नीतिवचन 17:11

बुरा मनुष्य दंगे ही का यत्न करता है, इसलिये उसके पास क्रूर दूत भेजा जाएगा।

मनुष्यों पर अधिकारी परमेश्वर की ओर से नियुक्त किएं जाते है। यह सही और बुद्धिमानी है। शरीफ़ लोग इस बात को समझते हैं। वे जानते हैं कि अधिकार हर किसी की भलाई के लिए है, इसलिए वे अधिकार को मानते हैं और उसका पालन करते हैं। शरीफ़ लोग जानते हैं कि अधिकार परमेश्वर की ओर से है, इसलिए वे उसके नियुक्त शासकों का पालन करके उसकी आज्ञा मानते हैं (रोमियों 13:1-7; 1 पतरस 2:13-23; 3:1-6)।

दुष्ट और बदमाश लोग अधिकार से नफ़रत करते हैं। जब उन्हें बताया जाता है कि वे क्या कर सकते हैं और क्या नहीं तब उन्हें गुस्सा आता है, इसलिए वे क़ानून का उल्लंघन करते हैं और उन्हें जो करना है वही करते हैं। परमेश्वर उन्हें अलौकिक और प्राकृतिक रूप से दण्ड देने के लिए निर्दयी शत्रुओं को भेजता है। सत्ता से द्वेष रखने वाले बदमाशों को किसी न किसी तरह सत्ता द्वारा कुचल दिया जाएगा। बग़ावत करनेवाले सभी दंगाईयों को अंत में क़ानून से कुचल दिया दिया जाएगा।

आज हमारे देश में (और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी) दंगों को होने दिया जाता है और दंगाईयों की हिफ़ाज़त भी की जाती है। इसे कुछ तो सामान्य और मर्दानगी भी मानते हैं। फ़िल्मों की कहानियों में अक्सर अधिकारियों और सत्ता में बैठे लोगों को भ्रष्ट दिखाकर उनकी शान और इज्ज़त की धज्जियां उड़ाई जाती है। बच्चे माता-पिता के विरुद्ध विद्रोह करते हैं, जिन्हें जनता की राय या कानून द्वारा अपना नियम लागू करने से रोक दिया गया है। आज अधिकांश क़ानूनों और उनके अमल को बुराई के रूप में देखा जाता है। समाज को इस प्रयोग की भयानक कीमत चुकानी पड़ रही है, जैसा कि हमारे देश की गिरती नैतिकता से भी स्पष्ट है।

दंगा एक भयानक पाप है। यह दिखाता है कि मनुष्य कितना अहंकारी, विपरीत बुद्धि का, दुर्भावनापूर्ण और अपनी मनमर्जी करने वाला हो सकता है। परमेश्वर इसकी तुलना जादू-टोने से करता है (1 शमू 15:23)। जब भी आप किसी दंगाई को देख लें, तो समझो आपने बुराई का चहरा देख लिया है। ये मूर्ख न तो सुधारते हैं और न क़ानून के सामने अपने घुटने टेक सकते हैं, इसलिए उनके पास एक ही तरीका होता है – दंगा। लेकिन महान परमेश्वर, जो सब अधिकार और शासन का मूल है, अंत में उनकी विपत्ति पर हँसेगा। वह ऐसे विद्रोही दंगाइयों के खिलाफ अपना न्यायपूर्ण प्रतिशोध लेने के लिए क्रूर शासकों को भेजेगा और उन्हें वर्तमान में सज़ा देगा और फिर अनन्तकाल की पीड़ा भोगने के लिए उन्हें नरक में डाल देगा।

पाठक, जब दूसरे आपको सुधारते हैं तब क्या आपने क्रोधित भावना महसूस की है? क्या आपको उन अधिकांश चीज़ों पर सवाल उठाना ज़रूरी लगता है जो आपसे करने के लिए कहा जाता है? आपके लिए क्या अधिक महत्वपूर्ण है – आपके अधिकार या आपके कर्तव्य? यह आपके मूर्ख स्वभाव का पहलू है जो अपने ऊपर किसी का नियंत्रण नहीं चाहता। यद्यपि आप इस दुनिया में पूरी तरह से असहाय और अज्ञानी शिशु के रूप में आए थें, लेकिन कुछ ही महीनों में आप दूसरों के अधिकार या ज्ञान की परवाह किए बिना अपनी इच्छानुसार काम करने में सक्षम होने की उम्मीद करते हैं।

विद्रोह के कारण इस संसार में पाप का प्रवेश हुआ। शैतान ने स्वर्ग में अपने पद को स्थिर न रखा वरन् परमेश्वर के ख़िलाफ विद्रोह किया – वह परमेश्वर के तुल्य होना चाहता था (यहूदा 1:6)। अदन में परमेश्वर के वचन के विरुद्ध विद्रोह करके आदम समस्त मानवता पर शारीरिक और अनन्त दोनों प्रकार के मृत्युदण्ड को ले आया (उत्पत्ति 2:17; रोमियों 5:12-14)। परमेश्वर ने पुरुष-स्त्री के बीच यौन संबंध के लिए जिन प्राकृतिक नियमों को दिया उनके विरुद्ध विद्रोह करने के कारण परमेश्वर सदोम को जला दिया (यहूदा 1:7)। और उसने मूसा के विरुद्ध शिकायत करने वाले विद्रोहियों को निगलने के लिए पृथ्वी का मुँह ही खोल दिया (गिनती 16:1-34)।

आज ऊपर से नीचे तक दंगों को बढ़ावा दिया जाता है। ऊपर से – मनुष्यों के सामने गिडगिडाने वाले एक कमज़ोर व्यक्ति के रूप में परमेश्वर की गलत तस्वीर जिससे लोगों को लगता है कि वे उसका और बाइबल इनकार कर सकते हैं। और नीचे से – अपने बच्चों को सबकुछ करने की अनुमति देनेवाले माँ-बाप और चाटुकारिता करनेवाले स्कूल बच्चों को उनकी स्वतंत्रता के लिए खतरा बननेवाली किसी भी बात के खिलाफ विद्रोह करने के लिए तैयार करते हैं। और इन दोनों के बीच में हैं मानवाधिकार का रोना रोनेवाले ढोंगी मूर्ख जो दंगा करनेवालों की हिफाज़त करनेवाले कानून बनवाते हैं – जैसे श्रमिक संघ और अभिव्यक्ति की आज़ादी – जिससे बुराई और भी बढ़ जाती है (सभो 10:5-7)।

यह दुष्ट षडयंत्र व्यापक अराजकता को जन्म देता है। महिलाएं पतियों की अधीनता के खिलाफ विद्रोह करती हैं, नारी-शक्ति के नाम से दूसरों के बसे-बसाएं घर उजाड़ देती हैं। छात्र शिक्षकों की अवज्ञा करते हैं, जिससे कक्षा में अराजकता फैल जाती है। तथाकथित देशभक्त देशभक्ति के नाम पर अल्पसंख्यक नागरिकों पर मूर्तिपूजा का एक स्वरुप थोपते हैं जिन्हें सरकारे खुद अपना समर्थन और सुरक्षा मुहैया कराती हैं, और ऐसे असामाजिक तत्व सिर्फ़ अराजकता को बढ़ावा देते हैं। चर्चों में चर्च की समितियां पास्टरों पर अपना दबाव बनाकर रखते हैं, पास्टरीय बुद्धिमान नेतृत्व को निष्प्रभावी कर देते हैं। महिलायें बाल काटती हैं, तो पुरुषों के बाल लंबे होते हैं, रैप को संगीत कहा जाता है, टेलीविज़न के छिछोरे बकवादियों को कलाकार कहा जाता है, युवा अपने पूरे शरीर को रंगों से पोत देते हैं और व्यभिचार को प्रेम कहा जाता है।

यहोवा, महान परमेश्वर, अपने वचन या अपने नियुक्त अधिकारियों के विरुद्ध विद्रोह को दण्ड देगा। उसने मूसा को केवल एक आदेश के विरुद्ध विद्रोह करने के कारण कनान में प्रवेश से वंचित रखा (गिनती 20:24)। वह आम नागरिकों के बीच रहनेवाले ऐसे विद्रोहियों का वर्णन करता है जो सरकारी शासकों के प्रति असम्मानजनक बातें करते हैं, और उनकी तुलना उन पागल कुत्तों से करता है जिन्हें सेना की गोली का निशाना बनाकर मार गिराने की ज़रूरत है (2 पतरस 2:10-12; यहूदा 1:8-10)। सावधान!

विद्रोही बच्चों के बारे में सुलैमान के ज्ञान पर विचार करें, ” जिस आँख से कोई अपने पिता पर अनादर की दृष्टि करे, और अपमान के साथ अपनी माता की आज्ञा न माने, उस आँख को तराई के कौवे खोद खोदकर निकालेंगे, और उकाब के बच्चे खा डालेंगे” (नीतिवचन 30:17)। और, ” जो अपने माता–पिता को कोसता, उसका दिया बुझ जाता, और घोर अन्धकार हो जाता है” (नीतिवचन 20:20)। आज की सड़ी हुई इस दुनिया में इस प्रकार का उपदेश शायद राजनीतिक रूप से भले ही सही न हो, लेकिन याद रखें कि परमेश्वर ने इसे लिखने के लिए सबसे बुद्धिमान राजा को प्रेरित किया।

उसने दंगा करनेवाले विद्रोही नागरिकों के विरुद्ध क्या कहाँ उस पर विचार करो, “हे मेरे पुत्र, यहोवा और राजा दोनों का भय मानना; और बलवा करनेवालों के साथ न मिलना; क्योंकि उन पर विपत्ति अचानक आ पड़ेगी, और दोनों की ओर से आनेवाली विपत्ति को कौन जानता है” (नीतिवचन 24:21-22)? और, “राजा का भय दिखाना, सिंह का गरजना है; जो उस पर रोष करता, वह अपने प्राण का अपराधी होता है” (नीतिवचन 20:2)। आज दुनियाभर के लोग और विशेषकर अमेरिका और भारत में, मानते हैं कि शासकों का अपमान करना और उनके विषय में बुरी बातें कहना उनका अधिकार है।

ख्रिश्चन पाठक, आज अधिकारियों के प्रति आज्ञाकारिता और समर्पण सीखना बुद्धिमानी है। शासन और अधिकार का मूल्य समझों! अपने शासकों और अधिकारियों में आनन्द मनाओ! सभी अधिकार परमेश्वर से शुरू होते हैं, इसलिए आपको सबसे पहले अपने जीवन के लिए उनकी आज्ञाओं और नियमों का पालन करके खुद को जांचना और मापना चाहिए (भजन 119:128)। बाइबल मानव अधिकार के पाँच क्षेत्रों – परिवार, विवाह, नागरिक, रोज़गार और धार्मिक – में आपके कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से वर्णन है। उन्हें सीखें, वैसा ही करें और अपने बच्चों को भी करना सिखाएं।

अधिकार के प्रति अधीनता और आज्ञाकारिता की सबसे बड़ी मिसाल हमारा प्रभु यीशु मसीह है । जब यहूदियों ने उसके विरुद्ध षडयंत्र रचा और उसपर सब प्रकार के झूठें आरोप लगाएं और रोमी सरकार ने भी झूठे मुकदमे चलायें, तब वह इन सब यातनाओं में अपने पिता का आज्ञाकारी पुत्र बना रहा और इस हद तक कि क्रूस पर मृत्यु तक सह ली। उसने परमेश्वर से इस पीड़ा से बाहर निकलने का रास्ता मांगा, लेकिन उसने पूरी तरह से परमपिता परमेश्वर की इच्छा का पालन किया और स्वेच्छा से इतिहास के सबसे अमानवीय अपराध का शिकार बन गया (मत्ती 26:38-44; फिल 2:6-8; इब्रानियों 5:7) -10)। उसके इस पवित्र उदाहरण को सामने रखकर अपने को सब अधिकार के प्रति आज्ञाकारी और समर्पित रखें (1 पतरस 2:13-23)।

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