नीतिवचन 17:13

जो भलाई का बदला बुराई से चुकाता है, उसके घर से विपत्ति कभी दूर न होगी। (केजेवी)

बुराई का बदला बुराई से चुकाना पाप है, क्योंकि प्रतिशोध लेना परमेश्वर का कार्य है (रोमि 12:17; 1 थिस्स 5:15; 1 पतरस 3:9)। परंतु भलाई का बदला बुराई से देना और भी अधिक बदतर पाप है, क्योंकि यह एक पाशविक और शैतानी हृदय को प्रकट करता है। ऐसे नीच आचरण के नतीजे अटल हैं – परमेश्वर ऐसी नीचता के लिए आप पर एक चिरस्थाई विपत्ति भेजकर आपको बड़ी कठोरता से दण्ड देगा। भलाई का बदला भलाई से चुकाना आपका कर्तव्य और ईश्वर-प्रदत्त सौभाग्य है।

यहां दो सबक हैं। पहला, जिन-जिन लोगों ने आपके जीवन में आपके साथ भलाई का व्यवहार किया है, उनके विषय में न्यायसंगत रहें। क्या आपने उनका सम्मान किया? क्या आपने उनकी भलाई के लिए सज्जनता से उन्हें प्रतिफल दिया? दूसरा, जिन्होंने आपकी भलाई की निंदा और उपेक्षा की उनके विषय में सोचें। व्यक्तिगत बदला लेने की न सोचे। परमेश्वर ही उनके इस दुर्व्यवहार के लिए उन्हें पिस डालेगा; और जब परमेश्वर पिसता है तो क्या कहना।

नूह, जो एक धर्मी पिता था, उसने मसीह में अपनी धार्मिकता से अपने बेटे हाम और उसकी पत्नी को जलप्रलय से बचाया (उत्प. 6:8-10; 7:1)। परंतु जब हाम ने अपने पिता के विरोध में पाप किया, उसके वंश को हमेशा के लिए शापित किया गया (उत्प. 9:18-27)। इसलिए, मसिहियों, सावधान रहों, परमेश्वर ऐसे मनुष्यों को पीस डालेगा।

दाऊद ने डरपोक और कायर शाऊल के लिए गोलियात का वध किया और इमानदारी से उसकी सेवा की (1 शमू. 17:50-53; 18:5)। परंतु शाऊल इस धर्मीजन से जलता था, और उसने दाऊद को जान से मारने का प्रयास किया, इसका नतीजा यह हुआ कि परमेश्वर ने शाऊल के धराने को ही मिटा दिया, और यहूदा के गोत्र को राज्य का अधिकार दिया (1 शमू 19:1; 25:28-31; 2 शमू 6:21)। उसके अधिकतर राज्य का विनाश ईर्ष्या के कारण हुआ, जिसने उसके ही प्राण को निगल लिया, और अंत में उसे निराशाजनक हालातों में लाकर छोड़ दिया।

दाऊद ने बड़ी करुणा से नाबाल की भेड़ों और चरवाहों की रक्षा की (1 शमू. 25:4-17)। परंतु जब नाबाल ने दाऊद की ओर से आए सम्मानजनक अनुरोध को ठुकरा दिया, तो परमेश्वर ने उसे दस दिनों तक पीड़ित किया और तत्पश्चात ऐसा मारा कि वह मर गया, और उसकी सुंदर विधवा को दाऊद की पत्नी होने के लिए दे दिया (1 शमू. 25:36-42)। इसलिए, हे मसीहियों, अपने परोपकारियों का स्मरण रखो।

हमारे प्रभु यीशु मसीह ने यहूदा इस्कर्योत से मित्रता की, और उसे अपने बारह प्रेरितों में से एक प्रेरित बनने का सम्मान दिया। परंतु यहूदा ने चांदी के चंद सिक्कों के लिए यीशु को पकड़वाने का चुनाव किया, इस कारण, हमारे धन्य और पवित्र परमेश्वर ने उसके पेट को फाड़ डाला, और उसका लहू कुम्हार के खेत में बिखरा दिया (प्रेरितों 1:18-19; भजन 109:1-20)। यीशु और दाऊद दोनों ही को अपने जीवन में ऐसे कई धोखेबाजों का सामना करना पड़ा (भजन 35:12; 38:20; 55:12-15)।

यीशु मसीह इस्राएलियों का मुक्तिदाता था। उसने तीन वर्षों तक सत्य का प्रचार किया, और जो कोई उसके पास आता था, उसे वह चंगा करता था। परंतु यहूदियों ने अपने अधर्म में उसे क्रूस पर चढ़ा दिया, इस कारण परमेश्वर ने सन 70 में उनके देश का विनाश करने रोमी साम्राज्य की सेनाओं को खड़ा किया (मत्ती 21:44; 22:7; लूका 19:42-44)। परमेश्वर अच्छे से पिसता है।

क्या यह चेतावनी आपको बहुत ही कठोर और बेरहम लग रही है? तो फिर आप ने भलाई का बदला बुराई से चुकाने के महा अपराध को ठीक से समझा ही नहीं। भलाई का बदला बुराई से चुकाना निंदाजनक स्वार्थ है; ऐसा करना हैवानियत, और घिनौना है; ऐसी एहसान-फरामोशी एक ऐसे हृदय को उजागर करती है जो खुद अकृतज्ञता से काला हो चुका है; यह अपराध कठोर दण्ड के योग्य है। यिर्मयाह की उस प्रार्थना पर विचार करें, जो उसने यहूदियों पर परमेश्वर के प्रतिशोध के लिए की जिन्होंने सत्य का प्रचार करने के कारण उसे सताया था (यिर्म 18:18-23)।

यीशु ने अपने प्रेरितों से कहा कि वे जिस किसी घर या नगर में जाए, तो उसे परखे। यदि कोई नगर उनके सुसमाचार की उपेक्षा करता है तो उन्हें उस नगर के विरोध में अपने पैरों की धूल झाड़नी थी। प्रभु यीशु ने प्रतिज्ञा कीं कि न्याय के दिन सदोम और गमोरा के नगरों की दशा अधिक सहनेयोग्य होगी (मत्ती 10:12-15)।

मसीहियों, अब तुम्हारी बारी है। जिन्होंने तुम्हारे साथ भलाई का व्यवहार किया, क्या तुम उनकी भलाई का बदला बुराई से चुकाते हो? जब जब कोई व्यक्ति आपके साथ कोई ना कोई भलाई करता है, तब तब आप उसका प्रतिफल भलाई ही से देने उसके कर्ज़दार हो जाते हैं। क्या आप देखभाल और करुणा का अपना कर्ज़ चुकाते हैं? शाऊल, नाबाल, यहूदा, और यहूदियों की अकृतज्ञता पर अनावश्यक रूप से क्रोध न करों। उसके बजाय अपना ही आत्म-परीक्षण करों।

आपके माता-पिता ने आपसे जो प्रेम किया, अपना समय दिया, आप पर मेहनत की, आपकी परवरिश का खर्चा उठाया, क्या आपने इसके बदले में उन्हें कोई प्रतिफल दिया? क्योंकि आपने उनसे अपने लिए खाने पीने की चीजों की मांग की, अपने गन्दे-मैले शरीर और कपड़ों को उनसे धुलवाया, और इतना ही नहीं, बल्कि अपनी युवावस्था में उन्हें बड़े-बड़े सदमें और दुख दिए। आप उन्हें आखरी बार कब खाने के लिए बाहर ले गए? आखरी बार कब उन्हें खत लिखा या फोन किया और महान माता-पिता होने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया? क्या आपने उनके लिए कोई उपहार खरीदा? क्या आपने उनके साथ अपना मूल्यवान समय बिताया?

पतियों क्या आपने अपनी अपनी पत्नी के प्रेम और मित्रता की बराबरी कीं? पत्नियों क्या आपने अपने अपने पति के प्रेम और मित्रता की बराबरी कीं? जिस व्यक्ति ने आपको नौकरी पर रखा क्या आपने उसके बदले में उसका सम्मान किया? आपको सत्य की शिक्षा देने के लिए क्या आपने अपने पास्टर के घर की ज़रूरतों को पूरा किया? क्या आपने कभी उन पुलिसकर्मियों की प्रशंसा कीं जो रात-रात भर जाग कर आपकी रक्षा करते हैं? क्या आप अपने अच्छे पड़ोसियों को जिन्होंने आपका जीवन सुखद और भयमुक्त बनाया, कभी कोई उपहार दिया है? क्या आपने अपने बेटे और बहू को उनके व्यस्त जीवन से समय निकालकर आप से मिलने आने के लिए धन्यवाद दिया है?

युवाओं और युवतियों, सुनो! इस जगत में सबसे घृणित अपराधी वह बच्चा है जो अपने माता-पिता का अनादर करता और उनके विरोध में विद्रोह करता है। आपके लिए सब कुछ करने के बाद, आप उनके साथ जरा भी दुर्व्यवहार कैसे कर सकते हैं? आपको उनका सम्मान किसी राजा और रानी के समान करना चाहिए। यदि आप विद्रोही और अकृतज्ञ हैं, और उनका अपमान करते हैं, तो आप एक दर्दनाक मृत्यु के योग्य हैं (निर्ग 21:15, 17; लैव्य. 20:9; व्यवस्था. 21:18-21; 27:16; नीति. 20:20; 30:17)।

इस नीतिवचन को एक कदम और आगे ले जाया जा सकता है। कुलीन और सच्चे मसीही लोग वास्तव में बुराई का बदला भलाई से चुकाते हैं (रोमि 12:17-21)। मसीही लोग तो अपने शत्रुओं से प्रेम रखते हैं; जो उन्हें शाप देते हैं, उन्हें वह आशीष ही देते हैं; जो उन से नफरत करते हैं, वे उनका भला करते हैं; और जो उन्हें तुच्छ जानकर दुर्व्यवहार करते हैं और सताते हैं, उनके लिए वे प्रार्थना करते हैं (मत्ती 5:43-48)। मसीहियों का ऐसा आचरण प्रमाणित करता है कि वे परमेश्वर के पुत्र और पुत्रियां हैं।

हमारे धन्य परमेश्वर ने अपने चुने हुओं का उद्धार करने अपने एकलौते पुत्र, अर्थात् प्रभु यीशु मसीह को देकर इस समस्त विश्व पर अपनी सबसे महान भलाई और करुणा दिखाई है। मनुष्य की दशा क्या थी? मनुष्य उसके दुष्ट शत्रु थे (रोमि 5:8-10)। उसने अपने अनुग्रह की महिमा की स्तुति के लिए हमारी बुराई का बदला भलाई से चुकाया (इफि 1:3-12)। यदि आप परमेश्वर के पुत्रों और पुत्रियों के समान आचरण रखना चाहते हो, तो आप ही बुराई का बदला भलाई से चुकाओ (रोमि 12:21)।

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