नीतिवचन 15:16
घबराहट के साथ बहुत रखे हुए धन से, यहोवा के भय के साथ थोड़ा ही धन उत्तम है,
अपनी प्राथमिकताएं ठीक करें। एक यादगार जीवन जियो। इस अद्वितीय नीतिवचन का अर्थ और मूल्य समझों। आपके जीवन को ऊँचा और महान बनाने के लिए अब तक का सबसे बुद्धिमान और सबसे अमीर राजा यहाँ परमेश्वर-प्रेरित अंतर्दृष्टि दे रहा है।
सुलैमान ने जीवन की लगभग हर वस्तु के साथ बड़े व्यापक रूप में यथा-संभव प्रयोग किया, आपके ज्ञान और कल्याण के लिए उसने सभी चीजों को तुलना के सिद्धांत को प्रयुक्त करके परखा और उनके परिणामों को मापा, ताकि आप एक गुमराह जीवन की उलझन और विपत्ति से बच सकें। इस प्रयोग को करने के लिए वही सबसे योग्य था, क्योंकि परमेश्वर ने उसे महान बुद्धि, धन, शक्ति और शांति दी थी।
उसने ज्ञान से लेकर सुखविलास तक, निर्माण से लेकर आमोद-प्रमोद तक हर चीज की खोज करने में खुद को डुबो दिया था। उसकी 1000 पत्नियाँ, अपना निज़ी चिड़ियाघर और अपना निज़ी आर्केस्ट्रा और भजन-मंडल था। उसने इतना धन और इतनी संपत्तियां जमा कीं कि वह दुनिया में सबसे अमीर मनुष्य बन गया था। उसने एक एक चीज का परिक्षण किया – उसने बुद्धिमानी और मूर्खता दोनों गुणों से परिणामों का आकलन किया। जीवन को लेकर उसका विश्लेषण अमूल्य है।
मानव सुख और जीवन के उद्देश्य की खोज करने के अपने हर संभव साधन का परीक्षण करने के बाद सुलैमान किस नतीजे पर पहुँचा? उसका निष्कर्ष पढ़ें: “सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्तव्य यही है” (सभोपदेशक 12:13)। इस निष्कर्ष की सत्यता पर आपके मन में कोई सवाल नहीं होना चाहिए। इसकी खोज और पालन आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है।
इन दोनों में से क्या श्रेष्ठ है – यहोवा के भय के साथ ग़रीब होना, या यहोवा के भय के बिना अमीर होना? उत्तर बिलकुल सरल है। और यह एक अमीर राजा था जिसने यह उत्तर लिखा। यहोवा का भय आपके जीवन की कुंजी है: इसका प्रतिफल सबसे बड़ा है, और यह तुम्हें संकट से बचाएगा। न तो संपत्ति और न ही कोई कमाई परमेश्वर का वह संतोष, आनंद और आशीर्वाद ला सकती है जो उसका भय मानने से मिलेगा।
यहोवा का भय क्या है? यह सृष्टिकर्ता परमेश्वर के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम है जो आत्मा को विश्वास और संतोषजनक आनंद से भर देता है। इससे पाप के प्रति घृणा और पवित्रता के लिए तीव्र इच्छा उत्पन्न होती है। यह उसके पवित्र शास्त्र को गंभीरता से पढ़ने और उसे अधिक जानने की उत्सुक इच्छा पैदा करता है। यह भक्ति और प्रेम के ऐसे फल की ओर ले जाता है जिसे यह संसार कभी उत्पन्न नहीं कर सकता।
परमेश्वर का भय मानने का परिणाम यह है कि उसके कारण व्यक्ति सत्य और ज्ञान के साथ एक पवित्र जीवन जीता है। ऐसे जीवन की तुलना “घबराहट” के जीवन से किए जाने पर ध्यान दें। परमेश्वर का भय मानने से शांति और आनंद, विश्वास और संतुष्टि, और स्वर्ग की सारी आशीषें प्राप्त होती हैं (नीतिवचन 10:22; भजन 112:1-3; 115:13; 128:1-6; 147:11; 145:19)। बिलकुल गारंटी के साथ! इससे बढ़कर आपको और क्या चाहिए? इस संसार की चाल आपको अपनी झूठी बातों से बहकाने न पाए।
परमेश्वर यहोवा का भय मानने से प्राप्त होनेवाली आशीष के केवल दो उदाहरणों पर विचार करें। सबसे पहला, यह बुद्धि और ज्ञान की नींव है (नीतिवचन 1:7; 9:10)। इसलिए, आप अपने मित्रों और यहाँ तक कि अपने गुरुजनों से भी अधिक बुद्धिमान बनेंगे। दूसरा, परमेश्वर पृथ्वी पर हमेशा ऐसे लोगों की खोज में रहता है जो उससे डरते हैं, कि वह उन्हें अपनी आशीष देने में अपनी सामर्थ्य दिखाए (2 इति 16:9; भजन 112:1-3; 25:12-14)।
जैसा कि सुलैमान ने अपने विवरण में मान लिया, केवल धन-संपत्ति ही व्यर्थता और आत्मा की घबराहट है। परन्तु वह तब और भी घबराहट को जन्म देती है जब परमेश्वर का भय नहीं माना जाता (नीतिवचन 10:22; 12:21; 19:23)। यदि आप परमेश्वर का भय मानें तो गरीबी भी अच्छी हो सकती है। यदि यह सब सच है, और है ही, तो अवश्य है कि आप विवाह करने में बहुत सावधानी बरते ताकि आप परमेश्वर से डरने वाले जीवनसाथी के साथ रह सके (नीतिवचन 31:30)।
यदि आप जीवित परमेश्वर और उसके पुत्र यीशु मसीह को जानते हैं, तो इससे क्या फ़र्क पड़ता है कि आपके बैंक-खाते में कितनी जमापूंजी है? इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या खाते हैं या पहनते हैं, या आप कहाँ रहते हैं। तुम्हारे मन में यहोवा का भय स्वर्ग की ओर से श्रेष्ठ वरदान है, क्योंकि इस संसार के आँखों के सामने परमेश्वर का कोई भय नहीं है (रोमियों 3:18)। परन्तु परमेश्वर ने आप पर ऐसा अनुग्रह किया कि उसने आपको इस संसार के उन लोगों में से जो उससे बैर रखते हैं और उसकी आज्ञा को नहीं मानते, अपने लेपालक पुत्र और पुत्रियाँ होने के लिए चुना।
अपने विश्वास के लिए मारे गएँ उन हजारों विश्वासियों को जिन्हें सत्य के शत्रुओं ने काठ पर जलाया कि वे धीमी और दर्दनाक मृत्यु मरें, बड़ी आशा और शांति थी, क्योंकि उनके मन परमेश्वर के भय से भरे हुए थे। वे किसी के सामने नहीं झुकें, किसी भी झूठी शिक्षा से सहमत नहीं हुएं, और ने उन्होंने अपने उद्धारकर्ता या उसके वचनों की महिमा को एक पल के लिए भी धोखा दिया। कोई भी संपत्ति या कमाई उन्हें वह शान्ति नहीं दे सकती थी जिसका उन्हें आनंद लिया।
ज्यादातर लोग यही सोचते हैं, और कई निर्बुद्धि ख्रिश्चन लोग भी उनसे सहमत होते हैं, कि धन का लाभ भक्ति है – उनकी परिभाषा में, आर्थिक तरक्की करना मतलब आपके जीवन में परमेश्वर की आशीष को साबित करता है (1 तीमु 6:3-5)। लेकिन वे सरासर ग़लत हैं, क्योंकि सुलैमान ने सिखाया कि परमेश्वर मूर्खों को इसलिए समृद्ध बनाता है कि अन्त में उनका घात करे (नीतिवचन 1:32)। आपको उससे भी श्रेष्ठ जीवन-नीति की आवश्यकता है: “संतोषसहित भक्ति बड़ा लाभ है” (1 तीमु 6:6)।
सुलैमान ने इसी नीतिवचन के समान और भी नीतिवचन लिखे: “अन्याय के बड़े लाभ से, न्याय से थोड़ा ही प्राप्त करना उत्तम है” (नीतिवचन 16:8)। ” टेढ़ी चाल चलनेवाले धनी मनुष्य से, खराई से चलनेवाला निर्धन पुरुष ही उत्तम है” (नीतिवचन 28:6)। और यह भी, “धर्मी का थोड़ा सा धन दुष्टों के बहुत से धन से उत्तम है” (भजन 37:16)।
जीवन का सबसे बड़ा मक़सद करोड़पति बनना नहीं है, बल्कि बुद्धि और ज्ञान की खोज करना और उन्हें प्राप्त करना है, जो कि किसी भी परिस्तिथि में क्या सही है यह जानने और वैसा ही करने का सद्गुण है। अगर बुद्धि हो तो आप परमेश्वर और मनुष्य दोनों को प्रसन्न कर सकते हैं, और आपका जीवन सांसारिक और आत्मिक दोनों ही रूप से धन्य हो जाएगा। बुद्धि कहाँ पाई जाती है? अय्यूब का दिलचस्प और लंबा विवरण पढ़ें (अय्यूब 28:1-28)।
आपको अभी अभी सबसे बुद्धिमान और सबसे अमीर मनुष्य ने जीवन की एक श्रेष्ठ नीति समझाई है। यदि आज वह जीवित होता और सलाह देने की कोई फीज़ लेता तो आप उसके एक घंटे का शुल्क भी वहन नहीं कर पाते। फिर भी उसने आपको यह सलाह और सम्मति बिलकुल निशुल्क दी है। आप इस अमूल्य सलाह का क्या करेंगे? क्या आप एक पेशेवर बनकर धन-दौलत की चाहत में खुद को बर्बाद कर देंगे? या क्या आप अपने जीवन को ऊँचा और महान बनाने के लिए परमेश्वर के वचनों और उपदेशों को सुनकर उसका भय मानना सीखेंगे?
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