नीतिवचन 13:13

जो वचन को तुच्छ जानता, वह नष्ट हो जाता है, परन्तु आज्ञा के डरवैये को अच्छा फल मिलता है।

क्या आपको बाइबल से उपदेश सुनना प्रिय लगता है? क्या आप सुनने के लिए खुद को तैयार करते हैं, प्रार्थना करते हैं, उपदेश पर ध्यान केंद्रित करते हैं और सुनने के बाद उस पर विचार-चिन्तन करते हैं? क्या आप बाइबल को मन की दीनता और पूरा मन लगाकर पढ़ते हैं? या क्या आप प्रचार के समय अपने ख़यालों में खोकर दिन में सपने देखते हैं और चाहते हैं कि उपदेशक अपना सन्देश जल्दी से जल्दी समाप्त कर दे? क्या आप बाइबल को एक ऐसी पुस्तक समझकर उसका तिरस्कार करते हैं जो भ्रम में डाल देती है और समझने में कठिन है?

नष्ट होने और प्रतिफल पाने के बीच कितना अंतर है? यह अंतर खासकर तब कितना बड़ा हो जाता है जब परमेश्वर आप ही है जो नष्ट भी करता और फल भी देता है? अंतर बहुत बड़ा है। लेकिन फल पाने की शर्तें बिलकुल स्पष्ट और आसान हैं। धन्यवाद परमेश्वर।

यह नीतिवचन सुलैमान के कई अन्य नीतिवचनों के समान है और ख़ास भी है। वह लगातार अपने बेटे और हम सबको परमेश्वर के वचन का पालन करने पर मिलनेवाली आशिषों और न मानने पर दिया जानेवाला दण्ड, दोनों की याद दिलाता आ रहा है। यदि आप बाइबल को तुच्छ जानते हो, तो आप नष्ट हो जाओगे। यदि आप बाइबल में कही गई बातों का आदर करते हैं और उनका पालन करते हैं, तो आप धन्य कहलायेंगे। यह आपके जीवन के लिए एक मौलिक सिद्धांत है।

स्वर्ग का परमेश्वर पवित्र और ईर्ष्यालु है (यहोशू 24:19)। जो लोग उसके वचन का तिरस्कार करते हैं या उसे मानने से इनकार करते हैं, वह उन्हें न तो माफ करेगा या न दण्ड दिए बिना छोड़ेगा । चूँकि वह सभी चीज़ों का कर्ता है, जिसमें प्रत्येक पुरुष, महिला और बच्चा भी शामिल है, वह उनसे अपने प्रति संपूर्ण समर्पण और आज्ञाकारिता की मांग करता है। उसकी पहली ही आज्ञा सही मायने में उसके लिए आपके परम और संपूर्ण प्रेम की मांग करती है (व्यवस्थाविवरण 6:4-5)।

सृष्टि की उत्पत्ति के लगभग 1,650 साल बाद, या लगभग 4,400 साल पहले, परमेश्वर ने जलप्रलय से पृथ्वी को डुबो दिया और सब रहिवासियों दम घोंट दिया (उत्पत्ति 7:4,23)। किस बात के कारण परमेश्वर ने पृथ्वी और मानवजाति पर अपना कहर बरपाया? उन्होंने उसके वचन को तुच्छ जाना और पृथ्वी पर उसका मार्ग बिगाड़ दिया था (उत्पत्ति 6:5-7,11-12)। उसने नूह को उपदेश देने और उन्हें चेतावनी देने के लिए भेजा, लेकिन उन्होंने अपने निर्माता की आज्ञाओं के खिलाफ विद्रोह किया, इसलिए उसने उन्हें नष्ट कर दिया (1 पतरस 3:18-20; 2 पतरस 2:5)।

लगभग 3,500 वर्ष पहले परमेश्वर ने मिस्र के राजा फिरौन के पास एक और उपदेशक भेजा। जीवित और सच्चे परमेश्वर के आराधक इब्री लोग, फिरौन के बंधुआ मजदूर थे। मूसा ने परमेश्वर की ओर से बोलकर फिरौन से अपने लोगों को जंगल में जाने देने के लिए अनुरोध किया। जब फिरौन ने उस वचन को तुच्छ जाना, तब परमेश्वर ने देश को दस विपत्तियों से उजाड़ दिया और उसकी सेना समेत उसे लाल सागर में नष्ट कर दिया (निर्गमन 5:2; 12:29-36; 14:28)। इस नीतिवचन का पाठ आपको बिलकुल स्पष्ट रूप से समझना अवश्य है।

राजा अहाब ने परमेश्वर के वचन को तुच्छ जाना, इसलिए परमेश्वर ने उसे उसके अन्तिम युद्ध में एक ऐसे तीर से नष्ट कर दिया जिसे किसी ने मात्र अटकल से चलाया था (1 राजा 22:1-40)। राजा उज्जिय्याह ने परमेश्वर के उस वचन को कि केवल याजक ही मंदिर में सेवा कर सकते हैं, तुच्छ जाना, इसलिए परमेश्वर ने उसे कुष्ठ रोग से नष्ट कर दिया (2 इतिहास 26:16-23)। राजा यहोयाकीम ने सोचा कि वह परमेश्वर के वचन को जला सकता है और उसकी चेतावनियों से बचकर निकल सकता है, इसलिए परमेश्वर ने उसे और उसके परिवार को नष्ट कर दिया और उसको गदहे के समान मिट्टी दी गई (यिर्मयाह 36:1-32; 22:18-19)।

लेकिन यह नीतिवचन उन लोगों को फल देने की भी प्रतिज्ञा करता है जो परमेश्वर की आज्ञा के डरवैये हैं। यह डर गुलामी का आतंक नहीं है, बल्कि उसकी इच्छा को जानने और करने के लिए उत्साह से भरी और सरगर्म श्रद्धा है (भजन 1:1-2; 112:1; 119:47-48; 6:8; प्रेरित 9:1-6)। यद्यपि प्रभु परमेश्वर बहुत महान है, वह उन लोगों को आशीर्वाद और फल देगा जो उसके वचन के सामने नम्रता से कांपते और थरथराते हैं (66:1-2; प्रेरित 17:11; इब्रानियों 11:6)।

परमेश्वर का भय मानना और उसकी आज्ञाओं का पालन करना मनुष्य का संपूर्ण कर्तव्य है (सभो 12:13-14)। परन्तु उनका पालन करने में भी बड़ा प्रतिफल है (भजन 1:1-6; 19:11; 37:4; 84:11; 112:1-3; याकूब 1:25), जिसे परमेश्वर के बच्चों ने सभी परिस्थितियों में पाया था, जैसे कनान में अब्राम (उत्पत्ति 13:1-6), कनान में इसहाक (उत्पत्ति 26:12-14), मिस्र में यूसुफ (उत्पत्ति 39:1-23), बेथलहम में रूत (उत्पत्ति 2:3), यरूशलेम में रहूबियाम (2 इतिहास 12:12), बेबीलोन में मनश्शे, (2 इतिहास 33:12-13), शूशन में एस्तेर (एस्तेर 2:17), और बेबीलोन में दानिय्येल (दानिय्येल 1:1-21) ने पाया था।

आपने उन प्रचारकों के साथ क्या किया है जिन्हें परमेश्वर ने आपके पास अपना वचन लेकर भेजा था? पौलुस ने भविष्यवाणी, या उपदेश को तुच्छ समझने के विरुद्ध चेतावनी दी (1 थिस्स 5:20)। और उसने उन लोगों पर अपरिवर्तनीय न्याय की नबूवत की जो उसके वचन को तुच्छ जानते हैं या उसकी उपेक्षा करते हैं (इब्रानियों 2:1-4; 10:26-31; 12:25)। प्रभु के वचन का भय मानना और उससे प्रेम करना आपका गंभीर कर्तव्य और महान प्रतिफल है। इस नीतिवचन का पाठ बिलकुल स्पष्ट है।

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