नीतिवचन 15:11

नरक और नाश परमेश्वर के सामने हैं : तो मनुष्य के सन्तान के अंतःकरण कितने अधिक? (केजेवी)

आप छिप नहीं सकते। सर्वशक्तिमान परमेश्वर आपके अंतःकरण की हर भावना और विचार को जानता है। वह मृतकों की अदृश्य दुनिया, कब्रों में सड़ रहे शरीरों और कैद में यातना भोग रही आत्माओं को स्पष्ट रूप से देखता है, तो उसके लिए आपके अंतःकरण की सब बातों को देखना बहुत आसान है। आप छिप नहीं सकते। मन फिराओं!

आप अपने आप को छिपा नहीं सकते, और न ही उसे धोखा दे सकते हैं। वह आपकी हर इच्छा, कल्पना और वासना को जानता है। वह आपकी आत्मा की गुप्त बातों को उनके स्वार्थी उद्देश्यों सहित पूरी तरह से जानता है। यदि मृत्यु और नरक उससे छिपे नहीं हैं, तो वह आपको भी पूरी तरह से और बड़ी आसानी से जानता है।

आपकी सभी महत्वाकांक्षाएं और इच्छाएं हर स्वरुप में पूरी तरह से परमेश्वर के सामने प्रकट हैं (भजन 44:21)। आपका मन और हृदय उसके लिए खुली किताबें हैं। कोई पाखंड या दिखावा उन पर परदा नहीं डाल सकता। यहोवा की आंखें सब स्थानों में सब कुछ देखती हैं (नीति 15:3)। वह एक दिन आपके प्रत्येक पाप का पर्दाफाश करके दण्ड देगा, वह दिन अब ज्यादा दूर नहीं है (सभो 12:14; रोमि 2:16; 1 कुरिं 4:5; प्रका 2:23)।

स्वर्ग का भयानक परमेश्वर आपके अंतःकरण को देखता है। उन मनुष्यों से क्यों डरते हो जो आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकते, परन्तु परमेश्वर से नहीं डरते, जो आपको नरक में डाल सकता है (लूका 12:4-5)? दूसरों का डर आपके आचरण को बदल देता है, लेकिन परमेश्वर जो आपके विचारों को जानता है, उसका आप पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उसके चेहरे पर आपके लिए क्रोध से भरी एक नज़र मनुष्य की नज़र या प्रतिक्रिया या सताव की तुलना में असीम रूप से भयावह होगी (प्रका 20:11)।

सर्वज्ञ सृष्टिकर्ता परमेश्वर को सभी बातों का असीम ज्ञान है। वह नरक और नाश के छोटे-छोटे विवरणों को भली-भांति जानता है (अय्यूब 26:6), लेकिन वह आपके आंतरिक भेदों को बेहतर जानता है। उसे आपके अंतःकरण के अंग-अंग को जानने के लिए किसी के इजाज़त की आवश्यकता नहीं है। वह आपको किसी भी मनुष्य से बेहतर जानता है। इस नीतिवचन को फिर से पढ़ें जो “तो” शब्द पर ज़ोर देता है, और ठीक ठीक गौर करें कि नीतिवचन “से अधिक” नहीं कहता।

पृथ्वी पर नाश का कोई ऐसा पहलू नहीं, कब्रों में मृतकों का सड़ना नहीं, या नरक में आत्माओं की पीड़ा नहीं जिनके विषय में सृष्टि का परमेश्वर पूरी तरह से नहीं जानता और न समझता। इसलिए, वह आपको पूरी तरह से जानता है। यह सोचकर अपने आप को धोखा मत दो कि परमेश्वर सुनता नहीं या देखता नहीं (भजन 97:7-9)। वह आपको नग्न और प्रकट रूप में देखता है। प्रत्येक दुष्ट अभिप्राय पूरी तरह से खुला है।

मृतकों का क्षेत्र कितना विशाल है? वहाँ कितने अरबों को यातनाएं दी जाती है? पृथ्वी के अधोलोक में कितने ही शरीर सड़-गल रहे हैं, तौभी परमेश्वर ने उनमें से किसी की एक भी कोशिका को नहीं खोया है, क्योंकि वह उन सभी को जिलाएगा कि उन्हें अपनी उपस्थिति में न्याय किए जाने के लिए खड़ा करे (यूहन्ना 5:28-29; प्रेरितों के काम 24:15)। क्या आप पर ऐसे ज्ञान का कोई फर्क पड़ता है? वह आपके मन को बेहतर रीति से जानता है। आपको अपने प्रत्येक विचार के लिए प्रभु यीशु मसीह को उत्तर देना होगा, जिसके पास नरक और मृत्यु की कुंजियाँ हैं (प्रकाशितवाक्य 1:18)।

दाऊद ने स्वर्ग में या नरक में छिपने के विषय में लिखा, लेकिन वह जानता था कि परमेश्वर दोनों स्थानों पर होगा, जो उसके मन का हर विचार, उसकी जीभ पर आनेवाला हर शब्द, और उसके शरीर की प्रत्येक हलचल को जानता है (भजन 139:1-13; यिर्म 23:24; आमोस 9:2)। यीशु मसीह की आंखों के सामने सब वस्तुएं, आपके मन का हर विचार और भावना खुली और प्रकट हैं (इब्रानियों 4:12-14)। यद्यपि आप अपने मन की बुराई को पूरी तरह से नहीं जान सकते, फिर भी वह इसे पूरी तरह से जानता है (यिर्म 17:9-10)।

आदम और हव्वा अदन के वृक्षों के पीछे छिप गए, परन्तु यहोवा परमेश्वर ने उन्हें ढूंढ़कर कठोर दण्ड दिया (उत्पत्ति 3:7-12)। कैन ने हाबिल की हत्या को छिपाने की कोशिश की, लेकिन यहोवा परमेश्वर ने हाबिल के लहू की पुकार को सुना जो प्रतिशोध के लिए याचना कर रहा था (उत्पत्ति 4:8-12)। प्रभु यीशु मसीह यहूदा की उसके साथ विश्वासघात करने की साजिश के हर विवरण को जानता था जो वह चांदी के चंद सिक्कों के लिए रच रहा था (यूहन्ना 6:64)। और हनन्याह और सफीरा के नेकनियत वचन उन्हें प्रभु के क्रोध से न बचा सके (प्रेरितों के काम 5:1-11)।

यद्यपि फरीसी, जो अहंकार से भरे धार्मिक पाखंडी थे और बाहरी रूप से अपने आप को धर्मी ठहराते थे, उन्होंने यीशु के प्रति अपनी अधिकांश घृणा को अंदर दबाए रखा, फिर भी यीशु उनके साथ अपने वाद-विवादों के दौरान उनके सभी विचारों को जानता था (मत्ती 9:4; 12:25; लूका 7:39-40)। और प्रिय मसीही, आपके गुप्त विचार हो सकते हैं जो अन्य सभी से छिपे हैं, परन्तु वह उन में से प्रत्येक विचार को पूरी तरह से जानता है (भजन 44:21)। वह उन्हें हल्के से नहीं लेता है, क्योंकि मूर्खता का विचार भी उसकी दृष्टी में पाप है (नीति 24:9)।

जब आप अपने साथ ही बहस करते हैं, तो किसकी जीत होती है? आप ही जीतते हैं! जब आप अपने मन में एक गुप्त विचार को उठने देते हैं, तब आप अपने को विश्वास दिला सकते हैं कि यह स्वीकार्य है या आप इसके नतीजों से बच सकते हैं, क्योंकि आप इसे किसी और को नहीं बल्कि अपने को ही उजागर कर रहे हैं। परन्तु, परमेश्वर ने पहले ही आपकी कल्पना को देख लिया है और आपको दोषी ठहरा दिया है, चाहे वे आपकी दृष्टी में कितने ही ऊँचे क्यों न हो (नीति 16:2; 21:2)। यह विशेष रूप से उन यौन स्वैर कल्पनाओं पर लागू होता है जिन्हें आप दुस्साहस से छिपाना चाहते हैं (नीति 5:19-23)।

यदि आपको कभी यह विश्वास हो जाता है कि किसी को आप के मदद की ज़रूरत है या आपको विश्वास हो जाता है कि आपको कोई भला काम करना चाहिए, परन्तु आप इसे टालने के लिए कोई बहाना ढूंढते हैं, तब जो सारी पृथ्वी का न्यायी है उसने आपके मन में चल रही इस दुष्ट चर्चा को देख लिया है जिसके चलते आपने अपने कर्तव्य की उपेक्षा कर दी। वह अपना दिव्य प्रतिशोध लेकर बदला चुकाएगा (नीति 24:11-12; याकूब 4:17)। आपको चेतावनी दी गई है। अपने भीतर पाप के किसी भी स्वीकृति की चर्चा न करें, न तो जानबूझकर, और न ही अनजाने में। अपने आप से झूठ मत बोलो!

प्रिय मसीही, यह सबक समझने में मुश्किल तो नहीं है, परन्तु उसका व्यवहारिक लागुकरण करना कठिन है। आपका मन, यह संसार, और शैतान चाहते हैं कि आप पवित्र परमेश्वर की सर्वज्ञता को भूल जाएं। इसी क्षण अपने आप को नम्र करें और अपने हृदय में हर उस विचार के लिए पश्चाताप करें जो परमेश्वर और उसके वचन के विपरीत है। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो स्वर्ग और पृथ्वी का न्यायी, जो आपके हृदय की बातों को नरक और मृत्यु के विषय में अपने सिद्ध ज्ञान से अधिक बेहतर रीति से जानता है, वह आपको आपकी प्रत्येक भावना और विचार के लिए जवाबदेह ठहराएगा।

प्रिय मसीही, क्या आप स्वर्ग के परमेश्वर और उसके वचन के सामने थरथराते हैं (यशा 66:2; इब्रा 12:28-29)? यीशु मसीह के पुनरुत्थान के बाद पतरस ने उससे जो शब्द कहें उनमें बहुमूल्य शान्ति को पाएं : “हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है; तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” (यूहन्ना 21:17)। यह उतना ही सत्य है जितना कि स्वर्ग का सर्वज्ञ ईश्वर आपके अच्छे विचारों और भावनाओं के साथ-साथ आपके बुरे विचारों और भावनाओं को भी जानता है। उसने अपने अनुग्रह से बुरे विचारों और भावनाओं को न्याय के दिन की दृष्टी से मिटा दिया है, और अच्छी भावनाओं और विचारों का शुद्धिकरन किया है! यह उनके लिए हैं जो प्रभु यीशु मसीह पर अपने उद्धार के निमित्त विश्वास करते हैं।

विश्वास करनेवाले प्रिय मसीही, क्या आप अपने उद्धार और अनन्त जीवन के वरदान पर संदेह करते हैं? क्या नरक के आतंक के विषय में पढ़कर आप भयभीत हो गए हैं कि यदि आपका नाम जीवन की पुस्तक में न मिले तो क्या होगा (प्रकाशितवाक्य 20:11-15)? यूहन्ना द्वारा लिखित परमेश्वर-प्रेरित प्रतिज्ञा में शान्ति पाएं कि परमेश्वर आपके मन के संदेह से बड़ा है (1 यूहन्ना 3:14-21)। वह जानता है कि आपके उद्धार की मज़बूत बुनियाद क्या है और उसका उसे स्मरण है, भले ही आप इसे कभी-कभी भूल जाते हैं (2 तीमु 2:19)। परमेश्वर से और भाइयों से प्रेम करो, और परमेश्वर के स्वभाव का यह प्रमाण आपको साहस देगा, यहां तक कि न्याय के दिन में भी साहस देगा (1 यूहन्ना 4:16-21; 1 तिमु 6:17-19)।

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