नीतिवचन 17:18

निर्बुद्धि मनुष्य हाथ पर हाथ मारता है, और अपने पड़ोसी के सामने उत्तरदायी होता है।

उतावली से जोखिम उठाने वाले निर्बुद्ध होते हैं। वे बिना विचार विमर्श किए ऐसे वित्तीय वायदे कर लेते हैं जो उन्हें नहीं करने चाहिए। अभिमान से फूलकर, वे अपनी वास्तविकता से अधिक धनवान होने का दिखावा करते हैं। दूरदर्शिता के अभाव के कारण, वे यह नहीं देख पाते कि आज किए गए उनके वायदे कल उनकी क्षमता से बाहर हो सकते हैं। अपने मित्रों को प्रभावित करने के उद्देश्य से, वे उधार पर पैसे लेने के लिए उनकी ज़मानत देते हैं या अन्य तरीकों से उसके उत्तरदायी बनते हैं। बुद्धिमान लोग जोखिम उठाने से बचते हैं, परंतु अहंकारी निर्बुद्ध लोग यह समझ नहीं पाते।

हाथ पर हाथ मारना एक ऐसा रिवाज़ था जिसे किसी व्यक्ति की प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए हाथ मिलाने के समरूप समझा जाता था, हालांकि आम तौर पर इसका अर्थ केवल एक-दूसरे का हाथ पकड़ना या थामना होता था। वायदे करने या हाथ मिलाने जैसी क्रियाएँ इस कार्य को भिन्न बनाती हैं, क्योंकि इसमें एक व्यक्ति का हाथ किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ से इतनी मज़बूती से जोड़ा जाता है जिससे उनके बीच लेन-देन की विधि स्थापित हो सके या एक वाचा बांधी जा सके। इस नीतिवचन के संदर्भ में, हाथ मिलाना किसी खराब साख वाले मित्र के लिए वित्तीय सहायता की ज़मानत देना है।

ज़मानत देने का अर्थ उत्तरदायी होना होता है। एक निर्बुद्ध व्यक्ति लेनदार से हाथ मिलाकर अपने मित्र के कर्ज़ का उत्तरदायी बन जाता है और यह वायदा करता है कि यदि उसका मित्र वह नहीं चुका पाएगा तो उसकी जगह वह स्वयं उसे चुकागा। भले ही लेनदार उस मित्र की संपत्ति या चरित्र को स्वीकार न करे, परंतु फिर भी यह वित्तीय रूप से निर्बुद्ध व्यक्ति उस सौदे को पूरा करने के लिए अपनी आर्थिक क्षमता का निर्भीकता से प्रदर्शन करता है। अनेक पत्नियों और बच्चों को तो काफी समय के पश्चात पता चलता है कि वित्तीय निर्बुद्धता के कारण उनके परिवार की संपत्ति और भविष्य की पारिवारिक आय को आवेग में आकार किसी दूसरे व्यक्ति का उधार चुकाने के लिए वायदे में रख दिया गया है।

किसी अभावग्रस्त मित्र की आर्थिक रूप से थोड़ी सहायता करना सही है। परंतु अत्यधिक प्रासंगिक ऋण को पूरा करने के लिए बाध्यकारी वायदे करना गलत है। एक आलसी मित्र के निवेदन और सौदे को पूरा करने के अहंकारी विचार एक सामर्थशाली प्रलोभन हो सकते हैैं। सुलैमान ने अपने पुत्र को ऐसे सौदों के कारण अपने नीचे की खाट के छिन जाने के विषय में चेतावनी दी थी (नीतिवचन 22:26-27)। उसने अपने पुत्र से कहा कि वह स्वयं को ऐसे वायदों से ठीक उसी तरह बचाए जिस प्रकार एक हिरनी शिकारी के हाथ से या एक चिड़िया एक चिड़ीमार के हाथ से बचने का प्रयास करती है (नीतिवचन 6:1-5)। ज़मानत देने से विशाल वित्तीय दुख उठाना पड़ता है (नीतिवचन 11:15; 20:16; 27:13)।

अनेक राजनीतिज्ञ और सरकारें इस सरल व्यवस्था का उल्लंघन करते हैं। बुद्धिमान लोग वित्तीय जोखिम उठाने से बचते हैं और प्रासंगिक ऋण से दूर रहते हैं। परंतु जो लोग अधिकारिक पदों के लिए चुनाव में खड़े होते हैं, वे अक्सर लोभ में लोगों से अनेक चीज़ों के वायदा करते हैं। वे इसी तरह लोगों के मत खरीदते हैं। चूँकि वे प्रत्येक मतदाता को रिश्वत नहीं दे सकते, इसलिए वे प्रत्येक मतदाता को भविष्य में अनेक लाभों का वायदा करते हैं, जबकि वह सब वास्तविकता में वित्तीय और/या राजनीतिक रूप से असंभव होते हैं। वे या तो अपने वायदों को पूरा न करने के कारण उस पद से हटा दिए जाते हैं, या वे उन्हें पूरा करते हुए स्वयं वित्तीय नुकसान भोगते हैं।

यहाँ दी गई सीख बहुत सरल है। किसी के उधार का उत्तरदायी न बनें, ऐसा केवल तभी करें यदि वह धनराशि बहुत कम हो, या परिस्थिति बहुत निराशाजनक हो, या वह व्यक्ति वास्तविक रूप से अभावग्रस्त हो। इसके अतिरिक्त, यहाँ और भी ज्ञान स्पष्ट रूप से दिया गया हैै। उधार से घृणा करें। जोखिम उठाने से बचें। बीमा लेने का चुनाव करें। अनुबंधों से दूर रहें। किरायों से भी बचें। बाध्यवादी वायदे न करें। नकद में लेन-देन करें। उधार से घृणा करें। सदा बचत करें। अपनी क्रेडिट रेटिंग को बनाए रखें। अपने मित्रों को उधार न लेने की सलाह दें।

संसार के सबसे महान ज़मानत देने वाले (उत्तरदायी) की कहानी पर विचार करें। वह ऋणदाता परमेश्वर था। ऋण लेने वाले सभी पापी मनुष्य थे, और वे अपनी आज़ादी को मोल लेकर खरीदने में सक्षम नहीं थे। परमेश्वर की पवित्र विधि के अनुसार उन्हें मृत्यु का दंड भोगना था और अपने कर्ज़दार की आग की झील रूपी कैद में अनंत काल बिताना था। परंतु तभी एक राजकुमार आगे आया और उसने उन सभी के पापों का भुगतान करने का वायदा किया। क्या उसने वास्तव में ऐसा किया? हाँ! कैसे? उनके लिए मृत्यु का दंड भोगकर! “इस प्रकार यीशु एक उत्तम वाचा का जामिन ठहरा” (इब्रानियों 7:22)।

प्रिय पाठक, आप एक ऐसे पापी हैं जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर के ऋणों के अधीन बहुत गहनता से दबे हुए हैं। यदि यीशु परमेश्वर के प्रति आपकी धार्मिकता की ज़मानत देने के लिए आपका उत्तरदायी नहीं ठहर है, तो आप अपने पापों का भुगतान अनंत काल तक पीड़ा सहने के द्वारा करेंगे (प्रकाशितवाक्य 20:10-15)। यीशु मसीह के समीप आएं, और अपने पापों का पश्चाताप करने के द्वारा, परमेश्वर के पुत्र और पापियों के एकमात्र ज़मानत देने वाले के रूप में उस पर विश्वास करने के द्वारा, और अपने उद्धार को सुनिश्चित करने के लिए उसकी हर आज्ञा को पूरा करने के द्वारा, उससे अपना उत्तरदायी बनने के लिए विनती करें (मत्ती 7:21; 2 पतरस 1:5-11; 1 थिस्सलुनीकियों 1:2-4)।

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