नीतिवचन 15:9

दुष्ट की चाल से परमेश्वर को घिन है, परंतु जो धर्म का पीछा करता है वह उस से प्रेम रखता है।

क्या आप की जीवन शैली से परमेश्वर को घिन है? या क्या वह आप से और आपके धर्ममय जीवन से प्रेम करता है? यहाँ आप दो प्रकार के मनुष्यों को देखते हैं, और आपके दैनिक चुनाव यह निर्धारित करते हैं कि आप इनमें से कौन से हैं? यदि परमेश्वर आपके जीवन से घृणा करता है तो, आप संकट में हैं। अगर वह आपसे प्रेम करता है, तो आप पर बहुत अनुग्रह हुआ है। दाऊद परमेश्वर का प्रिय था और इस बात से उसके जीवन में बहुत अंतर आया (1 इतिहास 28:4; भजन संहिता 18:19-26)।

अधिकांश लोग यह समझना ही नहीं चाहते कि परमेश्वर किसी चीज़ से घृणा भी कर सकता है, क्योंकि जन्म से ही उनकी परवरिश इस झूठी शिक्षा में हुईं है कि परमेश्वर उनसे बेहद प्रेम करता है चाहे वे कैसे भी रहें। उन्होंने सुलैमान की ईश्वर-प्रेरित चेतावनियों को कभी नहीं पढ़ा है (नीतिवचन 6:16-19; 3:32; 11:20; 12:22; 15:8; 16:5; 17:15; 28:9)। वे मानते हैं कि परमेश्वर शैतान से तो नफ़रत कर सकता है, लेकिन वह मुझसे प्रेम करता है चाहे कुछ भी हो जाए।

यहां एक धनी और बुद्धिमान राजा की अनमोल चेतावनी है। उसने आपकी समृद्धि और सफलता के लिए लिखा, जो दोनों ही असंभव होंगे यदि परमेश्वर आपके विरुद्ध हो जाए। यदि परमेश्वर किसी व्यक्ति से प्रेम करता है, तो गुलामी में बेचा गया एक लड़का भी राज्य की गद्दी पर बैठ सकता है, या एक अनाथ लड़की रानी बन सकती है, या एक बंदी राजा का मुख्य सलाहकार बन सकता है। यूसुफ, एस्तेर और दानिय्येल के बारे में सोचें।

अपने जीवन को जांचे। क्या आपका जीवन परमेश्वर को प्रसन्न करता है या उसे ठेंस पंहुचाता है? बाइबल ही एकमात्र मानक है जो मायने रखता है। परमेश्वर इस बात की परवाह नहीं करता कि आप क्या सोचते हैं, आपके माता-पिता क्या सोचते हैं, आपका पास्टर क्या सोचता है, या राजनीतिक रूप से क्या सही है। लोकप्रिय प्रवृत्तियों और उभरते हुए नए सामाजिक मूल्यों से उसे घिन है। वह पवित्र और धर्मी है, और वह कभी भी मूर्खो या उनकी दुष्ट जीवनशैली को स्वीकार नहीं करेगा।

यह आपका कर्तव्य और सुअवसर है कि आप अपने पापों का परमेश्वर के सामने अंगीकार करें, क्योंकि वह आपको क्षमा प्रदान करेगा और समृद्ध करेगा (नीतिवचन 28:13)। आपको हर उस विचार से घृणा करना सीखना चाहिए जो परमेश्वर के वचन के विपरीत है, जैसा कि दाऊद ने किया था (भजन संहिता 119:128)। इस संसार को सही या गलत की कोई पहचान नहीं है, विशेष रूप से इस पीढ़ी में (यशायाह 8:20; 1 तीमुथियुस 6:3-5)। चुनाव आपका है – और परमेश्वर सब कुछ देखता है।

अधिकांश लोग कहते हैं, “परमेश्वर पाप से घृणा करते हैं, लेकिन पापी से प्रेम करते हैं”। लेकिन यह बाइबल से नहीं है! लोगों ने मूर्खों को खुश रखने के लिए इस कथन का आविष्कार किया, जो एक ऐसा परमेश्वर चाहते हैं जो उन्हें स्वीकार करें, चाहे कुछ भी हो। यह उतना ही सच है जितना कि एक दंतकथा की परी का होना। जब इस नीतिवचन को समझा जाता है, तो यह इस सत्य की पुष्टि करता है कि परमेश्वर दुष्ट व्यक्तियों, उनकी प्रार्थनाओं और उनकी जीवनशैली से घृणा और नफरत करता है।

आज की विकृत सोच पर विचार करें। आज की सोच के अनुसार पुरुषगामिता अब यहोवा के लिए घृणित नहीं रही; यह समलैंगिक है! व्यभिचार अब यहोवा के लिए घृणित नहीं रहा; यह एक प्रेम प्रसंग है! विद्रोही संतानों से अब यहोवा को घृणा नहीं होती; वे अति सक्रिय हैं! परंतु बुद्धिमान लोग परमेश्वर के सब उपदेशों को मानते हैं और हर एक विरोधी मत से बैर रखते हैं (भजन संहिता 119:97-104,113,128)।

इस नीतिवचन में दो विपरीत खंड हैं जो पूर्ण अर्थ प्रदान करते हैं। परमेश्वर दुष्ट के मार्ग से घृणा करता है, और परमेश्वर उस मनुष्य से प्रेम रखता है जो धार्मिकता से चलता है। “दुष्टों के मार्ग” की तुलना” “धर्म का पीछा करता है” से करने पर हम सीखते हैं कि परमेश्वर पापी और उसकी जीवनशैली दोनों से घृणा करता है और वह धर्मी मनुष्य और उसकी जीवनशैली दोनों से प्रेम करता है। सुलैमान की उन 7 बातों की सूची में जिनसे परमेश्वर घृणा करता है, पाप से पापी तक के परिवर्तन पर ध्यान दें (नीतिवचन 6:16-19)।

इस संदर्भ पर विचार करें। पिछला नीतिवचन इसके समान है और पापपूर्ण जीवनशैली के लिए परमेश्वर की घृणा को समझने में मदद करता है। “दुष्ट के बलिदान से यहोवा को घृणा आती है: परंतु सीधे मन वालों की प्रार्थना उसे आनंदित करती हैं” (नीतिवचन 15:8)। परमेश्वर दुष्ट व्यक्तियों की धार्मिक आराधना से भी घृणा करता है। परंतु वह सीधे मन वालों की प्रार्थनाओं से प्रेम करता है। जब मनुष्य उसके विरुद्ध पाप करने का चुनाव करता है, तो परमेश्वर उसकी आराधना से घृणा और नफरत करता है (नीतिवचन 21:27; 28:9; यशायाह 1:10-15)।

अंतर बहुत बड़ा है! या तो परमेश्वर आपके जीवन से घृणा करता है, या उससे प्रेम करता है। या तो तुम दुष्टता के मार्ग पर चलो, या तुम धर्म के मार्ग पर चलो। आप परमेश्वर की घृणा और उसके प्रेम के बीच के अंतर को कैसे समझ सकते हैं? यह रहस्य बहुत बड़ा है! आप परमेश्वर को न तो आपका तिरस्कार करने से और न हीं आप पर अनुग्रह करने से रोक सकते हैं। अधिकांश लोग अब परवाह नहीं करते क्योंकि उनके लिए परमेश्वर के बेहद प्रेम की झूठी शिक्षा के द्वारा उन्हें सांसारिक जीवन जीने के लिए बहकाया गया है।

बेशक, यह कथन कि “परमेश्वर पाप से घृणा करते हैं, लेकिन पापी से प्रेम करते हैं”, सांत्वना देती है। लेकिन आपको इस या किसी अन्य कथन पर विश्वास करने से पहले उसे साबित करना होगा (नीतिवचन 14:15; प्रेरितों के काम 17:11; 1 थिस्स 5:21)। परमेश्वर सच्चा और हर एक मनुष्य झूठा ठहरे (रोमियो 3:4)। इस तरह की निरर्थकता का सुझाव देने वाले प्रभावशाली शिक्षकों को न तो बाइबल के परमेश्वर के बारे में कोई जानकारी होती है और न ही पापियों के लिए उसके धर्ममय न्याय के बारे में। वे उनकी भीड़ बढ़ाने और अपनी जेब भरने के लिए पापियों की चापलूसी करते हैं।

क्या वे जो नरक में है यह गा रहे हैं,”यीशु मुझसे प्रेम करता है, यह मैं जानता हूँ क्योंकि बाइबल मुझे ऐसा बताती है”? क्या नूह ने जहाज़ के बाहर एक चमकदार स्माइली चेहरे को टांगा था, जिस पर लिखा था, “मुस्कुराओ! परमेश्वर तुमसे प्यार करता है!”? यीशु मसीह के कहने का क्या अर्थ होगा, जब वह न्याय के दिन दुष्टों से यह कहेगा कि, “मैं ने तुम को कभी नहीं जाना। हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ” (मत्ती 7:23)। क्या आपको लगता है कि वह शैतान से भी प्रेम करता है, जो किसी भी मनुष्य से कहीं अधिक प्रकाशमान था?

दुष्टों के बारे में बाइबल और क्या कहती है? दाऊद ने लिखा, “क्योंकि तू ऐसा ईश्वर नहीं जो दुष्टता से प्रसन्न हो; न ही बुराई तेरे साथ रहेगी। मूर्ख तेरे सम्मुख खड़े होने न पाएंगे: तू सब अनर्थकारियों से घृणा करता है। तू उनको जो झूठ बोलते हैं नष्ट करेगा; यहोवा हत्यारे और छली मनुष्य को नष्ट कर डालेगा” (भजन संहिता 5:4-6)। क्या आप अचम्भित हो गए? यदि आप आज एक अनोखे मसीही हैं, तो एकमात्र भजन जो आपको पता होगा वह भजन संहिता 23 है।

इज़राइल का सबसे प्रिय भजनकार दाऊद लिखता है, “परमेश्वर अपने पवित्र भवन में है, परमेश्वर का सिंहासन स्वर्ग में है: उसकी आंखें मनुष्य की संतान को नित देखती रहती हैं और उसकी पलकें उनको जांचती है। यहोवा धर्मी को परखता है: परंतु वह उनसे जो दुष्ट हैं और उपद्रव से प्रीति रखते हैं, अपनी आत्मा में घृणा करता है। वह दुष्टों पर फंदे बरसाएगा; आग और गंधक और प्रचंड लूह उनके कटोरो में बांट दी जाएगी” (भजन संहिता 11:4-6)।

स्वर्ग का परमेश्वर प्रेम होने से पहले पवित्र है। वह किसी भी पाप को स्वीकृति की दृष्टि से नहीं देख सकता (इब्रानियों 1:13)। वह दुष्ट को दोषमुक्त नहीं कर सकता (नेहम्याह 1:3)। वह दोषी को निर्दोष नहीं ठहरा सकता (निर्गमन 34:7)। वह धार्मिकता से प्रेम करता है, और अधर्म से घृणा करता है (भजन संहिता 45:7; इब्रानियों 1:9)। उसने संसार को जल प्रलय से डुबो दिया। उसने सदोम और अमोरा के नगरों को जला दिया। उसने कनान देश के सात नगरों को मिटा दिया। वह दुष्ट पर प्रतिदिन क्रोध करता है (भजन संहिता 7:11)। यही सच्चा परमेश्वर है।

परमेश्वर के स्वभाव के इस पहलू को आज नजरअंदाज कर दिया जाता है, क्योंकि लोग आकाश में एक मीठा डैडी चाहते हैं जो उनके पाप करने पर मुस्कुराएगा और उन्हें कॉटन कैंडी देगा। परंतु दाऊद पर विचार करें, जो परमेश्वर के मन के अनुसार चलने वाला मनुष्य था। वह परमेश्वर के शत्रुओं से पूर्ण घृणा करता था (भजन संहिता 139:21-22; 26:5; 31:6; 2 शमूएल 5:8)। जब उसके पुत्र यहोशापात ने एक दुष्ट व्यक्ति से मित्रता करने की कोशिश की, तो धार्मिकता की इस विकृति के लिए परमेश्वर उस पर क्रोधित हुआ था (2 इतिहास 19:2)।

परमेश्वर किसी से भी प्रेम कैसे कर सकता है, जब कि सब के सब पापी हैं (भजन संहिता 14:1-3; रोमियो 3:23)? उसने कुछ को जगत के आरंभ होने से पहले मसीह यीशु में चुन लिया था, कि वे प्रेम में उसके आगे पवित्र और निर्दोष हों (इफिसियों 1:3-4)। मसीह में उस चुनाव के कारण, वह उन्हें अपनी दृष्टि में पूर्ण रूप से पवित्र मानता है। उसने अनुग्रह के द्वारा उन्हें पहले से ही उसके लेपालक पुत्र होने के लिए ठहराया था, क्योंकि उसने उन्हें अपनी इच्छा से प्रिय मसीह में ग्रहणयोग्य बनाने के लिए चुन लिया था (इफिसियों1:5-6)।

परमेश्वर का प्रेम उसका अपना चुनाव है, और वह कुछ मनुष्यों से प्रेम करना चुनता है (रोमियों 9:14-18)। यह इसी महत्वपूर्ण कारण की वजह से ही है कि बाइबल इन सब के बारे में बताती है कि यीशु मसीह कलीसिया से प्रेम करता है (इफिसियों 5:25), कोई भी बात परमेश्वर के लोगों के लिए उसके प्रेम को अलग नहीं कर सकती (रोमियो 8:29-39), यीशु ने पुष्टि की कि वह किसी भी ऐसे व्यक्ति का साथ नहीं छोड़ेगा जिसे बचाने के लिए परमेश्वर ने उसे भेजा था (यूहन्ना 6:38-39; 10:26-29; 17:2), और यह कि वह केवल अपने बच्चों को प्रेम से ताड़ना देता है, व्यभिचार की सन्तान को नहीं (इब्रानियों 12:6-8)।

बेशक, इस बाइबलिए शिक्षा का तिरस्कार किया जाता और घृणा की जाती है। मनुष्य इस संसार में मूर्खों के रूप में आते हैं, और अधिकांश मूर्ख ही रह जाते हैं। जो परमेश्वर और उसके वचन के सामने थरथराने के लिए परमेश्वर की आत्मा के द्वारा नया जन्म पाते हैं, केवल वे ही सत्य को देख पाते हैं और उस पर विश्वास कर पाते हैं (यूहन्ना 3:3; 8:47)। केवल वे ही हैं जो परमेश्वर की बातों को समझ सकते हैं (1 कुरिन्थियों 2:14; 2 कुरिन्थियों 4:3-4; 2 थिस्सलुनीकियों 2:9-14)। केवल वे ही अपने जीवन को जाचेंगे, ज्ञात पापों से पश्चाताप करेंगे और धार्मिकता का मार्ग चुनेंगे।

पाठक! इस बात का प्रमाण कि आप स्वर्ग में परमेश्वर के चुने हुए और प्रिय हैं, धर्मी जीवन जीने का आपका प्रयास है (2 पतरस 1:5-11; 1थिस्सलुनिकियों 1:2-4; मत्ती 7:21-23)। इस संसार के दुष्ट मार्गो से फिरो और उस सरल और सकरे मार्ग पर चलो जो उसने तुम्हारे लिए बाइबल में दिया है (मत्ती 7:13-14)। आप इस वर्तमान जगत में और आनेवाले नए जगत में धन्य और समृद्ध होंगे।

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