नीतिवचन 13:24
जो बेटे पर छड़ी नहीं चलाता वह उसका बैरी है, परन्तु जो उस से प्रेम रखता, वह समय पर उसको ताड़ना देता है।
जो माता-पिता प्रेम रखनेवाले होते हैं वे अपने बच्चों को ताड़ना देते हैं। वे इसकी शुरुआत बच्चों के बाल-अवस्था में ही करते हैं और अपने इस अनुशासन से पीछे नहीं हटते। वे अपने बच्चों का सबसे अधिक कल्याण चाहते हैं, और वे जानते हैं कि पिटाई या ताड़ना से उन्हें सफल होने में मदद मिलेगी। वे आज के अहंकारी, अज्ञानी और दिवालिया विचारधाराओं के बजाए परमेश्वर और सुलैमान पर कहीं अधिक भरोसा करते हैं।
यह नीतिवचन अद्भुत है। एक सक्षिप्त वाक्य साबित कर देगा कि आप परमेश्वर से प्रेम करते हैं या नहीं, आप परमेश्वर का भय मानते हैं या नहीं, आप अपने बच्चों से प्रेम रखते हैं या नहीं, और आप बुद्धिमान हैं या नहीं। आप इन निष्कर्षों से बच नहीं सकते। यदि आप अपने बच्चों को ताड़ना नहीं देते हैं, तो आपने परमेश्वर से, अपने बच्चों से और बुद्धि से बैर रखने का फैसला किया है।
इस नीतिवचन का सबक इतना गंभीर है कि इसे कुछ और नीतिवचनों में दोहराया गया है: शारीरिक दंड काम करता है, और बुद्धिमान माता-पिता इसे लागू करते हैं (नीतिवचन 3:12; 10:13; 19:18; 20:30; 22:15; 23:13-14; 26:3; 29:15,17)। यह बहस का विषय नहीं है। परमेश्वर ने कहा है, बस इतना काफ़ी है। 3000 वर्षों का लिखित मानव-इतिहास इसकी पुष्टि करता है, और आज के बेलगाम युवा साबित करते हैं कि उन्हें इसकी आवश्यकता है।
अगर माता-पिता इस नीतिवचन का पालन करें तो दुनिया एक बेहतर जगह होगी। लेकिन शारीरिक दंड के ख़िलाफ़ शिक्षकों, राजनेताओं और समाचार मीडिया द्वारा अधिकांश लोगों की बुद्धि भ्रष्ट कर दीं गईं है। हालाँकि एक गंभीर समस्या हर जगह देखी जाती है – अर्थात् अभिमानी, आलसी, विद्रोही, स्वार्थी और अहंकारी युवाओं की एक पीढ़ी – फिर भी यह दुनिया बाइबल में परमेश्वर और सुलैमान की बुद्धि से बैर रखती है।
छड़ी क्या है? यह एक पतली छड़ी होती है जो मूर्खों और मूर्ख बच्चों की पीठ पर फटके लगाने के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। ताड़ना क्या है? उनकी पीठ पर बुद्धि के निशान बनाने के लिए ही छड़ी का उपयोग किया जाता है। ‘समय पर’ का क्या अर्थ है? यह वह समय होता है जब बच्चे के बुद्धिमान होने की आशा अब भी बनी हुई होती है। छड़ी नहीं चलाता का क्या अर्थ है? छड़ी नहीं चलाने का अर्थ है यह फैसला लेना कि आप अपने बच्चों से इतना भी प्रेम नहीं करते हैं कि छड़ी का उपयोग करें, फिर वजह चाहे जो भी हो।
क्या आप अपने बेटे से प्रेम रखते हैं? केवल नफरती माँ-बाप ही अपने बच्चों को ताड़ना नहीं देते हैं। वे अपने आप से इतना प्रेम करते हैं कि अपने बच्चे की भलाई के लिए उसका सामना करने और उसे ताड़ना देने के लिए उन में न तो कोई भावना है, न समय है, और न ही थोड़े समय के लिए दुःख सहने की हिम्मत। वह पिता जो वास्तव में अपने बेटे से प्रेम रखता है और चाहता है कि वह महान बने, आशा के रहते कम उम्र में ही उसे ईमानदारी से डांटेगा और पिटेगा। यदि आप छड़ी का प्रयोग नहीं करते हैं, तो आप अपने बेटे से बैर रखते हैं; यदि आप वास्तव में उसमें अपना आनन्द पाते हैं, तो आप उसे सुधारेंगे और फटके लगाएँगे (नीतिवचन 3:11-12)।
सच्चा प्रेम इतना महान होता है कि आज की दुनिया का भावनाप्रधान आधुनिक बेशर्त झूठा प्रेम उसकी बराबरी नहीं कर सकता। सच्चा प्रेम वह है जो दूसरे के व्यक्तिगत और आध्यात्मिक कल्याण के लिए त्याग करने हमेशा तत्पर रहता है; यह वह करना है जो दूसरे व्यक्ति को ऐसे जीवन का निर्माण करने में उपयुक्त साबित हो ताकि वह परमेश्वर और सब मनुष्यों को अधिक सिद्धता से प्रसन्न करनेवाला एक कामयाब इन्सान बन सके। बेशक, आप ऐसे प्रेम के बारे में बेन स्पॉक की किताबों या गैर-मसीही मैगज़ीनों में नहीं पढ़ सकते। यह प्रेम केवल ख्रिश्चन लोग ही जानते हैं और इसका ज्ञान केवल बाइबल में सिखाया गया है। आपको बाकी सब स्रोतों को अनदेखा करना ज़रूरी है।
सच्चा प्रेम अपने लक्ष्य और उसे पाने के लिए जिन साधनों का चुनाव किया जाता है, उससे जाना जाता है। धर्मी माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ते जाएं, जो मानव अस्तित्व का संभवत: सर्वोच्च लक्ष्य है। और वे उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए परमेश्वर-प्रेरित और समय-सिद्ध साधनों का उपयोग करते हैं – छड़ी और ताड़ना (नीतिवचन 29:15)। यह माता-पिता के प्रेम की सबसे बड़ी ऊँचाई है। क्या आप अपने बच्चों से इस तरीके से और इतने उच्च स्तर का प्रेम करते हैं? इससे बेहतर कोई विचारधारा नहीं है, इसलिए बाइबल की इसी विचारधारा को अपनाएं!
क्या आप अपने बच्चे की सबसे बड़ी भलाई चाहते हैं? वह मूर्ख पैदा हुआ था, और आपको ही उस मूर्खता को उससे बाहर निकालकर दूर करना होगा, वर्ना आप उसके बड़े हो जाने पर एक मूर्ख वयस्क को जीवन और अन्य अधिकारियों द्वारा दंड पाने के लिए एक बेरहम दुनिया में भेज देंगे (नीतिवचन 22:15)। छड़ी बद्धिमान बनाती है, इसलिए भावुकता में आकर उसका उपयोग न करना अपने बच्चों को उस बुद्धि से वंचित रखना है जो उनकी सफलता के लिए अति आवश्यक होती है (नीतिवचन 29:15)। छड़ी बच्चों को मृत्यु और नरक से बचाती है, इसलिए इसका उपयोग न करना एक ऐसा फैसला लेना है जिसके नतीजें आपके बच्चों के लिए भविष्य में केवल पीड़ा और परेशानी को ही जन्म देंगे (नीतिवचन 23:13-14)।
बच्चे में सद्चरित्र और सफलता को संभव करने का एकमात्र सिद्ध तरीका है उसे ताड़ना देना। आप एक स्वार्थी, आलसी, अपरिपक्व वयस्क को एक ऐसे चरित्र की कमी की गारंटी कैसे दे सकते हैं जो जीवन में सफल होने के लिए आवश्यक है? बस आप उसकी इच्छाओं को पूरा करें, उसके बार बार बिगड़ते मिजाज़ को ठीक करें, उसे उसके मित्रों के समान आज़ादी दें और किसी भी आलोचना या नकारात्मक बातें बोलने से बचें जो उसे निराश कर सकती है। इसे ही अब माता-पिता प्रशिक्षण कहते हैं। आप किसी ऐसे काम करने वाले जानवर को प्रतियोगिता में शामिल करने का प्रयास करें जिस पर लगाम या चाबुक का कभी उपयोग ही न किया गया हो (नीतिवचन 26:3)।
क्या आप बुढ़ापे में आनंद और शांति चाहते हैं? जो बच्चा अपने आप पर छोड़ दिया जाता है, वह अपने माता-पिता को लज्जित करता है, परन्तु डाँट और ताड़ना से बच्चे बुद्धिमान बनते हैं (नीतिवचन 29:15,17)। क्या आप ऐसे माता-पिता को जानते हैं जो अब अपनी बची-खुची ज़िन्दगी अपने मूर्ख, विद्रोही या अपराधी बच्चों के दुःख में बिता रहें हैं? आप खुद भी उनमें से एक हो सकते हैं। जब उनके बच्चें छोटे थे तो उन्होंने बच्चों को नियमित रूप से ताड़ना नहीं दीं ताकि बुढ़ापे में उन्हें खुशी मिले (नीतिवचन 10:1; 15:20; 17:21,25; 19:13; 22:6; 23:15-16, 24-25; 29:3,15,17)।
द्वंद्व की जड़ यहाँ है: माता-पिता अपनी अस्पष्ट भावनाओं के शिकार हो जाते हैं जिन्हें वे प्रेम कहते हैं कि बच्चों को जो कुछ भी वे चाहते हैं वह उन्हें दें, वे जो भी करना चाहते हैं उसे करने दें, और ऐसी किसी भी चीज़ से बचते हैं जो उन्हें निराश करती है। वे सोचते हैं कि खुश बच्चे अच्छे बच्चे होते हैं। ऐसे माँ-बाप बच्चों की मूर्खता और इस पीढ़ी के पापों – घमंड, आलस्य, विद्रोह, स्वार्थ आदि को और बी बढ़ावा देकर उनकी जड़ों को मज़बूत करते हैं।
इस द्वंद्व की एक और जड़ यहाँ है: अमेरिका में पीटीए प्लास्टर्स के सूज़ी स्मार्टमाउथ ने शहर के चारों ओर ऐसे विज्ञापन लगाएं है कि “आप बच्चों को पिट नहीं सकते।” स्कूल मनोवैज्ञानिक डॉक्टर डिमविट्स का कहना है कि पिटाई से व्यक्तित्व विकृत हो जाता है और इसमें बुरे व्यवहार के लिए कोई प्रतिबंधात्मक गुण नहीं है। बेंजामिन स्पॉक और जेम्स डॉब्सन ने भी ऐसी ही बाइबल-विरोधी विचारधारा को अपनाया था (नीतिवचन 20:20; 30:17; व्यवस्था 27:16)। भारत के पालकों ने भी इसी विचारधारा को अपनाया लिया है।
आप किस पर विश्वास करेंगे? जिस परमेश्वर ने परिवार की रचना की उस सृष्टिकर्ता ने अपनी इच्छा स्पष्ट रूप से और बार-बार घोषित की है। विश्व इतिहास के सबसे बुद्धिमान राजा और दार्शनिक, राजा सुलैमान ने अपनी ईश्वर-प्रेरित सलाह और शिक्षा दी। आप किस पर विश्वास करेंगे? संयुक्त राष्ट्र और यूनिसेफ पर, जो ग्लोबल वार्मिंग के बारे में चेतावनियों के बीच बच्चों के अधिकारों का प्रस्ताव रखते हैं?
दुनिया के विचारकों को माँ-बाप की परवरिश के बारे में कोई जानकारी नहीं है, विशेषकर तब जब वे अपने आप को अधिक शिक्षित और बुद्धिमत्ता समझते हैं। जब अमेरिका में एक बिगड़ैल बच्चा अपनी बन्दूक से स्कूली बच्चों पर गोलियां चला देता है, तो शिक्षकों, राजनेताओं और मीडिया की प्रतिक्रिया क्या होती है? बंदूकों पर नियंत्रण! न तो अमेरिका और न ही दुनिया को बंदूक पर नियंत्रण की आवश्यकता है – उन्हें इस नीतिवचन में सिखाए गए बाल-नियंत्रण की आवश्यकता है।
हमारे बाप-दादा कहा करते थें, “डंडे को छोड़ दो, बच्चे का विनाश कर दो”, अगर हमारी भाषा में कहे तो, ज़्यादा लाड़ प्यार से बच्चे बिगड़ जाते हैं ; उस पीढ़ी का चरित्र इस पीढ़ी के चरित्र के लिए अंधकार में ज्योति के समान है। यह पीढ़ी कहती है, “आप बच्चों को पिट नहीं सकते।” कौन सही है? हमारे दादा-दादी ने परमेश्वर का प्रेरित वचन, सुलैमान की बुद्धि और अपने सामान्य ज्ञान को चुना। आज का स्त्रैण और उदारवादी समाज अज्ञानी शिक्षकों और फुटबॉल खेलनेवाली मूर्ख माताओं के सामने झुकता है, दोनों ही जीवन का कोई ज्ञान नहीं है।
वे दादा-दादी जानते थे कि सच्चा प्रेम एक बच्चे को जीवन के लिए तैयार करने के लिए आवश्यक मार्ग पर लाने साकार होता है। वे जानते थे कि किसी बच्चे को शारीरिक दंड दिए बिना अनियंत्रित छोड़ देना उसका बैरी होना है। वे जानते थे कि एक अप्रशिक्षित बच्चा एक अनुशासनहीन वयस्क बन जाएगा, जो एक सफल जीवन के लिए तैयार नहीं होगा। वे जानते थे कि अनुशासनहीन वयस्कों को बहुत दर्द और परेशानी होगी।
वर्तमान समय की अहंकारी, आलसी, विद्रोही, बिगड़ैल, हिंसक और मनमौजी युवाओं की पीढ़ी इस सबक को साबित करती है। आज से पहले दुनिया ने कभी भी ऐसे निकम्मे, स्वार्थी बच्चों और युवाओं का ऐसा समूह नहीं देखा है जो बड़ों से यह उम्मीद करता है कि सब कुछ उन्हें सौंप दिया जाए। वे आज बच्चों को ताड़ना देने की अपनी उपेक्षा की करनी का फल भुगत रहें हैं। परमेश्वर और सुलैमान सही थे। परमेश्वर के वचन को छोड़ किसी भी अन्य विचारधारा का तिरस्कार किया जाना चाहिए (भजन 119:128)।
यदि आप अपने बच्चों से प्रेम रखते हैं, तो आप उनके बचपन से समय-समय पर शारीरिक दंड का का व्यावहारिक उपयोग करेंगे। यदि आप बहुत देर तक प्रतीक्षा करते रहेंगे, तो वे अपनी जन्मजात मूर्खता में कठोर होते जाएंगेहै, और फिर बहुत देर हो चुकी होगी (नीतिवचन 19:18; सभो 8:11)। अगर माता-पिता अपने बच्चों को उनकी बाल-अवस्था से ही बाइबल के अनुसार प्रशिक्षण देते हैं और उन्हें अनुशासित करते हैं तो वे उन्हें दुःख देनेवाली किशोरों की पीढ़ी से बच सकते हैं। यदि आप मूर्खतापूर्वक छड़ी को छोड़ देंगे, तो उसके दर्दनाक परिणाम आपको बुढ़ापे में भुगतने होंगे।
दुनिया में सबसे अच्छा पिता खुद परमेश्वर है। वह अपने बच्चों से इतना प्रेम करता था कि उसने अपने इकलौते बेटे, अर्थात् यीशु मसीह को उनके लिए मरने भेज दिया। जब उसके प्रिय बच्चे उसकी अवज्ञा करते हैं तो वह उनके साथ कैसा व्यवहार करता है? क्या आप अपनी बाइबल जानते हैं? वह उन्हें कोड़े मारता है और उनसे अपेक्षा करता है कि वे ऐसी ताड़ना से प्रेम रखें और इससे सीखकर सयाने बनें (इब्रानियों 12:5-13)। यदि वे तेज़ी से नहीं सीखते हैं, तो वह उन्हें इस दुनिया से बाहर ले जाएगा (1 कुरिन्थ 11:30-32)। जोएल ओस्टीन और रिक वॉरेन जैसे पाखंडी लोग ऐसी शिक्षा कभी नहीं देंगे।
यीशु के अलावा परमेश्वर का प्रिय पुत्र दाऊद था। वह दाऊद से बहुत प्रेम करता था। जब दाऊद ने पाप किया, और बाइबल में ऐसे अनेक पाप दर्ज हैं, तो परमेश्वर ने उसे कड़ी सज़ा दी। बतशेबा के साथ व्यभिचार और अन्य पापों के कारण उसने जो मार सही वह बहुत गंभीर थी। लेकिन दाऊद उसकी ताड़ना से प्रेम रखता था, क्योंकि वह जानता था कि उसे उसके लाभ के लिए प्रेम में पीटा गया था (भजन 119:67,71,75)। यदि आप परमेश्वर की संतान हैं, तो आपको अपने पिता के प्रेम का मूल्य समझना होगा और इसे अपने बच्चों को दिखाना होगा।
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