नीतिवचन 13:15
सुबुद्धि के कारण अनुग्रह होता है, परन्तु विश्वासघातियों का मार्ग कड़ा होता है।
एक आशीषित जीवन या एक कठिन जीवन – फैसला आपका है। एक भली समझ , या बुद्धि के नियमों के अनुसार जीने से, प्राकृतिक और अलौकिक दोनों ही आशीषें आएँगी। निश्चित रूप से! लेकिन अगर आप चीजों को अपने तरीके से करने का फैसला करते हैं और बुद्धि के नियमों को अस्वीकार करते हैं, तो आपका जीवन कठिन होगा। निश्चित रूप से! आप न तो परमेश्वर को धोखा दें सकते हैं और न ही बुद्धि को। आप जो बोओगे, वही काटोगे।
केवल तेराह शब्दो में ,आपके सामने एक अनमोल वरदान और प्रतिज्ञा हैं। पाठक, आप इन शब्दों का क्या करेंगे? वे किसी भी सलाह से अधिक मूल्यवान हैं जो आपको आज तक किसी ने दी होगी या कभी दी जाएगी । इस नीतिवचन को पढ़ने के पश्चात् आप एक फैसला करेंगे- या तो आप बुद्धि से जीवन जीएंगे या इसके नियमों का उल्लंघन करेंगे। और आपको परिणामों का सामना करना होगा। यकीनन!
दुनिया भी जानती है कि पापमय जीवनशैली, या जैसा कि वह इसे कहते हैं एक कड़ा जीवन यापन, व्यक्ति को बूढ़ा कर देता है। रौकर्स और रैपर्स की जीवन प्रत्याशा भयानक होती है। रौकर्स के क्लबों को देखें – अमेरिका में कई रौकर्स की 27 वर्ष की आयु में ही मृत्यु हो गई। और रैपर्स के लिए मृत्यु की औसत आयु समान ही है। सामान्य जनसंख्या 79 की आयु तक जीती है! रौकर्स और रैपर्स अपने अधर्मी जीवन शैली के लिए जाने जाते है , और उनकी मृत्यु दर 3000 साल पहले लिखे गए सुलैमान के इस नीतिवचन की पुष्टि करते हैं।
दुनिया यह भी जानती है, हालांकि वह ज़्यादा नहीं जानती, कि संतुलित जीवनयापन जीव- प्रत्याशा को बढ़ाता है। अनुभव और विज्ञान ने यह उन्हें सिखाया है , लेकिन सुलैमान ने इसे 3000 साल पहले लिख दिया था, क्योंकि परिभाषा के अनुसार ईश्वरीय बुद्धि में संतुलित जीवन शामिल होता है (नीतिवचन 20:1 ; 23:20-21; फिलिप्पियों 4:5 ; रोमियो 13:13-14; इफिसियों 4:26; 1 पतरस 4:1-5)। मसीह जीवन-शैली विवाह के बाहर यौन-संभोग, पियक्कड़पन, लोलुपता, कड़वाहट, क्रोध, असंतोष , हिंसा , आदि की निंदा करती है।
लेकिन और भी हैं ! पापमय जीवन शरीर और संबंधों का दुरुपयोग करता है , और जीवन में आनंद को घटाता है । संतुलित जीवन देह और संबंधों की रक्षा करता है । हद से ज़्यादा जीवन शैली के विरुद्ध भी व्यवस्था है जिससे उल्लंघनकर्ताओं को और भी भुगतना पड़ता है। लेकिन सबसे बढ़कर, परमेश्वर पवित्र लोगों पर कृपा-दृष्टि करता है, इसलिए एक सामर्थ्यशाली आत्मिक लाभ भी है। और वह पापियों का न्याय करता है और उन्हें दंड देता है, जो अच्छे और बुरे लोगों के बीच परिणामों में बृहत अंतर को और भी अधिक बढ़ा देता है।
यहोवा का भय मानना बुद्धि का आरंभ है ( नीतिवचन 9:10)। तब वह परमेश्वर के लिखित वचन के सामने काँपती है, क्योंकि इसमे अलौकिक ज्योति और सच्ची बुद्धि के ईश्वरीय नियम हैं ( भजन संहिता 119:128 ; यशायाह 8:20)। जीवनयापन के व्यावहारिक निर्देश यहाँ सुलैमान के नीतिवचन में पाये जाते हैं। इन नीतिवचनों का दीनतापूर्वक पालन करने वाला व्यक्ति परमेश्वर और मनुष्यों से अनुग्रह प्राप्त करेगा।
लेकिन अपराधी लोग निर्देशों का पालन करने से इंकार करते हैं। वे कभी–कभी सुन लेंगे , लेकिन वे इसका पालन नहीं करेंगे। वे चीज़ों को अपने तरीके से करने का इरादा रखते हैं। वे परमेश्वर या मनुष्यों के अधिकार के अधीन नहीं होना चाहते। उनका मानना है कि वे परमेश्वर और मनुष्यों की व्यवस्था से ऊपर हैं । वे नहीं चाहते कि कोई उन्हें बताए कि क्या करना है, और वे उन लोगों को अहंकारपूर्वक तुच्छ समझते हैं जो उनकी मदद करने की कोशिश करते हैं। वे मूर्ख पापी हैं।
अब्राहम और लूत की तुलना करें। अब्राहम परमेश्वर का भय मानता था और उसकी समझ भली थी। अपने भतीजे से अलग होने के बाद, उसे असमृद्ध भूमि मिलने के बावजूद , वह आत्मिक और आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ (उत्पत्ति 15:1; 24:35)। लेकिन लूत ने तराई भूमि का फैसला किया और अपना तंबू सदोम के निकट खड़ा किया ; उसने अपना जीवन हर संभव तरीके से बर्बाद किया (उत्पत्ति 19:15-18; 2 पतरस 2:7-8)।
यूसुफ ने एक स्त्री का विरोध किया और अंतत: मिस्र की गद्दी पर बैठा । उसकी समझ भली थी, और यहोवा और मनुष्यों ने उस पर कृपा की। शिमशोन और दाऊद ने परदेशी स्त्रियों का विरोध नहीं किया,और यहोवा और मनुष्यों की ओर से उन्हें कठोर परिणाम भुगतने पड़े। यह नीतिवचन सत्य है! बुद्धि के नियमों का पालन करो, और तुम धन्य होंगे ; उनकी अवहेलना करो, और तुम्हें दंड दिया जाएगा।
मनश्शे, जो एक बहुत ही दुष्ट राजा था, उसने अपने आप को दीन किया, इसलिए परमेश्वर ने उसे एक परदेशी कारावास से उसके अपने सिंहासन पर पुनर्स्थापित किया (2 इतिहास 33:11-13)। उसने अपने जीवन मे देर से भली समझ सीखी। नबूकदनेस्सर ने, सांसारिक रूप से बुद्धिमान और धनी राजा होने के बावजूद, दानिय्येल की गंभीर चेतावनी का उल्लंघन किया और सात साल बैलों के समान घास चरके बिताए (दानिय्येल 4:27-37)। उसने कठिन तरीके से भली समझ सीखी। पाठक, आप भली समझ कैसे सीखेंगे और आप इसे कब सीखेंगे? परमेश्वर के नियमों का उल्लंघन करना बंद करने और बुद्धि का पालन करने के लिए आज से बेहतर और कोई समय नहीं।
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