नीतिवचन 15:31
जो कान जीवन की झिड़की सुनता है, वह बुद्धिमानों में रहता है।
बुद्धिमान मनुष्य सुधार की बातों के मूल्य को समझते हैं, और वैसा ही करते हैं। आप कितने अच्छे श्रोता हैं? विशेषकर तब जब आपको कोई झिड़की लगाता है और सुधारता है? सुधार और निर्देश को विनम्रता से सुनने की तत्परता बुद्धि की प्राप्ति के लिए एक शर्त है। डांट-फटकार से यदि आप नाराज़ हो जाते हैं या आपको बुरा लगता है तो आप बुद्धि को ठुकरा रहे हैं, क्योंकि बुद्धि एक सफल जीवन के लिए आवश्यक है। यदि आप एक बुद्धिमान व्यक्ति बनना चाहते हैं, तो आप को सुधार को ग्रहण करना सीखना होगा।
सुलैमान ने अगले ही वचन में उसे इस प्रकार लिखा : “जो उपदेश को नहीं मानता सो अपने ही प्राण का तिरस्कार करता है, परंतु जो दपट को मानता है सो समझ को पाता है” (नीति 15:32)। यदि आप सुधार और शिक्षा को अनसुना करते हैं, जो एक सम्पन्न और कामयाब जीवन के लिए अनिवार्य बातें हैं, तो आपको अपने ही प्राण को तुच्छ जानना चाहिए, क्योंकि आपने जीवन के लिए आवश्यक बुद्धि के स्रोत को ही ठुकरा दिया है।
दूसरों की ओर से आने वाले सुधार, निर्देश, डांट-फटकार और चेतावनियों के द्वारा बुद्धि की प्राप्ति का महत्व समझना जीवन का मुख्य नियम है। एक बुद्धिमान मनुष्य उन्हें ग्रहण करेगा, ऐसा करने के लिए आप के प्रति प्रेम और सम्मान रखेगा, और बुद्धि में बढ़ता जाएगा। परंतु ठट्ठा करनेवाला सुधार का तिरस्कार करेगा और सुधार करने के कारण आपका द्वेष करेगा (निति 9:8)। इन में से एक, परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ता है; तो दूसरे का दोनों ही द्वेष और तिरस्कार करते हैं।
झिड़की या डांट-फटकार क्या है? झिड़की या डांट-फटकार वह है जब कोई व्यक्ति आपकी किसी हरकत, रवैया, मान्यता, आचरण, प्रतिष्ठा, आदि को अनुचित समझकर उनकी निंदा करता है। फटकार तब पड़ती है जब लोग आपको कोई ग़लत काम करने के लिए डांटते हैं, दोषी ठहराते हैं, या आप में ग़लती निकालते हैं। यह तब होता है जब लोग यह कहकर आक्षेप लेते हैं, आलोचना करते हैं, या आपको चेतावनी देते हैं कि आप के वर्तमान चुनाव मूर्खतापूर्ण हैं, जिसका नतीजा पीड़ा और मुसीबत के रूप में सामने आएगा। इसमें आपको साफ-साफ बताया जाता है कि आप ग़लत हैं।
अपनी आलोचना को मानना और उसका मूल्य समझना कठिन है। क्यों? इसलिए, क्योंकि हर एक मनुष्य का मार्ग उसकी दृष्टि में सही है (निति 16:2,25; 20:6; 21:2)। क्योंकि हर मनुष्य सोचता है कि वही सही है, इसलिए वह उस हर व्यक्ति से नाराज़ हो जाता है जो उसे फटकारता है और उसके मूर्खतापूर्ण चुनावों, उसके चरित्र, या आचरण के विरोध में चेतावनी देता है। परंतु अगर आप बुद्धिमान हैं, तो आप हर विषय पर अपनी कल्पनाओं, विचारों, और मतों पर आसानी से संदेह करेंगे।
अपनी आलोचना को मानना और उसकी सराहना करना कठिन है। क्यों? इसलिए, क्योंकि मानव-स्वभाव किसी बुद्धिमान से डांट-फटकार को सुनने के बजाय मूर्खतापूर्ण आव-भगत ज्यादा पसंद करता है (सभो. 7:5)। परंतु विश्वासयोग्य मित्र से आनेवाली डांट-फटकार, भले ही उससे चोट पहुंचे, या घाव लगे, एक झूठे मित्र के पाखंडपूर्ण कई चुंबनों और गुप्त प्रेम से उत्तम है (निति 27:5-6)। बुद्धिमान दाऊद ने हमें बताया कि जो हमें फटकारते हैं उन से हम प्रेम रखें (भजन 141:5)।
जीवन की झिड़की क्या है? यह किसी व्यक्ति से आनेवाला सुधार या निर्देश है जिसका लक्ष्य आपको अपनी ही हानि करने से रोकना है जिसे आप अलग-अलग तरीकों से अपने ऊपर ले आते हैं, ताकि एक समृद्धि और कामयाबी का जीवन जीने में आपकी मदद की जा सके। यह आपकी आलोचना या आपके लिए चेतावनियां है ताकि सही दिशा में आपकी अगुवाई की जा सके जिससे कि आपका जीवन परमेश्वर की आशीषों और उसकी कृपा से ओतप्रोत हो जाए। यह एक समृद्ध जीवन के लिए आवश्यक सुधार और फटकार है।
झिड़कियां कहां से आती हैं? वे सबसे पहले माता-पिता से आती हैं (निति 6:20-23; 7:1-2; 15:5)। माता-पिता अपने बच्चों से कई अधिक बढ़कर बुद्धिमान और ज्ञानी होते हैं। हालांकि, यह दूरी उम्र, सयानापन, और अनुभव के साथ धीरे-धीरे कम होती जाती है, फिर भी यह दूरी बचपन और जवानी में इतनी व्यापक और बड़ी होती है कि माता-पिता की डांट-फटकार को स्वर्ग से आने वाली बुद्धि के तुल्य समझकर ग्रहण की जानी चाहिए। एक बच्चा अपने माता-पिता की तुलना में कुछ भी नहीं जानता।
झिड़की या फटकार बुद्धि और अनुभव से युक्त शिक्षकों, पास्टरों, मालिकों, पतियों, और अन्य अगुओं की ओर से भी आती हैं। वे आपसे कितना प्यार करते हैं इसका तरीका दिखाने के लिए वे आपको आपके जीवन में मौजूद किसी भी पाप को दिखाने के लिए परमेश्वर की व्यवस्था से बंधे हुए हैं (लैव्य. 19:17)। क्या आप फटकार में प्रदर्शित प्रेम को स्वीकार करते हैं? क्या आप डांट-फटकार लगाकर अपने प्रेम को प्रमाणित करते हैं? यह तो चरित्र का परीक्षण और सफलता का मूलमंत्र है।
अधिकतर डांट-फटकार बाइबल में से आती है, जो मूर्खतापूर्ण जीवनशैली को फटकारने और बुद्धि का निर्देश पाने परमेश्वर का वचन है (2 तिमु 3:16-17)। यह इस अंधकारमय संसार में आपके लिए ज्योति है, जिस पर आप को बड़ी सतर्कता से ध्यान देना आवश्यक है (2 पतरस 1:19)। यह उन पर जो उसे पढ़ते और उस में लिखी हुई बातों के अनुसार करते हैं, आशीषों को ले आता है (याकूब 1:21-25)। आप फटकार को कितनी सजगता से सुनते हैं? आप उससे कितना प्रेम रखते हैं? आप उस वचन का कितनी तत्परता से पालन करते हैं?
यह नीतिवचन समझने में एकदम सरल है, फिर भी सबसे महत्वपूर्ण है, और नीतिवचन की पुस्तक में अन्य शब्दावली में दोहराया गया है। इस नीतिवचन पर हमारी शिक्षा को आप जो प्रतिक्रिया देंगे, वह इस बात की ओर संकेत होगा कि आप इस सबक को सीख कर उसका पालन करेंगे या नहीं। इस परिभाषा के अनुसार, क्या आप अपना परीक्षण करेंगे और फटकार का विरोध करने की अपनी मूर्खता को देख सकेंगे? आज ही अपनी इस मानसिकता से संभल जाए।
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