नीतिवचन 17:22
मन का आनन्द अच्छी औषधि है, परन्तु मन के टूटने से हड्डियाँ सूख जाती हैं
आप अपनी सेहत का ख़याल सिर्फ अच्छे आहार, पोषण, व्यायाम, गर्माहट और पर्याप्त नींद से ही नहीं रखते हैं। अपनी सेहत को अपनी विचारधाराएँ और दुनिया को देखने के नज़रिए और उसके प्रति अपने मन की भावना से प्रभावित करते हैं। आनन्द और प्रसन्नचित्त मन आपके स्वास्थ्य को हमेशा चंगा रखेगा, लेकिन टुटा हुआ और नकारात्मक मन आपकी सेहत को बिगाड़ सकता है। आज आपकी विचारधाराएँ और दुनिया को देखने का आपका नज़रिया कैसा है? अपने आप पर एक एहसान करें! यहाँ दी गई बुद्धि पर विचार करें और परमेश्वर में आनंद करने का फैसला लें! आज ही!
इस नीतिवचन में प्रयुक उपमा, “औषधि है”, और अलंकार, “हड्डियाँ सूख जाती हैं,” के उदाहरणों का उपयोग एंटीबायोटिक दवाओं का उपहास करने या ल्यूकेमिया के कारण की व्याख्या को बिगाड़ने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। ये दोनों अलंकार सामान्य स्वास्थ्य और जीवन के प्रति एक प्रसन्नचित्त दृष्टिकोण और रवैया रखने के मूल्य को सिखाने के लिए प्रयुक्त किएँ गएँ हैं। यहाँ एक महान सबक है, लेकिन इस नीतिवचन का तात्पर्य यह नहीं है कि एक प्रसन्नचित्त दृष्टिकोण और रवैया सब प्रकार की बीमारियों के लिए औषधि है।
हाल के चिकित्सा अध्ययन 3000 साल पहले सुलैमान द्वारा सिखाए गए इस तथ्य की पुष्टि करते हैं। जो लोग हँसते हैं और जीवन का प्रसन्ना रहते हैं वे दीर्घायु होते हैं। अब बीमारियों और शारीरिक विकृतियों की एक पूरी श्रेणी है जिसे साइकोसोमैटिक (मनोदैहिक) बीमारियाँ कहा जाता है, जहाँ मन आपके शरीर में शारीरिक व्याधियाँ पैदा कर सकता है। इस नीतिवचन के लिए परमेश्वर को महिमा दें।
मन को प्रसन्ना रखना या मन को टूटा हुआ रखना विकल्प है! वे भाग्य, स्वभाव, आनुवंशिकी या स्वास्थ्य के परिणाम नहीं हैं। और न वे परिस्थितियों का परिणाम हैं, क्योंकि एक प्रसन्नचित्त व्यक्ति भयानक कठिनाइयों में भी आनन्दित रहने का फैसला ले सकता है, और एक उदास व्यक्ति किसी शानदार समारोह को बर्बाद कर सकता है। यदि आपका दिल खुश है, तो आप जीवन भर लगातार दावत का आनंद ले सकते हैं; लेकिन एक नकारात्मक दृष्टिकोण वाला व्यक्ति हर दिन कुछ न कुछ खामियाँ ढूंढता है (नीतिवचन 15:15)। इस पर विचार करें।
मसीही आनन्द एक आज्ञा है (फिलिप्पियों 4:4; 1 थिस्सलुनीकियों 5:16), लेकिन मूर्खों की हंसी भी पाप है (इफिसियों 5:4; सभोपदेशक 7:6)। मूर्खता कोई औषधि नहीं है; मज़ाक कोई मरहम नहीं है। दोनों ही विकृत मानसिकता और विनाशकारी हैं। सुलैमान ने उन्हें पागलपन कहा (सभोपदेशक 2:2; 10:13)। यह नीतिवचन जीवन के प्रति मूर्खतापूर्ण या भोलेपन का दृष्टिकोण नहीं सिखा रहा है। यह प्रसन्नचित्त रहने पर आनेवाली प्राकृतिक आशिषों का वादा करता है, जो एक आत्मिक फल और आज्ञा दोनों है; और यह नकारात्मक, आलोचनात्मक या कृतघ्न मन की भर्त्सना करता है।
पाप प्रसन्नचित्त मन को नष्ट कर देता है, क्योंकि परमेश्वर की सन्तान अपने पिता के साथ संगति के बिना प्रसन्न नहीं रह सकती। दाऊद ने अक्सर पाप के कारण टूटी हुई आत्मा का वर्णन किया (भजन 6:1-6; 38:1-11; 51:8-11)। पाप ने उसे सुखा दिया थे, उसकी हड्डियों को तोड़ दिया था, और उसे अंदर से बाहर तक बुरी तरह से पीड़ित कर दिया था। उसने अपना समय रोने और शोक करने में बिताया, बजाय आनन्द मनाने और जीने के। इसलिए एक प्रसन्न मन और अच्छे स्वास्थ्य के लिए पहला सरल कदम परमेश्वर में आनन्दित होकर एक पवित्र और निष्कलंक जीवन जीना है।
असंतोष आपके स्वास्थ्य को ख़राब कर देगा, क्योंकि आप केवल उसी के बारे में सोच सकते हैं जो आपके पास नहीं है, भले ही आपके पास बहुत कुछ हो। अहाब का जीवन बर्बाद हो गया क्योंकि वह नाबोत की दाख की बारी नहीं पा सका (1 राजा 21:1-4), और अम्नोन अपनी बहन के लिए वासना रखने के कारण बीमार हो गया (2 शमूएल 13:1-4)। कोई आश्चर्य नहीं कि पवित्र आत्मा सिखाता है कि सन्तोष सहित भक्ति सच्ची सफलता है (1 तीमुथियुस 6:6)।
यदि आप अपने जीवन में ईर्ष्या, कड़वाहट, वासना, आक्रोश या क्रोध को मौका देते हैं, तो आप अपने लिए परमेश्वर का दण्ड और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की भीख मांग रहे हैं। ये दुष्ट विचार दिन-रात आपका पीछा करेंगे; वे आपको चैन से सोने भी नहीं देंगे। यदि आप दूसरों को क्षमा नहीं करते हैं, तो परमेश्वर आपको क्षमा नहीं करेगा, और आप ऐसे बुरे, दुष्ट स्वभाव से अपने स्वास्थ्य को सुखा देंगे।
लेकिन यदि आप आनंदित, प्रेममय, सब बातों में आभारी, शांतचित्त, क्षमाशील और प्रशंसा से भरे हुए हैं, तो आपको परमेश्वर का आशीर्वाद और आपके शरीर के लिए एक उपचारात्मक मरहम मिलेगा। यदि आप परमेश्वर को अपने जीवन का आनंद बनाते हैं, तो आपके पास परिस्थितियों की परवाह किए बिना, आनंदित होने का एक निरंतर कारण होगा। आपकी रातें शांतिपूर्ण और सुखद होंगी, क्योंकि आपका मन, आत्मा और दिमाग शांत है।
पाठक, उपदेशक आपको अपने जीवन का आनंद लेने के लिए कहता है (सभोपदेशक 9:7-10)। क्या आप उनकी ईश्वर-प्रेरित सलाह पर ध्यान देंगे, या आप पापी दृष्टिकोण और विचारों को अपनी आत्मा और शरीर को भ्रष्ट करने देंगे? फैसला आपका है, क्योंकि संतोष और आनंद विकल्प हैं। परिस्थितियाँ मुद्दा नहीं हैं, क्योंकि आप कहीं भी खुश रह सकते हैं। लेकिन आपके चुनाव के परिणाम केवल आपके ही होंगे!
प्रभु यीशु इसलिए आये थें कि खेदित मन के लोगों को शान्ति दे (यशायाह 61:1-3)। आपके मन में आनंद, आपके कदमों में उछाल, आपके चेहरे पर चमक और आपकी हड्डियों को स्वस्थ बनाने के लिए उन्हें और क्या करना चाहिए? वह महिमामय उद्धारकर्ता और मित्र हैं, और जो लोग उन्हें जानते हैं वे हमेशा प्रसन्न रहते हैं। मसीह यीशु में परमेश्वर का अनुग्रह एक अकथनीय उपहार और अथाह धन है। आनन्द मनाएँ!
अपना आत्म-परिक्षण करना, एकान्त प्रार्थना में अपने पापों को मान लेना और फिर अकेले या सभा में, परमेश्वर को स्तुति और गायन के बलिदान चढ़ाने से ज़्यादा ताज़ा और स्वस्थकर कुछ भी नहीं है। दाऊद इसमें पारंगत हो गया था (भजन 32:11; 68:3; हब 3:17-19)। जब तक आप ये चीजें नहीं सीख लेते, तब तक आप पूरी ताकत से नाच नहीं पाएँगे। पाठक, अपनी औषधि ले लो!
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