नीतिवचन 15:17
प्रेम वाले घर में सागपात का भोजन, बैर वाले घर में पले हुए बैल का मांस खाने से उत्तम है।
जब आप किसी को अपने घर खाने पर बुलाते हैं, तो क्या मुख्य भोज के लिए केवल साग-भाजी और सलाद परोसते हैं? यदि प्रेम खाने की मेज पर दिलों को जोड़ता है, तो यह मांस और दाखमधु से युक्त एक शानदार दावत हो सकती है। परन्तु यदि मेहमान और मेजबान दोनों के मध्य आपसी बैर मौजूद हो, तो मांस और दाखमधु से युक्त एक शानदार दावत भी निराश कर देती है। मन में आपसी नाराजगी को कायम रखकर मांस और दाखमधु से युक्त एक शानदार दावत की तुलना में प्यार- मोहब्बत के साथ कुछ हरी पत्तेदार सब्जियों से बनी साग-भाजी अधिक आनन्द देनेवाली होती है। यह नियम रुखी-सुखी रोटी के लिए भी सत्य है, यदि आपसी लड़ाई-झगड़े के बजाय शांति और चैन हो (नीतिवचन 17:1)।
उपदेशक, राजा सुलैमान ने चीजों के बीच तुलनाएं करके बुद्धि की शिक्षा दीं। एक चीज़ को दूसरी से बेहतर दिखाकर, उसने बुद्धिमानीपूर्ण प्राथमिकताएँ क्या हैं इस विषय पर शिक्षा दीं। ऐसे में आपको मांस और दाखमधु से युक्त एक शानदार दावत और भौतिक चीजों से ज्यादा प्यार- मोहब्बत को महत्व देना चाहिए। प्रेम और शांति पर जोर देना सही रेस्तरां चुनने और अतिरिक्त पैसे खर्च करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। एक अति निर्धन भी सुखी हो सकता है।
आप कितने बुद्धिमान हैं? ज्ञान, समझ, और ठीक-ठीक परखकर किया हुआ निर्णय सर्वोश्रेष्ठ बातें हैं, और अपने तथा अपने आस-पास के लोगों के जीवनों का कल्याण करने के लिए लक्ष्यों और दैनिक प्रयासों को प्राथमिकता दें। इस दुनिया की यह सोच कि ‘किसी भी कीमत पर ऊँचाई को छू लो’ या ‘मैं ही अमीर बनूंगा’ एक विनाशकारी मानसिकता है। आज कितने तथाकथित सफल लोग अवसाद से ग्रस्त हैं? यहाँ इलाज है। इसे आज ही जानें।
यदि यह नीतिवचन किसी निर्धन मनुष्य ने लिखा होता, जो अक्सर सागपात खाने में ही संतुष्ट रहने विवश हो, तो इस नीतिवचन के सबक को तुच्छ जानकार अनदेखा किया जा सकता है। परन्तु इसे एक ऐसे राजा ने लिखा जो अपने समय का सबसे धनवान मनुष्य था, और वह जब-जब अपनी खाने की मेज पर बैठता तो हर बार अपने भोजन के लिए रसोई की किसी भी संभावित पकवान को चुन सकता। सुलैमान ने प्रतिदिन ऐसे-ऐसे पकवानों का आनंद लिया जिसकी एक गरीब व्यक्ति कल्पना भी नहीं कर सकता था, फिर भी उसने प्रेम और शांति को उन सबसे ऊपर रखा।
क्या आपने कभी किसी के घर में ऐसे माहौल में खाना खाया है जहाँ कड़वाहट, घृणा, विवाद या आक्रोश का कोलाहल हो? क्या आपको उस समय का तनाव याद है? गरमा-गर्मी का माहौल? और जिसे एक सुखद और मिठास से भरा पल होना चाहिए था, वह कैसे बर्बाद हो गया? आपको तो यह भी याद नहीं होगा कि आपने उस दर्द भरे माहौल में क्या खाया था।
क्या आपने कभी किसी ऐसा शानदार भोजन किया है जिसमें केवल कुछ साधारण पकवान ही परोसे गएँ थे, क्योंकि आप उन लोगों से प्यार करते हैं जिनके साथ आप थे, और वे भी आपसे प्यार करते हैं? प्रेम और अपनेपन से भरा माहौल हो तो सागपात या आलु-पोहा भी पर्याप्त है। हो सकता है आपको यह भी याद न हो कि ऐसी मीठी सहभागिता के सुखद समय आपने क्या खाया था।
कई परिवार कलह और तनाव के मध्य भोजन करते हैं। यह उनकी आदत बन जाती है और उन्हें अपनी गलती का पता भी नहीं चलता। कलह एक पारिवारिक परंपरा बन जाती है। आपसी बातचीत केवल नकारात्मक और आलोचनात्मक होती है; बच्चे एक दूसरे को ताने मारकर काट-फाड़ सकते हैं; और कुछ अपने अंदरूनी क्रोध को दबाकर चुपचाप बैठे हुए हो सकते हैं। सचमुच वहां कोई भी नहीं रहना चाहता। एक मसीही घर में ये चीज़ें कभी नहीं होनी चाहिए।
कड़वी ईर्ष्या और तकरार नरक से हैं (याकूब 3:14-16), और शांति और सौम्यता स्वर्ग से हैं (याकूब 3:17-18)। कुछ और सोचकर अपने आप को धोखा मत दो। झगड़े और कलह से बैर रखें। यह विश्वासियों का कर्तव्य और सौभाग्य है कि वे प्रेम और शांति का पीछा करें, और इसके परिणामस्वरूप उनके पास इस संसार के धनवानों की तुलना में कहीं अधिक सुखद और संतुष्ट करने वाली दावतों से भरे पल होंगे।
आधुनिक लालची समाज सफलता की परिभाषा भौतिक वस्तुओं की उपलब्धियों पर जोर देकर करता है। लेकिन सुलैमान ने इन कुछ शब्दों में यहाँ सिखाया कि अच्छा जीवन इस बात पर निर्भर नहीं है कि आपके पास क्या है, बल्कि इस पर निर्भर करता है आप दूसरों से कितना प्रेम करते हैं। सन्तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है (1 तीमु 6:6), परन्तु स्वर्ग से प्रेरित यह ज्ञान संसार के उच्च शिक्षित विद्वानों की समझ से बाहर है।
कई लोग शाम की सफलता या ख़ुशी को इस बात से मापते हैं कि वे किस प्रतिष्ठित रेस्तरां में गए, क्या क्या पकवान मंगवाएं और कितनी बार मंगवाएं, और मुख्य भोज पर कितना खर्च किया। लेकिन अधिक महत्वपूर्ण मुद्दा यह होना चाहिए कि यह सहभागिता कैसी थी और जिन्हें आपने यह भोज दिया उन के साथ आपसी संबंध कैसे हैं। तब तो खाने का मेनू भी कोई मायने नहीं रखता, चाहे मांस और दाखमधु हो, या केवल सागपात। जीवन के इस सबक से कभी भी समझौता न करें, और फिर शाकाहारी भोजन की निराशा या मांसाहार के कारण होटल का बड़ा बिल कभी भी ऐसे भोज या उसकी स्मृतियों को प्रभावित नहीं कर सकते, क्योंकि इस भोज और ख़र्चे की बुनियाद प्रेम से भरी सहभागिता है।
झगड़ालू स्त्रियों ने कितनी बार दावतों का सत्यानाश कर दिया है (नीतिवचन 12:4; 19:13; 21:9,19; 27:15-16)? उनके बच्चों के दिमागों में कौन-सी यादें हैं? वे एक दबंग, आलोचनात्मक और घिनौनी माँ के साथ कितनी बार रात के खाने के लिए बाहर जाना पसंद करेंगे? उस पति पर दया आती है, जो बच्चों के समान उसकी संगती को छोड़कर कही जा नहीं सकता, बल्कि उसे हर दिन दर्द सहना पड़ता है।
हालांकि भोजन आम तौर पर घर की औरतें तैयार करती हैं, और साधारण सामग्री से भी स्वादिष्ट भोजन तैयार करने के लिए योजना बनाने, सामग्री खरीदने, पकाने और साफ-सफाई करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, फिर भी यह सुनिश्चित करना पुरुषों की भूमिका होनी चाहिए कि परिवार के सब सदस्य एक दूसरे से प्रेम करते हैं और शांति से रहते हैं। यह भूमिका पतियों और पिताओं की है! जिन्होंने चोंट पहुँचाई है उन्हें आपको सुधारना है, घावों को चंगा करना है, शिकायतों को सुलझाना है, शांति बनाए रखनी है, और प्यार को बढ़ावा देना है। आपसी समन्वय से किया हुआ यह प्रयास परिवार की परंपरा और एक उच्च-स्तरीय आतिथ्य देनेवाली टीम होनी चाहिए।
भाई लोग आपस में मिले रहें यह क्या ही भली और मनोहर बात है (भजन 133:1-3), लेकिन जब भोजन के साथ इसका आनंद लिया जाता है, तो यह वास्तव में विशेष होता है, और इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि क्या परोसा जा रहा है। ऐसी संगति स्वर्ग का माहौल उत्पन्न करती है। पिन्तेकुस्त के दिनों के आनन्द और एकता की और घर घर जाकर उसकी मीठी संगति का पीछा करो (प्रेरितों के काम 2:46)। यीशु मसीह और सुसमाचार के सत्य का बंधन किसी भी अन्य संबंध से कहीं अधिक मूल्यवान है।
आप अपने घर में रिश्तों को सुधारने और संतोषजनक बनाने के लिए आज क्या करेंगे? जब सब ओर से प्यार ही प्यार हो तो, खाने की मेज पर जो कुछ है वह मायने नहीं रखता है। क्या आपने दूसरों को चोंट पहुँचाई है? क्या उन्होंने आपको चोंट पहुँचाई है? क्या आप अपने मन में कोई कड़वाहट पाल रहे हैं? प्रभु यीशु के अनुग्रह से इसका हल और उपचार बिलकुल सरल हैं (नीतिवचन 19:11; मत्ती 5:23-24; 18:15-16; इफि 4:31-32; कुल 3:12-15)।
अपने और अपने प्रियजनों के लिए एक यादगार भोज तैयार करें, बिना ज्यादा खर्च किए या बिना ज्यादा मेहनत किए। शांति और एकता को बढ़ावा दें, और एक दूसरे के लिए प्यार को बढ़ावा दें – चाहे आप कुछ भी खाएं। इसका परिणाम उपस्थित प्रत्येक आत्मा के लिए मरहम होगा और प्रत्येक हृदय के लिए एक सुखद आनंद होगा।
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