नीतिवचन 15:1
कोमल उत्तर सुनने से गुस्सा ठण्डा हो जाता है, परन्तु कटुवचन से क्रोध भड़क उठता है।
परमेश्वर मेल-मिलाप कराने वालों से प्रेम रखता है और उन्हें बहुतायत से आशीष देता है (मत्ती 5:9; याकूब 3:17-18; 2 कुरिन्थियों 13:11)। आप मेल-मिलाप कराने वाले बन सकते हैं। आप झगड़े, द्वेष और क्रोध का अन्त कर सकते हैं। यह संक्षिप्त नीतिवचन सुलैमान के सबसे अच्छे नीतिवचनों में से एक है। आप हर दिन परमेश्वर से आशीष पाने के लिए इसके ज्ञान का व्यवहारिक उपयोग कर सकते हैं।
यहाँ प्रस्तुत ज्ञान सरल है। अगर कोई क्रोधित है, तो उसे शांत करने के लिए कोमल वाणी का प्रयोग करें। खुद को सही ठहरानेवाले या कठोर शब्दों का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे क्रोध और बढ़ेगा। आप कोमल शब्दों से झगड़ा और लड़ाई ख़त्म कर सकते हैं। आग के साथ आग से लड़ने की मूर्खतापूर्ण और दुष्ट प्रतिक्रिया को न अपनाएं।
क्या कोई व्यक्ति तकिये से लड़ सकता है? असंभव! तकिया इतना कोमल होता है कि वह उस पर होनेवाले किसी भी वार को बिना पलटवार किए सह लेगा। कोई लड़ाई नहीं रहती; सभी घूंसे सह लिए जाते हैं, और तकिया को चोट तक नहीं लगती; क्रोध जल्दी ही शांत हो जाता है, और लड़ाई खत्म हो जाती है। क्या आप दूसरों के क्रोध का सामना करने ऐसा तकिया बन सकते हैं?
अगर एक व्यक्ति अपना दूसरा गाल आगे कर दे, तो लड़ाई कैसे हो सकती है (मत्ती 5:38-42)? सुलैमान के महानतम पुत्र, यीशु मसीह ने क्या ही दुर्लभ ज्ञान सिखाया! अपने व्यक्तिगत शत्रुओं से लड़ने के बजाय, उनसे प्रेम करो, उन्हें आशीर्वाद दो, उनके साथ भलाई करो और उनके लिए प्रार्थना करो (मत्ती 5:39-43)।
यह सुलैमान के सबसे मूल्यवान नीतिवचनों में से एक है। यदि आप इस नियम को याद रखते हैं, तो आप हर क्रोधित विरोधी और किसी भी टकराव से निपट सकते हैं। यदि सभी इस नियम का पालन करें, तो हर जगह मेल-मिलाप और भाईचारा बढ़ेगा। शान्ति के राजकुमार, अर्थात् यीशु मसीह द्वारा दिया यह कितना धन्य नियम है!
जब भी कही लड़ाई-झगड़े की चर्चा होती है, तो हमारे देश में एक आम कहावत है, “एक हाथ से ताली नहीं बजती।” कितना सच है! यदि कोई भी पक्ष लड़ाई-झगड़ा से अपने कदम पीछे हटा लें और दया दिखाए, तो हर लड़ाई खत्म हो जाएगी। स्कूल के शिक्षक और प्रधानाचार्य इस नियम को जानते हैं और इसका उपयोग लड़ाई में दोनों पक्षों के अपराधियों का पता लगाने के लिए करते हैं।
आप दुनिया में जहाँ भी रहते हैं उस क्षेत्र में झगड़े खत्म कराने मेल-मिलाप करनेवाले के रूप में समाज में अपनी एक अच्छी पहचान बना सकते हैं। इसकी शुरुआत अपने वैवाहिक जीवन और परिवारिक कलह मिटाकर कर सकते हैं, और फिर अपने व्यवसाय, चर्च और पड़ोस तक इसे काम में ला सकते हैं, जिससे कि आपको परमेश्वर और सब लोगों द्वारा एक महान मेल-मिलापदूत के रूप में जाने जाए और आपकी प्रतिष्ठा हो।
लेकिन भड़काऊ और अपमानजनक शब्द, वे शब्द जो स्वाभाविक रूप से आपके मुँह से तब निकलते हैं जब आप अपने विरोधी का सामना गुस्से में आकर करते हैं या गर्व के कारण खुद का बचाव करते हैं, झगड़े को जारी रखने और बढ़ाने का कारण बनते हैं। कभी-कभी ऐसे शब्दों को सही मायने में “भड़काऊ भाषण” कहा जाता है। अगर आप जल्दी से क्रोध को ठण्डा कर विवाद को ख़त्म नहीं करते तो कोई भी झगडा रौद्र रूप लेता है और अधिक नुकसान पंहुचाता है (नीतिवचन 17:14; 26:21)।
अगर कोई व्यक्ति आपसे गुस्सा है, भले ही यह आपकी गलती हो, तो आप अपने बचाव में अपने गुस्से के बजाय, धीरे और कोमलता से जवाब देकर मामले को शांतिपूर्ण ढ़ंग से ख़त्म कर सकते हैं (नीतिवचन 12:16; 15:18; 29:22)। क्या आप अपने अभिमान को कुचल देंगे और झगडा ख़त्म कर देंगे (नीतिवचन 13:10; 21:24; 28:25)? यह नियम परिवार के सदस्यों, ऑफिस, सरकार या हर क्षेत्र पर लागू होता है। इसका इस्तेमाल करें।
यह आपका अभिमान है जो यह कहकर इस ज्ञान के खिलाफ तर्क देता है कि आपको खुद का बचाव करना चाहिए। झगडे की प्रतिक्रियाएँ केवल गंभीर उकसावे जैसे कि जीवन या मृत्यु की स्थिति या जहाँ आपराधिक आचरण आपको बहुत महंगा पड़ सकता है, में आवश्यक हैं। अन्यथा, जीवन के सामान्य संघर्ष और दूसरों द्वारा किए गए अपराधों को पराक्रमी लोग अनदेखा और अनदेखा कर कर हैं (नीतिवचन 19:11)।
आत्म-अनुशासन और मेल-मिलाप कराने के इस नियम से खुद को मापें। क्या आप दूसरों के भड़काने पर चिढ़ जाते हैं? क्या आपको अपने बारे में कही गई किसी भी बात का जवाब देना ज़रूरी है? क्या आपको अंतिम शब्द कहना ज़रूरी है? क्या आप अपनी गलती को मानने के बजाय खुद को सही ठहराने की ओर प्रवृत्त हैं? क्या आप किसी नियम की ओर संकेत करके बहस करने की अपनी प्रवृत्ति को सही ठहराते, और बच निकलते हैं, भले ही यह स्पष्ट रूप से अभिमान हो?
सुलैमान ने लोगों को राजाओं या अन्य सरकारी शासकों से डरना सिखाया, क्योंकि उस समय राजाओं के पास बहुत अधिकार और शक्ति होती थी (नीतिवचन 19:12; 20:2; सभोपदेशक 8:2-5)। लेकिन उसने यह भी सिखाया कि झुकने से उनके जानलेवा क्रोध को भी शांत किया जा सकता है (नीतिवचन 16:14; सभोपदेशक 10:4)। कोमल शब्द किसी क्रोधित राजा या किसी और के खिलाफ़ आपका सबसे शक्तिशाली हथियार हैं (नीतिवचन 25:15)। बुद्धिमानी भरी आदत सीखें।
परमेश्वर मेल-मिलाप कराने वालों से प्रेम रखता है (मत्ती 5:9), और यीशु ने उन लोगों को जिन्होंने दूसरों को नाराज़ किया था यह शिक्षा दीं कि वे जाकर उनके साथ मेल-मिलाप करें (मत्ती 5:23-26)। यीशु ने आपको मेल-मिलाप के लिए अपने विरोधी के साथ जल्दी से सहमत होना सिखाकर इस नीतिवचन पर अमल किया। परमेश्वर की आत्मा, जिसे हर सच्चा मसीही पाना चाहता है, मेल-मिलापपूर्ण, कोमल, विनती करने में आसान और सक्रिय रूप से मेल-मिलाप कराने वाली होती है (याकूब 3:17-18)।
सरुआह के बेटे, दाऊद के प्रसिद्ध भतीजे जो अपनी सैन्य सफलता और महान जुनून के लिए जाने जाते थे, उसके प्रति बहुत कठोर रवैया रखते थे (2 शमूएल 3:39)। वे कभी भी कोमल शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे, क्योंकि उनके पास कोमल दिल नहीं थे। यीशु ने कुछ अज्ञानी और अपमानजनक सामरियों के प्रति उनकी अधर्मी भावना के लिए गर्जन के पुत्र, याकूब और यूहन्ना को भी फटकार लगाई (लूका 9:51-56)।
परमेश्वर को प्रसन्न करने और लोगों के साथ सफल रिश्ता बनाने के लिए अगर आपको मेल-मिलाप कराने वाला व्यक्ति बनना है तो, आपको दूसरों के प्रति आपकी अंदरूनी भावना क्या है यह परखकर शुरुआत करनी होगी (याकूब 3:13-18)। अनुग्रहपूर्ण और कोमल शब्द केवल शुद्ध और कोमल हृदय से ही आ सकते हैं (नीतिवचन 22:11; लूका 6:45)। आपका अनुग्रहपूर्ण भाषण, न कि भड़काऊ भाषण, नमक के समान नमकीन हो जैसा कि यीशु मसीह का था (कुलुस्सियों 4:6; 2 कुरिन्थियों 10:1)।
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