नीतिवचन 15:10
जो मार्ग को छोड़ देता, उसको बड़ी ताड़ना मिलती है, और जो डाँट से बैर रखता, वह अवश्य मर जाता है।
क्या आप डांट और सुधार से प्रेम रखते हैं? आपको रखना चाहिए, क्योंकि यह बुद्धिमान लोगों का एक प्रमुख गुण है। आपको डांट और सुधार से प्रेम रखना चाहिए, क्योंकि इसी से सीखा जा सकता है और अपने जीवन की उन्नति की जा सकती है। आपको डांट और सुधार से प्रेम रखना चाहिए, क्योंकि इससे आपकी कई संकटों और मुसीबतों से जान बच सकती है। केवल मूर्ख, विद्रोही और ठट्ठा करने वाले ही डांट और सुधार से बैर रखते हैं।
अपने अंदरूनी मनुष्यत्व का चरित्र सुधारो। क्या आप सुधार को ग्रहण कर पाते हैं? क्या आप इसे ख़ुशी से ग्रहण कर पाते हैं? क्या आप डाँट का मूल्य समझते और उसको प्रिय जानते हैं? क्या आप डांटनेवालों और सुधार करनेवालों को धन्यवाद देते हैं? सुधार और फटकार के प्रति आपके हाव-भाव और रवैया (ऐटिटूड) बाकि सब बातों की तुलना में आपके मन को सबसे ज्यादा उजागर करता है। यह सम्मान पाने की पूर्व-शर्त है.
मूर्ख और ठट्ठा करनेवाले ताड़ना और डाँट से बैर रखते हैं, परन्तु दोनों अपनी मूर्खता में ही मर जाते हैं। वे चीजों को अपने तरीके से करना चाहते हैं। चरित्र का यह माप और इसको लेकर चेतावनियाँ ऐसे विषय हैं जिन्हें सुलैमान ने अपनी नीतिवचन की पुस्तक में बारबार दोहराए हैं (नीतिवचन 9:8; 10:17; 12:1; 13:18; 15:32; 29:1)।
हम सब इस दुनिया मेंअज्ञानी और भ्रष्ट मन के साथ आएं हैं। परमेश्वर और भले कर्मों के प्रति हमारी आत्मा मरी हुईं दशा में थी, परन्तु यह विद्रोह और हर प्रकार के अधर्म व पाप करने के लिए जीवित थी। हमारे माता-पिता ने आपकी बचकानी हरकतों को सुधारा और हमें जीवन जीने के लिए प्रशिक्षित किया। उन्होंने ही हमारी युवावस्था की मूर्खता को सुधारा और डांट-फटकार लगाई। और जब जब हमने उनकी अच्छी सलाह के ख़िलाफ बग़ावत की, तब तब उन्होंने और इस बेरहम दुनिया ने हमें तुरन्त सजा दी।
यदि माता-पिता अपने बच्चों को बारबार सुधारते और डाँटते-फटकारते नहीं, तो बच्चे कई मूर्खतापूर्ण और खतरनाक काम करते। किशोरावस्था के लड़कों और लड़कियों के लिए भी यही बात लागू होती है, हालाँकि उनकी मूर्खतापूर्ण बातें और उनके लिए खतरे बदल जाते हैं। बुद्धिमान बनने के लिए आपको जीवन भर सीखते रहना अवश्य है। सीखने के लिए दो परस्पर चीज़ों की ज़रूरत होती है – वे जो आपको सुधारने, ताड़ना देने, डाँटने, और सिखाने के लिए तैयार हों, और उनके सुधार, उनकी ताड़ना और डांट को मान लेने और उनपर अमल करने आपका तैयार होना।
यदि परमेश्वर ने अपने अनुग्रह से आपका मन बदल दिया है, तो आपके लिए धार्मिकता का मार्ग सीखने का एकमात्र तरीका ताड़ना और जो डाँट है। आपको आपकी मूर्खता के लिए फटकार लगाने और आपको ज्ञान की बातों ओर ले जाने के लिए शिक्षकों की आवश्यकता होगी। परमेश्वर ने इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए मुख्य रूप से माता-पिता और प्रचारकों को चुना है। यह परमेश्वर के वचन की चेतावनियों और निर्देशों के द्वारा है कि आप सफलता के लिए तैयार किएं जाते हैं।
हमारा दुष्ट मन ताड़ना और डांट से बैर रखता है। जब हमें डांट पड़ती है, हम नाराज़ हो जाते हैं। कोई हमें हमारी गलती दिखाए और बदलने के लिए कहे यह हमें पसंद नहीं। हम तो बस अपने पापों में बने रहना चाहते हैं। हमें उन लोगों पर गुस्सा आता हैं जो हमारे आचरण पर नज़र रखते हैं और उसकी भर्त्सना करते हैं। लेकिन ये वे साधन हैं जिनके द्वारा कम बुद्धि और ज्ञान प्राप्त करते हैं और जीवन के संकटों से बच जाते हैं। जिन बातों को परमेश्वर ने हमारे छुटकारे और आशीष के लिए ठहराया हैं, आखिर हम उनपर इतने क्रोधित क्यों हो जाते हैं? क्योंकि हमारा भ्रष्ट मन इतना पापप्रिय है कि हम अपनी ही मूर्खता से प्रीति रखते हैं।
इस नीतिवचन में दो नियम सिखाये गये हैं। पहला यह कि, यदि हम ताड़ना से बैर रखते हैं, तो यह साबित करता है कि हमने धार्मिकता और ज्ञान के मार्ग को छोड़ दिया है।जो मनुष्य ज्ञान और सत्य की खोज करता है, उसमें ऐसी विद्रोही भावना नहीं होती। दूसरा नियम यह, कि यदि हम डांट से बैर रखते हैं, तो हम मर जाएंगे। अज्ञान तुम्हें फंसाएगा; विद्रोह तुमपर हँसेगा। मूर्खता और पाप अंत में हमें निश्चित रूप से विनाश के अधोलोग में ले जाएँगे।
यदि आप सुधार और फटकार और उन लोगों से जो आपको सुधारते और फटकारते हैं, नाराज़ हो जाते हैं, तो आपने एक दर्दनाक और संकटों भरा जीवन चुना है जो अन्त में आपको मृत्यु की ओर ले जाएगा। और इतना ही नहीं, क्योंकि आपने उसके सत्य को नहीं माना, इसलिए जब आप अपने विनाश की ओर बढ़ रहे होते हैं, उस दौरान भी परमेश्वर आपके जीवन में भ्रम और झूठ को भेजेगा कि आप उसे ही सच मानकर उसपर विश्वास रखें (2 थिस्स 2:9-12; यहेज़केल 14:1-11)। परमेश्वर आज्ञा देता है कि आप उन शिक्षकों की प्रशंसा करें जिन्हें वह आपके पास भेजता है।
किसी भी व्यक्ति को सही रीति से सुधारने के लिए प्रेम और साहस की आवश्यकता होती है। यह आपके जीवन में मौज़ूद शिक्षकों का मूल्य जानने और उनकी सराहना करने का एक और कारण है। सुलैमान ने कहा, “खुली हुई डाँट गुप्त प्रेम से उत्तम है। जो घाव मित्र के हाथ से लगें वह विश्वास योग्य हैं परन्तु बैरी अधिक चुम्बन करता है” (नीतिवचन 27:5-6)। दाऊद ने कहा, “धर्मी मुझ को मारे तो यह कृपा मानी जाएगी, और वह मुझे ताड़ना दे, तो यह मेरे सिर पर का तेल ठहरेगा; मेरा सिर उससे इन्कार न करेगा…..” (भजन 141:5)। जो लोग आपको ताड़ना देने या सुधारने के लिए समय निकालते हैं, वे ही वास्तव में आपसे सबसे अधिक प्रेम करते हैं।
अज्ञानी मनुष्य सत्य और बुद्धि-ज्ञान कैसे सीखते हैं? उन्हें सुधार और शिक्ष की ज़रूरत होती है। यदि आप ज्ञान प्राप्त करने के इन माध्यमों से बैर रखते हैं, तो आप अपनी इस ज़िद्दी और हठी मूर्खता में ही मर जायेंगे। दुष्ट मनुष्यों का झूठ और जाल तुम्हें धोखा देंगे; आपके जीवन में मौज़ूद विभिन्न अधिकारी तुम्हारी निंदा करेंगे; और स्वर्ग का धन्य परमेश्वर तुम्हें नष्ट कर देगा। परन्तु परमेश्वर ने बाइबल को इसीलिए अपनी प्रेरणा से लिखवाया कि वह ताड़ना, फटकार, सुधार और शिक्षा की दृष्टि से आपके के लिए उपयुक्त हो (2 तीमु 3:16-17)।
जीने का केवल एक ही सच्चा मार्ग है। विश्वासों का केवल एक ही सच्चा समूह है। सच्चा धर्म केवल एक ही है। इस नीतिवचन में इसे “मार्ग” कहा गया है। यह बाइबल के परमेश्वर का मार्ग है; यह जीवन, धार्मिकता, सत्य और ज्ञान का मार्ग है। इफिसुस नामक एक मुतिपुजक शहर में पौलुस के ख्रिश्चन धर्म को “वह मार्ग” कहकर पुकारा जाता था (प्रेरितों 19:8-10)। जब तक आपके पूरे जीवन की मान्यताएँ और प्रथाएँ परमेश्वर के प्रेरित वचन से मेल नहीं खातीं, तब तक आपको सुधारने और फटकारने की आवश्यकता है।
अपने मन को परखो। क्या तुम्हें ताड़ना और डाँट प्रिय है? क्या आप उन माता-पिता और पास्टरों से प्रेम करते हैं जो आपको सुधारते और फटकारते हैं? इसी से आपके चरित्र और बुद्धिमत्ता का मूल्यांकन होता है। यदि आपको बताया जाता है कि आप गलत हैं, और उससे आप को गुस्सा आता है, या आप उन लोगों से रूठ जाते हैं जो आपको डांटते हैं, तो आज ही अपने आप को परमेश्वर के सामने दीन करें और इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, उसके रहम की दोहाई दें। मृत्यु आ रही है।
यीशु मसीह ने आपको अपने पवित्र बाइबल से वचन का प्रचार करने के लिए मनुष्यों को प्रशिक्षित कर नियुक्त किया है, और बाइबल उन्हें वह सब कुछ देती है जो आपकी शिक्षा और प्रगति के लिए आवश्यक है। कई बार दुख होगा जब वे परमेश्वर के वचन की आग और हथौड़े से आपके जीवन की आलोचना करते हैं, लेकिन आपको ऐसे उपदेश का कभी तिरस्कार नहीं करना है (यिर्मयाह 23:28-29; 2 कुरिन्थ 10:4-6)। इस से प्रेम रखें। आपको इसकी आवश्यकता पड़ेगी। क्या आपके पास ऐसा चर्च और पास्टर है, या फिर आपको कोई ऐसा पास्टर अच्छा लगता है जिसके चहरे पर हमेशा मुस्कुराहट होती है और जो अपने कड़वे प्रचार से कभी किसी को नाराज नहीं करता? यह नीतिवचन आपके चुनाव की या तो सराहना करता है, या निंदा।
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