नीतिवचन 17:15
जो दोषी को निर्दोष, और जो निर्दोष को दोषी ठहराता है, उन दोनों से यहोवा घृणा करता है।
इस जगत ने समझौते का युग बनाया है। मानव समाज ने सभी परम-सिद्धांतों से छुटकारा पाने के लिए हर संभव प्रयास किया है। दुष्ट लोगों को क्षमा किया जाता है और उन्हें दोषमुक्त किया जाता है, और यहाँ तक कि उनकी रक्षा भी की जाती है; धर्मी मनुष्यों की आलोचना की जाती है और उनकी निंदा की जाती है, और उन्हें दंडित भी किया जाता है। परन्तु परमेश्वर यहोवा इस दोनों प्रकार के समझौता करनेवालों से घृणा करता है, अर्थात् उनसे जो दुष्टों को निर्दोष ठहराते हैं और जो धर्मी को दोषी ठहराते हैं।
स्वर्ग के जीवित और सच्चे परमेश्वर के पास परम-सिद्धांत, अर्थात् परम सत्य हैं, और वह अपेक्षा करता है कि मनुष्य उनका पालन करें और उन्हें अपने व्यवहार में लागू करें। जब उसने इस्राएल में न्यायियों को नियुक्त करने की आज्ञा दी, तब उसने आदेश दिया, “यदि मनुष्यों के बीच कोई झगड़ा हो, और वे न्याय करवाने के लिये न्यायियों के पास जाएँ, और वे उनका न्याय करें, तो निर्दोष को निर्दोष और दोषी को दोषी ठहराएँ” (व्यवस्था 25:1)।
बाइबल परमेश्वर के परम-सिद्धांतों का एक संग्रह है, हालाँकि इसके लिए उन परम-सिद्धांतों की उचित व्याख्या करना और उनका व्यावहारिक उपयोग करना आवश्यकता होता है (2 इतिहास 19:10; नेहम 8:8; 2 तीमु 2:15)। यीशु ने कहा, कि बाइबल की छोटी से छोटी आज्ञा का भी उल्लंघन करना अस्वीकार्य है (मत्ती 5:19)। परमेश्वर की दृष्टि में, एक आज्ञा को तोड़ना सब आज्ञाओं को तोड़ने के समान है (याकूब 2:10)।
परमेश्वर भेद करता है। उनसे पूछो जिन्होंने नूह के उपदेश पर विश्वास नहीं किया था, या उसकी आज्ञा नहीं मानी थी। सदोम की नगर परिषद से उनकी समलैंगिक आबादी के विषय में पूछो। फ़िरौन या उसकी सेना से पूछो कि परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता का अनादर करने के कारण मिस्र का क्या हश्र हुआ। कनानियों से पूछों कि उनकी उदार यौन-प्रथाओं के विषय में परमेश्वर की सोच क्या थी। बाइबल से ऐसे कई उदहारण दिए जा सकते हैं। परन्तु आप बाइबल में वर्णित इन लाखों लोगों से नहीं पूछ सकते, क्योंकि परमेश्वर ने उनका विनाश कर दिया। उसने दुष्टों दोषी ठहराया।
परमेश्वर विस्तृत विवरण को महत्व देता है। कैन से यहोवा के लिए उसके बलिदान के विषय में पूछो जो उसे ठीक समय और ठीक स्थान पर चढ़ाना था। मूसा से उसके क्रोध के आवेश के विषय में पूछो जब उसने चट्टान से वचन बोलने के बजाय उस पर प्रहार किया। नादाब और अबीहू से उनकी ऊपरी आग के विषय में पूछो जिसकी आज्ञा यहोवा ने नहीं दी थी। दाऊद से सन्दूक को नई बैलगाड़ी पर ले जाने के विषय में पूछो। हनन्याह और सफीरा से उनके देने में हेराफेरी करने के विषय में पूछो। कुरिंथ की कलीसिया से प्रभु-भोज को भ्रष्ट करने के विषय में पूछो। पीटर से अन्ताकिया में यहूदियों के साथ उसके समझौते के विषय में पूछो।
न्याय और रिश्तों के मामलों में, दुष्टों का तिरस्कार कर उन्हें दोषी ठहराया जाना है, और धर्मी से प्रेम करके उसे स्वीकार किया जाना है। दाऊद ने परमेश्वर की रीति पर दुष्टों से घृणा की (भजन 5:5; 11:5; 101:3-8; 139:21-22)। और दाऊद ने परमेश्वर की रीति पर धर्मियों से प्रेम किया (भजन 15:4; 16:3; 119:63,79; 122:8; 146:8-9)। परमेश्वर के सेवक पापियों का तिरस्कार करते हैं और भले मनुष्यों से प्रेम करते हैं (तीतुस 1:8; 3:9-11)। धर्मी और दुष्ट के बीच जो बड़ा संघर्ष चल रहा है वह कभी समाप्त नहीं होगा (नीतिवचन 29:10,27)।
अच्छाई की निर्दोषता को प्रमाणित करना और बुराई को दोषी ठहराना ही न्याय है। बेशक, यह अदालतों में होता है। लेकिन यह घर में भी होता है, जहां बच्चों के आचरण को परखा जाता है। और यह काम करने के स्थान में, चर्चों में, स्कूलों में और यहाँ तक कि दोस्तों के बीच भी होता है। ऐसी ऐसी और अन्य स्थितियों में, धर्मियों का सम्मान किया जाना चाहिए, और दुष्टों को दोषी ठहराया जाना चाहिए।
पूरी दुनिया के वर्तमान हालातों से पता चलता है, कि कानून-प्रणाली अब न्याय का प्रतिमान नहीं रही है। निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालयों, और सर्वोच्च न्यायालयों तक, दुष्टों को क्षमा कर दिया जाता है और निर्दोष को दंडित किया जाता है। न्यायाधीशों को उनकी पूर्ण सत्यनिष्ठा के कारण नहीं बल्कि राजनीतिक संबंधों के बल पर चुना और अनुमोदित किया जाता है। और ऐसी ग़लत नियुक्तियों के कारण कई फैसले गरोबों के ख़िलाफ और सरकारों तथा नौकरशाहों के हक़ में दिए जाते हैं।
पीड़ितों की तुलना में अपराधियों के पास अब अधिक अधिकार हैं। न्यायाधिशों को अपराधियों द्वारा मुकदमा चलाने से पहले धमकाया जाता है; पत्नियों का ऑफिस में जाने और पतियों का घर पर बच्चें संभालने को मर्दांगी कहा जाता है; पतियों को पत्नियों के अधीन रहने को कहा जाता है। स्कूलों में बच्चों को शारीरिक दण्ड देने को ग़ैर-क़ानूनी माना जाता है; सरकार के पागल समर्थकों द्वारा सबसे बेहूदा कारणों से मुकदमे दायर किए जाते हैं और उन्हें बरकरार रखा जाता है। इंसान के जीवन से अधिक पेड़-पौधों और पशुओं के जीवन को मूल्यवान समझा जाता है। समलैंगिकों की रक्षा की जाती है, लेकिन क़ानूनी पतियों को तिरस्कृत और नीचा दिखाया जाता है।
ख़राब मानसिक हालत की दलील देने वाले हत्यारों को हत्या के अपराध से दोषमुक्त किया जाता है। कितना बेतुका है! यदि कोई व्यक्ति ख़राब मानसिक हालत के कारण हत्या करता है, तो यही कारण उसके मृत्युदण्ड के लिए काफ़ी है – वह केवल हत्यारा नहीं है, वह विक्षिप्त मानसिकता वाला एक पागल हत्यारा है। क्यों न पागल कुत्तों को पाले और उनकी रक्षा करें, क्योंकि यह तुलनीय होगा, सिवाय इसके कि पागल कुत्तों ने कभी किसी की हत्या नहीं की? वास्तविकतावादी बनो, दुनिया के लोगों!
लेकिन आपको अपने देश की कानून-व्यवस्था की तुलना में अपने घर की कानून-व्यवस्था पर बारीकी से ध्यान देना चाहिए। क्योंकि यह कलीसियाओं में है जहाँ बहुत समझौता किया जा रहा है, जैसा कि पौलुस ने भविष्यवाणी कीं थीं और तीमुथियुस को चेतावनी दी (2 तीमुथियुस 3:1-4:4)। झूठे सिद्धांत और उन्हें सिखानेवाले शिक्षकों के नाम लेकर खुलकर विरोध किया जाना चाहिए और उनकी निंदा की जानी चाहिए; सच्चे सिद्धांत और विश्वासयोग्य शिक्षकों का, समर्थन, बचाव और सम्मान किया जाना चाहिए।
आजकल कई कहते हैं, “आओ, हम असहमत होने के लिए सहमत हों।” लेकिन सच्चाई यह है कि सत्य के प्रति परमेश्वर का दृष्टिकोण इतना ढीला और समझौतावादी नहीं है। जो सही है, वह सही है, और जो गलत, वह गलत है, और हर नैतिक मसले में सही दृष्टिकोण केवल एक, और गलत दृष्टिकोण बहुत-से होते हैं। दाऊद ने कहा, “इसी कारण मैं तेरे सब उपदेशों को सब विषयों में ठीक जानता हूँ; और सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूँ” (भजन 119:128)।
एली ने अपके पुत्रों को डांटा, परन्तु उसने उन्हें दोषी नहीं माना; उसने अपने समझौते के कारण सब कुछ खो दिया। कुरिन्थ की कलीसिया अपने चर्च में व्यभिचार पर घमण्ड कर रही थी, बजाए इसके कि उस पर शोक करें और उस दुष्ट व्यक्ति को दोषी ठहराए। लेकिन इस्राएल के मधुर भजनकार, दाऊद ने अपनी मृत्युशय्या पर सुलैमान से कहा कि वह अपने भतीजे और लंबे समय से सेना के प्रमुख रहे योआब को मार डाले। और यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने राजा हेरोदेस से भी ऐसा ही न्याय करने कहा।
बहुत से लोग कहते हैं, “दोष न लगाओ, कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए” (मत्ती 7:1), जो संदर्भ के अनुसार ऐसे मनुष्यों का न्याय जो सत्य के लायक नहीं हैं कुत्ते और सूअरों के समान करने, (मत्ती 7:6), और ठीक ठीक न्याय करने की प्रभु की आज्ञा का ग़लत अर्थ निकलते हैं। धर्मी न्याय (यूहन्ना 7:24)। वे सत्य के स्थान पर शान्ति को महत्व देते हैं, हालांकि परमेश्वर सत्य को शान्ति के ऊपर रखता है (अमोस 3:3; 1 तीमु 6:3-5)। वे बड़ी उत्सुकता से बाइबल के न्याय के विरूद्ध विद्रोह करते हैं (रोम 16:17-18)।
आज के सांसारिक मन के मसीही इस नीतिवचन में वर्णित घिनौने पापों को पूरा कर रहे हैं। पौलुस ने मसिहत के एक स्त्री-गुणी स्वरुप के उदय का वर्णन किया जिसके चलते मसिहत के भीतर से ही कुछ मनुष्य धर्मियों का तिरस्कार करेंगे उन दुर्बल स्त्रियों को वश में कर लेंगे जो पापों से दबी और हर प्रकार की अभिलाषाओं के वश में होती हैं (2 तिमु 3:1-7)। उनके पास भक्ति का एक रूप होगा – एक धार्मिक विधि – लेकिन उनके सुसमाचार या जीवन शैली में कोई सामर्थ या न्यायप्रियता नहीं होगी। वे परमेश्वर से अधिक भोग-विलास से प्रेम रखेंगे, और उनका यह प्रेम पापियों की उनकी चापलूसी में दिखाई देगा।
आज के राजनीतिक और धार्मिक हालात वैसे ही हैं जैसे पहली सदी के इस्राएल में थें। रूढ़िवादी धार्मिक नेताओं और पृथ्वी पर के उस समय के सबसे महान राष्ट्र के राजनीतिक अगुओं ने देशद्रोही और हत्यारे बरअब्बा को निर्दोष ठहराने और नासरत के निर्दोष और धर्मी यीशु को दोषी ठहराने में एक दूसरें का सहयोग किया। अगर आज आप यीशु मसीह के समान जीवन जिएंगे और बातें करेंगे तो वे आपको भी सूली पर चढ़ाएंगे, जबकि वे अपनी अदालतों में कुकर्मियों को माफ करते, और मनोरंजन मीडिया के माध्यम से उन्हें बढ़ावा देते हैं।
आप एक तटस्थ या निष्पक्ष भूमिका नहीं ले सकते, क्योंकि तटस्थता बाइबल का तिरस्कार करना और परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह करना है, क्योंकि परमेश्वर और उसकी बाइबल तटस्थ नहीं हैं। बाइबल मूर्खता और दुष्टता की निन्दा करती है, और बुद्धि और धर्म की बड़ाई करती है। पापियों का तिरस्कार किया जाना चाहिए, और धर्मियों का सम्मान किया जाना चाहिए (भजन 15:4; 31:6; 101:3-8)। इस स्त्री-गुणी पीढ़ी को और उसके समझौते को ठुकरा दो। खड़े हो जाओ और पवित्रजनों को एक ही बार सौंपे गए विश्वास के लिए पूरी तत्परता से संघर्ष करो (यहूदा 1:3)।
लोगों को ख़ुश करनेवाली आज की उभरती कलीसियाओं में जाने से इन्कार करों, बल्कि उनकी पोल खोलो, क्योंकि वे इस पीढ़ी के लिए इस नीतिवचन को पूरा कर रही हैं। उन्होंने बाइबल के मानकों को भ्रष्ट और कमजोर कर दिया है जहां हर किसी बात की अनुमति दी जाती है और सब कुछ सहिष्णुता से सहन किया जाता है, यहां तक कि ऐसी बातों का समर्थन और बचाव भी किया जाता है। पुल्पिटों का उपयोग परमेश्वर की पवित्रता और न्याय की सत्य परिभाषा के प्रचार के बजाय प्रेम और शांति की एक अति भावनाप्रधान, और मानव निर्मित खोखली परिभाषा के प्रचार लिए किया जाता है। अधिकांश मसीही वैसा ही चाहते हैं – सत्य के बजाय दिल बहलानेवाली दंतकथाएँ।
वह दिन आ रहा है जब सब न्याय सत्य के वास्तविक परम-अर्थ के अनुसार किया जाएगा। किताबें खोली जाएंगी, और कोई ग़लतफ़हमी, दलीलों की सौदेबाजी, त्रिशंकु न्यायपीठ, अपराध-क्षमा या दोषमुक्ति नहीं होगी। उदारतावादी विद्वान, और विधर्मी पास्टर्स और पोप इस न्यायाधीश में कोई सुधार, उसकी आलोचना या निंदा नहीं करने पाएंगे। धर्मीजन स्वर्ग में अनन्त जीवन पाएंगे, और दुष्ट हमेशा के लिए नरक में डाल दिए जाएँगे (मत्ती 13:41-43; यूहन्ना 5:28-29; प्रकाशितवाक्य 20:11-15)।
हर एक का ठीक ठीक न्याय कैसे किया जाएगा, क्योंकि पापी तो सभी हैं (रोमियों 3:23)? बाइबल कैसे कह सकती है कि परमेश्वर दुष्टों को धर्मी ठहराता है (रोमियों 4:5)? यीशु मसीह के द्वारा (रोम 3:26)! यीशु ने चुने हुओं के लिए परमेश्वर की आज्ञा मानी (रोमियों 5:19) और उनके लिए मरा (यूहन्ना 10:11,15), और अब वह उनके लिए मध्यस्थी करने सदा जीवित है (रोमियों 5:10; 8:34; इब्रानियों 7:25)। यह परमेश्वर का यीशु मसीह पर डाला गया कठोर दंड है जो पापियों पर उसके दण्ड को स्पष्ट रूप से दिखाता है (यशा 53:5-11)। इसलिए जो कोई प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करता है, वह दण्ड से मुक्ति पाकर अनंत जीवन पाएगा।
प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा!
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