नीतिवचन 15:6
धर्मी के घर में बहुत धन रहता है, परन्तु दुष्ट के उपार्जन में दु:ख रहता है।
एक ऐसा घर जिसमें आर्थिक समृद्धि के साथ साथ प्रेम और शांति निवास करती हैं, वह उस घर से बेहतर है जहाँ आर्थिक समृद्धि तो है, पर प्रेम और शांति के बजाए सिर्फ़ झगड़ा और अशान्ति ही हैं। धर्मी मनुष्य आवश्यकता से अधिक वस्तुओं के साथ सुख और शान्ति से भरे जीवन का आनंद लेता है, लेकिन दुष्ट मनुष्य आर्थिक रूप से दिन-ब-दिन बढ़ते हुए भी कठिनाई और पीड़ा सहता है। यह नीतिवचन धार्मिक और दुष्ट जीवनशैली के कारण उभरनेवालें व्यक्तिगत परिणामों के बीच विरोधाभास को दिखाता है।
सुलैमान के कई कहावतों में दो उपवाक्य हैं जो दो चीजों के बीच तुलना करके उनमें मौजूद विरोधाभास को दिखाते हैं, और उन उपवाक्यों की सावधानीपूर्वक तुलना करने से हम उसके सही अर्थ और सबक को समझ सकते हैं। इस नीतिवचन में आपको यह देखना चाहिए: घर और धन के बीच तुलना, दुष्ट और धर्मी के बीच तुलना, तथा दुःख और उपार्जन के बीच तुलना। धार्मिक जीवन से फर्क पड़ता है।
सुलैमान, जो एक राजा और दार्शनिक था (नीतिवचन 1:1-6; सभो 1:1-3,12-14), उसने सिखाया कि प्रेम, शांति और धार्मिकता जैसी अमूर्त वस्तुएं कमाई, संपत्ति, और खाने-पीने की लज्जतदार चीजों जैसी मूर्त वस्तुओं से श्रेष्ठ हैं। उसने बार बार स्पष्ट रूप से बताया कि श्रेष्ठ क्या है ताकि हम समझने से चूक न जाएं (नीतिवचन 15:16-17; 16:8; 17:1; 21:19; 28:6; सभो 2:26; 4:6; 7:1)। जीने के लिए ये प्राथमिकताएँ अमूल्य हैं।
यहां वह उसी सबक को अस्पष्ट रूप से सिखा रहा है- एक सच्चे नीतिवचन के रूप में, या बुद्धिमानों की गूढ़ बातों के रूप में (नीतिवचन 1: 6)। सबक बिलकुल सरल है। धर्मीजन की कमाई (उपार्जन) दुष्टजन की कमाई से कम हो सकती है, लेकिन वह अपने घर में बहुत धन के साथ रहता है जिसकी दुष्टजन कल्पना भी नहीं कर सकता – अर्थात् सब बातों की समझ, परमेश्वर की उपस्थिति, प्रेम, शांति, मेल, आने वाली अनंत विरासत, आदि।
दुष्ट लोग इस जीवन में समृद्ध बन सकते हैं, लेकिन वे अनंतकाल के लिए नरक में पीड़ा भुगतेंगे (भजन 17:14-15; 73:18-20; मत्ती 16:26)। हालाँकि इस जीवन में धर्मी लोगों के बैंक अकाउंट में ज्यादा रूपया न हो, और न दुनिया की दृष्टि में बड़े लोग न कहलाएं, परमेश्वर उन्हें इस जीवन और आनेवाले नए जीवन में कहीं अधिक अनुग्रह और लाभ की आशीष देता है (नीतिवचन 3:31-33; 10:22; 13:25) ;23:17-18; मरकुस 10:28-31)।
दुष्ट लोलों के जीवन में, असीम धन-सम्पत्ति होने के बावजूद, हमेशा केवल कलह और परेशानियाँ होती हैं जिससे पृथ्वी पर भी उनका जीवन नरक बन जाता है। लोभ और लालच उन्हें चैन की साँस नहीं लेने देता। कई तरीकों से नुकसान का डर उन्हें परेशान और दुखी रखता है। पापी लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ अपने रिश्तों में कभी भी स्थायी प्रेम या शांति नहीं दे सकते। जीवन की क्षणिकता उन्हें बार बार याद दिलाती है कि वे जल्द ही अपना सब कुछ किसी मूर्ख के पास छोड़ देंगे जो इसे तुरंत बर्बाद कर देगा।
सबक क्या है? आपकी कमाई चाहे जो भी हो, धार्मिक जीवन पापमय जीवन से कहीं बेहतर है। क्या कोई और सबक है? संतोषसहित भक्ति बड़ा लाभ है (नीतिवचन 30:8-9; 1 तीमु 6:6-10)। क्या कोई और सबक है? सुसमाचार का रहस्य और छिपा हुआ ज्ञान यह है कि धर्मी मनुष्य के पास वास्तव में पहले से ही सबकुछ है (रोमियों 8:17; 1 कुरिन्थ 3:21-23; 2 कुरिन्थ 6:10)। धार्मिक जीवन जीने का प्रतिफल क्या है? परमेश्वर से, बाकी मनुष्यों से सच्ची आशिषें आपके अपने मन में शान्ति, और भविष्य में स्वर्ग में मूर्त आशिषें (नीतिवचन 14:14; रोमियों 8:18-23; 2 कुरिन्थ 4:17-18)!
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