नीतिवचन 16:9
मनुष्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता है, परन्तु यहोवा ही उसके पैरों को स्थिर करता है।
मनुष्यों में दिमाग होता है। वे अपना लक्ष्य निर्धारित करते हैं और उन्हें प्राप्त करने के तौर-तरीकें ढूंढते हैं। नासझ पशु ऐसा नहीं कर सकते; वे केवल उकसाने पर अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति से प्रेरित होकर प्रतिक्रिया देते हैं, जैसे कि कुत्ते, बिल्लियाँ, बन्दर, आदि। लेकिन सृष्टिकर्ता परमेश्वर अपनी संप्रभुता में उन सब कामों और घटनाओं का एक एक पल और एक एक हलचल को नियुक्त करता है, ताकि आप अपने हर काम और योजना के लिए उस पर निर्भर रहें, क्योंकि वह धर्मीजन के लिए समस्त सृष्टिक्रम को अनुकूल बनाता है और दुष्ट मनुष्य की योजनाओं को उलट कर रख देता है।
सुलैमान का यह नीतिवचन महत्वपूर्ण है। परमेश्वर आपके जीवन को चलाता है। इन्सान अपने मन में केवल युक्ति कर सकता है, लेकिन उसे अन्जाम देना है या नहीं इसका फैसला परमेश्वर करता है। मनुष्य भले ही अपनी इच्छा से कल्पना करता है, परन्तु यह परमेश्वर है जो उसे अपनी सामर्थ से चलाता है। मनुष्य रचनात्मक योजनाएँ बनाता है, किन्तु परमेश्वर कुशलतापूर्वक पहले से उन्हें ठहराता है। मनुष्य सोचता है कि वह अपनी इच्छानुसार कार्य कर रहा है; परन्तु परमेश्वर अपनी सुमति से मनुष्य के कार्यों का उपयोग करता है। परमेश्वर यहोवा है! आपका जीवन और उसमें होनेवाली सब घटनाएँ उसके हाथों में हैं। इसलिए सिखें कि आपको इस ज्ञान का उपयोग कैसे करना है।
बहुत से लोग जीवन भर भटकते हैं और इस अचरज में रहते हैं कि काश वे जानते कि उनके लिए परमेश्वर की इच्छा क्या है। लेकिन उसकी इच्छा कोई रहस्य नहीं है, और इस दुविधा का एक बड़ा उत्तर इस नीतिवचन में है। अपने कामों को यहोवा पर डाल दो (नीतिवचन 16:3; भजन 37:4-5); आप अपनी सुइच्छाओं में जिन भले लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहते हैं उसके लिए युक्ति तैयार करें (नीतिवचन 16:1; 15:22; 20:18), और फिर विश्वास रखें कि आपके क़दमों को उन लक्ष्यों की ओर कैसे ले जाना है इसका ध्यान वही रखेगा (भजन 37:23; 84:11)।
आज्ञाकारी ख्रिश्चन पाठक, ये वचन आपके लिए लिखें हैं: प्रभु ने आपको एक मन दिया है, इसलिए आप जो पाना चाहते हैं उसके प्रति एक निरन्तर लगन रखें। उसने आपको दिमाग दिया है, इसलिए सोचो कि आप अपने लक्ष्यों को कैसे हासिल कर सकते हो। एक बार जब आप इसे परमेश्वर को सौंप देते हैं और बाइबल में प्रगट बुद्धि के नियमों का शिद्दत से पालन करते हैं, तो इसके लिए आगे बढ़ें! इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह लक्ष्य क्या है! बस उसे परमेश्वर की इच्छा पर समर्पित कर दें (याकूब 4:13-15)।
जैसा कि लोग सोचते हैं, मनुष्य का कोई “परफेक्ट प्लान” नहीं है, इसलिए “परफेक्ट प्लान” की खोज में न रहें। आप एक पापी संसार में रहते हैं; यहाँ कुछ भी “परफेक्ट” है। परमेश्वर ने मनुष्य के लिए कोई “परफेक्ट” फैसला प्रकट नहीं किया है। आप अगले पांच मिनट में क्या होगा वह भी नहीं देख सकते। अपने जीवन को चिंताओं में बर्बाद मत करो, नहीं तो तुम हमेशा निराश ही रहोगे। यदि परमेश्वर आपके कदमों को निर्देशित करें तो कई अच्छी नौकरियाँ आपकी सेवा कर सकती हैं। और यह बात विवाह, मकान, व्यापारिक सौदे, भरा-पूरा परिवार, आदि के साथ भी सच है, यदि आप प्रकट बुद्धि को मानते हैं।
परन्तु अगर आप परिस्थितियों से डरते हैं या परफेक्ट प्लान की चिंता करते हैं, तो आप कोई भी युक्ति सोचने से हिचकिचाएँगे या कुछ नहीं करेंगे, और आप परमेश्वर की उन आशिषों से वंचित रह जाएंगे जिन्हें वह विश्वास और कर्म के आधार पर देता है (सभो 11:3-6)। इन्सानी आत्म-विश्वास को कमज़ोर करनेवाली इस परिस्थिति का विश्लेषण किया जाए तो इसे पक्षाघात कहा जा सकता है। हालाँकि कुछ विश्लेषण अच्छे होते हैं, लेकिन बहुत अधिक विश्लेषण ध्यान भटकाने वाला और विनाशकारी होता है। चूँकि आप नहीं जानते कि अब से पाँच मिनट बाद क्या होगा, अत: जो कुछ भी आपको करने को मिला है उस पर बाइबल से बुद्धि और ज्ञान पाकर उत्साह के साथ चलते रहें (सभो 9:10)।
रूत विदेशी भूमि में रहने गई एक गरीब विधवा थी। उसने अपने मन में खेत बीनने की युक्ति कीं- अर्थात काटने वालों के पीछे चलकर ज़मीन पर गिरे अनाज के दाने बीनने की युक्ति–एक तुच्छ काम था जिसका कोई भविष्य नहीं (रूत 2:2)। परन्तु यहोवा ने उसके कदमों को बोअज़ के खेत की ओर निर्देशित किया, जो एक धनवान और अविवाहित व्यक्ति था जिसने बाद में उससे शादी कर ली, और दाऊद दोनों का परपोता हुआ (रूत 2: 3; 4:17)। परमेश्वर को महिमा दो!
फ़ारसी साम्राज्य में यहूदियों का नरसंहार करने का षडयंत्र रचा गया था। एस्तेर ने अपने मन में राजा क्षयर्ष और हामान को दोपहर के भोजन के लिए बुलाने की योजना बनाई, बावजूद इसके कि राजा को निमंत्रित करने बिना इजाज़त राजभवन में जाने पर उसे अपनी जान का खतरा था (एस्तेर 4:16-17)। परन्तु यहोवा ने बड़े स्नेह और दया से राजा का मन उसकी ओर फेर दिया। जब उसने उसे हामान की बुरी योजनाओं के बारे में बताया, तो हामान पर एस्तेर रानी से अपनी जान की भीख मांगने की नौबत आई, और आगे क्या हुआ आप जानते हैं (एस्तेर 7:7-8)। परमेश्वर को महिमा दो!
अब्राहम ने इसहाक के लिए पत्नी ढूंढने की एक युक्ति निकाली और उसके दास की सबसे पहली भेट रिबका से हुई। जब याकूब को अपने भाई एसाव से भागना था तब उसने एक युक्ति निकाली, और परमेश्वर ने उसे एक भरा-पूरा परिवार देने के साथ साथ धनवान भी बनाया। जब यूसुफ को पोतीपर की पत्नी से यौन-सम्बन्ध स्थापित करने का मौका मिला तब उसने धर्मी बने रहने का फैसला किया, और परमेश्वर यहोवा ने उसके कदमों को मिस्र के सिंहासन की ओर निर्देशित किया। यिशै ने अपने सबसे छोटे बेटे दाऊद को भेजकर सेना में युद्ध लड़ रहे अपने बेटों के लिए भोजन कैसे भेजा जाए इसकी युक्ति निकाली, और उसे इस बात की भनक भी नहीं थी कि परमेश्वर गोलियत के साथ मुकाबला करने दाऊद के पैरों को चला रहा था।
लेकिन इसके विपरीत एस्तेर पर फिर से एक बार विचार करें। हामान ने अपने मन में यहूदियों को मिटाने की एक युक्ति निकाली, और उसने राजा क्षयर्ष को आज्ञापत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए उकसाया (एस्तेर 3:1-15)। लेकिन यहोवा ने उसके पैरों को ऐसे चलाया कि उसकी युक्ति उसी के लिए फाँसी का फंदा बन गई, कि जब वह राजा से मिलने पहुँचा तो बाज़ी ऐसे पलट गई कि उसकी ही अप्रतिष्ठा हुई और परिणामस्वरूप मोर्दकै का सम्मान हुआ, और वह एस्तेर के चरणों में गिरकर अपनी जान की भीख माँगने लगा (एस्तेर 5: 1 – 7:10)।
अब यूसुफ पर फिर से विचार करों। उसके भाइयों ने इस “स्वप्न देखने वाले” से छुटकारा पाने की युक्ति निकाली, जो उन्हें अपने दिव्य दर्शनों से मानसिक पीड़ा दे रहा था, लेकिन यहोवा ने उनके पैरों को चलाया कि वे उसे मिस्र जा रहे लोगों को बेच दें, जहां उसने कुछ साल बाद उन सभी को अकाल की भुखमरी से बचाया (उत्पत्ति 45: 4- 8;50:19-21)। आख़िरकार उनके जीवन में यूसुफ का वह हर सपना पूरा हुआ जो उसने देखा था कि वे उनके सामने झुकेंगे।
यहूदियों ने नासरत के यीशु से छुटकारा पाने के लिए अपने मन में युक्तियाँ कीं, परन्तु महिमामय परमेश्वर ने उनकी युक्तियों को उलट दिया। उसका सूली पर चढ़ाया जान उन अन्यजातियों के उद्धार के लिए परमेश्वर की योजना थी जिनसे यहूदी बैर रखते थे और उनके विनाश की कामना करते थे, और बाद में सन 70 में परमेश्वर ने उनके अपराध का न्यायपूर्ण बदला चुकाने के लिए एक पागल रोमी सम्राट को भेजा जिसने उनके मंदिर, नगर और राष्ट्र का विनाश कर दिया। इस सबसे जघन्य अपराध में उन्होंने जो भी कदम उठाया वह केवल परमेश्वर के सनातन उद्देश्य के अनुसार ही था (प्रेरितों 2:23; 3:18; 4:28; 15:18)।
दुष्ट मनुष्यों की युक्तियों के विषय में सुनकर चिन्ता न करना। वे ऐसा कुछ भी नहीं कर सकते हैं जिसकी परमेश्वर ने अपनी महिमा, उद्देश्यों और लोगों के लिए सनातन काल में ही अंजाम देने की योजना न बनाई हो। दुष्ट लोग सिर्फ़ उसके मोहरे या कठपुतलियाँ हैं – उसकी तलवार और उसका हाथ (भजन 17:13-14)। याद रखें, वह उन्हें भ्रम में रखने और धोखा देने देने के लिए इस पृथ्वी पर सब प्रकार से समृद्ध भी बना सकता है (नीतिवचन 1:32)। याद रखें, वह उन्हें कुछ समय के लिए सफल भी होने दे सकता है ताकि वे आपके लिए धन इकट्ठा करें (नीतिवचन 13:22)।
जब आप पर कोई निर्णय लेने का समय आता है और आप नहीं जानते कि क्या करना है, तो यहाँ बुद्धि और समझ है: अपना जीवन और अपने सब काम परमेश्वर को सौंप दें, ईश्वरीय ज्ञान की सीमा में रहकर वह मार्ग चुनें जो आपको सबसे अधिक पसंद हो, कई बुद्धिमान सलाहकारों की स्वीकृति प्राप्त करें, और जो बातें आपके नियंत्रण से बाहर हैं उनकी चिंता परमेश्वर पर छोड़े और उसी पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़ें। सही लक्ष्यों या रणनीतियों के बारे में चिंता न करें, क्योंकि आप उन्हें जानने में सक्षम नहीं हैं। आपका स्वर्गीय पिता आपकी परवाह करता है, और वह आपकी ऐसी किसी भी “गलती” के लिए जो आपने नासमझी में ग़लत फैसलें लेकर की है, क्षतिपूर्ति करने में सामर्थी है (योएल 2:25-27)।
भजन 127:1-2 में प्रगट अतिरिक्त ज्ञान को सीखें, जहां दाऊद ने समझाया कि अगर परमेश्वर आशीष न दे तो आपके सर्वोत्तम प्रयास और कड़ी मेहनत सब व्यर्थ हैं। हालाँकि परमेश्वर आपसे अपेक्षा करता है कि आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूरी लगन से काम करें, परिणाम वास्तव में उसके अनुग्रह पर निर्भर करता है, न कि आपकी क्षमता, प्रतिभा, या योजना बनाने या योजनाओं को क्रियान्वित करने में आपके परिश्रम पर। वह चाहता है कि आप अत्यधिक चिंताओं या प्रयास का त्याग करें और चैन की नींद सोए, क्योंकि वह आपसे प्रेम करता है और वह सबकुछ देगा जिसकी आपको ज़रूरत है।
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