नीतिवचन 15:8
दुष्ट लोगों के बलिदान से यहोवा घृणा करता है, परन्तु वह सीधे लोगों की प्रार्थना से प्रसन्न होता है।
क्या परमेश्वर आपकी आराधना से घृणा करता है, या उससे प्रसन्न होता है? कितना विरोधाभास है! यहोवा परमेश्वर कुछ लोगों की आराधना को घृणित समझता है। वह सिर्फ़ उनकी आराधना को नापसंद ही नहीं करता : वह उससे घृणा भी करता है! लेकिन वह दूसरों की प्रार्थनाओं से प्रसन्न होता है। कितना अंतर है! क्या आपकी आराधना उसके पवित्र नथुनों में एक घृणित दुर्गंध है? या वह आपकी आराधना और आपकी प्रार्थनाओं से प्रसन्न होता है?
जब दुष्ट लोग परमेश्वर की आराधना करते हैं, चाहे वह कितनी भी सटीक, वास्तविक या बड़ी बड़ी दानराशी क्यों न हो, यह उसके लिए घृणित, घिनौनी है (नीतिवचन 21:27)। वह उससे घृणा करता है! उसने इस्राएल से कहा, “धूप से मुझे घृणा है…. तुम्हारे नये चाँदों और नियत पर्वों के मानने से मैं जी से बैर रखता हूँ; वे सब मुझे बोझ जान पड़ते हैं, मैं उनको सहते सहते उकता गया हूँ” (यशायाह 1:12-14)। “मैं तुम्हारे पर्वों से बैर रखता, और उन्हें निकम्मा जानता हूँ, और तुम्हारी महासभाओं से मैं प्रसन्न नहीं” (आमोस 5:21)।
यदि आप अपने जीवन में पाप लेकर आते हैं, तो परमेश्वर आपके बलिदान, आपकी प्रार्थना और आराधना से घृणा करता है। धार्मिकता के बिना आराधन-विधि उसके लिए घृणित है। वह आपकी आज्ञाकारिता चाहता है, आपकी आराधन नहीं। जिस बलिदान से परमेश्वर प्रेम रखता है वह टूटा हुआ मन है (भजन 51:17)। वह इस्राएल से भेंट नहीं चाहता था: वह आज्ञाकारिता चाहता था (यिर्मयाह 7:22-23)। ” शमूएल ने कहा, “क्या यहोवा होमबलियों और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन, मानना तो बलि चढ़ाने से, और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है” (1 शमूएल 15:22)।
मूर्ख लोग अपने जीवन में पाप लेकर सूट-बूट पहनकर चर्च जाते हैं, अपनी बाइबल साथ रखते हैं, भजन-गीत गाते हैं, सिर झुकाते हैं, प्रार्थना करते हैं और आराधना करते हैं। उनका मानना है कि ऐसे धार्मिक कर्म परमेश्वर को प्रसन्न करेंगे। उन्हें लगता है कि वह उनकी दुष्टता को अनदेखा कर देगा, क्योंकि वे चर्च जाते हैं। लेकिन वह उनके पाखंड से घृणा करता है। वे दिखावा करते हैं ताकि लोग उनके बारे में ऊँची सोच रखें, लेकिन परमेश्वर बुरी तरह से सब पाखंडियों की पोल खोलेगा और उन्हें नष्ट कर देगा (नीतिवचन 26:24-26; अय्यूब 27:8; भजन 144:11-15)।
दुष्ट लोग धार्मिक अनुष्ठान, धर्म या धार्मिक चिन्हों (जैसे गले में क्रॉस) में शान्ति पाने की कोशिश करते हैं। इस्राएल ने मूसा के द्वारा बनाए पीतल के साँप (2 राजा 18:4), वाचा के सन्दूक (1 शमूएल 4:3), मंदिर (यिर्मयाह 7:4) और शास्त्रों (यिर्मयाह 8:8) की आराधन की। कैथोलिक लोग गले में क्रूस पहनते हैं और बैपटिस्ट लोग बाइबल अध्ययन में भाग लेते हैं। लेकिन इन चीजों में बचाने की कोई शक्ति नहीं है। वे केवल पाखंडियों के दण्ड में बढ़ोतरी करते हैं, क्योंकि ईर्ष्यालु परमेश्वर पापी ढोंगियों द्वारा धर्म के अभिमानपूर्ण उपयोग को बर्दाश्त नहीं कर सकता।
अनुत्तरित प्रार्थनाएँ आपकी गलती हैं, परमेश्वर की नहीं! वह हमेशा धर्मी लोगों प्रार्थनाएँ सुनता और उत्तर देता है। हो सकता है कि वह वह उत्तर न दे जिसकी वे अपेक्षा करते हैं, लेकिन वह हमेशा उत्तर देता है। यह आपकी गलती है! ” सुनो, यहोवा का हाथ ऐसा छोटा नहीं हो गया कि उद्धार न कर सके, न वह ऐसा बहिरा हो गया है कि सुन न सके; 2परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ने तुम को तुम्हारे परमेश्वर से अलग कर दिया है, और तुम्हारे पापों के कारण उसका मुख तुम से ऐसा छिपा है कि वह नहीं सुनता।” (यशायाह 59:1-2)। यह तुम्हारी गलती है! ” जो अपना कान व्यवस्था सुनने से मोड़ लेता है, उसकी प्रार्थना घृणित ठहरती है” (नीतिवचन 28:9)।
आराधना की सटीकता, धर्म-सिद्धांत की शुद्धता, और आराधना में ईमानदारी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। यदि आप शुद्ध और कांपते हुए हृदय से नहीं आते हैं, तो परमेश्वर को इस बात की परवाह नहीं है कि आप अपने धर्म-सिद्धांत कितने सटीक, सही या ईमानदार हैं (यशायाह 66:1-2)। वह झुके हुए सिर से प्रसन्न नहीं होता; वह झुके हुए हृदय से प्रसन्न होता है (यशायाह 58:3-7)। पाखंड में प्रार्थना करने से भला है प्रार्थना ही न करें (प्रकाशितवाक्य 3:15-16)।
दुष्ट व्यक्ति भले ही महँगे बलिदान चढ़ाता हो, अपने समय के कई घंटे देता हो, परमेश्वर की आराधना में बहुत जोश से अगुवाई करता हो, फिर भी परमेश्वर इसे अस्वीकार कर देता है और इसके बजाए अपने विनम्र पवित्र जनों की सरल और टूटी-फूटी प्रार्थना से प्रसन्न होता है। कितना विरोधाभास है! परमेश्वर या चर्च को चाहे कितना भी दिया जाए, वह केवल एक ही चीज़ स्वीकार करेगा, वह है धर्मी व्यक्ति के टूटे मन से निकली दीन प्रार्थना।
परमेश्वर धर्मी की प्रार्थना से प्रसन्न होता है – वह इसे सुनता है और प्रसन्नता से इसका उत्तर देता है। “धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है” (याकूब 5:16)। “यहोवा दुष्टों से दूर रहता है, परन्तु धर्मियों की प्रार्थना सुनता है।” (नीतिवचन 15:29)। अगर एक बाप बुरा होकर भी, अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएँ देना जानता है, तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता अपने माँगनेवालों को अच्छी वस्तुएँ क्यों न देगा (मत्ती 7:11)। यह सबक सरल और सत्य है। इस पर विश्वास करें।
परमेश्वर आपकी आराधना को तुच्छ क्यों समझता है? ऐसे किसी पाप के कारण जिसे आपने अंगीकार न किया हो! दाऊद जानता था, ” यदि मैं मन में अनर्थ की बात सोचता, तो प्रभु मेरी न सुनता” (भजन 66:18)। पतरस ने लिखा, ” क्योंकि प्रभु की आँखें धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उनकी विनती की ओर लगे रहते हैं; परन्तु प्रभु बुराई करनेवालों के विमुख रहता है” (1 पतरस 3:12)। अभी अपने पापों को मान लें!
यदि आप अपने जीवन में मौजूद किसी पाप के साथ परमेश्वर की आराधना करते हैं, तो आप उसके सामने अपनी भयानक स्थिति को और भी बदतर बना रहे हैं। आप उसके अटल, ईर्ष्यालु क्रोध को अपने सिर पर लाएँगे। अपना परिक्षण करें! मन फिराएं! अपने पापों को स्वीकार करें! पवित्रता से शोभायमान होकर यहोवा की आराधना करें। विश्वास और पवित्र भय के साथ उसकी आराधना करें। न भूलें, वह भस्म करने वाली आग है (इब्रानियों 12:28-29)।
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