नीतिवचन 16:23

बुद्धिमान का मन उसके मुँह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है।

बुद्धिमान मनुष्य अपनी बुद्धि छिपा नहीं सकते; वह उनके भाषण से प्रगट होती है। बुद्धिमान लोग अपनी बुद्धि बर्बाद नहीं करते; वे अपने मुँह और होठों को अनुग्रह से भरी और दूसरों की उन्नति करनेवाली बातें बोलना सिखाते हैं। एक व्यक्ति जिस प्रकार से बातें करता है इससे उसके अन्य किसी भी कार्य की तुलना में यह साबित होता है कि वह कितना बुद्धिमान है या कितना मूर्ख है। मूर्ख अपनी मूर्खता को छिपा नहीं सकते, क्योंकि उनके शब्द उनकी मूर्खता को शीघ्र ही और निश्चित रूप से प्रकट कर देते हैं (सभो 10:12-13)।

पाठक, क्या आप परमेश्वर और मनुष्यों की दृष्टि में महान बनना चाहते हैं? सफलता के लिए एक अच्छे और ईमानदार मन की आवश्यकता होती है, क्योंकि जीवन की सब बातों का आरम्भ वही से होता है (नीतिवचन 4:23; मत्ती 12:34-35; 15:16-20)। मन में नेक, शुद्ध और बुद्धिमान इरादे जल्द ही व्यक्ति के जीवन की बाकी पहलुओं को सिखाएंगे और उन्हें बदल देंगे, खासकर उसके मुँह से निकलने वाली बातों को। क्योंकि मुंह के वचन दूसरों को बहुत स्पष्ट सुनाई देते हैं और सुनने वालों पर या तो अच्छी छाप पडती है या बुरी, इसलिए श्रेष्ठ वचन बोलना ही महान बनने की चाह रखने वाले व्यक्ति का एक उच्च लक्ष्य होता है।

क्या आप जीवन का वृक्ष हैं? ” शान्ति देनेवाली बात जीवन–वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है” (नीतिवचन 15:4)। परमेश्वर ने आपको जीभ इसलिए दी है कि आप भोजन को गले से नीचे उतारने के अलावा और भी बहुत कुछ कर सकें। उसने आपको उसकी महिमा करने और दूसरों को शान्ति के वचन बोलने और उनकी मदद करने के लिए जीभ दी है, यही कारण है कि वह इसे आपकी “महिमा” कहता है (भजन 30:12; 108:1; कुलुस्सियों 3:16)। आप इसका कितनी अच्छी तरह उपयोग करते हैं?

आपकी जीभ या तो बहुत कल्याण कर सकती है या नुकसान पहुंचा सकती है, और परमेश्वर और मनुष्य आपको तदनुसार प्रतिफल देंगे (नीतिवचन 18:21)। अच्छे वचन वे सुंदर चीजें हैं जिन्हें सुनकर मनुष्य प्रसन्न होते हैं (नीतिवचन 15:23; 24:26; 25:11)।

क्या आप अपने शब्दों को सीमित रखते हैं? एक बुद्धिमान व्यक्ति अधिक बोलने के खतरे को जानता है (नीतिवचन 10:19)। वह जानता है कि मूर्ख भी बुद्धिमान प्रतीत होता है, जब वह चुप रहता है (नीतिवचन 17:27-28)। चुप्पी सुनहरी है।

क्या आप बोलने में धीमे हैं? परमेश्वर ने तुम्हें दो कान और एक मुंह दिया है, इसलिए सुनने में तत्पर और बोलने में धीमे बनो (याकूब 1:19)। जल्दबाजी में बोलना आपको मूर्ख से भी बदतर बना देगा (नीतिवचन 29:20)।

क्या आप बोलने से पहले मसले को समझते हैं? भावनाओं में बहकर विचारों को उगल देना या बातें करना मूर्खता है। आपको बोलने से पहले पूरी बात सुननी चाहिए और उसे समझना चाहिए (नीतिवचन 15:28; 18:13)।

क्या आपको अनुग्रहपूर्ण वाणी अच्छी लगती है? एक बुद्धिमान व्यक्ति के मुंह के वचन अनुग्रहपूर्ण होते हैं, क्योंकि वे शुद्ध हृदय से निकलते हैं, और राजा भी ऐसे वक्ताओं से प्रेम करते हैं और उनपर अपनी कृपादृष्टि रखते हैं (नीतिवचन 22:11; सभो 10:12; कुलुस्सियों 4:6)।

क्या आप दूसरों को सिखाते हैं? जब आप बोलते हैं, तो आपको सत्य के ख़ास वचन बोलना चाहिए (नीतिवचन 22:17-21; 1 पतरस 3:15)। आपका लक्ष्य दूसरों को शिक्षित करना या उनका निर्माण करना है (नीतिवचन16:24; इफिसियों 4:29)।क्या आप एक अच्छे शांतिदाता हैं? उदास मनवाले लोगों के सामने ज्यादा खुश मत होइए (नीतिवचन 25:20)। कमज़ोरों को धीरज बंधाओं (1 थिस्स 5:14)। अय्यूब के मित्रों के समान दुःख न पहुँचाओ (अय्यूब 16:2)।

क्या तुम्हें मूर्खतापूर्ण बातचीत और मज़ाक से नफरत है? परमेश्वर मूर्खों की मूर्खतापूर्ण बकवास से नफरत करता है, और वह इस दुनिया का बकवादी बातों और वचनों की ऐसी बर्बादी के लिए न्याय करेगा (सभो 7:1-6; इफ 5:3-5)।

क्या आप अन्य पुरुषों की प्रतिष्ठा के रक्षक हैं? चुगली करने, बदनामी करने, पीठ पीछे बुराई करने और कानाफूसी करने से घृणा करें (नीतिवचन 6:16-19)! इन पापों को मत करो, और दूसरों को भी ऐसे पाप करने से रोकें (नीतिवचन 25:23)।

मुंह के वचन भले हो इसके लिए सबसे पहले आपको अपना मन शुद्ध करना होगा, जो आपके शब्दों का स्रोत है। अगर आपका मन अच्छा नहीं है तो आपकी बातें कभी अच्छी नहीं होंगी। अपने मूर्खतापूर्ण और बुरे विचारों को परमेश्वर के सामने मान लें, और उससे प्रार्थना करें कि वह आपके होठों की रक्षा करने में आपकी सहायता करे (भजन 19:14; 139:23-24; 141:3; यशायाह 6:5)। फिर आपको सुंदर और उपयोगी बातें कहने के लिए अपने मन को पवित्रशास्त्र के शुद्ध वचनों से भरना होगा (नीतिवचन 22:17-21; भजन 37:30; 119:46,172)।

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