन बर्बाद करना मूर्खता है, जबकि वास्तव में आप किसी विनाशकारी वस्तु की ओर दौड़ रहे हैं – मृत्यु! संतोष सहित भक्ति तो बड़ा लाभ है (1 तीमु 6:6)। आप इस सरल नियम के बिना सफल जीवन नहीं पा सकते। भक्ति का जीवन वह है जिसे आप समझदारी से बुद्धि को ही अपना महान लक्ष्य बनाकर जीते है (नीतिवचन 4:5-9; 8:17)। संतोष इस बात का मूल्य समझना है कि परमेश्वर आपका मित्र है और आपके पास जो कुछ भी है उसके लिए उस पर भरोसा करना सर्वोत्तम है (इब्रानियों 13:5-6)। लेकिन मूर्खों को सिर्फ़ सपने देखना अच्छा लगता है!

मूर्ख चाहे निकट हो या दूर, हमेशा हरे-भरे चरागाहों की तलाश में रहता है। उसका दिमाग एक खुली छन्नी है, जो व्यर्थ विचारों का बहुत सारा झाग जमा करता है और मूल्यवान ऐसी कोई बात पकड़कर नहीं रखता। सुलैमान ने भटकती इच्छा की व्यर्थता और झुंझलाहट के बारे में चेतावनी दी (सभोपदेशक 6:9)। लेकिन मूर्ख अपने परिवार के कल्याण के लिए परमेश्वर के वचन का व्यवहारिक उपयोग करने के बजाय धर्म और जात-पात की गन्दी राजनीति, बच्चों को शिक्षा देनेवाली बेन स्पॉक की मतिभ्रम प्रणाली, योग का अभ्यास, या टेलीविजन पर अमीर और प्रसिद्ध लोगों की जीवन शैली का अध्ययन करना ज्यादा पसंद करेगा।

मूर्ख का मंत्र है, “मैं खुले दिमाग से जीवन जीता हूं।” उसका दिमाग इतना खुला है कि कोई भी बात उसमें तुरंत घुस जाती है और कोई भी मूल्यवान चीज़ वहाँ टिकती नहीं। यह दुनिया उसके दिमाग को शैतान की इच्छा के आगे झुकाने के लिए विज्ञापन, सनक, जनमत, साथियों के दबाव, सवालों और हेरफेर के अन्य रूपों की एक सतत धारा भेजती है, जो अपने मूर्खतापूर्ण मंत्र पर दुष्ट प्रसन्नता के साथ मुस्कुराता है जो झूठ के पिता को उसकी आत्मा में प्रवेश देता है। अपने मन को परमेश्वर के वचन से मुहर बंद करें (भजन 119:128)!

जीवन के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं, और जीवन की मूर्खतापूर्ण बर्बादियाँ हैं। ज्ञान अज्ञानता से, बुद्धि मूर्खता से, धार्मिकता दुष्टता से, स्वर्ग नरक से और परमेश्वर मनुष्य से उत्तम है। जबकि मार्था ध्यान भटकाने वाली बातों को लेकर चिंतित थी, किन्तु मरियम को पता था कि उसके जीवन के लिए आवश्यक एक बात थी प्रभु यीशु मसीह की शिक्षाओं को सुनना (लूका 10:38-42)। पाठक, उद्धारकर्ता आपको किस श्रेणी में रखेगा? मार्था के साथ? या मरियम के साथ?

आपको खुद से और आपकी भटकती इच्छा से बचाने के लिए, स्वर्ग के परमेश्वर ने कुछ लोगों को आपका पास्टर और शिक्षक बनने के लिए बुलाया, तैयार किया और भेजा है (भजन 68:18; सभो 12:8-14; यिर्मयाह 3:15; मलाकी 2: 7; इफि 4:8-12; 2 तीमु 3:16-17)। उनका काम क्या है? सामाजिक कार्य नहीं! प्रशासन नहीं! शादियाँ और अंत्येष्टि नहीं! मठ नहीं! दमघोंटू धार्मिक कार्य नहीं! उनका काम आपकी आंखों को आपके दिमाग में और आपके दिल को सच्चाई में केन्द्रित रखना है: वे आपको मूर्ख के समान भ्रम की युक्तियों के और उपदेश के हर एक झोंके से उछाले और इधर–उधर घुमाए जाने से बचाएंगे (इफि 4:13-14; कुलु 1:28-29)।

क्या आपने इनमें से किसी व्यक्ति को खोजा है? क्या आप जीवन की सच्ची प्राथमिकताओं के बारे में उनकी शिक्षा के प्रति समर्पण कर सकते हैं? यदि आप कर सको, तो आप समझ से भरपूर हो जाओगे, और बुद्धि ठीक आपके सामने है। वह आपके मूर्खतापूर्ण और गँवार प्रश्नों को ठुकरा देगा, क्योंकि वह चाहता है कि आप उस विश्वास में स्थापित हो जाएँ जो पवित्र जनों को एक ही बार सौंप दिया गया था। वह आपकी हर कल्पना और विचार को परमेश्वर के प्रेरित और अचूक वचनों के अनुरूप बनाने के लिए परमेश्वर के आत्मा के साथ मिलकर काम करेगा (2 कुरिन्थ 10:4-6)।

लेकिन क्या आप सप्ताह में कम से कम एक या दो घंटे उसकी शिक्षा पर ध्यान दें सकते हैं? अधिकांश लोग नहीं दे सकते। यीशु मसीह ने उनके बारे में कहा कि वे मार्ग के किनारे के हैं। उपदेश को उनके अनिच्छुक मन और हृदय में कोई स्थान नहीं मिलता है, और शैतान तुरंत आकर उनके मन में से वचन उठा ले जाता है। वे जब भी किसी नए चर्च में जाते हैं, वे पहले से भी अधिक अज्ञानी बनकर उसे छोड़ चले जाते हैं। अक्षरशः! इस बारे में पढ़ें (लूका 8:12,18)!

क्योंकि मूर्खों को सुधार, शिक्षा, डाँट और चेतावनी सुनना अच्छा नहीं लगता, इसलिए वे चापलूस शिक्षकों की तलाश में रहते हैं। वे चाहते हैं कि शिक्षक दंतकथाओं से उनका मनोरंजन करें और उन्हें मानव-कल्पना और शिक्षा की गन्दी नाली का पता लगाने में मदद करें (यशायाह 30:8-11; 1 तीमु 6:3-5,20-21; 2 तीमु 4:3-4)। ओह, उन्हें ऐसे कबाड़ से कितना प्यार है! मुझे और सिखाओ, वे रोते हैं! लेकिन परमेश्वर ने वादा किया है कि वह उनमें एक भटका देनेवाली सामर्थ्य को भेजेगा कि वे झूठ की प्रतीति करें (2 थिस्स 2:9-12; 2 तीमु 3:6-7)।

पाठक, आपके पास मौका है। यह एक गंभीर मौका है। आपको बाइबल से बुद्धि प्राप्त करने का मौका मिल रहा है। आपको बुद्धिमान बनाने के लिए परमेश्वर फिर से अपने वचन के साथ आपके पास आया है। यदि आप में समझनेवाला मन है तो यह आपके सामने है। परन्तु यदि आपकी आँखें पृथ्वी के दूर दूर देशों में लगी रहती हैं, तो यह घृणास्पद है। उस हर एक बात को जो आपको विचलित करती है, अपने से दूर करें और बुद्धि की खोज करें (नीतिवचन 4:7; 18:1)।

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