नीतिवचन 15:25

यहोवा अहंकारियों के घर को ढा देता है, परन्तु विधवा की सीमाओं को अटल रखता है।

अहंकार आपको बर्बाद कर देगा। यह सोचना कि आप विशेष हैं आत्म-विनाशकारी है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप धनी हैं या बलवान, परमेश्वर आप ही आपको नीचे गिरा देगा। आप उसके न्याय का न तो मुकाबला कर सकते हैं और न उसे धीमा कर सकते हैं। परन्तु वह दीन और नम्र लोगों को आशीष देगा और उनकी रक्षा करेगा, फिर चाहे वे विधवाएं हो या अनाथ।

अहंकारी फिरौन के विषय में सोचें। उसने मूसा को ठट्ठों में उड़ाया, “फ़िरौन ने कहा, “यहोवा कौन है कि मैं उसका वचन मानकर इस्राएलियों को जाने दूँ? मैं यहोवा को नहीं जानता, और मैं इस्राएलियों को नहीं जाने दूँगा” (निर्गमन 5:2)। उसका अन्त कहाँ हुआ? लाल सागर की तलहटी में। उसके सबसे बड़े बेटे का क्या हुआ? वह उससे भी नीचे जा पहुँचा। मिस्र के धन का क्या हुआ? वह परमेश्वर यहोवा का मन्दिर बनाने के लिये इस्राएल की जेब में चला गया।

शिप्रा और पूआ नामक दो धाइयां इस्राएल की सेवा करती थीं। फिरौन ने उन्हें सभी इब्री बालकों को मार डालने का आदेश दिया। परन्तु वे परमेश्वर का भय मानती थीं, और इसलिए उन्होंने नवजातों का घात नहीं किया, और इस विषय में फिरौन से झूठ बोलती थीं। यहोवा ने क्या किया? उन्हें आशीष दी और उनके घर बनाए (निर्गमन 1:15-21)। किसका घर उजाड़ गया? फिरौन का। किनके घर बस गएँ? दाइयों के।

यहोवा (LORD) कौन है? यह शब्द जिसे अंग्रेजी बाइबल में बड़े अक्षरों, LORD के रूप में लिखा जाता है, जीवित और सच्चे परमेश्वर यहोवा का नाम है (निर्गमन 6:3)। यहोवा का अर्थ है ‘मैं जो हूँ सो हूँ’ (निर्ग 3:14)। उसके तुल्य हो सके ऐसा कोई अन्य जीवित प्राणी, चाहे वास्तविक हो या काल्पनिक, अस्तित्व में नहीं है। यदि आप अहंकारी हैं, और सोचते हैं कि आप कुछ हैं, जब कि आप कुछ भी नहीं बल्कि उसकी रचना मात्र हैं, तो आप उसके विरूद्ध अपराध करते हैं।

परमेश्वर यहोवा घमण्डियों का नाश करेगा, इसलिए इस नीतिवचन में सुलैमान का सबक यह है कि घमण्ड, या अहंकार से घृणा करो और उसके स्थान पर दीनता को अपनाओ। उसका नीतिवचन आपको जीवित परमेश्वर के चारित्रिक गुण और आपकी सफलता के लिए उपयुक्त सबक की शिक्षा है। आप जिस निमित्त घमण्ड करते हैं उसमें कितने लोग आपका साथ देते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, यह परमेश्वर आपका विनाश कर देगा। सुलैमान ने लिखा, “सब मन के घमण्डियों से यहोवा घृणा करता है; मैं दृढ़ता से कहता हूँ, ऐसे लोग निर्दोष न ठहरेंगे” (नीतिवचन 16:5)। इस पर विश्वास करो।

सिकंदर महान के बारे में सोचें। क्या वह इतिहास के सर्वश्रेष्ठ सैन्य कमांडरों में से एक था? बिलकुल था। जब वह अपनी तीस वर्ष की आयु की शुरुवात में ही था तब क्या उसने अपने सब शत्रुओं को पराजित कर दुनिया को जीत लिया था? हाँ। क्या उसके पास अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए जीवित रहने के साधन और कई दशक थे? हाँ। लेकिन हुआ क्या? उसके घमण्ड के कारण परमेश्वर यहोवा ने मात्र 33 वर्ष की आयु में उसे और उसके पूरे परिवार को मिटा दिया। वह उस महान शिखर पर कैसे पहुंचा था इस बारे में उसने अधिक ध्यान से सोचना चाहिए था, क्योंकि यह परमेश्वर ही था जिसने उसे ऐसी आशीष दीं थी।

मनुष्य चाहे कितना ही प्रसिद्ध, शक्तिशाली या धनवान हो, घमंड उस पर परमेश्वर यहोवा का विनाश ले आता है। परन्तु मन की दीनता के कारण सामाजिक बेक़द्री, निर्धनता या निर्बलता के बावजूद परमेश्वर से आशीष ही मिलती है। असहायों को छुड़ाने में परमेश्वर प्रसन्न होता है, और वह उन लोगों का विनाश करने में प्रसन्न होता है जो अपने आप पर और अपनी शक्ति पर भरोसा रखते हैं (व्यव. 10:17-18; अय्यूब 40:9-14; भजन 18:27; 146:9; लूका 1:51) -53)। मन की दीनता और घमण्ड के बारे में यह मूल नियम नीतिवचन की पुस्तक में दोहराया गया है (नीतिवचन 16:18; 17:19; 18:12; 29:23)। यदि आप स्वेच्छा से अपने को छोटा करते हैं, तो महान परमेश्वर यहोवा आपको ऊपर उठाएगा (1 पतरस 5:6; याकूब 4:10)।

यहोवा अहंकार से घृणा करता है। वह उस मनुष्य को सह नहीं सकता जो सोचता है कि वह कुछ है, जबकि वास्तव में वह कुछ भी नहीं है। ऐसे विचारोंवाला मनुष्य खुद से झूठ बोलता है (गलातियों 6:3)। मनुष्य जो कुछ भी है या उसके पास जो कुछ भी है वह सब परमेश्वर की देन है; और उसे उन बातों पर घमण्ड नहीं करना चाहिए, मानो सबकुछ उस ने अपने ही बल पर हासिल किया हो (1 कुरिन्थियों 4:7)। परमेश्वर अहंकारी का न केवल नाश करेगा, परन्तु वह उसके घर को भी उजाड़ देगा, और उसके घराने और उसकी संपत्ति को भी, जिसके बारे में उसने व्यर्थ ही सोचा था कि वह पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहेगी (भजन संहिता 49:11)।

परमेश्वर ने घमण्ड के कारण लूसिफर (शैतान) को स्वर्ग से बाहर निकाल दिया (यशायाह 14:14; 1 तीमु 3:6; यहूदा 1:6)। उसने महान राजा नबूकदनेस्सर को कुचल दिया और उसे ऐसी हालत में छोड़ दिया कि वह अगले सात वर्ष रेंगता रहा (दनिय्येल 4:25; 5:20); उसने हामान और उसके दस पुत्रों को उनके ही रचे फाँसी के फंदे पर लटका दिया (एस्तर 7:10; 9:14)। एडॉल्फ हिटलर का तीसरा जर्मन राज्य कहाँ है जो एक हज़ार साल तक चलनेवाला था? माओ जेडोंग और उनकी महान योजना जिसे “आगे की ओर बड़ा क़दम” के रूप में जाना जाता है, और उसकी सांस्कृतिक क्रांति का क्या हुआ? परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता।

परमेश्वर यहोवा को मन की दीनता प्रिय है। वह उस मनुष्य को आशीष देगा जो उसके सामने थरथराता है (यशा 57:15; 66:2)। वह एक भिखारी को गोबर के ढेर से उठाकर उसे महिमा के सिंहासन पर बिठाकर राजकुमारों के बीच स्थापित करने से अधिक प्रसन्न होगा, जैसा कि हन्ना ने अपनी विलक्षण प्रार्थना में शानदार ढंग से वर्णित किया है (1 शमूएल 2:1-10)। वह सभी अनाथों और विधवाओं का रक्षक है (भजन 10:14,18; 68:5)। किसी विधवा की संपत्ति को लुटने का विचार ही प्राण-घातक मूर्खता है (नीतिवचन 22:22-23; 23:10-11)।

सुनों, दाऊद विधवाओं और अनाथों के इस रक्षक के बारे में लिखता है, “परमेश्वर का गीत गाओ, उसके नाम का भजन गाओ; जो निर्जल देशों में सवार होकर चलता है, उसके लिये सड़क बनाओ; उसका नाम याह है, इसलिये तुम उसके सामने प्रफुल्लित हो! परमेश्वर अपने पवित्र धाम में, अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है” (भजन 68:4-5)। बेहतर होगा कि आप अपने आप को जीवित रखने के लिए विधवाओं के प्रति मन के दीन और दयालु बनें।

परमेश्वर ने एलिय्याह को सारपत की भूखी विधवा को बचाने के लिए भेजा (1 राजा 17:8-16; लूका 4:25-26)। उसने एक और विधवा को उसके लेनदार से बचाने के लिए एलीशा को भेजा (2 राजा 4:1-7)। नाओमी पर विचार करें, जिसकी सीमाओं को परमेश्वर ने बढ़ाया और दाऊद और यीशु उसके पुरुष वंशजों में से थें (रूत 4:14-17)। शूनेमिनों की सीमाओं के संक्षिप्त इतिहास पर विचार करें (2 राजा 8:1-6)।

यहोवा कहता है, ”तुम्हारी विधवाएँ मुझ पर भरोसा रखें” (यिर्मयाह 49:11)। नया नियम, जो अपने सिद्धांतों और नीतियों में और भी कड़ा है, विधवाओं पर विशेष ध्यान देने और उनकी देखभाल करने का आदेश देता है (मत्ती 23:14; लूका 2:36-38; 7:11-18; 21:1-4; यूहन्ना 19:26-27; प्रेरितों 6:1-7; 9:36-41; 1 तीमुथियुस 5:3-10; याकूब 1:27)। इस नीतिवचन में आपकी सफलता और सम्मान का मूलमंत्र है अपने को विधवा के समान मन का दीन करना और सज्जन होना।

क्रिश्चन भाई, आपकी स्थिति कभी खराब नहीं होगी। जीवन की ओर देखने और आशीष कैसे पाई जाती है इसपर आपके विनम्र और दीन दृष्टिकोण के लिए दुनिया को आपका उपहास करने दें। आपका छुड़ानेवाला और मित्र आपको बचाने में पराक्रमी है (यशा 63:1-6)। वह तुम्हें कभी नहीं त्यागेगा; मनुष्य तुम्हारा क्या कर सकता है (इब्रा13:5-6)? तुम्हारी सीमाएँ शीघ्र ही लाज़र और धनी व्यक्ति की तरह निश्चित और साफ़ साफ़ हो जाएगी (लूका 16:22-26)।

अहंकार में डूबी झूठी रोमी कलिसियाँ महान पुरातनता का दावा करती है और सोचती है कि वह विधवापन या दुःख के किसी भी डर के बिना हमेशा के लिए एक रानी बनकर विश्वस्तर के धार्मिक सिंहासन पर बैठेगी। परन्तु परमेश्वर उसे एक ही दिन में मृत्यु, शोक, अकाल और आग से नाश करेगा (प्रकाशितवाक्य 18:1-8)। ठीक उसी समय यीशु के छोटे झुण्ड को, जिसे पिता ने राज्य दिया है, रोम के झूठे सुसमाचार के आक्रमणों से सुरक्षित कर उसकी सीमाओं को स्थापित करेगा (लूका 12:32; प्रकाशितवाक्य 12:14-17)। यहोवा परमेश्वर जगत के अंत तक अपने छोटे झुण्ड के साथ है (मत्ती 28:20)।

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