नीतिवचन 14:9

मूढ़ लोग पाप का अंगीकार करने को ठट्ठा जानते हैं, परन्तु सीधे लोगों के बीच अनुग्रह होता है।

पाप कोई मज़ाक नहीं है। केवल मूढ़ ही पाप को मज़ाक समझते हैं। पाप विश्व में सबसे भयानक शत्रु है। फिर भी दुनिया इस पर हंसती है। पाप ने सुखलोक को बर्बाद कर दिया, इस जीवन की सब व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर देता है, जैसे जैसे एक एक दिन बीतता है वह आपको मौत के करीब ले जाता है, और वह जल्द ही आपको अनन्तकाल की पीड़ा भुगतने के लिए आग की झील में डुबो देगा (प्रकाशितवाक्य 20:11-15)।

धर्मी पुरुष, जो पाप से बैर रखते हैं और अपने विवेक और शक्ति का उपयोग कर उससे बचते हैं, उन्हें परमेश्वर इस जीवन में और आनेवाले अनन्तकाल के जीवन में आशीष देता है। हालाँकि वे कभी-कभी मानवीय कमज़ोरी के कारण पाप करते हैं, वे तुरंत उन पापों को मान लेते हैं और परमेश्वर भी उन्हें क्षमा कर देता है। आपको आज यह निर्णय लेना होगा कि आप वास्तव में पाप के बारे में क्या सोचते हैं।

मूढ़ व्यक्ति पाप का मजाक उड़ाता है, पाप का उपहास करता है, वह हमेशा अपने पाप से छुटकारा पाने के लिए कोई न कोई बहाना ढूंढ लेता है, और पाप के लिए दूसरों को दोषी ठहराता है। उसे परमेश्वर का कोई डर नहीं है। पाप उसके लिए कोई ख़ास गंभीर बात नहीं है; वह इस पर कोई गंभीर विचार नहीं करता। परन्तु धर्मी मनुष्य पाप से कांपता है, उससे भागता है, और उसके लिये शोक करता है। परमेश्वर ऐसे मनुष्य पर कृपा करके उस पर आशीषें बरसाएगा।

प्रिय ख्रिश्चन पाठक, यदि आप मेरे इस संक्षिप्त उपदेश पर गंभीरता से विचार नहीं करते हैं, तो आप भी मूढ़ हैं। मैंने इसके लिए जो परिश्रम किया है वह अपने आप में भले ही मूल्यवान न हो, लेकिन जैसे ही आप इस पाठ की सच्चाई और उसके मूल्य को समझ लेते हैं तो इसमें दी गई चेतावनी पृथ्वी के सभी खजानों से अधिक मूल्यवान हो जाती है। यदि आज आपके पास इस पाठ के लिए समय नहीं है, तो इस पाठ में निहित जो भयावह संदेश है उसके बारे में सोचने के लिए आपके पास अनंत काल के लिए समय ही समय रहेगा।

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी, क्योंकि तब तक परमेश्वर के क्रोध की धधकती आग आपकी पिघली हुई रूह को भयानक पीड़ा देकर भस्म कर चुकी होगी। उसके बाद अनंत काल का दूसरा दिन आएगा जो अपने साथ आपकी रूह और शरीर के लिए और भी अधिक भयानक पीड़ा को लेकर आएगा। क्या आपको लगता है कि मैं इस विषय को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा हूँ? अगर आप ऐसा सोचते हैं, तो सिर्फ़ इसलिए क्योंकि आप पाप की बुराई को कम आंकते हैं – अब आप अपने दिमाग में पाप का मज़ाक उड़ा रहे हैं – आप इस नीतिवचन में वर्णित मूढ़ हैं। आज ही अपनी मूढ़ता पर पश्चाताप करो!

मूढ़ सोचते हैं कि वे जो चाहें कर सकते हैं। वे इसे स्वतंत्र इच्छा या जीवन, आज़ादी और अपनी खुशी की खोज करने का अधिकार कह सकते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे ज्ञान से रहित अपने इस विद्रोह की क्या परिभाषा करते हैं। परमेश्वर उन्हें बुद्धि और समझ देने से इनकार करता है, इसलिए वे अपनी अज्ञानता में आकर सोचते हैं कि वे अपने पापों से बच रहे हैं (भजन 36:1-4; 50:21-22)। अन्त में परमेश्वर उन पर हँसेगा!

परमेश्वर उन धर्मियों पर कृपा करेगा, जो पाप की भयानकता के बारे में अच्छी समझ रखते हैं, परन्तु अपराधियों का मार्ग कठिन है (नीतिवचन 13:15)। लूत ने समृद्ध सदोम को चुना, क्योंकि उसने सोचा कि अब्राहम का पवित्र जीवन इतना अधिक अनुशासनात्मक, प्रतिबंधात्मक और संकीर्ण था कि वह उसके साथ रहकर सुख और विलासिता के अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाएगा, लेकिन उस पर अपनी दो भ्रष्ट बेटियों और अन्धकारमय भविष्य के साथ बेघर होकर गुफा में रहने की नौबत आने में ज्यादा देर नहीं लगी।

पाप बहुत ही गंभीर है! कितना गंभीर है? यदि बाइबल सत्य है, तो परमेश्वर ने प्रत्येक पापी स्वर्गदूत को शैतान का उसके विद्रोह में साथ देने के कारण स्वर्ग से बाहर फेंक दिया और शैतान के साथ अनन्तकाल के लिए विनाश पाने बन्दी बनाकर रखा है। यदि बाइबल सच है, तो परमेश्वर ने निषिद्ध फल खाने के आदम के केवल एक पाप के कारण समस्त मानवजाति को ही मृत्यु और अनंत काल के लिए नरक का दण्ड ठहराया है। यदि बाइबल सत्य है, तो परमेश्वर ने नूह के समय पाप के कारण ही सब बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों समेत पूरी पृथ्वी को जलप्रलय में डुबा दिया। बाइबल सत्य है। परमेश्वर ने ये सब काम पाप के कारण किये।

यदि बाइबल सच है, तो परमेश्वर ने इज़राइलियों के हाथों कनान के सात राष्ट्रों का उनके यौन पापों के कारण औरतों और बच्चों समेत विनाश कर दिया और उन्होंने उनके नगरों, घरों और साज़ो-सामान पर कब्ज़ा कर लिया। यदि बाइबल सच है, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाने के यहूदियों के अधर्म का बदला चुकाने सन 70 में सम्राट टाइटस की अगुवाई में रोमी सेनाओं को भेजा कि यरूशलेम शहर, मंदिर और आबादी का विनाश कर दे जो इस्राएल के इतिहास में सबसे बड़ी महामारी जानी जाती है। बाइबल सत्य है। पाप भयावह रूप से गंभीर है। क्या पाप आपकी नज़रों में गंभीर बात है?

बाइबल सत्य है। यीशु मसीह जल्द ही आ रहा है कि पृथ्वी को कभी न बुझने वाली आग से जला दे, और हर पापी को शैतान और उसके स्वर्गदूतों समेत कभी ख़त्म न होने वाली पीड़ा को भुगतने के लिए आग की झील में डाल दे। कोई भी व्यक्ति इतनी भयानक बात का मज़ाक भी कैसे उड़ा सकता है? वह उस न्यायाधीश का मज़ाक उड़ा रहा है जो उसकी आत्मा को पीड़ा से भरे अन्धकार के अथाह कुण्ड और मृतकों के नरक में अनंत काल के लिए डाल देगा जहाँ उसके लिए छुटकारे की कोई आशा न होगी।

पृथ्वी पर किसी न्यायाधीश का उपहास करो, वह तुम पर अदालत की अवमानना का आरोप लगाकर तुम्हारी ग़ैर-ज़मानती गिरफ़्तारी का आदेश देगा। तो क्या हुआ! आपको दिन में तीन बार भोजन, नियमित रूप से धुले हुएं कपड़े और सोने के लिए बिस्तर मिलेगा। सब प्राणियों के न्यायाधीश का मज़ाक उड़ाओ, और देखों वह कैसे तुम्हें एक ऐसे अन्धेरे कुण्ड में डालता है जहाँ भोजन, कपडे और सोने ले लिए बिस्तर तो दूर की बात है, तुम्हें दो बूंद पानी तक नहीं मिलेगा, और वह यह सब अपनी महिमा के लिए करेगा। वह यहोवा के दूत और भय के राजा के साथ तुम्हारा पीछा करेगा (भजन 35:5-6; अय्यूब 18:14; लूका 16:24)।

पाप कितना बुरा है? यह मृत्यु का कारण बनता है। क्या यह पर्याप्त नहीं है? मृत्यु भयानक है। मृत्यु आपसे आपका जीवन छीन लेती है, आपके रिश्तों को तोड़ देतीहै, आपकी योजनाओं को बर्बाद कर देती है और आपके सपनों को नष्ट कर देती है। मृत्यु कहां से आई? मनुष्य ने अदन में रहते परमेश्वर की उस चेतावनी का मज़ाक उड़ाया जिसमें उसने पाप के लिए मृत्यु का दण्ड ठहराया था। क्या आपको उस चीज़ का मज़ाक उड़ाना चाहिए जो हर मनुष्य के लिए सबसे ज़्यादा भय का कारण बनती है? मृत्यु की जड़ का मज़ाक उड़ाना कितना पागलपन है!

लेकिन पाप सब प्रकार की बीमारियों की भी जड़ है – शारीरिक विकृतियों की – विनाश- दुर्बलताओं की- विपत्तियों की– मानव-भ्रष्टता की- जीर्णता की। पाप परमेश्वर और स्वर्ग के विरुद्ध एक घिनौनी बुराई है जो आपके जीवन और आपके वंश को जागते-सोते हर पल केवल विनाश की ओर ले जा रहा है। यह शांति, आनंद और कल्याण को नष्ट कर देता है। इन सब विपत्तियों की जड़ का मज़ाक उड़ाना कितना पागलपन है!

पाप कितना बुरा है? गतसमनी और कलवरी के क्रूस पर एक नज़र डालों। वहां आप परमेश्वर के पुत्र को उसकी आत्मा में व्याकुल और मन की वेदना को सहते हुए देख सकते हैं कि कैसे उस बोझ के कारण उसका पसीना लहू की बड़ी बड़ी बूँदों के रूप में भूमि पर गिर रहा था (लूक 22:44)। उसने अपने पिता से बिनती कीं कि वह अपने चुने हुओं के पापों को उठा ले जाने का कोई अन्य विकल्प दे, क्योंकि निर्दोष होने पर भी पाप ठहराया जाना और दुनिया के सामने नामधराई से गुज़रना उसके लिए भारी पीड़ा थी (लूक 22:42)। मूढ़ पाप का मज़ाक उड़ाते हैं।

नरक भयानक है। नर्क अग्नि में जलता है। आप पीड़ा देने वाली उस आग की अंगार को कम नहीं कर पाएंगे; आप अपना दर्द कम नहीं कर पाएंगे (मरकुस 9:44,46,48)। आप जान लेंगे कि परमेश्वर ने आपको हमेशा-हमेशा के लिए ठुकरा दिया है। आपको पता चल जाएगा कि वह आपसे बैर रखता है और अब वह आपको उस पीड़ा में अनन्तकाल के लिए रखनेवाला है। नरक की पीड़ा आपकी कल्पना से भी परे है। आपने अपने इस जीवन में जो भी सबसे गहरा दुःख सहा है, आपने उस दर्द में नरक की पीड़ा का एक मामूली अंश भी अनुभव किया है। और आप पाप का उपहास करोगे?

आज लोग नरक की बातों की ओर ध्यान क्यों नहीं देते? आज पास्टर्स इस विषय पर उपदेश देने में इतना परहेज क्यों करते हैं? अखबारों में इसका जिक्र क्यों नहीं है? जो लोग इसपर उपदेश देते हैं उन्हें पुरातनपंथी क्यों माना जाता है? यह अपने आप में पाप का मज़ाक उड़ाना है, क्योंकि यह पाप के लिए बताई गई सज़ा को मानने से इनकार करना है और उसकी अनदेखी करने का संकल्प है।

परमेश्वर ने नरक को क्यों और किसलिए बनाया और तैयार किया? पाप के कारण! नरक शैतान और उसके स्वर्गदूतों के लिए बनाया और तैयार किया गया, क्योंकि उन्होंने पाप किया था (मत्ती 25:41; 2 पतरस 2:4)। और सभी पापी मनुष्य उनके साथ अनंत काल तक भयानक पीड़ा सहते रहेंगे (लूका 16:19-31; प्रकाशितवाक्य 20:11-15)।

मूढ़ कहता है, “पाप कोई बड़ी बात नहीं है। आप पाप को क्या समझते हैं?” वह एक बिगड़ैल बच्चे की तरह शिकायत करता है, “एक छोटी सी गलती के लिए हर कोई मुझे क्यों डांटता है?” वह यह कहकर अपना बचाव करता है, “मैं ऐसा ही हूं।” वह दूसरों को दोषी ठहराता है कि वे क्यों ” उसकी धीमी गति से सीखने और कमजोरियों” के प्रति सहानुभूति नहीं रखते। वह कहता है, “मुझे माफ़ कर दो,” और वह वही सब गलतियाँ फिर से करता है।

व्यभिचारिणी अपने शरीर को किसी पराए मर्द को शारीरिक सम्भोग के लिए सौंपकर विश्वासघात का जघन्य पाप करती है, और फिर अपना मुँह पोंछती और कहती है, “मैं ने कोई अनर्थ काम नहीं किया” (नीतिवचन 30:20)। जब परमेश्वर ने व्यवस्था दीं, उसने लिखा कि अगर कोई स्त्री व्यभिचार करती है, तो वह याजक के मुँह से उसे शापित कर उसकी जाँघ सड़ाएगा और उसका पेट फुलाएगा, और लोग उसके नाम को शाप देकर उसका धिक्कार करेंगे (गिनती 5:11-31)। या उसे पत्थर मार-मार कर मार दिया जाता था (लैव्य 20:10)। फिर भी, आज बॉलीवुड और हॉलीवुड व्यभिचार के पाप का सौंदर्यीकरण करते हीन, और लोग इसे केवळ मनोरंजन कहते हैं।

किसी चीज़ का मज़ाक उड़ाने का अर्थ है उसका उपहास करना, तिरस्कार करना, उस पर हँसना, उस पर चुट्कुलें करना। पाप का मज़ाक उड़ाने का अर्थ है उसे हल्के से लेना और उसकी हंसी उड़ाना। पाप का मज़ाक उड़ाना उसकी गंभीरता का मज़ाक उड़ाना और उसकी खिल्ली उड़ाना है। पाप का मज़ाक उड़ाना उन लोगों का तिरस्कार और उपहास करना है जो इसके विरुद्ध शिक्षा देते हैं और फटकारते हैं। पाप का मज़ाक उड़ाने का अर्थ यह सोचना या कहना है कि आप जो चाहे और जैसा चाहे पाप कर सकते हैं और उसके नतीजों से बचकर निकल सकते हैं। पाप का मज़ाक उड़ाने का मतलब होगा कि मेरे इस उपदेश के विषय में यह कहना कि मैं इसमें पाप को कुछ ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा हूँ और पाप के लिए इतना भी कठोर दण्ड नहीं दिया जाएगा जितना कि मैं इसमें बता रहा हूँ।

परमेश्वर ने कहा कि मूर्खता का विचार भी पाप है, और वह मानता है कि सीधे लोग ठट्ठा करनेवाले मनुष्य से, जिसे सुधार की बातें सुनना भाता नहीं, घृणा करते हैं (नीतिवचन 24:9)। यद्यपि कुछ लोग सोचते हैं कि पाप के केवल प्रकट कार्य ही गलत हैं, यीशु ने उनकी इस घिनौनी सोच के ठीक विपरीत शिक्षा दीं (मत्ती 5:21-32)। जो लोग मन के विकृत और कामों में घिनौने हैं, वे ही मूढ़ता को चुनते हैं और सुधार को नहीं मानते, बल्कि उससे क्रुद्ध हो जाते हैं।

मनुष्यों को पाप करने से रोकने के लिए उन्हें डांट-फटकारने और उन्हें दण्ड देने के भलाई के काम पर कोई कैसे आपत्ति जता सकता है? दूसरे को पाप करने से रोकना बड़े अनुग्रह का काम है (याकूब 5:19-20)। बच्चों को क्यों फटके लगाएं जाते हैं? यदि फटके लगाने से उन्हें मृत्यु और नरक से बचाया जा सकता है, तो ऐसा ही करें (नीतिवचन 23:13-14)। चर्च के कुछ सदस्यों को क्यों बहिष्कृत किया जाता है? यदि यह प्रभु यीशु के न्याय के उस महान दिन में उनकी आत्मा को बचा सकता है, तो इस अनुशासन पर पूरा अमल करें (1 कुरिन्थ 5:3-5)। अनन्तकाल के नरक की आग की तुलना में ये बहुत मामूली दण्ड क्या हैं?

परमेश्वर “छोटे” पापों के लिए मनुष्यों का कठोरता से न्याय करता है। उसने अपनी आराधना को बदलने के अपराध के लिए इस्राएल के दो मूल याजकों को जलाकर मार डाला (लैव्य 10:1-2)। उसने अपने विश्वासयोग्य दास मूसा को कनान में प्रवेश करने से सिर्फ़ इसलिए रोक लिया क्योंकि उसे जिस चट्टान को आज्ञा देकर उससे पानी निकलवाना चाहिए था उस पर उसने अपनी लाठी से प्रहार किया (गिनती 20:12)। जब दाऊद वाचा का सन्दूक येरुशलेम को ले जा रहा था तब जब वाचा का सन्दूक लड़खड़ाया तो उसे अपने हाथ से थाम लेने के उज्जा के दुस्साहस के लिए उसने उज्जा को मार डाला (2 शमू 6:6-7)। केवल मूढ़ ही पाप का मज़ाक उड़ाते हैं।

अमेरिका अब पाप को खेल समझकर उसका मजाक उड़ाता है। टेलीविजन उसे बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। व्यभिचार, अपवित्रता, माता-पिता की अवज्ञा, समलैंगिकता, परस्त्रीगमन, दूसरों के साथ मज़ाक करना, और ऐसे कई अन्य पाप फिल्मों, धारावाहिकों और नाटकों के मुख्य तत्व हैं। आज की प्रणाली में एक पीढ़ी अपने पहले की पीढ़ी की तुलना में कहीं अधिक पापों का मज़ाक उड़ाती है। मनुष्यों पर परमेश्वर के श्राप का यही कारण है (रोमियों 1:32)।

मूढ़ पाप का मज़ाक उड़ाते हैं, लेकिन वे जल्द ही उनकी मुलाक़ात अपने सृष्टिकर्ता और न्यायाधीश से होगी, जो उनकी बेबस और आशाहीन चीखों से अपनी पवित्रता के निमित्त अनन्तकाल की स्तुति और प्रशंसा निकलवाएगा। लेकिन धर्मियों का नाम स्मरण रखा जाएगा, और क्योंकि वे पाप से घृणा करते थें और उससे दूर रहते थें इसलिए परमेश्वर आप उनके साथ रहेगा और उन्हें विशेष अनुग्रह के साथ अब और आनेवाले समय में अनंत काल के जीवन की आशीष देगा।

आज प्रचारक भी पाप का मज़ाक उड़ाते हैं। प्रचार-मंच पर चुटकुले सुनाए जाते हैं। एक चर्च ने विज्ञापन दिया, “यदि आप वापस आते हैं, तो हम वादा करते हैं कि हम आप पर किताबी ज्ञान का बोझ नहीं डालेंगे।” यह पाप का मजाक उड़ाना नहीं है तो क्या है! यदि कोई व्यक्ति पाप कर रहा है, तो उसे परमेश्वर की पवित्र पुस्तक, अर्थात् बाइबल की आवश्यकता है। अगर आज बपतिस्मा देनेवाले यूहन्ना होता तो वह इसी पुस्तक का बोझ डालता, और प्रभु यीशु मसीह और पौलुस भी ऐसा ही करते।

सांसारिक मन के ख्रिश्चन लोग आज अपने दृष्टिकोण से पाप का मज़ाक उड़ाते हैं। वे कहते हैं, “सबसे ज़रूरी है कि हम यीशु से प्रेम करें।” वे कहते हैं, “परमेश्वर पाप से घृणा करता है, परन्तु पापी से प्रेम करता है।” क्या नूह ने अपने जहाज़ के चारों ओर फेफड़ों में पानी निगल रहे लोगों को ऐसा ही संदेश सुनाया था और डूबने वालों के चहरों पर मुस्कुराहट ले आया था? नहीं! पौलुस ने साफ़ साफ़ भविष्यवाणी की थी कि आधुनिक समयों में ऐसे ही लोग होंगे जो सत्य को नहीं मानेंगे और सब प्रकार से दुष्कर्मी होंगे (2 तीमु 3:1-5)।

ख्रिश्चन पाठक, क्या आप पाप का मज़ाक उड़ाते हैं? क्या आप परमेश्वर के पवित्र वचन के उपदेश पर ध्यान न देकर इसका मज़ाक उड़ाते हैं? जब पास्टर आपके पसंदीता पापों की भर्त्सना करता है तो क्या आप आक्रामक रूप अपना पक्ष रखते हुआ उसका मज़ाक उड़ाते हैं? जो लोग आपको पाप के लिए आपको डांटते हैं क्या उन से ख़फा होकर पाप का मज़ाक उड़ाते हैं? क्या आप एक ऐसे प्रचारक की इच्छा करके जो खरे उपदेश के बजाए आपको मनोरंजक कहानियां सुनाए, पाप का मज़ाक उड़ाते है? क्या आप मेरे इस कठोर उपदेश पर अपनी आपत्ति जताकर पाप का मज़ाक उड़ाते हैं? इन बातों पर गंभीरता से विचार करें।

यदि बाइबल सच है, तो जब हेरोदेस ने अपने भाषण के लिए लोगों की प्रशंसा का आनंद लिया, परमेश्वर ने उसे कीड़ों का खाना बना दिया (प्रेरितों 12:21-23)। जब बतशिबा ने दाऊद के साथ प्रेम संबंध स्थापित किए उसने उसके इस पाप के लिए उसके नन्हें बालक को मार डाला (2 शमू 12:14)। उसने मिस्र में हर परिवार के पहिलौठे को मार डाला क्योंकि फिरौन ने इस्राएल को उसकी आज्ञा के अनुसार आराधना करने जाने देने की अनुमति नहीं दी थी (निर्गमन 12:29-30)। और जब यरूशलेम की कलीसिया में हनन्याह और सफीरा ने अपनी सम्पत्ति का ग़लत बौरा दिया तो उसने सबके सामने दोनों मार डाला (प्रेरितों 5:1-11)।

दुनिया कहती है, “डरने की कोई ज़रूरत नहीं।” परन्तु यहोवा परमेश्वर कहता है, कि “घात करने के बाद जिसको नरक में डालने का अधिकार है, उसी से डरो; हाँ, मैं तुम से कहता हूँ, उसी से डरो” (लूका 12:4-5)। हर एक मूढ़ परमेश्वर के महिमामय चरणों में जाकर गिरे और कांपते हुए पश्चाताप और भय मानकर उससे दया की भीख माँगे। यदि प्रेम और सच्चाई की यह चेतावनी आपको ऐसा करने नहीं उकसाती, तो “अपने परमेश्वर के सामने आने के लिये तैयार हो जाओ” (आमोस 4:12)।

पश्चाताप करने वालों के लिए बहुतायत की आशा है, क्योंकि परमेश्वर ने अपने चुने हुए लोगों के हर पाप की पूरी कीमत चुकाने के लिए अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजा (रोमियों 8:28-39; इफि 1:3-12)। इसी कारण से सुसमाचार अच्छी खबर है। आप कैसे जान सकते हैं कि आप परमेश्वर के चुने हुए लोगों में से एक हैं? उस पर और उसके पुत्र यीशु पर विश्वास करें और फिर उस विश्वास में 2 पतरस 1:5-11 में वर्णित बातों को जोड़ें जो प्रमाणित करेंगी कि आपका विश्वास वास्तविक और ईश्वर-प्रदत्त है (1 थिस्स 1:2-4)।

प्रभु यीशु मसीह, जो जल्द ही शुद्ध धार्मिकता से सभी मनुष्यों का न्याय करेगा, उस ने एक ऐसे बुद्धिमान व्यक्ति के बारे में बताया जिसने पाप को सही दृष्टिकोण से देखा। उस मनुष्य ने स्वर्ग की ओर आंखें भी न उठायीं, और अपनी छाती पीटकर कहा, “हे परमेश्वर, मुझ पापी पर दया कर” (लूका 18:13)। ऐसे लोग शान्ति से अपने घर लौट सकते हैं और निश्चिन्त रह सकते हैं, क्योंकि इस प्रकार के अंगीकार से वे प्रमाणित करते हैं कि परमेश्वर ने उन्हें दोषमुक्त करके धर्मी ठहराया है।

ऐसा मनुष्य इस शापित संसार में धन्य ठहरेगा (भजन 37:4; 84:11; मत्ती 6:33), और वह आने वाले नए जगत में अनन्त जीवन प्राप्त करेगा (मत्ती 7:21; प्रकाशितवाक्य 22:14)। आपको क्या करना ज़रूरी है? परमेश्वर के सामने विश्वास से धर्मी ठहराए जाने के लिए आज ही प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास रखें और इस शापित दुनिया में “जब कि ये प्रतिज्ञाएँ हमें मिली हैं, तो आओ, हम अपने आप को शरीर और आत्मा की सब मलिनता से शुद्ध करें, और परमेश्वर का भय रखते हुए पवित्रता को सिद्ध करें ” (2 कुरिन्थ 7:1)। आमीन।

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