नीतिवचन 16:8
अन्याय के बड़े लाभ से, न्याय से थोड़ा ही प्राप्त करना उत्तम है।
कौन-सी बात आपके जीवन को बेहतर बनाएगी? अधिक पैसा? या अधिक धार्मिकता? आपके उत्तर से पता चलता है कि आप बुद्धिमान हैं या नहीं। अगर आपको लगता है कि अधिक पैसा आपके जीवन को बेहतर बना देगा, भले ही आपने इसे पाने के लिए सत्य से समझौता किया हो, तो आप मूर्ख हैं। आप के पास अब जो है यदि आप उसे स्वीकार करते हैं, जबकि आप धार्मिकता में अधिक बढ़ते जाते हैं, तो आप बुद्धिमान हैं। इस पाठ पर चिंतन करें।
जीवन प्राथमिकताओं के आधार पर किये चुनाओं की एक श्रृंखला है। विवेकपूर्ण प्राथमिकताएँ बुद्धिमानीपूर्ण चुनाव करने की ओर ले जाती हैं, जो एक सफल जीवन का निर्माण करती हैं। परमेश्वर ने मनुष्य को प्राथमिकताओं के सम्बन्ध में मूल्यों की एक प्रणाली दी है, और सुलैमान ने अपने व्यापक प्रयोगों और निरीक्षणों के माध्यम से इसकी पुष्टि कीं। परन्तु ऐसे महान पुरुष और स्त्रियाँ बहुत ही कम हैं जो अपनी प्राथमिकताओं को परमेश्वर की प्राथमिकताओं के तालमेल में रखते हैं और बुद्धिमानीपूर्ण चुनाव करते हैं (नीतिवचन 13:7; 28:6)।
आपका जीवन कैसे बेहतर बन सकता है? इसे बेहतर बनाने के कई तरीके हैं। सबसे पहला, आप बिना किसी अपराध-बोध या शर्म के बहुत सुखी, अधिक कामयाब और संतुष्ट, और शांति तथा आनंद से भरे हुए हो सकते हैं। यह जीने का एक शानदार तरीका है। दूसरा, परमेश्वर आपकी जीवनशैली को मान्यता और आशीष देगा, यदि आप इसे उसके धार्मिक मानकों के अनुसार जीते हैं। तीसरा, आप उन्हीं धार्मिक मानकों के अनुसार जीवनशैली को जीकर मनुष्यों की दृष्टि में उसी महान प्रतिष्ठा का निर्माण कर सकेंगे जो आपने परमेश्वर की दृष्टि में कीं। तो, सबक सरल है, एक सफल जीवन वह नहीं है कि आपके पास क्या क्या है, बल्कि यह है कि आप उसे कितने सही तरीके से जीते हैं।
क्यों इतने कम लोग परमेश्वर और मनुष्यों के सामने सफल जीवन जी पाते हैं? क्योंकि इस संसार की प्राथमिकताएँ परमेश्वर की प्राथमिकताओं के विपरीत हैं! परमेश्वर की धार्मिकता की परवाह किए बिना ही यह दुनिया सफलता को कॉलेज की शिक्षा, एक सफल कैरियर, एक आरामदायक घर और एक अच्छी सेवानिवृत्ति के द्वारा मापती है। परमेश्वर सफलता को संतोष-सहित भक्ति के जीवन से मापता है (1 तीमु 6:6)। ये दोनों लक्ष्य एक-दुसरे से कितने विपरीत हैं? पूरी तरह से विपरीत हैं! धर्मी होने के लिए आपको कितना निर्धन बनना होगा?
सुलैमान बिल गेट्स की कल्पना से कही अधिक धनवान और शक्तिशाली मनुष्य था। उसकी 1,000 पत्नियां थीं। सभोपदेशक की पुस्तक में मनुष्य के जीवन का मुख्य उद्देश्य क्या होना चाहिए इस विषय पर उसकी खोज का विवरण लिखा है। उसने यह लिखकर अपनी छानबीन का सारांश रखा कि परमेश्वर का भय मानना और उसकी आज्ञाओं का पालन करना ही मनुष्य का संपूर्ण कर्तव्य है (सभोपदेशक 12:13-14)। उसी ने यह नीतिवचन भी लिखा, क्योंकि उसने धन को व्यर्थ और निराश करनेवाला पाया, और वह जानता था कि हर एक मनुष्य पृथ्वी पर के अपने जीवन-काल के चालचलन का लेखा देगा।
धार्मिकता को पृथ्वी पर के सबसे विशाल धन से अधिक एक उच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। परमेश्वर को प्रसन्न करना बड़े धन से अधिक महत्वपूर्ण होना चाहिए। यदि ऐसा है, तो आप धनवान होने के बजाय सही होने का निर्णय लेंगे। आप रविवार का उपयोग प्रभु के लिए करेंगे। आप पूरी तरह ईमानदार होंगे। आप दुष्ट लोगों से बचेंगे, चाहे वे कितने भी मिलनसार या सफल क्यों न हों। आप परमेश्वर और निर्धन मसीहियों को उदारता से देंगे। आप कमाई को बचाएंगे, कर्ज से बचेंगे और किसी और के क़र्ज़ में जामिन बनने से इनकार करेंगे। आप काम पर अधिक समय देने से पहले अपने पापों को मानने, वचन पर मनन करने, प्रार्थना करने और आत्म-परीक्षण करने में अधिक समय व्यतीत करेंगे।
लूत और अब्राहम पर विचार करें। लूत ने आर्थिक लाभ के लिए यरदन के हरे-भरे मैदानों को चुना, जबकि अधर्मी सदोम नगर वहाँ से कुछ ही दूरी पर था (उत्पत्ति 13:10-13)। उसने अंत में सब कुछ खो दिया, और दुर्दशा में पहुँचकर अपनी बेटियों के साथ एक गुफा में रहने लगा (उत्पत्ति 19:30-38)। अब्राहम ने बंजर भूमि ले ली, लेकिन वह परमेश्वर का मित्र और इस्राएल का पितामह बना। यद्यपि दोनों मनुष्य उद्धार पाने परमेश्वर के चुने हुए थे, फिर भी लूत ने अपना भौतिक जीवन बर्बाद और व्यर्थ कर दिया; अब्राहम ने परमेश्वर की संगति को बड़ा प्रतिफल जानकर बंजर भूमि को स्वीकार किया। आप इन दोनों मनुष्यों में से कौन बनना चाहेंगे?
मूसा ने मिस्र के सुख और धन को ठुकरा दिया, ताकि परमेश्वर के लोगों के साथ रहे और मसीह के धन की खोज करे (इब्रानियों 11:24-26)। परन्तु एक धनवान जवान मनुष्य साक्षात् परमेश्वर के पुत्र, यीशु मसीह से ही दूर चला गया, क्योंकि वह धन से बहुत अधिक प्रेम करता था (मत्ती 19:16-26)। मूसा को आज तक उसके नाम से जाना जाता है और एक महान व्यक्ति के रूप में सम्मानित किया जाता है, लेकिन एक मूर्ख शासक जिसकी प्राथमिकताएं ग़लत थी, इस बात का एक गुमनाम उदाहरण है कि कैसे नहीं जीना चाहिए। आप किस प्रकार के जीवन का चुनाव करेंगे?
यदि आप परमेश्वर का भय मानते हैं और उसे प्रसन्न करने को महत्व देते हैं, तो आप बड़े उत्साह से लूत और उस मूर्ख धनवान मनुष्य के ऊपर अब्राहम और मूसा बनने का चुनाव करेंगे। लेकिन इस समीकरण को बिठाने के लिए और भी बहुत कुछ है, क्योंकि जो कोई परमेश्वर के लिए अपना भौतिक जीवन देता है, उसे आत्मिक आशीषें प्राप्त होंगी, और जो कोई अपने भौतिक जीवन को बचाने का प्रयास करता है, उसे आत्मिक जीवन की हानि होगी (मत्ती 16:24-26)। आज तक ऐसा कोई मनुष्य नहीं हुआ है जिसने प्रभु के लिए अपना सब धन त्याग दिया हो और उसे उसका इस जीवन और आनेवाले अनंत जीवन में प्रतिफल न दिया गया हो (मरकुस 10:28-30)।
धार्मिकता से कमाया थोड़ा-सा धन अधर्म के धन से कैसे बेहतर है? कोई भी धनराशि अपराधबोध से भरे विवेक को छुटकारा नहीं दे सकती। कोई भी धनराशि आपकी पापमय नैतिकता के प्रतिफल स्वरुप आप पर आनेवाली परमेश्वर की ताड़ना का दाम नहीं चुका सकती है। कोई भी धनराशि आत्मिक आशीषों के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती। कोई भी धनराशि आपके परिवार को सांसारिकता और भौतिकवादी मानसिकता से वापस नहीं खरीद सकती। कोई भी धनराशि आपके प्राण को धन के छलावे से छुटकारा नहीं दे सकती (1 तीमु 6:6-10)। न्याय के दिन कोई भी धनराशि आपको बचा नहीं पाएगी।
आप कौन बनना चाहेंगे? वह धनवान जो प्रति दिन बैंजनी और मलमल के वस्त्र पहनकर सुख-विलास और ऐय्याशी का जीवन जी रहा था, या वह कंगाल लाजर, जो उसके फाटक पर भूखा पड़ा रहता, और अपने फोड़ों को आवारा कुत्तों से चाटवाया करता था? यहाँ धन और निर्धनता के बीच मौज़ूद सबसे चरम विषमता को दिखाया गया है। यकीनन आप उन दोनों के अनंत गंतव्यों को महत्व देकर लाजर को चुनने का पलड़ा अधिक भारी समझेंगे। परन्तु विश्वास, आशा, आनन्द और आत्मा की शान्ति की अगर बात करें, तो लाजर भी इस संसार में उस धनवान मनुष्य से ज्यादा सुखी था।
इस नीतिवचन की शिक्षा का सम्बन्ध रोमन कैथोलिक धर्म के फादरों और ननों द्वारा की जानेवाली गरीबी की प्रतिज्ञा से बिलकुल भी नहीं है, क्योंकि वे साफ़ साफ़ झूठ बोलते हैं: नए नियम में कोई फ़ादर या नन नहीं हैं – केवल पास्टर और कलीसिया के सेवक हैं (1 तीमु 3:1-13; फिलिप्प 1:1)। परमेश्वर ने हमें सब कुछ बहुतायत से दिया है ताकि हम उनका आनंद ले सकें (1 तीमुथियुस 6:17-19), और सुसमाचार के सेवक अपनी मजदूरी पाने के योग्य हैं (1 तिमुथियुस 5:17-18; 1 कुरिन्थियों 9:3-11)। मठ में रहनेवालों के पाखंड के बारे में कुछ भी सही नहीं है जो मांस खाने से परहेज करनेवाले और विवाह करने पर पाबन्दी लगानेवाले शैतानी झूठ का अनुसरण करते हैं (1 तीमु 4:1-3; कुल 2:18-23)।
आपने आज कुछ चुनाव किए हैं, और आप और भी अन्य चुनाव करेंगे। कौन-सी प्राथमिकताएं आपका चुनाव और निर्णय तय करती हैं? क्या आपने खुद को इस दुनिया की मूल्य-प्रणाली के हाथों बेच दिया है, या आप अपने पूरे मन से यहोवा परमेश्वर की मूल्य-प्रणाली के प्रति समर्पित हैं? इस नीतिवचन में आपके सामने बुद्धिमान प्राथमिकताओं का एक अटल कानून है। सुनिश्चित करें कि आप धन के ऊपर धार्मिकता को चुन रहे हैं और उसी को महत्व दे रहे हैं, या आप का अन्त लूत के समान, उस मूर्ख धनवान शासक के समान, या नरक में डाले गए उस धनवान मनुष्य से समान होगा।
हर दिन सही और बेहतर चुनाव करें, और आप एक बेहतर जीवन के धनी बनेंगे, क्योंकि जीवन रोज रोज के चुनाओं की श्रृंखला से कही अधिक बढ़कर है। जो सही है वही करो, और तुम्हारे कमाई की देखभाल परमेश्वर को करने दो। तरक्की करने के लिए धार्मिकता से समझौता न करें, क्योंकि लाभ पाने का ऐसा चुनाव अनंतकाल में काम नहीं आएगा (नीतिवचन 15:27; 20:21; 28:21-22; 11:19)। ऐसा मनुष्य अधोगति में जा रहा है। यदि आप परमेश्वर का आदर करते हैं, तो वह आपको उस रीति से धनवान भी बना सकता है जिसे आप अभी नहीं देख पा रहे हैं (नीतिवचन 10:22)।
आपका जीवन क्या होगा? धर्मियों का श्रेष्ठ जीवन, ताकि आप जो कुछ भी करें उस पर परमेश्वर की आशीष हो? या लाभ के लोभी मनुष्य का शापित जीवन, जो अपना विवेक और शान्ति खो देता है, और परमेश्वर उससे वह भी ले लेता है जो उसके पास है और उसे उस मनुष्य को देता है जो उसकी आज्ञाओं का पालन करता है? चुनाव आपका है – परिणाम क्या होंगे इसका सुलैमान ने वर्णन किया है – आप क्या करेंगे?
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