नीतिवचन 13:5
धर्मी झूठे वचन से बैर रखता है, परन्तु दुष्ट लज्जा का कारण और लज्जित हो जाता है।
आपकी शोहरत और सफलता आपकी ईमानदारी और सच्चाई पर निर्भर करती हैं। धर्मी मनुष्य झूठ से बैर रखता है। वह अपनी बड़ाई करने या अपनी झूठी शोहरत की छाप डालने से घृणा करता है। उसे झूठ बोलने पर विवश कर सके ऐसी कोई कीमत या प्रेरणा उसे नहीं दी जा सकती। सत्यवादिता एक दुर्लभ गुण है; परमेश्वर और मनुष्य एक विश्वासयोग्य और ईमानदार व्यक्ति की बड़ाई करेंगे और उसे पुरस्कृत करेंगे।
तो वही, दुष्ट लोग बड़ी सहजता से झूठ बोलते हैं और दूसरों की बदनामी करते हैं। वे नीच, घिनौने और नफ़रत पैदा करनेवाले होते हैं; उन्हें देखते ही मिचली महसूस होती है, जैसा कि शब्द ‘लज्जा’ सूचित करता है। वे अपने ईश्वर, अर्थात् शैतान को प्रतिबिम्बित करते हैं, जो आरम्भ से ही झूठ बोलता आया है। वे लज्जित होंगे, क्योंकि यहोवा उनका भेद खोलेगा और उन्हें दण्ड देगा।
आपकी भविष्य की समृद्धि आपकी सच्चाई पर निर्भर करती है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दूसरे क्या कहते हैं, क्या करते हैं, या सत्य से बच निकलने का कितना दिखावा करते हैं (नीतिवचन 12:19)। आपकी ईमानदारी निर्धारित करती है कि परमेश्वर आपसे बैर रखता है या वह आप पर प्रसन्न होता है – और इससे आपके जीवन पर अविश्वसनीय फ़र्क पड़ता है (नीतिवचन 12:22)।
यदि आपको झूठ बोलकर आगे बढ़ने का कोई अवसर दिखाई देता है, तो यह निष्फल का भ्रम है, और आप साक्षात् मृत्यु से खिलवाड़ कर रहे हो (नीतिवचन 21:6; 19:9)। विश्वासयोग्य मनुष्य कभी झूठ नहीं बोलेगा (नीतिवचन 14:5), और वह विश्वासयोग्य मनुष्य का प्रतिफल पाएगा (नीतिवचन 28:20)। सच्चाई पर चलनेवाला एक निर्धन मनुष्य झूठ बोलने वाले धनवान मनुष्य से श्रेष्ठ है (नीतिवचन 19:22)।
ईमानदारी एक बहुत ही सुन्दर बात है। परमेश्वर ईमानदार मनुष्य को आशीष देगा, और समाज के कुलीन मनुष्य उसकी बड़ाई करेंगे, क्योंकि वे किसी भी परिस्थिति में उस पर भरोसा कर सकते हैं। ऐसे व्यक्ति को कभी भी शब्दों का खेल नहीं खेलना पड़ता, क्योंकि वह केवल सच्चाई से व्यवहार करता है; उसे कभी भी एक झूठ पर पर्दा डालने के लिए दूसरा झूठ नहीं बोलना पड़ता है।
परमेश्वर झूठ बोलनेवाली जीभ से घृणा करता है (नीतिवचन 6:16-19), और दाऊद भी ऐसा ही करता था (भजन 119:163)। उसने सब झूठों और निन्दा करनेवालों को बड़ी से सख्ती से अपने घर से निकाल दिया (भजन 101:4-8)। यदि आप उसके जैसा बनना चाहते हैं, तो आपको भी उसी के समान झूठ के खिलाफ एक मजबूत भूमिका लेनी होगी (नीतिवचन 12:19)।
झूठ बोलने की फ़ितरत आपको आदम से विरासत में मिली है, और आपको इससे छुटकारा पाना होगा (कुलुस 3:9; इफिस 4:25)। इस्राएल में, परमेश्वर ने अपने लोगों को झूठ न बोलने की आज्ञा दी (लैव्य 19:11), और यह अभी भी खरी शिक्षा के विरुद्ध है (1 तीमु 1:10)। स्वर्ग में एक भी झूठा नहीं है; वे सब आग की झील में हैं (प्रक 21:8,27)।
माता-पिता को बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि झूठ बोलना, बढ़ा-चढ़ा कर बातें करना, या किसी को बताना, गलत बयानी करना, बदनामी करना या झूठा आरोप लगाना भयानक पाप हैं। अन्य पापों को पश्चाताप, क्षतिपूर्ति और सुधार द्वारा ठीक किया जा सकता है, लेकिन झूठ बोलना एक अलग प्रकृति का पाप है। यह भरोसे को नष्ट करता है, और यह सही भी है। एक बच्चा जब जब अपने जीवन में झूठ बोलता है, तब तब उसे स्पष्ट रूप से, संयमित मन से और गंभीरता से निपटा जाना चाहिए।
दुष्ट लोग नीच, घिनौने, नफ़रत पैदा करनेवाले, तिरस्कृत, और चौंकाने वाले होते हैं, जैसा कि असामान्य शब्द लज्जा से सूचित होता है। जब आप किसी चीज़ से लज्जा महसूस करते हैं, तो आप उससे घृणा करते हैं (जकर्याह 11:8)। परमेश्वर और धर्मी लोग दुष्टों से उनके झूठ बोलने की फ़ितरत और सत्य की एक विकृत मानसिकता से अवहेलना करने के कारण उनसे घृणा तथा नफरत करते हैं, और बैर रखते हैं।
झूठ आज की सांसारिक मन की मसीहियत का मुख्य लक्षण है, जहाँ के ज्यादातर सदस्य शांति भंग करने वाले, झूठे आरोप लगाने वाले, विश्वासघाती, धोखा खाए हुए, धोखा देने वाले, और सच्चाई के स्थान पर दंतकथाओं को प्रिय जाननेवाले होते हैं (2 तीमुथियुस 3:1-4:4)। यह लज्जा की बात है कि चर्च में ऐसे मनुष्य हैं जो अपने मुंह के एक ओर से मसीह के चेले होने का दावा करते हैं, तो दूसरे मुंह से झूठ बोलते हैं।
परमेश्वर के सच्चे पवित्र लोग झूठे धर्म के झूठे ढोंग से बैर रखते हैं (1 तीमु 4:1-3); वे सब मनुष्यों को झूठा समझते हैं, और केवल सत्य के परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं (रोमियों 3:4; प्रेरितों के काम 17:11; 1 थिस्स 5:21)। वे उस बड़ी वेश्या (अर्थात झूठी कलीसिया) और उसकी बेटियों से घृणा करते हैं, जो झूठ के द्वारा मसीहियत को वेश्या बना देती हैं (प्रक 17:1-6)।
परन्तु झूठ बोलनेवाले ये दुष्ट बेनकाब होंगे। परमेश्वर उनकी झूठी मुस्कान से हाथ मिलाने की प्रवृत्ति और उनके मुंह की व्यर्थ बातों को प्रगट करेगा (भजन 144:8,11)। परमेश्वर न्याय के लिए पापियों का पर्दा फाश करने और अपने प्रिय पवित्रजनों का आदर करने से प्रीति रखता है (मलाकी 3:17-18)। उसने झूठ बोलने के कारण हनन्याह और सफीरा को कलीसिया के सामने मार डाला (प्रेरितों 5:1-11)।
यीशु मसीह सत्य है (यूहन्ना 14:6), सत्य का वचन है (याकूब 1:18), विश्वासयोग्य साक्षी है (प्रक 1:5), सच्चा है (प्रक 3:7), विश्वासयोग्य और सच्चा साक्षी है (प्रक 3: 14), और वह विश्वासयोग्य और सत्य कहलाता है (प्रक 19:11)। यदि आप उसमें एक नयी सृष्टि हैं, तो आप भी झूठ से घृणा करेंगे और सत्य से प्रेम करेंगे।
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