नीतिवचन 14:25
सच्चा साक्षी बहुतों के प्राण बचाता है, परन्तु जो झूठी बातें उड़ाया करता है उस से धोखा ही होता है।
झूठ की कीमत जान है; सत्य जान बचाता है (नीतिवचन 18:21)। किसी निर्दोष को बचाने के लिए गवाहों को वह सब कुछ बताना चाहिए जो जो वे जानते हैं (नीतिवचन 24:12; 31:8-9)। गवाह सच बोलकर किसी निर्दोष को मुसीबत से बचा सकता है, या गवाह किसी व्यक्ति के बारे में झूठी साक्ष देकर उसे मृत्यु के फंदे पर लटकवा सकता है। गवाह में बहुत बड़ी ताकत होती है, और आप के पास सच्चा गवाह या फंसानेवाला गवाह बनने का मौका लगभग रोज़ ही आता है। इसलिए आप अपने मन और ज़बान को हमेशा केवल सच बोलने के लिए तत्पर रखें यह बहुत महत्वपूर्ण है।
यह नीतिवचन गवाहों के कार्य का एक सीधा अवलोकन है। इसमें छिपा हुआ सबक गवाह के मुंह से निकलनेवाले सच या झूठ की ताकत है। एक सच्चा गवाह किसी निर्दोष व्यक्ति को संदेह या झूठे आरोपों का शिकार होने से बचा सकता है। झूठ बोलने वाला साक्षी अपने सुननेवाले को धोखा देकर उसमें संदेह पैदा करके या झूठे आरोपों की पुष्टि करके किसी निर्दोष व्यक्ति का विनाश कर सकता है। गवाहों की हानी बहुत ज़बर और बड़ी है, और यह बात आपको सत्य से और ईमानदार लोगों से प्रेम करने और झूठ और झूठ बोलनेवाले लोगों से नफरत करने के लिए प्रेरित करने पाए।
परमेश्वर की सिद्ध क़ानून-व्यवस्था, जो सभी राष्ट्रों के कानूनों से श्रेष्ठ है, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई आरोप लगने पर फैसला सुनाने से पहले कम से कम दो गवाहों की मांग करती है (गिनती 35:30; व्यवस्था 17:6; 19:15; मत्ती 18: 15-16)। एक गवाही काफी नहीं है, क्योंकि एक क्रोधी या कड़वाहट भरे व्यक्ति के लिए धोखे से झूठ बोलकर दूसरों का जीवन बर्बाद करना बहुत आसान है। आप आए दिन किसी झूठे व्यक्ति द्वारा किसी निर्दोष की प्रतिष्ठा या जीवन को नुकसान पहुंचाने या उसे बर्बाद कर दिए जाने के बारे में पढ़ या सुन सकते हैं।
परमेश्वर की सिद्ध क़ानून-व्यवस्था अदालत में झूठी गवाही देने या झूठ बोलने से बचाती है। परमेश्वर की व्यवस्था के तहत जब कोई व्यक्ति झूठी गवाही देता हुआ पाया जाता, तो उसी को फाँसी के तख्ते पर लटकाया जाता था (व्यवस्था 19:16-21)। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति हत्या के मामले में झूठी गवाही देता, जहां मृत्युदंड का नियम था, तो उस झूठे गवाह को ही मार दिया जाता था। यदि झूठे गवाह के कारण कोई अपनी आँखें खो देता, तो झूठे गवाह की भी आंख फोड़ दी जाती थी। बाइबल में इंसान के लिए दी गई बुद्धि और ज्ञान महान और सर्वश्रेष्ठ है, और राजनीतिशास्त्र की प्रत्येक कक्षा में इसे पढ़ाया और इसका अध्ययन किया जाना चाहिए (व्यवस्था 4:5-8)।
परमेश्वर की सिद्ध क़ानून-व्यवस्था में किसी गवाह को सुनने से पहले उसे शपथ दिलाया जाना भी अनिवार्य होता था, जिसके कारण मुक़दमें में परमेश्वर के भय का शक्तिशाली प्रभाव पड़ता था (नीतिवचन 29:24; लैव्य 5:1)। आज हमारे देश की अदालती कार्यवाही में भी इसी नियम का पालन किया जाता है। जब कोई व्यक्ति परमेश्वर यहोवा के नाम पर सच बोलने की शपथ लेता था, तो झूठ बोलने का कोई भी विचार अपने साथ परमेश्वर के निश्चित अभिशाप का डर पैदा करता था। यहाँ तक कि नाज़रेथ के यीशु ने भी अंत में अपना मुँह केवल तब खोला जब महायाजक ने उसे शपथ दिलाई (मत्ती 26:63-64)।
झूठे गवाहों के कारण होनेवाली हानि पर विचार करें। पोतीफर की पत्नी ने निर्दोष यूसुफ पर उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश करने का आरोप लगाया, और इससे उसे अपनी नौकरी, अपनी प्रतिष्ठा और अपनी स्वतंत्रता से हाथ धोना पड़ा (उत्पत्ति 39:7-20)। लेकिन परमेश्वर ने उसे मिस्र के शासक के रूप में खड़ा किया, तो वहीं पोतीपर की बीवी के बारे में फिर कभी नहीं सुना गया। दुष्ट इज़ेबेल ने नाबोत के बारे में झूठ बोलने के लिए दो झूठे गवाहों को काम पर रखा था ताकि वह अपने दुष्ट पति, राजा अहाब के लिए उसके अंगूर के बगीचे को चुरा ले (1 राजा 21:7-14)। अहाब युद्ध में मारा गया और इज़ेबेल को कुत्तों ने खा लिया।
यदि अदालत में सच्चा गवाह इतना महत्वपूर्ण है, तो उन लोगों का क्या जो परमेश्वर के राजदूत हैं और मंच (पूल्पिट) पर उसके वचन के गवाह बनते हैं? वह प्रत्येक मनुष्य जिसे परमेश्वर की ओर से उसके सुसमाचार का प्रचार करने की बुलाहट दी गई है, वह उस धर्म-सिद्धांत पर ध्यान दे जिसकी वह धोषणा करता है (1 तीमु 4:16; तीतुस 1:9-11)। लेकिन आज भी, जैसा कि हमेशा रहा है, कलीसियाओं के अन्दर झूठे शिक्षको की भरमार है जो परमेश्वर और उसके धर्म के नाम पर झूठ बोलते हैं (यशायाह 30:8-11; यिर्म 5:31; 2 कुरिन्थ 2:17)। हर एक प्रचारक का परमेश्वर के वचन के अनुसार माप-तौल करें (प्रेरितों 17:11)।
अब तक का सबसे बड़ा मुक़दमा निकट आ रहा है, जब प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन का लेखा परमेश्वर को देना होगा (रोमियों 14:10-12; 2 कुरिन्थ 5:9-11)। कोई भी मनुष्य उस असीम पवित्र और न्यायप्रिय परमेश्वर की मर्मज्ञ दृष्टि से छिप नहीं पाएगा। परन्तु परमेश्वर के चुने हुए लोगों के लिए, जो उसकी कृपा से और उस स्थानापन्न प्रायश्चित से बचाए गए हैं जो उनके पापों के लिए यीशु मसीह ने दिया, उस मुक़दमे के दिन एक विश्वासयोग्य और सच्चा गवाह बनने एक मध्यस्थ और वकील प्रकट होगा (प्रकाशितवाक्य 3:14; 19:11)। और वह प्रभु यीशु मसीह है, और वह विश्वासयोग्यता से उन लोगों को ग्रहण करेगा जो सुसमाचार पर विश्वास रखने की उसकी आज्ञा को मानते हैं (मत्ती 7:21-27; इब्रानियों 2:13; 5:9; प्रकाशितवाक्य 3:5)। उस भयानक मुक़दमे के दिन परमेश्वर के ज्वालामय क्रोध से बचने के लिए अपने पापों से पश्चात्ताप करें, और अपनी सिद्ध धार्मिकता के लिए यीशु मसीह पर विश्वास रखें।
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