नीतिवचन 15:4
शान्ति देनेवाली बात जीवन–वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है।
क्या आपकी वाणी दूसरों को बल और शान्ति देती है या उन्हें घायल करती है? राजा सुलैमान ने उत्तम वाणी के उपयोगी मूल्य की प्रशंसा की और बुरी वाणी से होने वाले नुकसान की निंदा की। उत्तम वाणी दूसरों के जीवन को शान्ति देती है, परन्तु बुरी या उलट फेर की वाणी उनके मनों को तोड़ सकती है। अपनी वाणी और शब्दों से, आप दूसरों के लिए या तो जीवन-वृक्ष हैं या आप उनकी आत्मा को दु:खित करते हैं।
जब आप बात करते हैं तो दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं? क्या वे आनंद से प्रसन्न हैं और उन्हें लाभ होता है? क्या आपके शब्द सत्य और ज्ञान के उपयुक्त वचन हैं? क्या आप अपनी दयालु और उत्साहवर्धक वाणी से अपने सुननेवालों को शिक्षा देते हैं? क्या आपके दयालु शब्दों से परिवार और दोस्तों को बल मिला है? क्या आप दूसरों को भक्ति और उत्साह के लिए प्रेरित करते हैं? क्या वे आपके आसपास होने के लिए आभारी हैं? क्या अलग अलग विषयों पर आपसे सलाह मांगी जाती है? क्या आप लोगों के मनों को इतना आनन्द से भर देते हैं कि वे ख़ुशी से झूम उठें?
या आपकी वाणी लोगों की आवश्यकता के विपरीत, उन्हें हतोत्साहित करने वाली और आपत्तिजनक है? क्या आपके मुँह के शब्दों कारण दूसरे लोग आपको चिड़चिड़ा समझते हैं और आप से दूरी बनाते हैं? क्या परिवार के सदस्य और दोस्त आपकी मूर्खतापूर्ण बातचीत, मज़ाकबाज़ी, आलोचना, उपहास या रोंधुपन से थक गए हैं? क्या आप सुननेवालों को व्यंग्यात्मक कटाक्षों से लहूलुहान कर देते हैं या नकारात्मक टिप्पणियों से ज़िन्दगी से पराजित कर देते हैं? क्या अन्य लोग आपकी हमेशा की चुगली और कानाफूसी से तंग आ चुके हैं? क्या आप एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं जो शायद ही कभी खुश होता है और शायद ही किसी को धन्यवाद के शब्द बोलता है?
आप दूसरों के लिए या तो जीवन-वृक्ष हैं या उनकी आत्मा को दुखित करनेवाले व्यक्ति हैं। आप अपने शब्दों से या तो उपचार करते हैं और मदद करते हैं, या आप चोट पहुँचाते हैं और घायल करते हैं। आप या तो शिक्षा देते हैं और उत्थान करते हैं, या आप भ्रष्ट करते हैं और अपमान करते हैं। ” जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा” (नीतिवचन 18:21)। आप जीवन-वृक्ष बन सकते हैं, दूसरों की मदद करने के लिए दयालु और उपयोगी शब्द प्रदान कर सकते हैं, या आप उनकी उनकी आत्मा को दुखी कर सकते हैं, उन्हें निराश और आहत कर सकते हैं।
“शान्ति देनेवाली बात” भले शब्दों और मददगार वाणी को दर्शानेवाला पर्यायी वाक्यांश है। ऐसा व्यक्ति सुनने वालों के आनन्द और उन्नति के लिए सावधानी से बोलता है। उसके वचनों का उन पर स्वास्थ्यप्रद प्रभाव पड़ता है (नीतिवचन 12:18)। हर उस व्यक्ति को जो उसकी बात सुनता है, लाभ होता है। वह अपने शब्दों को शुद्ध मन से सावधानीपूर्वक चुनता है, आवश्यकता से अधिक नहीं कहता है और जिस भी व्यक्ति से वह बात करता है उसकी सिर्फ़ और सिर्फ़ उन्नति का प्रयास करता है। वह कभी भी शब्दों को मूर्खतापूर्ण हंसी-मजाक में बर्बाद नहीं करता या उनका उपयोग ठेस पहुंचाने के लिए नहीं करता। वह उत्तर देने से पहले सोच-विचारता है, और वह उत्तर के लिए सत्य के कुछ निश्चित शब्दों को जानता है (नीतिवचन 15:28; 22:17-21)।
वह जीवन-वृक्ष है। यहाँ एक सशक्त रूपक प्रयुक्त किया गया है। वह अपनी बातों से दूसरों को ज्ञान और बुद्धि का फल प्रदान करता है (नीतिवचन 10:21; 11:30; 15:7)। बुद्धिमान लोग उससे और उसके शब्दों को प्रिय जानते हैं (नीतिवचन 22:11; 24:26)। वे जानते हैं कि उसकी सलाह, सम्मति, शिक्षा, डांट-फटकार और चेतावनियाँ उनकी उन्नति ही कर सकती हैं। वह बहुतों को ज्ञान देता है, और सब लोग उसके वचनों की लालसा करते हैं। भोले-भाले लोग उसके अनुयायी बनते हैं, क्योंकि वह उन्हें बुद्धि और ज्ञान सिखाता है; बुद्धिमान और ज्ञानी उसे ढूंढ़ते हैं, क्योंकि वह उन्हें और भी अधिक बुद्धिमान और ज्ञानी बनाता है।
लेकिन “उलट फेर की बात” बोलनेवाली जीभ भ्रष्ट और बुरी वाणी को दर्शाता है जो दूसरों को चोट पहुंचाती है और घायल करती है (नीतिवचन 12:18)। यह आलोचनात्मक, गंदा, मूर्ख, घमंडी या रोने वाला व्यक्ति सभी अच्छे लोगों के लिए एक बद्दुमा दाग है। वह अपने सुननेवालों को क्रुद्ध और अपमानित करता है, क्योंकि वह उचित शब्दों को नहीं बोलता, अवसर के अनुसार नहीं बोलता, जो कुछ भी बोलता है, सिर्फ स्वार्थी उद्देश्य से बोलता है, उसकी विषयवस्तु बुरी होती है और नतीजें विनाशकारी। फिर भी वह बोलता रहता है। उसे चुप कराना असंभव है। वह सवालों के मूर्खतापूर्ण उत्तर देता है, दोस्तों के बीच कलह पैदा करता है, और भीड़ में अपराध और पाप को बढ़ावा देता है (नीतिवचन 6:19; 15:2,28; 18:13)।
यीशु और पौलुस दोनों ने बुरी वाणी के खिलाफ चेतावनी दी थी। प्रभु ने सिखाया कि बिना किसी पवित्र कारण के किसी को फटकारना छठी आज्ञा का उल्लंघन है – तू हत्या न करना- और बोलनेवाले को नरक की आग के खतरे में डालता है (मत्ती 5:21-22)। पौलुस ने सिखाया कि गन्दे , मूर्खतापूर्ण वार्तालाप और उपहास के कारण परमेश्वर का क्रोध इस अवज्ञाकारी संसार पर आ रहा है (इफि 5:3-7)। इसलिए, सभी ख्रिश्चन विश्वासियों को सावधान रहकर अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए और ये पाप नहीं करने चाहिए।
उलट फेर की बात के परिणाम क्या होते हैं? दूसरों को स्वास्थ्य और बुद्धि देकर जीवन-वृक्ष बनने के बजाय, यह अपने भ्रष्ट शब्दों से उनकी आत्मा को दु:खित करती है। आत्मा दु:खित होना क्या है? एक टूटा हुआ, दूषित, क्षत-विक्षत, या घायल हृदय! एक भ्रष्ट जीभ विनाश का काम करती है (नीतिवचन 6:14; 12:18; 25:18,20; 26:28; 1 कुरिन्थ 15:33)। कई पत्नियाँ और बच्चे क्रूर जीभ के कारण आहत और जख्मी हुए हैं। उलट फेर की बात के कारण कई अन्य लोगों की प्रतिष्ठा नष्ट हो गई है, रिश्ते टूट गए हैं, आशा खो गई है और बुद्धि भ्रष्ट हो गई है।
उलट फेर की बात बोलनेवाली स्त्री से विवाह करने वाला मनुष्य भयानक विपत्ति में पड़ता है (नीतिवचन 30:21-23)। उसे घर पर पीड़ा और यातना होती है (नीतिवचन 19:13; 21:9,19; 25:24), और सार्वजनिक स्थानों पर शर्मिंदा और बदनाम हो जाता है (नीतिवचन 12:4; 25:15-16)। अपनी क्रूर पत्नी के साथ फंसे रहने से बेहतर होगा कि वह जंगल में जाकर अकेला तम्बू में रहे। एक दबंग, परेशान करने वाली, हर बात पर सवाल पूछने वाली और सुझाव देने वाली स्त्री द्वारा कई पुरुषों को धीरे-धीरे उनकी आत्मा पर हमला कर मौत के घाट उतार दिया गया है। कब्रिस्तान, तथाकथित सामाजिक क्लब, शौक की दुकानें और ओवरटाइम काम के स्थान इन पुरुषों से भरे हुए हैं। वे हर कीमत पर अपने घर जाने से बचते हैं।
परन्तु एक दयालु स्त्री, जिसके मुँह से अनुग्रह और ज्ञान की बातें निकलती हैं, सब उसकी प्रशंसा करते हैं और उसका सम्मान करते हैं (नीतिवचन 11:16; 31:26)। ऐसी स्त्री अविश्वसनीय रूप से दुर्लभ है, और सभी बुद्धिमान पुरुष उसकी तलाश करते हैं। नवयुवकों, सावधान रहें, आपका भविष्य का सुख या दुख दांव पर है। युवतियों, यह एक नम्र और शांत आत्मा है जो आपकी जीभ को निर्देशित करती है और जो आपकी सबसे बड़ी सुंदरता है (1 पतरस 3:3-4)। बालों के स्टाइल, मेकअप और कपड़ों की झूठी चमक को भूल जाइए। अपने में इस अनमोल आत्मा को विकसित करें।
माता-पिता, आपको अपने उदाहरण से अपने बच्चों को चंगा करनेवाली वाणी दिखानी और सिखानी चाहिए, और नियम बनाना चाहिए कि वे मधुर वाणी बोलें। यदि आप ऐसा करते हैं, तो आपके कुटुम्ब में बहुत-से जीवन-वृक्ष होंगे। आपको अपने घर में हॉलीवुड-बॉलीवुड के अहंकारपूर्ण, उपहासपूर्ण, गंदगीपूर्ण, अनादर और व्यंग्य से भरें वातावातन को ख़त्म करना होगा। बच्चों को यह कहने का अधिकार नहीं है कि वे क्या सोचते हैं। उनका कर्तव्य यह है कि वे वही सोचें और कहें जो सही है। अपने बच्चों से माँग करें कि वे आपसे बहुत सम्मान के साथ और एक-दूसरे से निरंतर दयालुता और सहायता के साथ बात करें। वे माताएँ कहाँ हैं जो गन्दी बात बोलने पर अपने बच्चों के मुँह पर गरम सराटे से चटका लगाती थीं?
इससे पहले कि आप अपने बच्चों को शान्ति देनेवाली वाणी का उपयोग करने के लिए सिखाने और मजबूर करने के बारे में चिंतित हों, सुनिश्चित करें कि आप उन्हें हर दिन अपनी खुद की शान्ति देनेवाली वाणी की मिसाल कायम करके यह सिखाएं कि मधुर वाणी में कैसे बातें करना है। बाइबल उन पिताओं के बारे में चेतावनी देती है जो अपने बच्चों को निराश करते हैं, और यह पिताओं की दबंग, आलोचनात्मक, अधूरी और कठोर वाणी है जिसने कई बच्चों के दिलों को घायल कर दिया है (कुलुस्सियों 3:21)। इस बारे में ध्यान से सोचें कि जब आपका बॉस या विरोधी आपके साथ इसी तरह बातें करता है तब आपको कैसे लगता है।
आज आप अपने जीवनसाथी से कैसे बात करेंगे? कार्यस्थल पर आप अपने अधीनस्थों, सहकर्मियों या वरिष्ठों को कैसे संबोधित करेंगे? आप अपने बच्चों या अपने माता-पिता से कैसे बात करेंगे? अपने होठों पर पहरा लगाओ, और तब तक मत बोलो जब तक आपके पास कहने के लिए कोई स्वास्थ्यप्रद और हितकर बात न हो जो सुनने वालों के कानों को मीठी लगे। आपकी प्रतिष्ठा इस बात पर निर्भर करती है कि आप आज क्या कहते हैं। क्या आप जीवन-वृक्ष हैं या आत्मा को दुखी करनेवाले व्यक्ति हैं?
इस नीतिवचन का एक और सबक है: आपका मुंह केवल वही कह सकता है जो आपके दिल में है (मत्ती 12:33-37; 15:18-20)। जो आप सोचते नहीं, वह आप कहेंगे भी नहीं। अपने दिल को सुधारे बिना आप अपनी वाणी में कोई सुधार नहीं कर सकते। शुद्ध मन अमृतवाणी बोलत है जिससे राजा भी प्रसन्न होते हैं (नीतिवचन 22:11)। इसलिए, अपने मन की रक्षा करना आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए (नीतिवचन 4:23)। सभी पाप मन ही से शुरू होते हैं, और यह उलट फेर की बात के मामले में भी सत्य है (याकूब 1:13-16; 3:1-18)।
आज तक किसी ने भी नाज़रेथ के यीशु के समान बातें नहीं कीं है (50:4; लूका 4:22)। उसके शत्रुओं ने भी माना कि उसका कोई तोड़ नहीं था (यूहन्ना 7:46)। जब बह बोलता तो सुननेवालों के मन में समझ के कारण उत्तेजना उत्पन्न होती थीं (लूका 24:32)। आम उसकी बातों से आनन्दित होते थें (मत्ती 12:37)। प्रत्येक पास्टर उसके पवित्र उदाहरण का अनुसरण करने के लिए बाध्य है (2 तीमु 1:13; तीतुस 2:7-8)। जिन्हें परमेश्वर के सुसमाचार का प्रचार करने के लिए बुलाया गया है, उन्हें मनुष्य की मूर्खता से सुसमाचार को प्रदूषित नहीं करना चाहिए। पुलपिट से अब जो चुटकुले, दन्तकथाएँ और हरकतें आम हैं, वे यीशु मसीह और खरी वाणी का अपमान हैं।
परमेश्वर ने आपको इसलिए जीभ दी कि आप उसकी महिमा करें और दूसरों की मदद करें (भजन 30:12; 108:1; मलाकी 3:16; 1 थिस्स 5:14; इब्रा 10:24-25)। प्रभु में घमंड करना और उसकी महिमा करना परमेश्वर का सम्मान करने और दूसरों का उत्थान करने का एक शानदार तरीका है (भजन 34:1-3)। आपका अंतिम संस्कार क्या प्रतिबिंबित करेग? क्या यह कि आपकी जीभ असंख्य लोगों के लिए जीवन-वृक्ष थी? या यह कि आपने कई लोगों की आत्मा को दुखित किया? क्या लोगों को आपके शब्दों के खोने का दुःख होगा? या राहत कि आपकी नकारात्मक और चुभने वाली ज़बान अब हमेशा के लिए ख़त्म हो गई है?
आपकी जीभ दूसरों को चंगाई देनेवाली हो सकती है और आप दूसरों के लिए जीवन-वृक्ष बन सकते हैं। आपका हृदय परमेश्वर के समक्ष शुद्ध होना चाहिए, आपका मन उसकी सच्चाई और बुद्धि से भरा होना चाहिए, और आपको वाणी के लिए बुद्धिमान नियमों को सीखना चाहिए जो बाइबल में निहित हैं (नीतिवचन 16:23; भजन 19:7-11; इफि 4: 29; कुलुस्सियों 4:6)। फैसला आपका है, लेकिन आप जो भी फैसला लेंगे उसके लिए आप परमेश्वर और मनुष्य दोनों के प्रति जवाबदेही होंगे।
नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।