नीतिवचन 17:20

जो मन का टेढ़ा है, उसका कल्याण नहीं होता, और उलट–फेर की बात करनेवाला विपत्ति में पड़ता है।

जिसका मन टेढ़ा या जिसकी बातें उलट–फेर की होती है वह विपत्ति में पड़ता है। इन दोनों दुर्गुणों में से कोई एक ही काफ़ी है। चाहे मन टेढ़ा हो या उलट–फेर की बात करनेवाली जीभ, दोनों आपपर दोगुना अभिशाप ले आएँगे। यदि आप अपने मन में बुराई को आने देंगे, तो आपके जीवन में कोई अच्छाई नहीं पाएगी। यदि आप अपनी जीभ को बुरी बातें कहने उपयोग में लाएंगे, तो इसके कारण आप विपत्ति में फँस जाएंगे। यहां अपने मन और जीभ दोनों को क़ाबू में न रखने पर आनेवाले भयावह नतीजों की गंभीर चेतावनी दी गई है। सावधान रहें!

टेढ़ा मन बुरा, सत्य के विपरीत, बदलने में कठिन, खुश करने कठिन, विकृत, घमंडी, विद्रोही, मूर्ख और दुष्ट होता है। और अगर इसके ठीक विपरीत देखा जाएं, तो एक अच्छा मन सहमत होनेवाला, खुश करने में आसान, सहयोगी, दयालु, नम्र, ज़मीन पर रहनेवाला, उचित, आज्ञाकारी, बुद्धिमान और धर्मपरायण होता है। टेढ़े मन का व्यक्ति दुष्ट, विद्रोही, उपद्रवी और कुटिल होता है। ऐसा मनुष्य मूर्ख है।

टेढ़ा मन वाला व्यक्ति विद्रोही होता है – वह अपने पिता, पास्टर, नियोक्ताओं या सरकार की आज्ञा मानने से घृणा करता है। वह अहंकारी होता है और हर बार अपने पापों के लिए कोई न कोई बहाने देगा। वह बिना किसी पछतावे के अपने आसपास के लोगों को चोट पहुँचाता है। वह शायद ही कभी खुश या संतुष्ट होता है, भले ही उसे खुश करने के लिए कितने भी प्रयास किए जाएं। वह गरीबों को तुच्छ जानता है और अमीरों से ईर्ष्या करता है। वह विकृत मानसिकता का है।

टेढ़े मन वाले का भला नहीं होता। वह सफल नहीं होता। वह अपने जीवन में परमेश्वर या मनुष्यों के अनुग्रह को कभी नहीं जान पाएगा। चाहे वह कितना भी अच्छाई की खोज में क्यों न हो, वह मुसीबत में फंसने के लिए ही अभिशप्त है, क्योंकि उसका मन परमेश्वर और मनुष्यों के प्रति कपटी है (नीतिवचन 11:20)। भले ही वह यह कहे कि, “तुम मेरे मन को नहीं जानते हो,” उसका कपट उसके आचरण से साफ़ साफ़ दिखाई देता है (नीतिवचन 20:11; मरकुस 7:21-23; लूका 6:43-45)।

उसी प्रकार, उलट–फेर की बात करनेवाली जीभ भी भ्रष्ट, विकृत, हठी, अविवेकी, दुष्ट और ग़लत होती है। और अगर इसके ठीक विपरीत देखा जाएं, तो सत्य बोलनेवाली जीभ शुद्ध, सौम्य, दयालु, सही, उचित, दयालु, धर्मी और सही होती है। उलट–फेर की बात करनेवाली जीभ गलत समय पर गलत तरीके से गलत बातें कहती है। उसकी वाणी चोट पहुंचाने वाली, चिड़ देनेवाली, विघ्नकारी और विनाशकारी होती है।

उलट–फेर की बात करनेवाली जीभ वाला व्यक्ति अपने निकट के लोगों, विशेषकर परिवार के लोगों को अकसर आहत करता है औ उनके मनों को दुखाता है। वह जब चाहे, हर किसी की आलोचना कर देता है। वह सरकार का उपहास करता है। वह चर्च में तो आराधना करता है, परन्तु घर जाते समय लोगों को शाप देता है। वह अपने शत्रुओं की चापलूसी करता है, परन्तुअपनी कोमल पत्नी को एक ही पल में चीर देता है। वह गा सकता है, “ओह, मैं यीशु से कितना प्यार करता हूँ,” और फिर रास्ते में किसी मोटर चालक पर चिल्लाता है। वह बिना सोचे-समझे दूसरों की निंदा करता है, चुगली करता है और कानाफूसी करता है। वह नकारात्मक है और हर बात में शिकायत करता है। उसकी जुबान कुटिल और कपटी है। वह अपने पाखंड को छोड़कर कभी शुद्ध और अनुग्रह से भरी बातें नहीं कह सकता।

परमेश्वर ऐसे कड़वे सोते से, जो जहर भरे जलकुण्ड से जहर उगलता है, बैर रखता है। ऐसा मनुष्य कुसंगति में पड़ेगा। वह विपत्ति में पड़ेगा, क्योंकि परमेश्वर और मनुष्य उसका विरोध करेंगे (नीतिवचन 18:6-7)। उसके जो भी मित्र हैं वे सच्चे मित्र नहीं हैं, क्योंकि वे उसके साथ सिर्फ़ अपनी स्वार्थी अभिलाषा से रहते हैं। वे निश्चित रूप से उसके साथ इसलिए नहीं हैं कि उसकी जीभ भ्रष्ट और कटु है या उन्हें खुशी और शांति मिलती हैं। जब उसके साथ बुरी चीजें होती हैं तो उसे हैरत होती है, फिर भी वह यह स्वीकार नहीं कर करता कि यह सब उसकी भ्रष्ट जीभ के कारण है।

बाइबल में हारून और मरियम ने अपने भाई मूसा की उसकी इथियोपियाई पत्नी के कारण आलोचना की, इसलिए परमेश्वर ने मरियम को कोढ़ से सफेद कर दिया (गिनती 12:1-15)। कोरह और इस्राएल के हाकिमों ने मूसा से अनादर करके कहा, तू तो अपने ऊपर बहुत अधिक भार उठाता है, क्योंकि सारी मण्डली पवित्र है। नम्र मूसा क्रोधित हुआ, और परमेश्वर ने उन्हें और उनके परिवारों को ज़मीन खोलकर जीवित ही निगल लिया (गिनती 16:1-34)।

इस मामले की सच्चाई यह है कि एक टेढ़ा मन ही उलटफेर भी बाते करनेवाली जीभ को जन्म देता है। एक के बिना दूसरे का होना लगभग असम्भव है, क्योंकि जो मन में भरा है वही मुँह बोलता है (मत्ती 12:33-37)। इसलिए, एक दुष्ट मन भ्रष्ट वाणी ही निकालेगा, जो इस नीतिवचन का दोहरा अभिशाप लाता है। इसलिए सब वस्तुओं से अधिक अपने मन की पूरी तत्परता से रक्षा करें (नीतिवचन 4:23)।

क्या आपको जीवन में कोई भलाई नहीं दिख रही है? क्या आप विपत्ति और दुर्गति से गुज़र रहे हैं? अगर हाँ, तो इसका एक अच्छा कारण है। आप अपने मन के विचारों या अपनी जीभ के शब्दों पर ध्यान नहीं दें रहे हैं जितना कि आपको करना चाहिए। आपके मन के पापों और दुष्ट वाणी ने आपके जीवन पर परमेश्वर का दण्ड और मनुष्य की अस्वीकृति ला दी है। पश्चाताप करें! अपने मन और होठों को भक्ति और प्रेम की ओर फेर दें।

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