नीतिवचन 14:30
शान्त मन, तन का जीवन है, परन्तु मन के जलने से हड्डियाँ भी जल जाती हैं।
क्या आप तन्दुरूस्त हैं? क्या आप हट्टे-कट्टे, ऊर्जावान, और ताकत से संपन्न हैं? आपके जीवन के भौतिक और आत्मिक दोनों पक्ष हैं। हो सकता है कि आपके अन्दर एक सशक्त शारीरिक हृदय हो, पर वाबजूद इसके आपकी आत्मा में ईर्ष्यालु भावनाओं के कारण वह जलकर सड़-गल रहा हो, जिसका अन्त मुत्यु है। राजा सुलैमान ने हमें ईर्ष्या के भयानक परिणामों से बचाने के लिए अपने नीतिवचन लिखें। क्या आप उसके लिखे इस नीतिवचन को अपने मन का परिक्षण करने देंगे?
दूसरों से जलन या ईर्ष्या प्राण-घातक है। यह आपकी आत्मा, शरीर और जीवन का विनाश कर देगी। और बाद में आपको अनंत काल के लिए नरक में ले जाएगी। परन्तु यह आपको आग की झील में ले जाने से पहले आपकी सोच को विकृत कर देगी, आपके मन को यातना देगी, आपकी सेहत को खराब कर देगी, आपके शरीर को भस्म कर देगी, आपकी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान को धूल में मिला देगी और अन्त में आपके जीवन का सर्वनाश कर देगी। जलन से नफरत करें। इसके साथ मत खेलो। आप जलन रख सकते हैं, या किसी से ईर्ष्या रख सकते हैं ऐसे प्रत्येक विचार को त्याग दें और जीवित रहें।
मनोवैज्ञानिक बीमारियों को – शारीरिक बीमारियाँ जिनकी जड़ भावनात्मक समस्याओं में होती हैं – धीरे-धीरे स्वीकार किया गया है। लेकिन सुलैमान ने इन बीमारियों के विषय में 3000 साल पहले ही परमेश्वर की प्रेरणा से जान लिया था। वे ऐसी शारीरिक बीमारियाँ हैं जिनकी जड़ मानसिक, भावनात्मक या मनोवैज्ञानिक कारकों में पाई जाती है। बेशक, जिस किसी भी ख्रिश्चन व्यक्ति को परमेश्वर के वचन की समझ है, वह आसानी से इस परिभाषा में सुधार कर सकता है – पाप, अर्थात् मन या ह्रदय की एक आत्मिक समस्या, शारीरिक सेवत प्रभावित कर सकता है और इसे अन्दर ही अन्दर नष्ट कर सकता है।
यह नीतिवचन शरीर के जीवन की तुलना हड्डियों के सड़ने से करता है। क्या यह नीतिवचन मांस और हड्डियों के शारीरिक स्वास्थ्य के विषय में बोल रहा है, या इन रूपकों के प्रयोग से या दोनों के संयोजन से परमेश्वर और मनुष्यों के साथ समस्त जीवन की सफलता के विषय में बोल रहा है? दाऊद ने परमेश्वर की आज्ञाओं को उनकी व्यापकता में देखा (भजन 119:96), इसलिए यह नीतिवचन पाप के कारण उभरने वाले विभिन्न प्रकार के परिणामों की शिक्षा देता है, विशेषकर जलन या ईर्ष्या के पाप के परिणामों के विषय में। मोहब्बत से भरा मन आपको शारीरिक और आत्मिक दोनों रूप से ताकतवर बनाएगा, जबकि जलन या ईर्ष्या इसके बिलकुल विपरीत करेगी।
आपके अन्दर एक सशक्त शारीरिक हृदय आपका सशक्त शारीरिक जीवन है, क्योंकि यह शरीर के हर हिस्से में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों के साथ-साथ रक्त की पर्याप्त आपूर्ति करता है और सभी अपशिष्ट गन्दगी और जहर को भी बड़ी कुशलतापूर्वक बाहर निकाल फेंकता है। जैसा कि बाइबल में कहा गया है, शरीर का प्राण लहू में रहता है (लैव्य 17:11)। एक सशक्त आत्मिक मन शारीरिक रूप से भी स्वस्थ होता है, क्योंकि दूसरों के प्रति प्रेम और अनुग्रह से भरा होने के कारण यह प्राण को प्रसन्न रखता है और शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले विभिन्न मानसिक तनावों और रासायनिक उत्सर्जन को कम करता है।
ईर्ष्या और इससे संबंधित भावनाएं आपकी मांसपेशियों को तनावग्रस्त करके और मस्तिष्क से रसायनों को उत्सर्जित करके आपके शरीर पर दबाव डालती हैं। जब आप किसी से जलते हैं, आपकी हृदय गति तेज हो जाती है, रक्तचाप बढ़ जाता है, सांस लेने में तेज़ी बढ़ जाती है और तनाव के हार्मोन स्रावित हो सकते हैं। आप पूरी तरह से खतरे पर केंद्रित हो जाते हैं – हालाँकि यह केवल आपकी कल्पना में होता है। इस तरह आप अपने शारीरिक स्वास्थ्य को खतरे में डाल देते हैं। स्थायी विद्वेष, जो रात में भी आपके मन और शरीर पर तनाव बनाए रखता है, आपकी आत्मा को भी कठोर बना देता है।
पाप और विभिन्न प्रकार की मृत्यु पर विचार करें। पाप ने परमेश्वर के प्रति आदम और हव्वा के प्रेम को तत्काल मृत्यु में बदल दिया, और पाप ने ही उनके आदर्श वैवाहिक व्यवस्था को भी भ्रष्ट कर दिया (उत्पत्ति 2:17; 3:7-8)। कुछ वर्षों बाद यह उनके लिए शारीरिक मृत्यु को भी लेकर आया (उत्पत्ति 5:5)। और अगर यीशु मसीह ने उनके लिए प्रायश्चित्त न किया होता, तो वे आग की झील में, जो कि दूसरी मृत्यु है, सदैव के लिए कष्ट सहने डाल दिए जाते (प्रकाशितवाक्य 20:11-15)। पाप, जिसका एक रूप ईर्ष्या या जलन रखना भी है, कई पहलुओं में भयानक रूप से विनाशकारी है। इसे समझो।
दूसरों से जलन भयानक बात है। “क्रोध तो क्रूर, और प्रकोप धारा के समान होता है, परन्तु जब कोई जल उठता है, तब कौन ठहर सकता है?” (नीतिवचन 27:4)। यह दूसरों के प्रति ईर्ष्यालु आक्रोश है, जो शैतानी और नारकीय है (याकूब 3:14-16)। यह अहंकार और स्वार्थ का बीजारोपण है। यह दूसरों की प्रशंसा या सफलता बर्दाश्त नहीं कर सकती; जब दूसरे गिरते हैं तो उसे खुशी होती है; यह उनके गुणों और कौशल का तिरस्कार करती है; यह दूसरों को बदनाम करने के लिए दिन-रात मेहनत करती है। आप बिस्तर पर भी इस भयानक स्वामी और राक्षस से बच नहीं सकते।
जब परमेश्वर ने कैन के छोटे भाई हाबिल की भेंट को स्वीकार किया, तब कैन को उसपर जलन हुई, इसलिए उसने उसे मार डाला। यूसुफ के भाई उसके प्रति अपने पिता के प्रेम और उसके सदाचारी जीवन के कारण उससे ईर्ष्या करते थे, इसलिए उन्होंने उसे गुलाम होने के लिए बेच दिया (प्रेरितों 7:9)। यहूदियों ने जब देखा कि लोग यीशु मसीह के पीछे चलने लगे हैं और उसकी ख्याति बढ़ रही है, तब उन्होंने उससे डाह के कारण पकड़वाया, रोमियों के हाथो मृत्युदंड दिलवाया (मत्ती 27:18)। यहूदियों ने अन्यजातियों में पौलुस के सुसमाचार की सफलता को देखकर उससे ईर्ष्या की, इसलिए उन्होंने सुसमाचार की निंदा की और उसे मारने की कोशिश की (प्रेरितों 13:45; 17:5)।
लेकिन आज ईर्ष्या या जलन की चिंता किसे है? यह एक भूला हुआ और उपेक्षित पाप है। आपने आख़िरी बार इसके ख़िलाफ़ कब उपदेश सुना था? क्या आपकी कर्मचारी-मार्गदर्शिका इसके बारे में चेतावनी देती है? जब आप पिछली बार अपने डॉक्टर से मिले तब क्या उन्होंने इसके बारे में आपसे पूछताछ कीं? क्या आपने किसी न्यायाधीश को इसके विरुद्ध फैसला देते हुए सुना हैं? कितनी बार वकील किसी अपराधी को दोषी ठहराने के उद्देश्य से ईर्ष्या के पाप का हवाला देते हैं? ईर्ष्या एक भयानक पाप, एक भयानक बुराई और प्राण के किए एक विनाशकारी कैंसर है, लेकिन कुछ ही लोग इसके बारे में या इसके खिलाफ कुछ कहते हैं। बुद्धिमान लोग इसका तिरस्कार करते हैं।
ख्रिश्चन पिताओं और माताओं, आपको इस घातक बीमारी का इलाज तभी शुरू कर देना चाहिए जब बच्चे छोटे ही हों। आपको बच्चों को अपने भाई-बहनों की सफलताओं का जश्न मनाना, उनकी उपलब्धियों की प्रशंसा करना, उनकी असफलताओं पर शोक मनाना और उनकी सफलताओं के लिए प्रार्थना करना सिखाना होगा। आपको उन्हें ऐसे किसी भी रवैये या कार्य के लिए तुरंत और गंभीर दण्ड देना होगा जो दूसरों के प्रति गर्व से फूली, स्वार्थी या द्वेषपूर्ण भावना प्रकट करता है। दूसरी आज्ञा है अपने ही समान दूसरों से प्रेम रख, इसलिए अपने घर में इसके पालन पर ज़ोर दो।
नीतिवचन कई रूपकों और अलंकारों का उपयोग करते हैं, यही कारण है कि वे गहन और गुप्त बातें हैं (नीतिवचन 1: 6; यूहन्ना 16:25)। सुलैमान ने अन्य बातों और वस्तुओं को दर्शाने के लिए शरीर के अंगों का उपयोग किया, जैसे बोलने के लिए होंठ और जीभ (नीतिवचन 12:19) और आत्मा और जीवन के लिए पेट का उपयोग (नीतिवचन 20:27,30)। उसने यह स्पष्ट कर दिया कि वह ल्यूकेमिया या अन्य हड्डी और मज्जा के रोगों के लिए किसी भी प्रत्यक्ष या शाब्दिक शब्दप्रयोग के बिना ही, मानव-दुःख और दर्द को दर्शाने के लिए ‘हड्डियों की सड़न’ की एक सरल उपमा का उपयोग कर सकता है (नीतिवचन 12:4)।
इसलिए, यह व्यापक नीतिवचन मुसीबत के कई स्तरों के विषय में शिक्षा देता है जो पाप, विशेष रूप से ईर्ष्या के कारण उत्पन्न होते हैं। सर्व प्रथम, जलन एक धर्मी और बुद्धिमान व्यक्ति के रूप में आपकी सब सफलता को बर्बाद कर देगी। यही कारण है कि आपके सब वस्तुओं में अपने मन की सबसे बढ़कर चौकसी करनी है (नीतिवचन 4:23)। दूसरा, आत्मा में जलन के भ्रष्ट प्रभावों के कारण यह आपके शारीरिक स्वास्थ्य को बिगाड़ देगी (नीतिवचन 17:22)। और तीसरा, परमेश्वर भी प्रतिज्ञा करता है कि वह आपकी पापपूर्ण जीवन के कारण आपके स्वास्थ्य को नष्ट कर देगा (निर्गमन 15:26; व्यवस्था 28:27,35)।
आत्मा और मन के पापों का असर शरीर पर पड़ता है – अर्थात् विविध मानसिक बीमारियाँ। अम्नोन अपनी सौतेली बहन तामार के प्रति इतना अधिक दिवाना हुआ कि इससे वह शारीरिक रूप से बीमार हो गया था (2 शमू 13:2)। जिसपर उसका अधिकार नहीं था उसकी लालसा ने उसके प्राण को इतना कष्ट पहुँचाया कि वह बीमार हो गया। और उसी जलन ने, जो किसी भी मनुष्य को दिन-रात पीसती है, उससे जीवन शक्ति छीन ली। यदि अम्नोन परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता, तो इससे उसकी नाभि स्वस्थ रहती और उसकी हड्डियाँ स्वस्थ रहतीं (नीतिवचन 3:7-8)।
डॉक्टर एस. आई. मैकमिलन और डेविड ई स्टर्न द्वारा लिखित पुस्तक None of These Diseases (इनमें से कोई भी बिमारी नहीं) एक उत्कृष्ट पुस्तक है जो पाप के कारण होने वाली मनोवैज्ञानिक बीमारियों का विसृत विवरण देती है। दोनों लेखक पढ़ने में आसान अध्यायों में पापपूर्ण जीवनशैली के विनाशकारी शारीरिक प्रभावों के बारे में बताते हैं। यह विश्वास की पुष्टि करता है कि सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने बाइबल में अपने प्रेरित-लेखकों से जो लिखवाया है वह अक्सर मानसिक बीमारियों की गोलियों या उपचार से बेहतर है। आध्यात्मिक समस्या- अर्थात् पाप- के कारण मानसिक संस्थानों और अस्पतालों में कितने लोग हैं?
एक प्रसन्न मन पर विचार करें। हाल के अध्ययनों से पता चला है कि जो लोग हंसते हैं और जीवन का आनंद लेते हैं वे उदास और नकारात्मक लोगों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहते हैं। लेकिन सुलैमान ने बहुत पहले लिखा था, “मन का आनन्द अच्छी औषधि है, परन्तु मन के टूटने से हड्डियाँ सूख जाती हैं” (नीतिवचन 17:22)। उसने यह भी लिखा, “जिसका मन प्रसन्न रहता है, वह मानो नित्य भोज में जाता है” (नीतिवचन 15:15)। जीवन-शक्ति केवल आपके आहार से नहीं बल्कि आपके मन से भी आती है। और जब आप दूसरों से ईर्ष्या करते हैं या उनसे जलते है तो आप प्रसन्न नहीं रह सकते, न ही आपके मन में आनन्द होगा।
आप अपनी जलन को दूसरों से छिपा सकते हैं – परन्तु कुछ ही समय के लिए; लेकिन चुगली करना, शिकायत करना, नफरत करना, निंदा करना, बदनामी करना या कानाफूसी करना जल्द ही इसे सबके सामने उजागर कर देगा। जलन तनाव से भरे और क्रोधित तथा कड़वे मन से होकर सीधे आपके स्वास्थ्य को ख़त्म कर सकती है; या आप पर परमेश्वर के प्रत्यक्ष शारीरिक दण्ड के द्वारा यह आपके शरीर को ख़त्म कर सकती है। अपनी ईर्ष्या को प्रेम में बदल दो (नीतिवचन 15:17)। मूसा के मन की दीनता और भक्ति के विपरीत यहोशू की ईर्ष्या पर विचार करें (गिनती 11:24-30)। आप किसके समान हैं?
अपना आत्म-परिक्षण करें और देखे कि आप के अन्दर कितनी जलन या ईर्ष्या है, जो आपके प्राण और शरीर में मौज़ूद समस्याओं का पापपूर्ण कारण है। कई लोग गांठों, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल रीडिंग, या घातक बीमारियों के अन्य लक्षणों के लिए अपने शरीर की जांच करते हैं, लेकिन इन बदतर परिणामों के मूल कारण का पता लगाने के लिए अपना आत्म-परिक्षण क्यों नहीं करते? और इस की जड़ को धर्मी पश्चाताप और अपने पापों को परमेश्वर के सामने स्वीकार करने से आसानी से उखाड़ा जा सकता है (नीतिवचन 28:13; अय्यूब 33:27-28; 1 युहन्ना 1:9)। आप हर तरह से उन्नति कर सकते हैं। बस उसकी बुद्धि को गले लगाओ।
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