नीतिवचन 13:9
धर्मियों की ज्योति आनन्द के साथ रहती है, परन्तु दुष्टों का दिया बुझ जाता है।
आपके परिवार का भविष्य आपके चरित्र और आचरण पर निर्भर करता है। यदि आप धार्मिकता का जीवन जीते हैं, तो परमेश्वर आपके परिवार को आशीष देगा। यदि आप दुष्टता का जीवन जीते हैं, तो इसका दण्ड परमेश्वर आपके परिवार को देगा। यहां आपके वंश-वृक्ष को लेकर परमेश्वर की प्रतिज्ञा और चेतावनी, दोनों हैं। क्या आप को इसकी गम्भीरता समझ में आ रही है?
सुलैमान ने आपके वंश पर असर डालनेवाले आपके चरित्र और आचरण के विषय में दी गई इस प्रतिज्ञा और चेतावनी को बार बार दोहराया है (नीतिवचन 2:21-22; 3:33; 11:21; 12:7; 14:11; 15:25; 20:7; 21: 12)। आप परमेश्वर और उसके वचनों से प्रेम करने का फैसला लेकर अपने वंशजों के लिए कुछ ऐसा कर सकते हैं जिसका उन्हें प्रतिफल मिलता रहेगा।
इस नीतिवचन में घराना या भावी पीढ़ियों का उल्लेख कहाँ है? याद रखें, नीतिवचन बुद्धिमान लोगों की गहरी बातें हैं (नीतिवचन 1: 6; भजन 78: 2)। उनमें खोज करना, उनकी व्याख्या करना और उन्हें अपने व्यावहारिक जीवन में लागू करना आपका काम है। यहां निश्चित ही आपके घराने और वंशजों की ओर इशारा है।
इस नीतिवचन में प्रयुक्त दो महत्वपूर्ण शब्द जिन्हें आपको अवश्य समझना चाहिए वे हैं “ज्योति” और “दिया”। हालांकि कुछ टीकाकार आम तौर पर कहते हैं कि ये सुख और समृद्धि के रूपक हैं, परन्तु प्रश्न यह है कि सुख और समृद्धि भला कैसे आनंदित होते हैं? इसकी एक बेहतर व्याख्या है, और जैसा कि प्रेरित पौलुस ने निर्देश दिया, हमें इसकी व्याख्या परमेश्वर के वचनों को परमेश्वर के वचनों से मिला मिलाकर करनी है (1 कुरिन्थ 2:13) ।
बाइबल में मनुष्य के घराने को उसकी ज्योति या उसका दिया कहा गया है। परमेश्वर ने ऐसे ही शब्दों में दाऊद को आशीष दीं थी: “और उसके पुत्र को मैं एक गोत्र दूँगा, इसलिये कि यरूशलेम अर्थात् उस नगर में जिसे अपना नाम रखने को मैं ने चुना है, मेरे दास दाऊद का दीपक मेरे सामने सदैव बना रहे” (1 राजा 11:36)। “तौभी दाऊद के कारण उसके परमेश्वर यहोवा ने यरूशलेम में उसे एक दीपक दिया अर्थात् उसके पुत्र को उसके बाद ठहराया और यरूशलेम को बनाए रखा” (1 राजा 15:4)। “तौभी यहोवा ने यहूदा को नष्ट करना न चाहा, यह उसके दास दाऊद के कारण हुआ, क्योंकि उसने उसको वचन दिया था, कि तेरे वंश के निमित्त मैं सदा तेरे लिये एक दीपक जलता हुआ रखूँगा” (2 राजा 8:19)।
फिर दाऊद के बारे में परमेश्वर ने कहा, ” वहाँ मैं दाऊद का एक सींग उगाऊँगा; मैं ने अपने अभिषिक्त के लिये एक दीपक तैयार कर रखा है” (भजन 132:17)। और फिर, “तौभी यहोवा ने दाऊद के घराने को नष्ट करना न चाहा, यह उस वाचा के कारण था, जो उसने दाऊद से बाँधी थी। उस वचन के अनुसार था, जो उसने उसको दिया था कि मैं ऐसा करूँगा कि तेरा और तेरे वंश का दीपक कभी न बुझेगा” (2 इतिहास 21:7) ।
क्या यह खरी धर्मशिक्षा है? बिलकुल! “क्योंकि यहोवा न्याय से प्रीति रखता; और अपने भक्तों को न तजेगा। उनकी तो रक्षा सदा होती है, परन्तु दुष्टों का वंश काट डाला जाएगा” (भजन 37:28)। “तू उनको दण्डवत् न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखने वाला परमेश्वर हूँ, और जो मुझ से बैर रखते हैं, उनके बेटों, पोतों, और परपोतों को भी पितरों का दण्ड दिया करता हूँ, और जो मुझ से प्रेम रखते और मेरी आज्ञाओं को मानते हैं, उन हज़ारों पर करुणा किया करता हूँ” (निर्गमन 20:5-6)।
परमेश्वर धर्मी जनों के घराने को आशीर्वाद देता है। “क्या ही धन्य है वह पुरुष जो यहोवा का भय मानता है, और उसकी आज्ञाओं से अति प्रसन्न रहता है! उसका वंश पृथ्वी पर पराक्रमी होगा; सीधे लोगों की सन्तान आशीष पाएगी” (भजन 112:1-2)। बाइबल और भी वचन हैं जो यही सत्य सिखाते हैं (गिनती 25:10-13; भजन 25:12-14; 34:11-22; 37:1-40; 102:28; 58:8-12; यिर्म 32:29; 35:18-19)।
परमेश्वर दुष्टों के परिवारों को दण्ड देता है। “तेरा हाथ तेरे सब शत्रुओं को ढूँढ़ निकालेगा, तेरा दाहिना हाथ तेरे सब बैरियों का पता लगा लेगा। तू अपने मुख के सम्मुख उन्हें जलते हुए भट्टे के समान जलाएगा। यहोवा अपने क्रोध में उन्हें निगल जाएगा, और आग उनको भस्म कर डालेगी। तू उनके फलों को पृथ्वी पर से, और उनके वंश को मनुष्यों में से नष्ट करेगा। क्योंकि उन्होंने तेरी हानि ठानी है, उन्होंने ऐसी युक्ति निकाली है जिसे वे पूरी न कर सकेंगे। क्योंकि तू अपना धनुष उनके विरुद्ध चढ़ाएगा, और वे पीठ दिखाकर भागेंगे” (भजन 21:8-13)। और भी कुछ वचन देखें (1 शमू 2:27-36; 1 राजा 16:1-7; 21:20-26; अय्यूब 18:16-21; 27:13-15; भजन 109:6-20; यशायाह 14:18 -23)।
क्या परमेश्वर माता-पिता के पापों के लिए बच्चों को दण्ड देता है, क्योंकि वह इस्राएल की इस कहावत से घृणा करता है कि, “तुम लोग जो इस्राएल देश के विषय में यह कहावत कहते हो, ‘खट्टे अंगूर तो खाए पुरखा लोगों ने, परन्तु दाँत खट्टे हुए बच्चों के” (यहेज़केल 18:1-3)? परमेश्वर उनकी इस कहावत से घृणा करता था, क्योंकि प्रत्येक पीढ़ी के पास अपने बाप-दादों की अच्छाई या बुराई का चक्र को तोड़ने का अवसर होता है। एक दुष्ट मनुष्य अपने धर्मी माता-पिता के आशीर्वाद के चक्र को तोड़ सकता है, और एक धर्मी व्यक्ति अपने दुष्ट माता-पिता के दण्ड के चक्र को तोड़ सकता है (यहेज़केल 18:4-32)।
पाठक! यदि आप परमेश्वर का इतना भय नहीं मानते कि अपना जीवन धार्मिकता से जिएँ, तो क्या आप कम से कम अपने बच्चों और पोते-पोतियों के लिए ऐसा करेंगे? आखिर उनकी विरासत के लिए पैसे क्यों बचाएं, उन्हें अच्छे कॉलेज में पढ़ाने की चिंता क्यों करें, एक अच्छे परिवार में उनकी शादियाँ कराने के लिए क्यों इतना परिश्रम करें और क्यों उन्हें अपनी नौकरी या व्यवसाय में स्थापित करने में मदद करें? आप धार्मिकता का जीवन जीकर भी उनके लिए इन सब आशिषों का इंतज़ाम कर सकते हैं, और आपके सुख का भी यही एकमात्र मार्ग है जिससे आप स्वयं प्रसन्न रह सकते हैं (नीतिवचन 3:13,18; 16:20; 28:14; 29:18)। स्वर्ग के धन्य परमेश्वर ने आपको आज के लिए एक महान अवसर प्रदान किया है।
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