नीतिवचन 14:7

मूर्ख से अलग हो जा, तू उससे ज्ञान की बात न पाएगा।

मूर्खों से दूर ही रहें। आप उन्हें उनकी बातों से पहचान सकते हैं। जब किसी व्यक्ति के शब्द बाइबल लिखित सत्य और बुद्धि के विपरीत होते हैं, तो जान लो कि वह मूर्ख है। उससे अलग हो जाएं। हो सकता है कि उस ने दुनिया के ज्ञान में पीएचडी या एमबीए की डिग्री कीं हो या उसका आईक्यू लेवल 150 हो, पर फिर भी वह मूर्ख है। बुद्धि का सम्मान करें और उससे अलग रहकर अपने को बचाएं। अगर आप कामयाबी के इस महत्वपूर्ण नियम की उपेक्षा करते हैं, तो आपका मूर्ख साथी आपको नीचे गिरा देगा।

परमेश्वर ने राजा सुलैमान को ये नीतिवचन लिखने के लिए प्रेरित किया कि आपको एक समृद्ध जीवन जीने के लिए आवश्यक बुद्धि सिखाएं। अगर आप आज से ही इस सरल नियम का अपने जीवन में व्यावहारिक रूप से अमल करने लगते हैं तो इससे आप परमेश्वर और उन लोगों की नज़रों में जो आपके जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं, अपना सम्मान बढ़ा सकते हैं। आज कितने बच्चे और युवा बुरी संगती और बुरे दोस्तों के दबाव में आकर बिगड़ गए हैं? यह नियम वयस्क लोगों की सफलता के लिए भी उतना ही कारगर है।

मूर्खों से दूर ही रहें। वे आपके बुद्धिमान शिष्टाचार और आचरण को भ्रष्ट कर देंगे और आपको नीचे गिरा देंगे (नीतिवचन 9:6; 13:20; 1 कुरिंथ 15:33)। वे आपकी बुद्धि को तुच्छ समझेंगे और आपको ज़लिल करके उसके प्रति आपका मन ख़राब कर देंगे (नीतिवचन 23:9; 9:7-8; मत्ती 7:6)। यदि आप उन की बातों पर ध्यान देते हैं, तो आप उनकी मूर्खता का सम्मान करते हैं, और वे मान लेंगे कि आप उन से सहमत हैं (नीतिवचन 26:1,4,8)। इसलिए इससे पहले कि आप उन से दूर भाग जाएँ, सत्य से उनका मुँह बंद कर दें (नीतिवचन 26:5)।

मूर्ख हर जगह हैं। वे ऐसे लोग होते हैं जिनके मनों में परमेश्वर या बाइबल के सत्य के लिए कोई वास्तविक सम्मान नहीं है। वे अपने विचारों में ही आश्वस्त होते हैं। वे दिमाग से इतने ढीलें हैं कि किसी विषय पर समीक्षात्मक रवैया अपनाकर सोच नहीं पाते। उन्हें सुनने और सीखने के बजाय बातें करना ज्यादा अच्छा लगता है। दिमाग और शिक्षा का इससे कोई लेना-देना नहीं है। जो लोग शिक्षित या दिमागवाले कहलाते हैं वे असल में दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख हैं, जैसे चार्ल्स डार्विन, स्टीफ़न हौकिंग, फ्रेडरिक नीत्शे, कार्ल सागन, सिगमंड फ्रायड और इन जैसे कई अनगिनत बुद्धिजीवी लोग।

मूर्ख लोगों के पास ज्ञान नहीं होता; वे अपनी बातों से इसे साबित करते हैं। ज्ञान के लिए सही पूर्वधारणाओं से तर्क करने की आवश्यकता होती है। मूर्ख लोग पागलपन से भरी पूर्वधारणाओं से तर्क करते हैं – जैसे, (1) विश्व में सभी अस्तित्व और व्यवस्था पूरी तरह से संयोग से है (बिग बैंग थ्योरी), (2) विश्व में सर्वोच्च बुद्धिमत्ता उनके अपने विचार हैं (आत्म-सम्मान सिद्धांत), और (3) यदि वे आपको उनके मतिभ्रमों पर विश्वास करने के लिए मना लेते हैं, तो उन्हें लगता हैं वे सत्य के लिए जीत जाते हैं (महामूर्ख सिद्धांत)।

एक छोटा बच्चा भी अपने विश्वास के द्वारा उनकी मूर्खता का मज़ाक उड़ा सकता है। विश्वास परमेश्वर का वरदान है जो सत्य को पहचानने के लिए दिया जाता है जिसे शिक्षित और बुद्धिमान लोग अपनी खोज से कभी पा नहीं सकते। विश्वास ही ठोस तर्क का एकमात्र आधार है। विश्वास रखने वाला व्यक्ति अपने तर्क का आरम्भ “परमेश्वर है, बाइबल सत्य है, और मैं एक पापी मनुष्य हूँ” से करता है। वह पृथ्वी पर एकमात्र बुद्धिमान व्यक्ति है (2 थिस्सलुनीकियों 3:1-2; इब्रानियों 11:1-3)। मूर्ख, जो अपने तर्क का आरम्भ अहंकार और अस्तित्व से करता है, घिनौना और निर्बुद्धि है।

जब आप किसी ऐसे व्यक्ति से मिलते हैं जो परमेश्वर और बाइबल को तुच्छ समझता हो, या अपनी राय खुलकर पेश करता हो, या अपने सामने मौजूद मूर्खों के अनुसार विकासवादी विज्ञान या अन्य पागल सिद्धांतों का अनुसरण करता हो, तो आपको एक मूर्ख मिल गया है। वे आपसे किसी सम्मान या ध्यान पाने के लायक नहीं हैं (नीतिवचन 19:10; 30:21-23)। वे सत्य के लायक नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने अपने घमंडी मनों को झूठ की वेदी पर बलि चढ़ा दिया है।

यीशु मसीह, जो स्वर्ग और पृथ्वी का प्रभु है, वह मूर्खों को तुच्छ समझते थे। उन्होंने कहा, “पवित्र वस्तु कुत्तों को न दो, और अपने मोती सूअरों के आगे मत डालो; ऐसा न हो कि वे उन्हें पाँवों तले रौंदें और पलटकर तुम को फाड़ डालें” (मत्ती 7:6)। मूर्ख किसी भी सत्य के लायक नहीं हैं। वे इसका मज़ाक उड़ाएँगे और इसका उपहास करेंगे, और दूसरों को आपकी बातें तोड़-मरोड़ कर बताकर आपको बदनाम करेंगे। उनसे अलग हो जाएं।

यीशु ने यह भी कहा, ” हर पौधा जो मेरे स्वर्गीय पिता ने नहीं लगाया, उखाड़ा जाएगा। उन को जाने दो; वे अंधे मार्गदर्शक हैं और अंधा यदि अंधे को मार्ग दिखाए, तो दोनों ही गड़हे में गिर पड़ेंगे” (मत्ती 15:13-14)। शिष्यों ने सोचा कि यीशु ने फरीसियों को ठेंस पहुँचाई है (मत्ती 15:12)। लेकिन उसने उनकी भर्त्सना कुछ सोच-समझकर की थी! उसने उनकी निंदा की। मूर्खों से अलग रहो।

यीशु मसीह इस संसार के नैतिक ज्ञान को अंधकारमय अज्ञान कहा (यशायाह 8:20)। उन्होंने खुद को बुद्धिजीवियों और उनकी तथाकथित शिक्षा का भांडा फोड़ने समर्पित कर दिया था (1 कुरिं 1:19-20; 3:19-20)। यह संसार जिन बातों को प्राथमिकता देता है उन चीजों को पौलुस ने अशुद्ध और बूढ़ियों की सी कहानियाँ और इस संसार के तथाकथित विज्ञानों को अशुद्ध बकवाद और विरोध की बातें कहा (1 तीमुथियुस 4:7; 6:20-21)।

यदि कोई व्यक्ति यीशु मसीह के सिद्धांत पर बहस, वाद-विवाद या सवाल उठाता है, तो वह मूर्ख है (1 तीमुथियुस 6:3-5)। पौलुस ने कहा कि ऐसा मनुष्य घमंडी है, वह कुछ नहीं जानता, और उसकी बकबक भ्रष्ट मन वाले लोगों के बीच गलत विवादों को जन्म देती है, जो सत्य से वंचित हैं। पौलुस ने ऐसे लोगों के बारे में तीमुथियुस को क्या सलाह दी? ठीक वही जो सुलैमान ने इस नीतिवचन में दीं! उनसे दूर ही रहें।

आज ये लोग कलीसियाओं में गुप्त रूप से घुस आए हैं और कमज़ोर और शिकार के लिए आसान औरतो को झूठे धर्म और झूठी शिक्षा में बंदी बना लिया है जिसके चलते आज कई ईसाई औरतें स्त्रीवादी बनकर अपनी कामुक सोच और महत्वाकांक्षाओं के पीछे भाग रही हैं (2 तीमुथियुस 3:1-7)। इन झूठे शिक्षकों के पीछे मूर्ख महिलाओं की एक बड़ी भीड़ है जो समूह की तरह उनका अनुसरण करती हैं। वे सत्य को जाने बिना बहुत कुछ सीखती हैं। ऐसे ईसाई शिक्षकों के बारे में पौलुस ने तीमुथियुस को क्या सलाह दी? वही, उनसे अलग हो जाएं।

आप मूर्खों की पहचान कैसे कर सकते हैं? सुनें। मूर्ख शांत नहीं रह सकता; उसका हृदय आपको अपने विचार सिखाने के लिए तड़पता और जलता रहता है (नीतिवचन 17:16; 18:2; सभोपदेशक 10:12-14)। उसे किसी भी विषय पर अपने विचार आपको बताने ही होंगे, भले ही उसने पहले कभी उसका अध्ययन न किया हो। चार्ल्स डार्विन जैसा मूर्ख एक ऐसी किताब लिखेगा जो पूरी तरह से सिर्फ उसकी कपोल-कल्पना पर आधारित होगी। उसे अपने भ्रमों को बताने के लिए एक बड़ी किताब की ज़रूरत पड़ी, जबकि परमेश्वर ने केवल एक अध्याय में विश्व की उत्पत्ति का पूरा विवरण दे दिया है (उत्पत्ति 1:1-31)।

जब आप मूर्खों के अहंकारपूर्ण, परमेश्वर-विरोधी, सत्य-विरोधी शब्दों को पहचान लेते हैं, तो आपको उनसे क्यों अलग होना ज़रूरी है? क्योंकि अगर आप उन्हें सुनते हैं तो इससे उनका अहंकार और बढ़ेगा और फिर उसे सुधारना और भी मुश्किल हो जाएगा (नीतिवचन 26:12)। क्योंकि उनके साथ चर्चा में शामिल होने से आप भी उनके स्तर पर निचे आ जाएँगे (नीतिवचन 26:4)। क्योंकि वे अपनी अशुद्धता को सही ठहराने के लिए आपके शुद्ध शब्दों और आचरण की निंदा करेंगे (नीतिवचन 23:9; 2 तीमुथियुस 2:23)। क्योंकि वे संभवतः आपको प्रभावित करेंगे और आपकी बुद्धि को भ्रष्ट कर देंगे (नीतिवचन 22:24-25; 1 कुरिन्थियों 15:33)।

आपको उनसे कितनी दूर चले जाना चाहिए? सुलैमान ने सिखाया, “दुष्टों की राह में पाँव न रखना, और न बुरे लोगों के मार्ग पर चलना। उसे छोड़ दे, उसके पास से भी न चल, उसके निकट से मुड़कर आगे बढ़ जा” (नीतिवचन 4:14-15)। दूर बहुत दूर चले जाएँ। आप उनकी मदद नहीं कर सकते। वे सत्य के लायक नहीं हैं। वे अपनी मूर्खता की ओर वैसे ही लौट जाएँगे जैसे कुत्ते अपनी उल्टी और सूअर कीचड़ में लोटने के लिए वापस लौटते हैं (नीतिवचन 26:11; 27:22)। स्वर्ग के परमेश्वर ने उनके लिए उचित प्रतिफल रखा है (रोमियों 1:21-28)।

क्या आप मूर्ख के समान बातें करते हैं? या क्या आपके होठों से ज्ञान टपकता है? वह बुद्धिमान मनुष्य जिस के मन को परमेश्वर के आत्मा ने नया कर दिया है और जो विश्वास के वरदान को काम में लाता है, उसकी बातें मूर्ख की बातों से बहुत अलग होंगी। वह परमेश्वर पर विश्वास करेगा, संसार के पागलपन को पहचानेगा, अपनी खुद की भ्रष्टता को स्वीकार करेगा, तथा जो कुछ वह सुनता या मानता है, उसकी पुष्टि या अस्वीकृति के लिए बाइबल में खोज करेगा (प्रेरितों 17:11; 1 थिस्सलुनीकियों 5:21)। वह सुधार को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करने के लिए हमेशा तत्पर रहता है और शिक्षा को बड़े आनन्द से ग्रहण करता है। वह एक बुद्धिमान व्यक्ति है।

पालकों, क्या आप अपने बच्चों को मूर्खों से बचाकर रखते हैं? स्कूलों का एजेंडा मूर्खता को समर्पित है। बस आप किसी भी उदार विषय पर एक पाठ्यपुस्तक पढ़ें और आप तुरन्त उनके ज्ञान की कमी को देख लेंगे। सत्य और ज्ञान का विश्वास-आधारित दृष्टिकोण रखने वाला साहित्य आज बहुत दुर्लभ है। आपके बच्चे अपने दिमाग में टीवी, यूट्यूब, OTT देखकर और सोशल मीडिया पर क्या क्या भर रहें हैं क्या उस पर आप सावधानीपूर्वक नज़र रख रहे हैं? उनके दोस्तों के बारे में क्या? आपके बच्चे उन दोस्तों से ज़्यादा बुद्धिमान नहीं बनेंगे जिनके साथ वे संगति करते हैं (1 कुरिंथ. 15:33)।

जब बुद्धि में विकास की बात आती है, तो बच्चे और युवा आम तौर पर अपने दोस्तों से ऊपर नहीं उठेंगे जब तक परमेश्वर कोई चमत्कार नहीं करता, जिसका उसने कोई वादा नहीं किया है। दोस्त चाहे आपके बच्चों के हो या आपके, उन्हें बहुत सावधानी से चुनें, जिसमें व्यवसाय, चर्च और परिवार शामिल हैं। विवाह करते समय सामनेवाले में आध्यात्मिक ज्ञान की ऊँचाई देखें, और आकर्षण, खूबसूरती, लोकप्रियता या धन के बारे में ज्यादा परवाह न करें। मित्र हो या जीवनसाथी, इन में से किसी भी रिश्ते में ढिलाई बरतना या समझौता करना आपको भविष्य में बहुत महंगा पड़ेगा (नीतिवचन 13:20)।

हालाँकि आप को मूर्खों से दूर रहना है, ऐसे बुद्धिमान लोग भी हैं जिन्हें आपको ढूँढ़ना चाहिए। जैसे आप मूर्खों को उनके शब्दों में ज्ञान की कमी से पहचानते हैं, वैसे ही बुद्धिमान लोग ज्ञानपूर्ण वाणी से पहचाने जाते हैं। आप उन्हें कहाँ पा सकते हैं? यीशु मसीह के चर्चों में, जहाँ उसने उन्हें अपना वचन प्रचार करने के लिए बुलाया है। आज अधिकांश लोग बाइबल-सम्मत सिद्धांत को सहन नहीं करेंगे, क्योंकि वे सत्य और ज्ञान के बजाय मनोरंजन, दंतकथाएँ और नौटंकी को ज्यादा पसंद करते हैं (2 तीमुथियुस 4:3-4)।

यीशु मसीह के सच्चे चर्च इस दुनिया में सत्य के रक्षक और संवर्धक हैं – परमेश्वर के ज्ञान के छिपे हुए खजाने के भंडार जिससे सांसारिक मनुष्य अज्ञात हैं (1 कुरिं 2:6-8; I तीमुथियुस 3:15)। वहाँ आपको स्त्री और पुरुष और सभी उम्र के सलाहकार और मित्र मिल सकते हैं। वहाँ आपको परिवार से बेहतर संगति और रिश्ते मिल सकते हैं। ऐसे चर्च को खोजने और उसमें शामिल होने और बुद्धिमान लोगों के साथ सक्रिय रूप से भाग लेने के आपके प्रयासों को परमेश्वर जल्द ही आशीष दें।

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