नीतिवचन 14:4
जहां बैल नहीं वहां खत्ता तो खाली रहता है, परन्तु अनाज की अधिकाई बैल के बल से आती है। (केजेवी)
खेती-किसानी के लिए बैल ज़रूरी होते हैं, भले ही वे महंगे क्यों न हो। उन में निवेश करना किसान के लिए लाभदायक है, ताकि खेती के काम में उसकी मदद हो सके, और वह बड़ी तेजी से प्रगति कर सके। इसलिए उसके लिए रुपए बचाकर अपने पास रखने की अपेक्षा बैल खरीदना अधिक बेहतर होगा। कृषि-समाज का यह प्राचीन नियम आज भी मूल्यवान है, यदि आप इसके सिद्धांतों और नीतियों को ठीक-ठीक समझे।
अपने परिश्रम को जन-बल देना बुद्धि का भाग है, ताकि एक आम व्यक्ति जितना हासिल कर सकता है, आप उससे कई अधिक बढ़कर ज्यादा फल प्राप्ति कर सके। यह नीतिवचन इसी महत्वपूर्ण सबक को सिखाता है। परमेश्वर ने सुलैमान को अर्थशास्त्र, वित्तीय बातें, और निवेश-नीतियों के विषय में लिखने की प्रेरणा दी। परमेश्वर चाहता है कि आप उन्नति पाने के लिए चतुराई से काम करें।
अपने दर्शनशास्त्र की पुस्तक में उसने लिखा “यदि कुल्हाड़ा थोथा हो और मनुष्य उसकी धार को पैनी न करे, तो अधिक बल लगाना पड़ेगा; परन्तु सफल होने के लिये बुद्धि से लाभ होता है” (सभो 10:10)। बुद्धि में चतुराई से काम करना शामिल है, जैसे कुल्हाड़ी की धार को पैनी करने के लिए रेती का उपयोग करना, ताकि आप पेड़ को दूसरों की तुलना में अधिक तेजी से काट सकें, जो मूर्खतापूर्ण तरीके से थोथी कुल्हाड़ी से पेड़ को काटने का असफल प्रयास कर रहे हैं।
1776 में एडम स्मिथ ने “द वेल्थ ऑफ नेशन्स” नाम की पुस्तक लिखी। इस किताब के लिखे जाने से पहले बचत, निवेश, पूंजी, उत्पादन के साधन, आय को और अधिक बढ़ानेवाली सम्पत्तियां (जैसे किराये पर देने के लिए अतिरिक्त घर, टैक्सी, औज़ार, उपकरण, आदि), और उद्योग को बढ़ाकर दूसरों को नौकरी देना, आदि बातों के विषय में बहुत कम समझा जाता था। परंतु सुलैमान ने यह बातें ईसा पूर्व 920 या एडम स्मिथ से लगभग 3000 वर्ष पहले सिखाई थी। परमेश्वर को महिमा दो! बाइबल से प्रेम करो! नीतिवचन की पुस्तक से प्रेम करो!
बैल गोजातीय बड़े जानवर होते हैं जिन्हें परमेश्वर ने मनुष्य की सेवा के लिए बनाया है। आज जब उन्हें घरेलू बनाया जाता है तो लोग आम तौर पर उन्हें मवेशी कहते हैं। विशेषकर, बैल पूर्ण परिपक्व और ताकतवर होते हैं। वे भारी-भरकम और माल ढोनेवाली गाड़ी को भी खींच सके इतने बलवान होते हैं।
खत्ता कठघरे जैसा बना गोदाम होता है जहां अनाज तथा मवेशियों और अन्य कृषि-पशुओं के खाने के लिए अलग-अलग किस्म का अनाज रखा जाता है। यहीं से हम छोटे बच्चों के लिए उपयोग होनेवाले छोटे पलंग का आविष्कार होते हुए पाते हैं, जो कठघरे जैसा ही बना होता है। मवेशियों का खत्ता लगभग उस गौशाला के समान ही होता है जिसमें मरियम ने यीशु मसीह को उसके जन्म के बाद रखा था (लूका 2:7)।
यदि कोई किसान अपने ही हाथों से हल चलाकर खेत की जुताई करता है, बीज बोता है, और कटनी भी करता है, तो वह बहुत ही कम खेती कर पाएगा। उसका परिवार मुश्किल से गुजारा कर पाएगा, और वह कभी उन्नति करने नहीं पाएगा। अनाज के लिए बनाया गया उसका खत्ता खाली ही रहेगा, क्योंकि उसने जो कुछ अनाज अपने अकेले के दम पर पैदा किया होगा उसमें से अधिकांश वह और उसका परिवार खा चुका होगा। जगत में आज भी जो जो देश शारीरिक मेहनत पर निर्भर हैं, वे आज भी उतने ही निर्धन हैं जितना 4000 वर्ष पहले हुआ करते थे।
परंतु यदि कोई किसान अपनी सुख-सुविधाओं को कम करके बैल खरीदने के लिए रुपए बचाता है, तो वह एक ऐसे साधन में निवेश कर रहा होगा जिसका उसे बहुत बड़ा फल मिलेगा। वास्तव में, उसने मानो व्यवसाय के लिए एक साथी खरीद लिया हो, जो अपना पेट भरने कुछ चारे के लिए प्रतिदिन कड़ी मेहनत करेगा। एक ताकतवर बैल दिन में कई घंटों तक खेत में हल खींच सकता है (1 राजा 19:19)। कई एकड़ में खेत की जुताई की जा सकती है। परंतु यहां पर उसकी कड़ी मेहनत समाप्त नहीं होती है।
बैल कच्चे अनाज को रौंदकर उसके घटकों को अलग अलग कर सकता है (व्यवस्था 25:4), और वह पीसनेवाली चक्की का पहिया भी खींच सकता है (न्यायि 16:21)। बैल अनाज से भरी भारी-भारी गाड़ियों को भी बाजार में खींच कर ले जा सकते हैं (गिनती 7:3)। किसान अब उसकी उपजीविका के लिए जितना ज़रूरी है उससे कहीं अधिक अनाज का उत्पादन कर पाता है और अपनी सम्पत्ति तथा खेतों का विस्तार कर सकता है। सुखी जीवन का यह विशाल परिवर्तन केवल रुपए बचाकर उन्हें बैल की खरीदी में निवेश करने से आया है।
बचत और निवेश एक पूंजीवादी और समृद्ध अर्थव्यवस्था के स्तम्भ हैं। एक बैल खरीदने के लिए एक किसान आवश्यक धन जमा करने के लिए खुद को अल्पकालिक सुख से वंचित रखता है : यह बचत है। फिर उसे उस बचाए गए धन को एक बैल तथा चारा खरीदने पर खर्च करना है क्योंकि बैल हर दिन बहुत अधिक चारा खाता है और उसे भरण-पोषण की दृष्टी से बड़ी लागत की आवश्यकता होती है : यही निवेश है। बुद्धि बचत और निवेश की सुंदरता को देखती है।
किसान ने अपने स्वयं के उत्पादन में से कुछ बचाकर पूंजी बनाई; इसे उत्पादन के बेहतर साधनों में निवेश करके, उसने अपनी पूंजी को आय-उत्पादक सम्पत्ति में बदल दिया है। निवेशित पूंजी धन लाएगी, जिससे अधिक पूंजी और निवेश पैदा होगा, जिससे और भी अधिक धन प्राप्त होगा। “अनाज की अधिकाई बैल के बल से आती है”। धन्यवाद, राजा सुलैमान!
इस नीतिवचन की बुद्धि पर विचार करें। बैल बहुत सारा अनाज और अन्य प्रकार का चारा खाते हैं, फिर भी, यह बिना बैलों का खेत ही है जिसके खत्ते में कुछ भी नहीं है। यदि खेती के लिए बैल हो तो भले ही वे बहुत अधिक चारा खाते हैं, तो भी उनकी मेहनत के कारण अनाज के खत्ते भर गए हैं। अब किसान के पास बेचने और उससे आए रुपयों से सुख-सुविधाएं खरीदने बहुत सारा अनाज बचा हुआ है जिसके विषय में उसने उस समय सपने में भी नहीं सोचा होगा जब वह अकेले ही अपने हाथ से खेती करता था। परमेश्वर ने उत्पादन के साधनों को बनाया -बैल- जिसका उपयोग यदि बुद्धिमानी से किया जाए, तो वह जितना खाता है उससे कहीं अधिक उत्पादन देगा। धन्यवाद प्रभु! परमेश्वर ने बैल को उपयोग करने की बुद्धि भी दी। धन्यवाद प्रभु!
बैल और बैल का उपयोग करने की बुद्धि दोनों ही परमेश्वर की ओर से हैं। वास्तव में, विभिन्न अनाजों का बीज बोने, कटनी करने, और संसाधित करने का ज्ञान भी उसी से प्राप्त होता है (यशा 28:23-29)। क्या आप इस अनमोल सत्य को समझते हैं – यहां तक कि बुनियादी कृषि-ज्ञान भी परमेश्वर से आता है? यह परीक्षण से और ग़लतियों को सुधार सुधार कर नहीं सीखा गया था (अन्यथा पहली पीढ़ी इसे सीखने से पहले ही मर गई होती)।
नए-नए आविष्कार कहाँ से आते हैं? वे परमेश्वर की आशीष हैं, और वे बुद्धि के उपयोंग के परिणाम हैं (नीति 8:12)। परमेश्वर कुछ लोगों के दिमाग में असाधारण क्षमताएं डालता है, और वह उन लोगों को उनकी रचनात्मक प्रतिभा का उपयोग करने के लिए प्रेरित करता है ताकि वे ऐसी ऐसी वस्तुओं का आविष्कार करें, जिन्हें देखकर लोग आश्चर्य करते हैं और उनके प्रयासों का लाभ उठाने के लिए उनका अपने जीवन में उपयोग करते हैं (निर्ग 31:1-6; 36:1-2; 2 इति 26:15)। क्या आप प्रतिदिन परमेश्वर को उन वस्तुओं के लिए धन्यवाद देते हैं जो आपको कठोर परिश्रम करने से बचाती हैं? वह प्रत्येक अकृतज्ञता को दण्ड देगा (रोमियों 1:21-22)।
यहाँ अर्थशास्त्रीय बुद्धि है, और सुलैमान ने इसे 3000 वर्षों पहले सिखाया था। लेकिन आज भी ऐसे समाज और देश हैं जिन्होंने इन सरल सबकों को नहीं सीखा है। वे अभी भी शारीरिक श्रम पर निर्भर हैं, बचत को नहीं समझते, कोई निवेश नहीं करते, और उपलब्ध उत्पादन के सब साधनों की उपेक्षा करते हैं। वे जंगलो में झड़बेरी और काजु-बादाम चुनते हैं, जंगली खेल खेलते हैं, खाल पहनते हैं, और झोपड़ियों या तम्बुओं में रहते हैं। वे हज़ारों वर्षों में नहीं बदले हैं। क्या आप बुद्धि के लिए परमेश्वर के आभारी हैं?
अमेरिका और अन्य देश जो बुद्धि के इन सिद्धांतों से प्रेम करते हैं और उनका उपयोग करते हैं, प्रचण्ड धन और समृद्धि का आनंद लेते हैं। वे इतिहास में के किसी भी समाज से अधिक विलासिता और सेवानिवृत्तियों, तथा छुट्टियों का आनंद लेते हैं। लोग सुलैमान की बुद्धि का उपयोग करने में विफल देशों को इन सरल आर्थिक सिद्धांतों की अज्ञानता के आधार पर अलग अलग वर्गों में बाटते हैं।
एक बार जब कोई मनुष्य बचत करने और बैल में निवेश के लाभ को देख लेता है, तो वह अन्य सम्भावनाओं के बारे में बहुत सचेत हो जाता है, इसलिए अन्य विलक्षण आविष्कार होते हैं, जो उन पर परमेश्वर की बढ़कर आशीष है जो उससे डरते हैं (नीति 8:12)। वे और भी बेहतर हल, बीज बोने के साधन, कटनी के साधन, ताड़ने की मशीने, और ट्रैक्टर का आविष्कार करते हैं। उन्होंने आरा-मशीने, फसल काटने की मशीने, वाहक, वाशिंग मशीन, टाइपराइटर, वैक्यूम क्लीनर, माइक्रोवेव ओवन और कंप्यूटर का आविष्कार किया।
क्या आप कुल्हाड़ी का उपयोग करनेवाला लकड़हारा बनना चाहेंगे – या आरा-मशीन का उपयोग करनेवाला? क्या आप मांस का खीमा हाथों से छुरा पकड़कर काटना चाहेंगे, या खीमा-मशीन से? क्या आप फलक का इस्तेमाल करनेवाले एकाउंटेंट बनना चाहेंगे या कम्पूटर का उपयोग करनेवाले एकाउंटेंट बनना चाहेंगे? आप बड़ा बड़ा सामान हाथ से उठाना चाहेंगे या क्रेन से? आप कार का निर्माण बैलगाड़ी के समान हाथों से करेंगे, या संयोजन तकनीक से?
इस पाठ के सारांश को समझे, और प्रभु को धन्य कहें। बैल, बैल का उपयोग करने के लिए आर्थिक ज्ञान, कृषि ज्ञान, और अद्भुत आविष्कार सभी परमेश्वर से हैं। परमेश्वर को महिमा दो! कितना भला होगा यदि भारत और अन्य पिछड़े देशों के बिजनेस स्कूल इसे समझे, लेकिन वे नहीं समझते।
क्या आप उतनी ही समझदारी से बचत और निवेश कर रहे हैं जितना आपको करना चाहिए? क्या आप अपने जीवन में इस नीतिवचन का पालन कर रहे हैं? क्या आपके पास उत्पादन का कोई साधन है? क्या आपके पास कोई आय-उत्पादक सम्पत्तियां है? क्या आप ऐसी चीजों में निवेश करने के लिए धन – पूंजी – जमा कर रहे हैं? यदि आप अपनी कमाई का सब कुछ खर्च कर देते हैं, तो आप मूर्ख हैं। आपको चींटियों के पास जा कर उन से सीखने की ज़रूरत है (नीति 6:6-8; 30:25)। आपको म्युचुअल फंड में निवेश करने, मकान को किराये पर देने, आपके पास जो उपकरण, या वाहन, या कुछ औज़ार हैं जो अपनी लागत से अधिक धन बना सकते हैं, तो आपको उनका उपयोग करना चाहिए, आपके पास दूसरों को रोजगार देने वाला व्यवसाय का निर्माण करने, या अपने स्वयं के परिश्रम का लाभ उठाने के अन्य तरीकों की खोज करनी चाहिए।
पौलुस ने बैलों की देखभाल के नियमों को सुसमाचार के सेवकों पर लागू किया, इसलिए विचार करें कि यह नीतिवचन उन्हें कैसे संबोधित करता है (1 कुरिं 9:6-14; 1 तीमु: 5:17-18)। एक पास्टर के बिना कलीसिया आध्यात्मिक उन्नति नहीं करने पाएगी, क्योंकि आध्यात्मिक बैल (अर्थात् पास्टर) का ईश्वर-प्रदत्त बल है ही नहीं। लेकिन जहां एक परिश्रम करनेवाला पास्टर है वहां कलीसिया को ईश्वर द्वारा नियुक्त इस वृद्धि के साधन से लाभ होगा। परमेश्वर का एक मेहनती दास कलीसिया के लिए बहुत लाभदायक हो सकता है – और यह उसकी बुलाहट भी है (1 तिमु 4:13-16)। और वह जितना अधिक परिश्रम करता है, उतना ही अधिक उसका भरण-पोषण किया जाना चाहिए (1 तीमु 5:17-18)। परमेश्वर ने ऐसा कहा।
क्या आप अपने बैल की, अर्थात् पास्टर जो आपकी आत्मा का पहरेदार है, देखभाल करते हैं? क्या आप उसके लिए दिन प्रतिदिन प्रार्थना करते हैं? क्या आप उसके काम के लिए प्रेम से उसका बहुत सम्मान करते हैं (1 थिस्स 5:12-13)? यदि आप उसकी देखभाल करते हैं और उसके लिए प्रार्थना करते हैं, तो वह परमेश्वर के वचन के लिए आपकी इच्छा को जागृत करने में मदद कर सकता है। कुछ अतिरिक्त भेंट उठाना उसे उतना ही प्रोत्साहित करेगा जितना आप स्वयं होंगे, जिसे हिजकिय्याह ने करने का आदेश दिया था (2 इति 31:4)।
इसके अलावा, यह परमेश्वर के पवित्रों का आध्यात्मिक कर्तव्य है कि वे अपनी कलीसियाओं में शुद्धता बनाए रखे, क्योंकि आध्यात्मिक और सांसारिक आशीषें उसकी कृपा से हैं (भजन 144:9-15)। यहां तक कि प्राकृतिक उत्पादन के साधन और निश्चित रूप से आध्यात्मिक उत्पादन के साधन भी उसी के आशीर्वाद से हैं। बलवान व स्वस्थ बैल और अन्न से भरे हुए खत्ते दोनों ही ईश्वरीय दया से हैं (भजन 144:13-14)। और यह वास्तव में धन्य लोग हैं जिन्होंने अपने पवित्र जीवन के द्वारा प्रभु का सम्मान किया है ताकि वे इन महान आशीषों को पाए। क्या ही धन्य है वह प्रजा जिसका परमेश्वर यहोवा है (भजन 144:15)!
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