नीतिवचन 17:23
दुष्ट मनुष्य न्याय को फेरने के लिए गोद से उपहार को लेता है। (केजेवी)
शासकों, न्यायाधीशों और गवाहों का चरित्र महान होना चाहिए। अपराधी न्याय को अपने लिए विकृत करने के लिए तरफदारी खरीदने उपहार या रुपए की पेशकश करते हैं। धर्मी जनों पर ऐसे प्रस्तावों का कभी कोई असर नहीं पड़ता। परन्तु दुष्ट लोग दूसरों से गुप्त भेंट लेंगे, और वे न्याय और सच्चाई को उखाड़ फेंकेंगे ताकि वे अधर्म की घृणित कमाई अर्जित कर सकें।
यहां उपहार रिश्वत हैं, किसी व्यक्ति को भ्रष्ट करने के लिए किया गया भुगतान ताकि कानून में बदलाव करने या न्याय को बिगाड़ने के द्वारा रुपए देनेवाले के हित में कार्य करने उसे राज़ी किया जा सके। रिश्वत का लेनदेन बहुत ही गुप्त रीति से होता है, क्योंकि ऐसे व्यवहार का पता चलने पर देने वाले और लेने वाले दोनों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। इसलिए रिश्वत को वस्त्र के अन्दर छिपाकर, या टेबल के निचे से देकर, बहुत ही निजी तौर पर उसका लेनदेन किया जाता है (नीति 21:14)।
उपहार लेने वाला दुष्ट व्यक्ति रिश्वतखोर होता है। वह भुगतानकर्ता से गुप्त रीति से उपहार लेता है। वह एक ऐसा शासक, न्यायाधीश या गवाह है जो इनाम के बदले न्याय व्यवस्था को विकृत करने के लिए तैयार है। रिश्वतखोरी में, बड़ा अपराध रिश्वत लेनेवाला करता है, क्योंकि जो अधिकार के स्थान पर बैठा होता है, उससे सत्यनिष्ठा के ऊंचे मानक का पालन करने की उम्मीद की जाती है, जितनी कि उसके अधीन कार्य करनेवाले से भी नहीं की जाती।
रिश्वत देने के पीछे का सबसे मज़बूत कारण जुर्माना, कारावास या यहां तक कि मृत्युदण्ड का डर होता है ताकि लोग इन से अपने को बचा सकें। सजा से बचने के लिए थोड़ा सा पैसा खर्च करना एक आसान उपाय प्रतीत होता है। परन्तु यहां और समस्त बाइबल में जिस घोर दुष्टता की निंदा की गई है, वह उस व्यक्ति का दुष्ट चरित्र है जो इस तरह के भुगतान को ग़लत काम करने के लिए स्वीकार करने की सोचता है।
उपहार लेना आपके जीवन को बेहतर बनाने का एक आसान तरीका है। लोग डर या लालच से प्रेरित होकर आपके प्रभावशाली अधिकार के कारण, आपको चुपके से अच्छी मात्रा में रुपया देते हैं। बस आपको इतना करना है कि उपहार देनेवाले के पक्ष में उसकी इच्छा के अनुसार उसे छुड़ाने का तरीका ढूंढना है या अपनी न्यायिक-प्रक्रिया को बिगाड़ना है।
नियमित रूप से किए जाने पर इस तरह के लेन-देन मनुष्य को बिना किसी प्रयास के धनवान बना देते हैं। आखिरकार, इसे उपहार कहा जाता है, क्योंकि यह परिश्रम से नहीं आया था। और ऐसी आसान कमाई लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर उन्हें प्रभावित करती है (नीति 17:8; 18:16; 19:6)। एक दुष्ट और भ्रष्ट व्यक्ति के लिए, यह पैसा कमाने का बहुत ही आसान तरीका है।
परमेश्वर ने रिश्वत की निंदा की। उसने लिखा, “घूस न लेना, क्योंकि घूस देखने वालों को भी अन्धा कर देती और धर्मियों की बातें पलट देती है” (निर्ग 23:8)। और फिर से कहा, “तुम न्याय न बिगाड़ना; तू न तो पक्षपात करना; और न तो घूस लेना, क्योंकि घूस बुद्धिमान की आँखें अन्धी कर देती है, और धर्मियों की बातें पलट देती है” (व्यवस्थाविवरण 16:19)। मूसा की व्यवस्था ने भी किसी व्यक्ति की हत्या करने या उसे मृत्युदण्ड दिलाने के लिए रुपयों की लेनदेन की निंदा की (व्यवस्थाविवरण 27:25)।
लोभ और लालच के प्रति घृणा शासकों और न्यायाधीशों के मौलिक चरित्र का गुण होना चाहिए। यित्रो ने मूसा से कहा, “फिर तू इन सब लोगों में से ऐसे पुरुषों को छाँट ले, जो गुणी, और परमेश्वर का भय मानने वाले, सच्चे, और अन्याय के लाभ से घृणा करने वाले हों; और उनको हज़ार–हज़ार, सौ–सौ, पचास–पचास, और दस–दस मनुष्यों पर प्रधान नियुक्त कर दे”(निर्ग 18:21)। कितना अच्छा होगा यदि सभी निर्वाचित अधिकारियों और उनके कर्मचारियों को इस मानक का पालन करना पड़े।
यहां तक कि नए नियम के प्राचीनों को भी धन के प्रति कोई झुकाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि वे परीक्षा में पड़ेंगे कि अपनी कमाई को बनाए रखने या बढ़ाने के लिए अपने उपदेश या निर्णय में बदलाव या पुनर्विचार करें (1 तीमुथियुस 3:3, 8; तीतुस 1:7)। अनुभवहीन या सेवकाई में विफल सुसमाचार के सेवक विशेषकर इस परीक्षा में पड़ेंगे कि जिन्होंने उन्हें नियुक्त किया उनको अपने पक्ष में बनाए रखने या अपनी उपजीविका को बचाए रखने के लिए वचन के खरे उपदेश या अधिकार को बिगाड़ दे। आज कई पास्टरों ने चर्च में लोगों की उपस्थिति को बनाए रखने या लोगों की संख्या को बढ़ाने अपने उपदेश को बिगाड़ दिया है और सुनने वालों को सन्तुष्ट किया है जिससे की उनका अधिकार और आय बढ़ती रहे।
शमूएल महान चरित्र और बड़े विश्वासवाला मनुष्य था। उसने इस्राएल के राजा सुलैमान के पिता अर्थात् दाऊद का अभिषेक किया। इस महान व्यक्ति ने जीवन भर देश की सेवा की। परन्तु इस धर्मी इतिहासकार ने शमूएल के पुत्रों के बारे में यह लिखा, “परन्तु उसके पुत्र उसकी राह पर न चले, अर्थात् लालच में आकर घूस लेते और न्याय बिगाड़ते थे” (1 शमूएल 8:1-3)। यहां प्रयुक्त भाषा इस नीतिवचन के लिए एक आदर्श उपसिद्धांत है। इसलिए जब वह मृत्यु के निकट था, तो शमूएल ने पूरे देश से शपथ लेने को कहा कि उसने अपने अधिकार के निर्वहन में कभी कोई रिश्वत नहीं ली थी (1 शमूएल 12:3-5)।
जिस देश में रिश्वत लेनेवाले भ्रष्ट अधिकारी होते हैं, वह एक दुष्ट राष्ट्र होता है। परमेश्वर ने इसके लिए इस्राएल की कई अवसरों पर निंदा की (यशा 1:23; यहेज 22:12)। भविष्यवक्ता मीका ने भ्रष्टाचार के एक ऐसे चरम का वर्णन किया जिसमें व्यापक रूप से रिश्वतखोरी के लिए साजिश चल रही थी (मीका 7:2-4)। परन्तु भविष्यवक्ता ने परमेश्वर के आने वाले न्याय की चेतावनी देकर अपना विवरण समाप्त किया।
आज हमारे देश में सरकारी और गैर सरकारी दोनों ही क्षेत्रों में फूल-फल रही रिश्वतखोरी की बुराई के बीच इस नीतिवचन की चेतावनी अब भी ऊंची और स्पष्ट आवाज़ में गूंजती है। और सरकारी नौकरशाही जितनी बड़ी होती है, और निजी उद्यम में उनकी भागीदारी जितनी अधिक होती है, अपने अपने लाभ के लिए सरकारी पक्षों को खरीदने उतने ही अधिक प्रयास किए जाते हैं।
हमारे देश में सरकारे गिराने और बनाने के लिए जनता के प्रतिनिधियों को कितना पैसा दिया जाता होगा?
एक ठेकेदार अपनी कंपनी के लिए अगला ठेका प्राप्त करने कितनी रिश्वत पेश करेगा? एक डॉक्टर अपने ऊपर लगे हत्या के आरोपों को हटाने के लिए कितनी रिश्वत देने को तैयार होगा? शिक्षण संस्थाएं अपने महा-विद्यालयों के लिए सरकार मान्यता प्राप्त करने या मुख्य-मुख्य स्थानों पर सस्ते में सरकारी जमीनों को पाने के लिए कितनी रिश्वत देंगे? जेल में किसी रिश्तेदार को क्षमा दिलाने के लिए एक परिवार या मित्र सरकार को कितनी रिश्वत देने तैयार होगा? और भी कई उदाहरण दिए जा सकते हैं।
शासकों के सामने रिश्वत के बड़े बड़े प्रलोभन हैं। एक अनैतिक या नीतिहीन समाज में, उपहार के रूप में अक्सर रिश्वत दी जाती है। भ्रष्टाचार हर स्तर पर मौजूद है। बहुत से ऐसे धर्मी जन हैं, जो अधिकार के ऊंचे पदों पर बैठे हैं, और अवश्य है कि आप उनके लिए प्रार्थना करें। वे ऐसी ऐसी परीक्षाओं का सामना करते हैं जिनका शायद आप सामना नहीं कर पाए, और आपको परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह उनकी रक्षा करे, और उन्हें न्याय करने प्रवृत्त करे और शक्ति दे।
बिलाम की कहानी एक लालची भविष्यद्वक्ता की दयनीय कहानी है जिसे इस्राएल को शाप देने के लिए धन दिया गया था। पतरस ने इस भविष्यद्वक्ता को पागल कहा, उसके चुनाव को अधर्म कहा, और उसकी रिश्वत को अधर्म की मजदूरी कहा (2 पतरस 2:15-16)। यहूदा इस्करियोती इसी बिलाम के घिनौने कदमों पर चलकर चांदी के तीस टुकड़ों के लिए हमारे प्रभु यीशु मसीह के साथ विश्वासघात करने राज़ी हुआ, जो कि एक दास को खरीदने की कीमत हुआ करती थी (मत्ती 26:14-16)।
वह दिन आ रहा है जिसमें सर्वज्ञानी परमेश्वर हर गुप्त रिश्वत को प्रगट करेगा, क्योंकि जो काम वे मनुष्यों से छिपाकर करते हैं, वे परमेश्वर से कभी छिपे नहीं थे (सभोपदेशक 12:14; रोम 2:16)। वे अपनी घूस छिपाते हैं, क्योंकि वे पवित्र परमेश्वर के भयावह क्रोध से अधिक मनुष्यों की आलोचना से डरते हैं, परन्तु जो दण्ड आने वाला है वह मनुष्य द्वारा उनके साथ किए गए किसी भी काम से कहीं अधिक बढ़कर होगा।
परमेश्वर उस व्यक्ति को बहुत आशीष देगा जो “घूस नहीं लेता” (यशा 33:15-16)। वह व्यक्ति जो “निर्दोष की हानि करने के लिए घूस नहीं लेता”, कभी न डगमगाएगा। वह परमेश्वर के पवित्र पर्वत पर बसने पाएगा (भजन 15:1-5)। उस बुलाहट को सुनो जो परमेश्वर ने अब्राहम को दी, “मैं सर्वशक्तिमान् ईश्वर हूँ; मेरी उपस्थिति में चल और सिद्ध होता जा” (उत्पत्ति 17:1)।
पौलुस ऐसा ही धर्मीजन था, उसने फेलिक्स को वह धन नहीं दिया जो उसकी रिहाई के लिए आवश्यक था, जिससे ईश्वरीय और रोमी दोनों ही कानूनों का उल्लंघन हो जाता (प्रेरितों के काम 24:25-27)। पौलुस के कई प्रतिष्ठित मित्रों पर अगर विचार किया जाए, तो रिश्वत के लिए आवश्यक रुपयों की बड़ी आसानी से व्यवस्था की जा सकती थी। परन्तु भले ही उसके रिहा हो जाने से उसे फिर नए सिरे से सुसमाचार के प्रचार का मौका मिलता, फिर भी इस प्रेरित ने यह बुरा काम नहीं किया कि भलाई निकले, और वह सब प्रकार की बुराई से बचा रहा (रोमि 3:8; 1 थिस्स 5:22)।
परन्तु सबसे बड़ा धर्मी आदर्श हमारा प्रभु यीशु मसीह है। प्रेम का भजन, जिसे पौलुस परमेश्वर के पुत्र की महिमा को दिखने उद्धृत करता है, यीशु जो महान राजा, के विषय में यह कहता है : “हे परमेश्वर, तेरा सिंहासन सदा सर्वदा बना रहेगा; तेरा राजदण्ड न्याय का है। तू ने धर्म से प्रीति और दुष्टता से बैर रखा है। इस कारण परमेश्वर ने हाँ, तेरे परमेश्वर ने तुझ को तेरे साथियों से अधिक हर्ष के तेल से अभिषिक्त किया है” (भजन 45:6-7; इब्रा 1:8-9)। आमीन!
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