नीतिवचन 17:2
बुद्धि से चलनेवाला दास अपने स्वामी के उस पुत्र पर जो लज्जा का कारण होता है प्रभुता करेगा, और उस पुत्र के भाइयों के बीच भागी होगा।
भेदभाव का आरोप एक कमज़ोर बहाना है। मूर्ख या आलसी पुरुषों को अपने जीवन में बहुत ही कम तरक्की कर पाने का दोष किसी न किसी पर मढ़ना अवश्य होता है, इसलिए उनमें से कुछ भेदभाव किये जाने का रोना रोते हैं। वे कहते हैं कि उन्हें इसलिए पीछे रहने दिया जाता है और आगे नहीं बढ़ने दिया जाता क्योंकि वे निचली जाती के, काले, बूढ़े, महिला, अल्प-संख्यक या मुस्लिम हैं। हमारे देश में ये बातें अक्सर सुनने में आती हैं। वे महाशत्रु, अर्थात् भेदभाव को दोष देते हैं।
परन्तु सुलैमान को इन सब का अच्छा ज्ञान था। सेवक, और यहाँ तक कि बेटे भी आलसी, मूर्ख, निरादर करनेवाले, या मंदबुद्धि होने के कारण उन्नति नहीं कर पाते। रंग, आयु, लिंग, पंथ या राष्ट्रीयता का इससे बहुत कम लेना-देना है। अधिकार के पदों पर बैठे अफसर काम में इमानदारी और उत्पादकता की मांग करते हैं; वे उन लोगों को प्रतिफल देंगे जो अपनी व्यक्तिगत सामाजिक पहचान की परवाह किए बिना उनके लक्षों को प्राप्त करने में उनके मददगार सिद्ध होते हैं।
बुद्धि कितनी महत्वपूर्ण है? बुद्धि उन्नति और सम्मान लाती है – मूर्खता पतन और लज्जा लाती है (नीतिवचन 3:35; 4:8; 12:8; 16:20; 22:4)। परिश्रम उन्नति लाता है; सुस्ती भुखमरी लाती है (नीतिवचन 12:24; 20:4; 22:29)। व्यावसायिक रूप से प्रगति न कर पाने वाला व्यक्ति अवश्य ही मूर्ख, सुस्त, अनादरपूर्ण, धीमा या इन सब लक्षणों का मिश्रण ही होता है।
बुद्धिमान सेवक को मूर्ख पुत्र के ऊपर पदोन्नत किया जाएगा। इस सिद्धान्त समझो। एक बेटे के पास खानदानी अधिकार और अपने पिता का प्रेम होता है। परन्तु एक मालिक या नियोक्ता परिश्रम की मांग करता है! वह उम्र, रंग, लिंग, पंथ या राष्ट्रीयता की परवाह नहीं करता। उसे उत्पादकता, समय की पाबंदी, इम्मंदारी और आज्ञाकारिता की सख्त जरूरत है। मूर्ख या आलसी पुत्र उसके किसी काम के नहीं होते।
एक बुद्धिमान दास को बेटे के ऊपर पदोन्नत किया जा सकता है, और वह अपने स्वामी के अपने बेटों के साथ बराबरी में विरासत का, अर्थात् खानदानी व्यवसाय के एक हिस्से का भागीदार बन सकता है! कैसे? क्योंकि कोई भी मालिक अपने अधीन काम करने वालों से फल की मांग करता है, अन्यथा जिस मुकाम पर वह पहुँचना चाहता है उसे हासिल करने के लिए जो परिश्रम और पूंजी उसने लगाई है उसके एवज में वह पर्याप्त प्रतिफल प्राप्त नहीं कर पाएगा। वह उन लोगों को पुरस्कृत करेगा जो अपने सौंपे गए कार्यों में विश्वासयोग्य भंडारी हैं, और मेहनत करते हैं (नीतिवचन 27:18)।
एक मेहनती दास आलसी बेटे की आलोचना करेगा (नीतिवचन 10:5)। ऐसे लोगों पर राजा प्रसन्न होते हैं (नीतिवचन 14:35)। भेदभाव की शिकायत मूर्ख, आलसी, और मंदबुद्धि मनुष्य का बहाना है! सफल मनुष्य आलसी लोगों की शिकायत से नाराज होते हैं, जो अपनी मूर्खता और खराब प्रदर्शन को दोष देने के बजाय परिस्थितियों को दोष देते हैं। वे ऐसे लोग चाहते हैं जो काम पूरा करें ताकि उन्हें वे प्रतिफल दे सके।
जब राजा सुलैमान ने यारोबाम के उद्योग को देखा – जो कि बुद्धिमानी, मेहनत, और यत्न का सुव्यवस्थित उपयोग है – जबकि वह जवान युवक ही था, तब उसने उसे प्रबंधन में मुखिया ठहराया (1 राजा 11:28)। उसने यह ज़िम्मेदारी अपने बेटों में से किसी को भी नहीं दी। कुछ वर्ष बाद यारोबाम इस्राएल के दस गोत्रों का बना, और सुलैमान के प्रिय पुत्र रहूबियाम के पास राज करने के लिए केवल दो गोत्र रह गए थे!
इस समृद्ध, उदार और सुस्त समय में क्रिश्चन व्यक्ति के लिए सफलता पाना आसान है। यह पके आम के समान पेड़ पर लटकी पड़ी है। बुद्धि नाम की सीढ़ी का सही उपयोग अगर किया जाए, तो सभी उसे बड़ी आसानी से तोड़ पाएंगे। प्रिय पाठक, चढ़ो और ले लो! बहाने मत बनाओ; दूसरों को दोष मत दो; सीढ़ी का उपयोग करों और फल तोड़ लें इससे पहले कि कोई और तोड़ ले। नीतिवचन की यह पुस्तक बुद्धि की मार्गदर्शिका है।
भारत और अन्य कई एशियाई देशों से कई लोग ख़ाली हाथ अमेरिका जाते हैं और पैसा कमाकर समृद्ध जीवन जीते हैं। वे शिकायत नहीं करते, मुकदमा नहीं करते, या भेदभाव की बात नहीं करते। वे लगन से काम करते हैं, कम खर्च में जीते हैं, ईमानदारी से बचाते हैं, खुद को बुद्धिमानी से अनुकूलन बनाते, अपने देश में ज़मीने और संपत्ति खरीदकर रखते हैं और शांति से रहते हैं। परन्तु बहुत से ऐसे हैं जो अवसर होते हुए कहीं नहीं जाते, और कुछ नहीं करते। क्या फ़र्क है? परमेश्वर की पहचान से दूर, वे अपने में जन्मजात स्वाभाविक बुद्धि का उपयोग करते हैं।
यूसुफ एक किशोर विदेशी दास था जिसकी पहचान केवल एक चरवाहे के रूप में थी, और जिसे मिस्रियों ने तुच्छ जाना। परन्तु वह पोतीफर के घराने में परमेश्वर की आशीष से उन्नत होता गया (उत्प. 39:1-6)। जब ऊपर बलात्कार के प्रयास का झूठा आरोप लगाया गया और दोषी ठहराया गया था, तब जेल में रहते भी अपनी विश्वासयोग्यता के कारण उसे वहाँ एक प्रशासनिक भूमिका दी गई (उत्पत्ति 39:19-23)। फिर वह फिरौन के पुत्रों श्रेष्ठ हुआ और मिस्र पर शासन किया (उत्पत्ति 41:38-46)!
दानिएल एक किशोर यहूदी युद्ध बंदी था। परन्तु उसने ऐसी तरक्की कीं कि वह राजा के प्रबंधन विभाग में शीर्ष पर पहुँच गया (दानि 1:18-21)। यद्यपि वह एक परदेसी था, उसे पूरे बेबीलोन के ऊपर पदोन्नत किया गया था और वह नबूकदनेस्सर राजा के कर्मचारियों का प्रधान बना। वह 70 वर्षों तक अपने इन उच्च पदों पर बना रहा, तब भी जब फारस के राजा कुस्रू ने इस साम्राज्य को जीत लिया था।
दाऊद ने बुद्धिमानी दिखाई और देश में उसका नाम बहुत बड़ा हो गया, और उसने जनता का प्यार पाया (1 शमूएल 18:30)। उसकी पृष्ठभूमि क्या थी? वह बेथलहम के निचले शहर का एक चरवाहा था, और जब यिशै के बेटों के अभिषेक की बारी आई तब उसके अपने परिवार ने उसे तुच्छ जाना। परन्तु वह अपने सात बड़े भाइयों से श्रेष्ठ हुआ। और राज्य कर रहे राजा के उसके अपने घराने ने उसे अपने पिता के स्थान पर दाऊद को राजा होने के लिए चुना। परमेश्वर सच्चा ठहरे!
यह नीतिवचन सफलता का स्रोत किसे कहता है? बुद्धि को! यह वह गुण है जो इस पुस्तक के सभी निर्देशों का मूर्त रूप है। भारत की एक पिछड़े समाज की गरीब युवा स्त्री, अल्पसंख्यक मुस्लिम स्त्री, जो तुतलाती और लंगड़ाती है, अभी भी आगे निकल सकती है, यदि वह इस नीतिवचन की बुद्धि का उचित उपयोग करती है। परन्तु अगर वह इस नीतिवचन की बुद्धि का उचित उपयोग नहीं करती है, तो मूर्ख बुद्धिमान व्यक्ति की सेवा करेगा (नीतिवचन 11:29)! आप कौन बनेंगे, पाठक?
एक गरीब लड़का एक बूढ़े राजा से आगे जा सकता है, केवल एक साधारण कारण से – बुद्धि (सभो 4:13)। अगर राजा को नसीहत दी जाए तो उसे बुरा लगता है, इसलिए वह सुधार और ताड़ना को दुत्कारता है। जो मनुष्य दूसरों की बात सुनने में खुद को बहुत छोटा महसूस करता है, वह मूर्ख से भी बद्तर है (नीतिवचन 26:12)। एक बुद्धिमान बच्चा सीखने के लिए तत्पर रहता है (नीतिवचन 9:9)। उसे यह बताए ने में कोई समस्या नहीं है कि क्या करना है। वह युवक किसी शिखर पर जा रहा है! और राजा? कहीं नहीं!
परिश्रम क्या है? यह तब तक बिना रुके कड़ी मेहनत और तेजी से काम करना है जब तक काम पूरा नहीं हो जाता। परिश्रम एक काम ख़त्म होते ही अगले काम की तलाश करता है, जुनून के साथ उस पर टूट पड़ता है और बिना किसी शिकायत या विश्राम के इसे खत्म करके ही चैन की साँस लेता है। बुद्धि पूरी सुबह दोपहर के भोजन के बारे में नहीं सोचती रहती, और न दोपहर के समय विश्राम के बारे में सोचती है। जब तक कार्य पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाता है, तब तक वह अपने काम को सबसे अच्छी रीति से और तेज़ी से करना चाहता है।
पाठक, अगर आप इस नीतिवचन को पढ़ेंगे और उस पर विश्वास करेंगे, तो राजा सुलैमान के माध्यम से परमेश्वर ने आपको बहुत हुनर और कौशल से भरी आशा दी है कि आप कुछ कर सकें। बहाने बनाना भूल जाओ! कर्म याद रखें! परिस्थितियों को दोष देना बंद करें और अपने आसपास के लोगों को मात दें। स्मार्ट वर्क करना सीखें। समयनिष्ठ, सम्मानित और ईमानदार बनें। धुँआ हमेशा ऊपर की ओर उठता है, अर्थात एक परिश्रमी व्यक्ति लंबे समय तक किसी से छिपा नहीं रह सकता। नीतिवचन की पुस्तक सीखें और उसके निर्देशों का हर दिन व्यवहारिक उपयोग करें। गलतियों को स्वीकार करें और अपने प्रयास को दोगुना करें। अपने काम से प्रेम रखें, और उसे अपनी पूरी शक्ति से करें (सभोपदेशक 9:10)। आपको उन्नति देने के लिए परमेश्वर पर भरोसा रखें (भजन 75:6-7; कुल 3:22-25)। वह अवश्य सफलता देगा!
यीशु ने अपने शिष्यों और प्रेरितों के लिए जो आत्मिक बातें दीं उनके विषय में उसने इस सिद्धांत को सिखाया (लूका 12:35-48)। जो दास अपने स्वामी की अनुपस्थिति में परिश्रमी बना रहता है उसे उसके स्वामित्व वाली सभी चीज़ों पर शासन करने के लिए ऊँचा किया जाएगा। परन्तु जो आलसी हैं उन्हें निकाल दिए जाएगा और झूठों के साथ बाहर फ़ेंक दिए जाएंगे। जिस ऊँचे शिखर के लिए तुम बुलाए गए हो, उस पर अच्छी तरह विचार करो। प्रभु में किया कोई परिश्रम व्यर्थ नहीं है।
यह शिकायत करने के बजाय कि स्वामी बहुत कठोर दिलवाला है और भेदभाव करता है, स्वर्ग के राज्य में विश्वासयोग्य और परिश्रमी बनें और उसकी आशीष प्राप्त करें (मत्ती 25:14-30)। यीशु ने उस दुष्ट और आलसी सेवक की निंदा की, उसके पैसे छीन लिए, और उसे बाहरी अँधेरे में डाल दिया जहाँ वह अपने दाँत पीसेगा और अपने दुख के बारे में विलाप करता रहेगा। और उस ने उस मनुष्य को जो थोड़े में विश्वासयोग्य रहा, और अधिक रुपया दिया। धनवान मनुष्य बुद्धि से धनवान बनता जाता है, और बिना बुद्धि के निर्धन और निर्धन होता जाता है।
क्रिश्चन कर्मचारियों को किसी भी काम में सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए (रोमियो 12:11; कुल 3:22-25; 1 थिस 4:11-12; 1 तीमु 6:1-2; तीतुस 2:9-10)। जहाँ आप काम करते हैं वहां अपने शब्दों से ज्यादा आपका उत्कृष्ट आचरण आपके उद्धारकर्ता परमेश्वर की शिक्षा को शोभा देता है और क्रिश्चन धर्म को मूर्तिपूजकों की निन्दा से बचाता है। जो कुछ भी तुम करते हो वह ऐसा करों कि मानों प्रभु यीशु मसीह के लिए कर रहे हो और वह तुम्हें आज और आनेवाले जीवन में प्रतिफल देगा।
यीशु मसीह को परमेश्वर के मानव-सेवक के रूप में आने के लिए स्वर्गदूतों से थोड़ा ही कम किया गया था (मत्ती 12:18)। परन्तु उसने इतनी बुद्धिमानी और ईमानदारी से अब तक के सौंपे गए सबसे कठिन काम को पूरा किया कि उसे परमेश्वर के सभी दिव्य पुत्रों से कहीं अधिक ऊँचा उठाया गया (अय्यूब 1:6; 1 पतरस 3:22)। वह न कभी कमज़ोर पड़ा और न ही कभी निराश हुआ, और आज वह सब पर प्रभुता करता है (फिल 2:5-11)।
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